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छात्रा से बदसलूकी पर बैंक में कुर्सियां चलीं

फर्रुखाबाद, कायमगंज बैंक आफ इण्डिया शाखा में शुक्रवार को ग्राहक व बैंक कर्मी के बीच मारपीट के बाद अचानक कुर्सियां चलने से अफरातफरी मच गयी। इस दौरान कुरुक्षेत्र बनी बैंक शाखा में चारों ओर बिखरा हुआ सामान व फर्नीचर नजर आ  रहा था।

शुक्रवार को कायमगंज के मोहल्ला पृथ्वी दरवाजा स्थित बैंक आफ इंडिया की शाखा में एक छात्रा ज्योति अपनी मां ममता मिश्रा के साथ पासबुक में रुपये चढ़वाने गयी थी। बैंक में धनराशि कम अंकित किये जाने की शिकायत पर बैंक कर्मी अजय शुक्ला ने छात्रा को झिड़क दिया।  इस पर ज्योति के पिता दिनेश मिश्रा की अजय शुक्ला से कहा सुनी होने लगी। बातों बातों में मामला मारपीट तक पहुंच गया। देखते ही देखते बैंक में कुर्सियां चलेने लगीं और बैंक में भगदड़ मच गयी। घबराये ग्राहकों ने घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस के पहुंचने पर दिनेश मिश्रा निवासी पृथ्वी दरवाजा और अजय कुमार शुक्ला पुत्र अमरनाथ शुक्ला निवासी नाला मच्छरट्टा ने एक दूसरे के विरुद्ध पुलिस को तहरीर दी है।

बजट साफ़ करने को अफसरों ने खोले दिए घरो में कैम्प कार्यालय

पूरे भारत के बारे में मेरा कोई अध्ययन नहीं है अलबत्ता उत्तर प्रदेह के बारे में मैं दावा कर सकता हूँ कि वित्तीय वर्ष के अंतिम माह यानि मार्च महीने में लगभग हर विभाग का मुखिया इन दिनों २०१०-११ के प्रदेश के बजट में स्वीकृत उसका हिस्सा प्रदेश के खजाने से हथियाने और उसे हर हाल में 31 मार्च तक खर्च दिखाने में जुटा है| कई विभागों में तो ये ये खर्च साल के ११ महीनो के खर्च के बराबर है| हाँ यहाँ बात वेतन और भत्ते की नहीं हो रही है, वेतन और भत्ता तो देरी से दिया नहीं कि प्रदेश कर्मचारिओं की हड़ताल पड़ताल शुरू हो जाती है| यहाँ केवल विकास के सम्बन्ध में होने वाले खर्च की है|

शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और समाज कल्याण विभाग में वेतन के अलावा जो खर्च प्रस्तावित होता है वो मासिक या साप्ताहिक के हिसाब से जनता के लिए होता है| मगर उत्तर प्रदेश में जनता को जरुरत के खर्च का अलाम ये है यहाँ एक सूखे की चेक अगले सूखे में और इस साल की बाढ़ की राहत अगले साल की बाढ़ तक मिल पाती है| शिक्षा के लिए सत्र शुरू होता है जुलाई माह में तो ये भी तय है सत्र शुरू होते ही किताबे, ड्रेस, वजीफा और शिक्षा से सम्बन्धित अन्य जरूरी खर्च हर माह नियमित मिलने चाहिए| मगर इनसे से ये खर्च भी सत्र परीक्षा के माह में आ रहे हैं| जो काम 30 दिन से कम में नहीं हो सकता वो 7 दिन में पूरा हो रहा है| साल भर इलाज और जागरूकता के लिए जरुरत का धन 15 दिन में आएगा और खर्च हो जायेगा|

