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मुख्यमंत्री को भी चेलेंज कर गया सिपाही..

फिर माननीय मुलायम सिंह, मुख्य मंत्री ने एनेक्सी भवन बुलवाया हमसे कहा गया कि आप को सब-इन्स्पेक्टर बना दे रहे हैं और आप चुप बैठ जाइए पोल खोल का काम का बंद कर दीजिए. मैंने मना कर दिया…..मुझे सजा दे दी गयी.. फिर मैं कोर्ट चला गया मगर झुका नहीं..
भ्रष्ट और पैसाखोर आईपीएस अफसरों को सबक सिखाने के लिए लड़ने वाले जांबाज सिपाही ब्रिजेंद्र सिंह यादव से नूतन ठाकुर की बातचीत-

मूल रूप से भरथना, इटावा निवासी ब्रिजेन्द्र सिंह यादव खानदानी तौर पर पुलिस वाले हैं क्योंकि उनके परिवार के कई सदस्य पीढ़ियों से पुलिस में रहे हैं- बाबा, पिता, पांच में से चार भाई और अन्य करीबी रिश्तेदार. वैसे तो वे उत्तर प्रदेश पुलिस के एक सिपाही मात्र हैं पर वे ऐसे हैं जिनके कारण आज उत्तर प्रदेश पुलिस के बड़े-बड़े अधिकारी हलकान हैं. इस जांबाज़ पुलिस वाले ने पुलिस के अधिकारियों द्वारा अधीनस्थ कर्मचारियों को एक लंबे समय से कई प्रकार से शोषित करने के मुद्दों को बड़े जोर-शोर से उठाया है. वे यह काम पिछले पन्द्रह सालों से कर रहे हैं जिसके दौरान उन्होंने पुलिस वालों के वेलफेयर के लिए संस्था बनाने के लिए अथक प्रयास किये और इस काम में बहुत कुछ झेला भी.

उन्हें नौकरी से बर्खास्त किया गया, कई बार सस्पेंड किया गया और उन पर एनएसए भी लगाया गया. पर ब्रिजेन्द्र यादव इन बातों से कभी नहीं घबराए और ना ही अपने मकसद से पीछे हटे. उनका खुद का संघर्ष शुरू से ही आईपीएस अफसरों के खिलाफ रहा पर चूंकि उनकी बातों में इतना दम और उनके उद्देश्य में इतनी सच्चाई दिखती है कि खुद एक आईपीएस अफसर की पत्नी होने के बावजूद मैं उनके प्रति पूरी सहानुभूति रखती हूं. मुझे लगने लगा है कि आईपीएस अफसरों को इस सिपाही से सबक लेना चाहिए कि किस तरह वह वर्दी के कर्तव्य को निभाते हुए बुराई और असमानता के खिलाफ लड़ रहा है. पेश है उनसे हुई एक लंबी वार्ता के प्रमुख अंश-

– ब्रिजेन्द्र जी, ये पूरा मामला क्या है?
— प्रकरण ये था कि ‘द कमिटी फॉर द वेलफेयर ऑफ द मेम्बर्स ऑफ द पुलिस फ़ोर्स इन यूपी’ नाम की एक संस्था अराजपत्रित अधिकारियों के लिए आईपीएस अफसरों द्वारा 1961 में रजिस्टर्ड कराई गयी थी. इसकी मेम्बरशिप थी- “आल ऑफिसर्स ऑफ द यूपी पुलिस फ़ोर्स अबव द रैंक ऑफ सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस एंड दियर वाइफ”. इस प्रकार केवल आईपीएस अधिकारी और उनकी पत्नियां ही इस कमिटी के पदाधिकारी हो सकते थे. 1961 से ले कर अब तक सिपाही से लेकर इन्स्पेक्टर की ओर से इस संस्था में कोई सदस्य नहीं है. इन लोगो ने हम लोगों से कोई कंसेंट नहीं ली. ये लोग हमारी बिना सहमति के हमारा पैसा सन 1961 से लगातार काट रहे हैं. दस रुपये शिक्षा, पांच रुपये रक्षा, चार रुपये डीएएफ, चार रुपये एमएलएस, दो रुपये मंदिर के नाम पर और इस तरह कुल पचीस रुपये वेतन मिलने के स्थान पर ही काट लेते हैं. इसके बाद वेतन देते हैं. करीब साढ़े तीन लाख कर्मचारी हैं तो सत्तासी लाख रुपये महीना और बारह महीने का हो गया दस करोड पचास लाख रुपये.

