फर्रुखाबाद:(राजेपुर संवाददाता) राजेपुर क्षेत्र के गांव तुषौर स्थित प्राचीन शिव मंदिर की धार्मिक मान्यता दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग की स्थापना स्वयं लंकापति रावण ने की थी। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मंदिर में भगवान शिव का पूजन करने से गोला गोकर्णनाथ के समान पुण्य लाभ प्राप्त होता है। सावन और शिवरात्रि के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं।फर्रुखाबाद शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर बरेली हाईवे के पश्चिम दिशा में स्थित तुषौर गांव में यह प्राचीन शिव मंदिर बना हुआ है। धार्मिक मान्यता के अनुसार चक्रतीर्थ नैमिषारण्य, सीतापुर की चारों दिशाओं में चार-चार योजन की दूरी पर चार सिद्ध शिवालय स्थित हैं। इनमें उत्तर दिशा में गोला गोकर्णनाथ, पूर्व में पांडेश्वरनाथ बाराबंकी, दक्षिण में खेरेश्वरनाथ कानपुर और पश्चिम दिशा में चंद्रखेरनाथ तुषौर, फर्रुखाबाद का नाम लिया जाता है।गंगाजल, बेलपत्र और खीर चढ़ाने की परंपरामंदिर में विराजमान शिवलिंग पर श्रद्धालु गंगाजल, बेलपत्र और खीर अर्पित करते हैं। सावन के महीने में प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजन-अर्चन करते हैं। सावन शुक्ल पक्ष की तेरस तथा महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर में मेले का आयोजन भी होता है।शिवलिंग पर आज भी हैं गोली के निशानगांव के बुजुर्ग शंकर सहाय सिंह बताते हैं कि वर्ष 1955 में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया था। इससे पहले मंदिर ककइया ईंटों से बना हुआ था। उनके अनुसार मंदिर में बाबा ब्रह्मानंद सरस्वती पुजारी के रूप में सेवा करते थे। ग्रामीणों के मुताबिक एक मुगल शासक के समय मंदिर को क्षतिग्रस्त किया गया था। शिवलिंग पर गोली लगने के निशान आज भी मौजूद होने की बात कही जाती है।मंदिर परिसर में बने राधा-कृष्ण और मां दुर्गा के मंदिरमंदिर परिसर में गांव की रामलली ने राधा-कृष्ण और मां दुर्गा के मंदिरों का निर्माण कराया है। इसके साथ ही भव्य प्रवेश द्वार भी बनवाया गया है। रामलली मंदिर परिसर में रहकर भजन-पूजन करती हैं। मंदिर में बाबा द्वारा नियमित रूप से भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जाती है।प्राचीन धार्मिक मान्यताओं और ऐतिहासिक कथाओं से जुड़ा तुषौर का यह शिव मंदिर आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। सावन के महीने में यहां भक्तों की आवाजाही बढ़ जाती है और पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठता है।
रावण ने की थी तुषौर के शिवलिंग की स्थापना! पूजन से मिलता है गोला गोकर्णनाथ के समान पुण्य
[adrotate banner="3"]
[adrotate banner="2"]