क्या आप ने कभी 3 दिन में अपना मकान बनबाया है, शायद नहीं मगर बेसिक शिक्षा परिषद् ने सर्व शिक्षा अभियान के मद में केंद्र से मिली धनराशि का उपभोग दिखाने के लिए ये कमाल कर दिखाया| पूरे प्रदेश में जहाँ जहाँ मिड डे मील की रसोई नहीं बनी थी, मध्याह भोजन प्राधिकरण ने जिलों में इसी माह बजट भेज 3 दिन में रसोई बनने की रिपोर्ट जिलों से मंगा ली और करोडो उपभोग कर लिए| गर्मियों की छुट्टियों में या सत्र शुरू होने से पहले शिक्षको की होने वाली ट्रेनिंग इस माह में चल रही है कारण शिक्षा गुणवत्ता सुधारना नहीं केवल बजट उपभोग ही कह सकते हैं| एक माह में साल भर के इलाज के लिए दवाइयां खरीदी (कागजो) जा रही हैं| येन केन प्रकरेण धन लूटो| ये धन खर्च का पत्र लखनऊ से जारी हो रहा है और तमाम जिलों में जा रहा है| पत्र का कड़ा और मीठा मजमूम हैं- ” खर्च और उपभोग न भेज पाने की दशा में ये बजट अगले वर्ष के बजट में समायोजित कर दिया जायेगा इसकी आप जिम्मेदार होंगे|

जिलों के आलम से रूबरू होईये- हर विभाग का खजांची यानि लेखाधिकारी रोज नियमित रूप से बैंक और जिला कोषागार के चक्कर लगता है ये देखने के लिए कि अमुक दिन उसके विभाग के लिए कितना धन आया| दफ्तरों के साहब और बाबू लोग दफ्तर से गायब हैं मगर काम २४ में से १८ घंटे कर रहे हैं| वैसे तो कैम्प कार्यालय केवल जिलों में डीएम या पुलिस अधीक्षक के होते हैं चूँकि उन्हें चौबीसों घंटे जनता का ध्यान रखना होता है मगर इन दिनों जिलों में अधिकांश जिला स्तर के अफसरों ने घरो पर कैम्प कार्यालय खोल दिए हैं| मार्च महीने में जिलों में इन अफसरों के निवासो पर रौनक बढ़ी हुई है| ठेकेदार, दुकानदार, सप्लायर, छोटे बढ़े बाबू, दलाल, बिचोलिये, लेखाधिकारी इन निवासो के पास सुबह से ही जमा हो जाते हैं| दफ्तरों के कंप्यूटर अफसरों ने घरो में लगवा दिए हैं| संविदा पर लगे कंप्यूटर ओपेरटर भी दिन रात रगड़े जा रहे हैं| कई जगह तो सरकारी बंगलो में ही ये जनता के धन के अपव्यय के काउंटर गुलजार हो गए हैं| कुछ साहब से पूछो तो एक ही जबाब मिलेगा क्या करें लखनऊ वाले अफसरों का यही आलम है साल के आखिर में बजट भेजते हैं और न खर्च कर पाने पर करवाई की धमकी देते हैं| इसके बाद अप्रैल महीने से साहब लोग जाँच पर आयेंगे और मार्च महीने के बजट के हिसाब की अटैची साथ ले जायेंगे|

गैस ऐजेंसी मालिक डाल रहे उपभोक्तओं की जेब पर डाका

एसडीएम की जांच में कालाबाजारी की पुष्टि

एजेंसी मालिकों की मनमानी उजागर

फर्रुखाबाद,गैस एजेंसी मालिकों के विरुद्ध मिल रही शिकायतों के आधार पर जिलाधिकारी रिग्जन सैम्फेल ने इसकी जांच के लिये उपजिलाधिकारी रविंद्र कुमार को लगाया था। एसडीएम की जांच में गैस की कालाबाजारी और मनमानी दोनों की पुष्टि होने की सूचना मिली है।