इसके अलावा एक पूर्व डीजी थे श्रीराम अरुण. इन्होंने एक नयी स्कीम चलाई जिसमें नवम्बर-दिसम्बर में 340 रुपये प्रति कर्मचारी काटा जाता है. करीब ग्यारह करोड़ बीस लाख रुपया इस तरह काट लेते हैं. हमने देखा दस-पांच जिलों में और कई कर्मचारी भी मेरे साथ हैं जो कहते हैं कि किसी को इस बीमा का कोई लाभ नहीं मिलता है. ये लोग करोड़ों रुपये का पीएफ घोटाला करते हैं| इसके अलावा कई और मामलों में वेलफेयर का पैसा आता है जैसे राज्यपाल महोदय ने पन्द्रह सौ रुपये दिए हैं लावारिश लाश के लिए, पर सिपाहियों को ये लोग एक रुपया नहीं देते हैं जबकि रोज पचासों लोग मरते हैं और ये लोग एक रुपया नहीं देते हैं सिपाहियों को. ये भी रकम खा जाते हैं. सिपाही अपनी जेब से ड्यूटी पर पैसा जुटा कर क्रिया-कर्म करता है क्योंकि उसकी ड्यूटी है, नौकरी करनी है तो ठीक, नहीं तो सस्पेंड होगा, बर्खास्त होगा. अब जब वह बरामदगी के लिए जाता है तो उसके पास पैसा नहीं पहुंचता है. इसी तरह की कई अन्य अनियमितताएं हैं जो ये अधिकारी करते हैं|

फरवरी 1989 में नेशनल पुलिस कमीशन ने लिखा था कि- “अकोर्डिंग टू इन्फोर्मेशन अवेलेबल टू कमीशन, असोशिएशन फॉर पुलिसमैन इज आलरेडी देयर इन मेनी स्टेट्स.” लगभग हर राज्य में अधिकारी और कर्मचारी की अलग-अलग असोशिएशन चल रही है और अपना-अपना वेलफेयर देख रही हैं. लेकिन सिपाही के लिए उत्तर प्रदेश में कोई एसोशिएशन नहीं है. मैंने 1993 में हाईकोर्ट में एक रिट की थी. 27/08/1993 को निर्णय मेरे पक्ष में हुआ कि पुलिस महानिदेशक यह देखें कि नियमों के अनुसार रजिस्ट्रार सोसायटी के पास संगठन पंजीकृत हो. एडीजीपी उस समय श्रीराम अरुण थे. इन्होने पुलिस महानिदेशक की ओर से मेरे खिलाफ एक बवंडर खड़ा कर दिया कि ब्रिजेन्द्र सिंह विद्रोह करा सकते हैं, सन 1973 में विद्रोह हो गया है, ऐसी स्थिति में पुलिस महानिदेशक ऐसी संस्था के पंजीकरण का घोर विरोध करते हैं. इन लोगों ने ऐसा इसीलिए कहा था क्योंकि ये लोग बहुत ज्यादा पैसा खा रहे थे. अब यदि संस्था रजिस्टर्ड हो जाए तो हिसाब-किताब माँगना शुरू कर देंगे|
फिर माननीय मुलायम सिंह, मुख्य मंत्री ने एनेक्सी भवन बुलवाया और पीएल पुनिया, राज बब्बर और मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी सब लोग मौजूद थे. हमसे कहा गया कि आप को सब-इन्स्पेक्टर बना दे रहे हैं और आप इस काम को बंद कर दीजिए. मैंने मना कर दिया. आप मुलायम सिंह से चाहें तो पूछ सकती हैं. यदि वे मना करें तो आप हमारी वार्ता कराइये उनसे. मैंने जब मना कर दिया तो फिर इन लोगों ने मेरे खिलाफ रिपोर्ट दे दी. तब मैंने हाई कोर्ट में एक और रिट की. जस्टिस ए रफत आलम जी ने मेरे पक्ष में फिर जजमेंट किया.

