सूचना अधिकार अधिनियम: आयोग से भी नहीं मिली सूचना

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फर्रुखाबाद, सूचना अधिकार अधिनियम की सार्थकता के विषय पर बहस के लिये एक नया मुद्दा खड़ा हो गया है। सूचना मांगने वाले एक आवेदक ने अब रा्ज्य सूचना आयोग के खिलाफ ही अपील कर दी है।

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अभी तक तो राज्य सरकार के अधीन विभाग और उसके नाकारे अफसर ही केंद्रीय सरकार के इस अहम् अधिनियम की धज्जिया उड़ा रहे थे लेकिन अब तो मामला राज्यसूचना आयोग का ही फंय गया है। हुआ यूं कि एक आरटीआई एक्टिविस्ट धीरेन्द्र ने खाद्य विभाग उत्तर प्रदेश सरकार से कुछ सूचनाएं मांगी थी लेकिन सम्बंधित विभाग ने ये कहकर सूचना नहीं दी की ये सुचना अधिकार अधिनियम के दायरे में नहीं आता। तब धीरेन्द्र ने राज्य सूचना आयोग लखनऊ से सूचना मांगी की कौन कौन सी सूचनाएँ अधिनियम के दायरे में नहीं आतीं इसके अलावा धीरेन्द्र ने आयोग से ये भी पुछा की आयोग ने 2009-10 व 2010-11 में कितने IAS, IPS, व PCS पर कितना अर्थ दंड लगाया गया है। लेकिन 1 माह गुजर जाने के बाद जब इसकी सुचना धीरेन्द्र को प्राप्त नहीं हुई तो धीरेन्द्र ने इसकी अपील अपीलीय अधिकारी को की लेकिन वहा भी नतीजा सिफर ही रहा यानि  की सूचना दी ही नहीं गई..

आब सबसे बड़ा सवाल यहाँ पर यह खड़ा होता है कि ऐसे में आम आदमी के पास अपना माथा पीटने के अलावा और क्या चारा हो सकता है..

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