विदित है कि होली से पूर्व गैस की किल्लत की अनेक शिकायतें आ रही थीं। अधिकवक्ता और स्वयं सेवी संगठन तक इसके विरोध में  प्रदर्शन कर चुके हैं। जिलाधिकारी रिग्जन सैम्फेल ने कुकिंग गैस वितरण प्रणाली की जांच के लिये उपजिलाधिकारी रविंद्र कुमार को निर्देश दिये थे। शुक्रवार को एसडीएम ने पूर्ति निरीक्षक मन्ना सिंह के साथ जाकर पल्ला बाजार स्थित जै भैरव गैस ऐजेंसी पर जांच शुरु की तो मामला सामने आ गया। उपभोक्ताओं ने एसडीएम के सामने ही सिलिंडर के दाम 345 के स्थान पर 360 रुपये वसूले जाने का आरोप लगाया। कई उपभोक्तओं ने निर्धारित तीन दिन के भीतर गैस डिलिवरी के स्थान पर बुकिंग के 15-20 दिन बाद तक गैस न पहुंचाने की शिकायतें की। उपभोक्ताओं ने बताया कि मजबूरन उनको लाइन में लगकर गैस सिलिंडर लेना पड़ता है, और डिलिवरी चार्जेज फोकट में  देने पड़ते हैं। जांच के दौरान रामचंद्र, दिलीप कुमार, भगवान दास, सुशील, संजीव, घनश्याम, अशोक, विद्यानंद, उमेशचंद्र आदि उपभोक्ताओं ने बयान दर्ज कराये। एसडीएम् रविन्द्र कुमार ने बताया कि जांच जारी रहेगी. उपभोक्ता अपने बयान दर्ज करा सकते हैं.|

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1 -गैस एजेंसी गोदामः मासूमों की जान पर मंडराता मौत का साया
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गेंहू खरीद का लक्ष्य पाना इस बार भी मुश्किल

फर्रुखाबाद, एक अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद होनी है। खरीद का लक्ष्य रखा गया है 58 हजार 500 मीट्रिक टन। यह लक्ष्य हासिल करना फिलहाल आसान नजर नहीं आ रहा है। यद्यपि विगत वर्ष की तुलना में यह लक्ष्य कुछ कम है।
विगत वर्ष जनपद को कुल 60 हजार मीट्रिक टन गेंहू खरीद का लक्षय मिला था। जिसके सापेक्ष खरीद मात्र 20 प्रतिशत ही हुई थी। इस बार केंद्र सरकार की ओर से मंहगाई को देखते हुए समर्थन मूल्य भी मात्र 20 रुपये प्रति कुंटल बढ़ाया गया है, जबकि अन्य चीजों के मूल्यों में कई गुना की वृद्धि हुई है। ऐसे में इस बार भी गेंहू खरीद का लक्ष्य पूरा हो पाने के आसार कम ही हैं। अपर जिलाधिकारी

सुशील कुमार ने बताया कि गेंहू खरीद के लिये फिलहाल पांच क्रय एजेंसियों के माध्यम से 76 केंद्र खोले जाने हैं। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से गेंहू का समर्थन मूल्य 1120 रुपये प्रति कुंटल तय किया गया है। फिलहाल यूपीएसएस, पीसीएफ, विपणन विभाग, यूपी एग्रो व कर्मचारी कल्याण निगम को गेंहू खरीद के लिये अधिकृत किया गया है। नेफेड द्वारा भी गेंहू खरीद के लिये आवेदन किया गया है परंतु उसे अभी अनुमति नहीं मिली है।

सूचना अधिकार अधिनियम: आयोग से भी नहीं मिली सूचना

फर्रुखाबाद, सूचना अधिकार अधिनियम की सार्थकता के विषय पर बहस के लिये एक नया मुद्दा खड़ा हो गया है। सूचना मांगने वाले एक आवेदक ने अब रा्ज्य सूचना आयोग के खिलाफ ही अपील कर दी है।

