राष्ट्रीय काव्य गोष्ठी में गूंजे देशभक्ति और सामाजिक सरोकारों के स्वर

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फर्रुखाबाद:(कायमगंज संवाददाता) साहित्यिक संस्था साधना निकुंज एवं अनुगूंज के संयुक्त तत्वावधान में कृष्ण प्रेस परिसर सधवाड़ा में राष्ट्रीय काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से देशभक्ति, सामाजिक चेतना और मानवीय संवेदनाओं को स्वर दिया।
श्याम नगर फतेहगढ़ से आए प्रसिद्ध गजलकार नलिन श्रीवास्तव ने अपनी गजलों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने पढ़ा—
“जिंदगी में जब हमारे घुप अंधेरे छा गए,
तब न जाने तुम कहां से चांद बनकर आ गए।”
उन्होंने आतंकवाद पर कटाक्ष करते हुए कहा—
“दहशतगर्दों खून-खराबा करते हो इंसान से,
अच्छी-अच्छी बातें तुमने सीखी नहीं कुरान से।”
प्रोफेसर रामबाबू मिश्र रत्नेश ने अपनी कविता में पड़ोसी देश पर तीखा व्यंग्य करते हुए कहा—
“धीर वीर गंभीर हिमालय कहता पाकिस्तान से,
अपने घर में बैठ अभागे मत खेले तूफान से।”
प्रसिद्ध गीतकार पवन बाथम ने ग्रामीण जीवन और भीषण गर्मी का चित्रण करते हुए अपनी रचना सुनाई—
“चुभे अखियन से बैरी बबूल,
अगिन बरसावे दोपहरी।”
अमृतपुर से आए पूर्व सैनिक एवं कवि प्रेमसागर चौहान ने राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कविता प्रस्तुत करते हुए कहा—
“ये देश मेरा जब चाहेगा मैं प्राण न्योछावर कर दूंगा,
सरहद पर हर दुश्मन का सीना गोली से भर दूंगा।”
प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. राजीव गुप्ता ने सामाजिक मूल्यों के क्षरण पर चिंता जताते हुए अपनी रचना प्रस्तुत की। वहीं युवा कवि अनुपम मिश्र ने भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा पर कविता पढ़ी।
छात्र कवि यशवर्धन ने समकालीन राजनीतिक परिदृश्य पर आधारित रचना सुनाकर श्रोताओं की तालियां बटोरीं।
कार्यक्रम में डॉ. सुनीत सिद्धार्थ, वी. एस. तिवारी, शिवकांत शुक्ला एवं अहिवरन सिंह गौर सहित अनेक साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

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