अभी तक तो राज्य सरकार के अधीन विभाग और उसके नाकारे अफसर ही केंद्रीय सरकार के इस अहम् अधिनियम की धज्जिया उड़ा रहे थे लेकिन अब तो मामला राज्यसूचना आयोग का ही फंय गया है। हुआ यूं कि एक आरटीआई एक्टिविस्ट धीरेन्द्र ने खाद्य विभाग उत्तर प्रदेश सरकार से कुछ सूचनाएं मांगी थी लेकिन सम्बंधित विभाग ने ये कहकर सूचना नहीं दी की ये सुचना अधिकार अधिनियम के दायरे में नहीं आता। तब धीरेन्द्र ने राज्य सूचना आयोग लखनऊ से सूचना मांगी की कौन कौन सी सूचनाएँ अधिनियम के दायरे में नहीं आतीं इसके अलावा धीरेन्द्र ने आयोग से ये भी पुछा की आयोग ने 2009-10 व 2010-11 में कितने IAS, IPS, व PCS पर कितना अर्थ दंड लगाया गया है। लेकिन 1 माह गुजर जाने के बाद जब इसकी सुचना धीरेन्द्र को प्राप्त नहीं हुई तो धीरेन्द्र ने इसकी अपील अपीलीय अधिकारी को की लेकिन वहा भी नतीजा सिफर ही रहा यानि  की सूचना दी ही नहीं गई..

आब सबसे बड़ा सवाल यहाँ पर यह खड़ा होता है कि ऐसे में आम आदमी के पास अपना माथा पीटने के अलावा और क्या चारा हो सकता है..

गोट में लगा तमंचा चलने से युवक की जान को खतरा

फर्रुखाबाद: गोट में तमंचा लगाना युवक शकील को काफी महँगा पड़ा| गोली चल जाने से उसकी जान को ख़तरा उत्पन्न हो गया है|

कोतवाली कायमगंज के ग्राम कुआं खेड़ा निवासी चऊँन खां का युवा पुत्र शकील गोट में तमंचा लेकर घूम रहा था| रास्ते में नाली में पानी चल रहा था जिसमे पैर पड़ने पर वह फिसलकर वह गिर पड़ा और अचानक तमंचे की गोली चलने से उसके गुप्तांग क्षतिग्रस्त हो गया|

शकील गंभीर घायल हो जाने पर बुरी तरह तड़प रहा था| राहगीरों ने उसे पड़ा देखा परिजनों ने शकील को कायमगंज के अस्पताल में भर्ती कराया| हालत गंभीर होने पर उसे लोहिया अस्पताल भेजा गया|

इंस्पेक्टर बीके मिश्र ने बताया कि सायन करीब ६ बजे गोट में घुरसा तमंचा चलने से शकील को गोली लगी है|

बेटे ने की लाईसेंसी बन्दूक से खुदखुशी, अब बाप जाएगा जेल

फर्रुखाबाद: विक्षिप्त युवक ने पिता की लाईसेंसी बन्दूक से गोली मारकर आत्म ह्त्या कर ली| लाईसेंसी शस्त्र को सुरक्षित न रख पाने के कारण अब बाप को जेल जाना पड़ेगा|

थाना जहानगंज के ग्राम राजेपुर भूढ़ निवासी योगेश चतुर्वेदी के २६ वर्षीय पुत्र मनमोहन ने घर में ही पिता की बन्दूक से गोली मार ली| मनमोहन के मार जाने पर घर में कोहराम मच गया| पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया|

एसओ जहानगंज डीके द्विवेदी ने बताया की अविवाहित मनमोहन मानसिक रूप से विक्षिप्त था| उसका डॉ मांगलिक के यहाँ से इलाज चल रहा था| उन्होंने बताया कि लाईसेंसी बन्दूक का दुरपयोग होने के कारण योगेश के विरूद्ध आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई की जायेगी|

ट्रक की टक्कर से परीक्षा देने गई महिला की मौत, पति घायल

परिजन  बिना पोस्टमार्टम कराये ही शव ले गये

फर्रुखाबाद: कोतवाली फतेहगढ़ के मोहल्ला अपर दुर्गा कालोनी निवासी अशोक मिश्रा की २८ वर्षीय पत्नी शिखा की आज परीक्षा देने में जान चली गई|

शिखा पति अशोक मिश्रा के साथ बाइक से जाकर मुरहास स्थित गौतम बुद्ध महिला महाविद्यालय में परीक्षा दी| दंपत्ति बाइक से वापस लौट रहे थे पीछे से जा रहे ट्रक (ट्राला) की टक्कर लगने से शिखा गंभीर रूप से घायल हो गई| शिखा को सिटी अस्पताल के बाद लोहिया अस्पताल ले जाया गया वहां डाक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया|

दुर्घटना में अशोक मिश्रा को मामूली चोट लगी उन्होंने भी अस्पताल में अपना डाक्टरी परीक्षण कराया| शिखा शहर कोतवाली के मोहल्ला हाता मंगल खां निवासी श्याम मोहन दीक्षित की पुत्री थी| उसका बीते १० माह पूर्व ही भारतीय कालेज के लिपिक अशोक से विवाह हुआ था| श्याम मोहन की सवायजपुर में सर्राफ की दुकान है|

शिखा के शव को देखकर परिजन बुरी तरह बिलखते रहे| बेटी की मौत से दुखी श्याम मोहन ने शव का पंचनामा कराये जाने का अस्पताल में ही हंगामा मचाकर विरोध किया और शव को बिना बताये ही ले गये| पहले कोतवाली पुलिस को शव का पोस्टमार्टम कराये जाने की सूचना भेजी गयी बाद में पुलिस को शव उठा ले जाने की जानकारी दी गयी|

माँ-बेटी की ह्त्या के केस में फंस गए लालची बाप-बेटे

फर्रुखाबाद: माँ-बेटी की ह्त्या के मामले में लालची बाप-बेटे फंस गए हैं| पुलिस ने बाप को गिरफ्तार कर लिया|

थाना मऊदरवाजा के ग्राम जसमई में बीते दिन ही प्रशांत दीक्षित उर्फ़ शीलू की पत्नी शिल्पी व शिल्पी की माँ श्रीमती ऊषा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी| थाना नवावगंज के ग्राम फतनपुर निवासी सुशील चन्द्र ने अपनी पत्नी ऊषा व बेटी शिल्पी की दहेज़ ह्त्या व ह्त्या के मामले में दामाद प्रशांत व समधी अवधेश के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई|

शिल्पी का ४ वर्ष पूर्व विवाह हुआ था| शादी के बाद उसे शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया| २२ मार्च को शिल्पी ने मोबाइल से पिता को सूचना दी थी कि पति व ससुर १ लाख रुपये मांग रहे हैं| रुपये न मिलने पर वह लोग मेरी ह्त्या कर देंगें| सुशील ने बेटी का हाल-चाल लेने के लिए वहां पत्नी को भेज दिया था|

पुलिस रोडवेज के संविदा चालक प्रशांत को तलाश कर रही है जो पत्नी व सास की मौत के बाद फरार हो गया|

नगर परिक्रमा 4: बार्ड संख्या 19

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बार्ड सभासद: आशू |

मोहल्ले: नाला फिदाई खां, खैराती खां, दिल्ली ख्याली कूंचा, गुदड़ी, छोटे-बड़े साहब की दरगाह, बंगशपुरा कोहना|

फर्रुखाबाद: बिजली की जर्जर तारों से बंधी केबिलें जो मोहल्लों में दूर मकानों तक जाती हैं| सडकों पर कचरे के ढेर व नाले से उठती ऐसी दुर्गन्ध जो आपका जीना मुहाल कर दे| तो आप समझ जाईये कि आप नगर के बार्ड नंबर १९ में पहुँच गए हैं|

कही धोखे से आपने वहां रहने वाले लोगों से उनकी दिक्कत परेशानियों के बारे में पूंछ लिया तो आप सुनते हुए थक जायेंगें लेकिन बताते हुए नहीं थकते हैं| कुछ लोग तो ऐसे मिलेंगें जिनका गला अपनी बात बताते हुए रुँधने लगता है|
JNI की टीम ने आज इसी बार्ड की समस्याओं के बारे में लोगों से बातचीत की|

बिजली के तारों से हो सकता है हादसा-

* नाला फिदाई खां मोहल्ले के अन्दर बिजली की लाइन पडी ही नहीं है| लोग अपने घरों में प्रकाश करने के लिए बाहर से निकली बिजली की लाइन से अपनी केबिल जोड़कर घर तक ले गए हैं| एक ही स्थान पर सैकड़ों केबिल बंधी होने की बजह से इनमे अक्सर स्पार्किंग होती रहती है जिससे वह कभी-कभी टूट कर गिर जाती हैं| इस तरह का वाक्या बरसात के मौसम में आयेदिन होता रहता है|

यहाँ के निवासी मो० सानू, सफी, राशिद, नूर जहां बेगम आदि लोगों ने बताया कि स्पार्किंग की बजह से तार टूटने से कई बार मोहल्ले के बच्चों को करेंट लग चुका है| जिसके बारे में मोहल्ले वालों ने मिलकर बार्ड सभासद से शिकायत की और मांग की कि मोहल्ले के अन्दर खम्भे लगवाकर बिजली की आपूर्ति की जाए| लेकिन हम लोगों की शिकायत पर अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है| हम लोग जब भी इस बारे में सभासद से बात करते है तो वह यह कहते हैं कि कुछ समय रुक जाओ आप के यहाँ की बिजली की समस्या जल्दी ही ठीक करवा दी जायेगी|

लोगों ने बताया कि बिजली का लोड अधिक रहने की बजह से ट्रांसफार्मर की फ्यूज अक्सर उड़े रहते हैं| जिससे मोहल्ला ज्यादातर समय अँधेरे में डूबा रहता है|

राशन कार्ड के नाम पर लूट-

नाला फिदाई खां मोहल्ले में लोगों के पास राशन कार्ड ही नहीं है और कुछ लोगों के पास थे उनके राशन कार्ड राशन कोटेदार अजीत पाण्डेय ने तीन वर्ष पूर्व अपने पास जमा कर लिए हैं जो आज दिन तक वापस नहीं दिए गए हैं| जब लोगों ने अपने राशन कार्ड मांगे तो उन्होंने कह दिया कि वह खो गए हैं और दोबारा बनवाने पड़ेंगें|

रईसा, इसरार, नौसाद, गुड्डू, रहीश, मो० हनीफ, रिहाना, नन्हीं, रफीका बानों, कमरुल निशाँ, नशीर अली आदि लोगों ने बताया कि हम लोगों के राशन कार्ड अजीत पाण्डेय ने अपने पास तीन वर्ष पूर्व जमा कर लिए थे जिनमे कुछ लोगों के वापस कर दिए लेकिन ज्यादातर लोगों से कह दिया कि राशन कार्ड गम हो गए हैं जिन्हें आपको दोबारा बनवाना पडेगा|

इन लोगों ने बताया कि पिछले वर्ष दो लोग ( लड़का, लड़की ) आये थे| जिन्होंने बताया कि नगर पालिका से हम लोग आपके राशन कार्ड बनाने के लिए आये हैं| जिन लोगों को अपने बीपीएल कार्ड बनवाने हैं उनको १०० रुपये व एपीएल कार्ड के लिए १० रुपये जमा करके फॉर्म भरना होगा| इस पर हम सभी मोहल्ले वालों ने रुपये देकर फॉर्म भर दिया लेकिन एक साल गुजर जाने के बाद आज भी हमें राशन कार्ड प्राप्त नहीं हुआ है|