फिर इन लोगों ने कहा कि ब्रिजेन्द्र सिंह यादव अध्यक्ष हैं जो ठीक नहीं है, मैंने कमिटी से ही अपना नाम हटा दिया कि यदि एक व्यक्ति से संस्था का नुकसान हो रहा है तो हम इसके सदस्य, पदाधिकारी कुछ नहीं रहेंगे. हटने के बाद उन लोगों ने कहना शुरू किया कि अभी तो हट गए हैं पर आगे फिर बन जायेंगे. तो हमने हाई कोर्ट में रिट की जहां जस्टिस शीतला प्रसाद ने रिट पेटिशन अलाऊ कर दी और कह दिया- “डिसाइड अकोर्डिंग टू ला.”

उसके बाद हमारी संस्था का रजिस्ट्रेशन हो गया और हमने इसे चलाने का प्रयास किया. तो इस पर आपत्ति लगा दिया और जो आरपी सिंह हैं उस समय थे पुलिस अधीक्षक गोरखपुर. इन्होंने जा कर के कहा कि ये विद्रोह करवा देगा, इसे अरेस्ट करवा दिया जाए. लिहाजा मैं भाग गया इटावा, दिल्ली. इसके बाद मैंने इस मामले की विधिवत पैरवी की. हमने फिर हाई कोर्ट में रिट किया पर तब तक रीनिएवल का समय निकल गया पांच साल. फिर एक बार हाई कोर्ट में रिट की और अबकी जज साहब ने मेरी पूरी प्रेयर ही अलाऊ कर ली. तो हमारी संस्थान ‘कल्याण संस्थान’ नाम से 2014 तक के लिए रजिस्टर्ड है. अब संस्था वैध हो गयी तो मैंने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत ‘द कमिटी फॉर द वेलफेयर ऑफ द मेम्बेर्स ऑफ द पुलिस फ़ोर्स इन यू पी’ के बारे में जानकारी प्राप्त किया. वहाँ से 04 दिसम्बर को मेरे पास लेटर आया कि इस नाम की संस्था का कोई भी रीनिवल सोसाइटी रजिस्ट्रेशन कार्यालय में नहीं कराया गया है अतः यह संस्था अपंजीकृत हो गयी है. ना ही इसकी आय-व्यय का लेखा-जोखा दिया गया है.

– यह संस्था अपंजीकृत किस साल से है?
— इन्होने कभी रीनीवल कराया ही नहीं है. एक बार पंजीकृत 1961 में कराया फिर रीनीवल कराया ही नहीं है. यदि कराते तो आय-व्यय का लेखा-जोखा देना पड़ता. फिर मैंने उच्च न्यायालय में इनके घोटाले की एक रिट याचिका दायर की तो जस्टिस दिलीप गुप्ता जी ने उसे पीआईएल में बदल दिया. पीआईएल मुख्य न्यायाधीश के पास चली गयी. मा० मुख्य न्यायाधीश ने इस प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए इसे स्वीकार कर लिया और नोटिस इशू कर के इनका जवाब-तलब कर लिया. 12/01/2011 को तारीख लगी है.

– अभी प्रकरण में निर्णय नहीं किया गया है?
— नहीं, अभी ये काउंटर देंगे, तो मैं रीजोइंडर दूंगा. कल जी न्यूज़ वालों ने एडीजी साहब से बात कराई, तो वे कह रहे थे कि इस धनराशि का सिपाहियों में उपयोग होता है पर सच्चाई है कि सर्वे कर लो तो एक सिपाही नहीं मिलेगा. कोई वेलफेयर नहीं करते. इस पैसे का पूरा का पूरा घोटाला है.

– कोई नहीं जानता आईएम पैसों का क्या हो रहा है?
— मैंने कुछ पता किया था कि ये पैसा हेड क्वार्टर चला जाता है, डी जी पी कार्यालय. ये सब बाबुओं ने विश्वस्त सूत्रों से बताया है. अरे भाई, ये लोग डी ई एफ के नाम पर चार रूपया अलग से लेते हैं. पूर्व डीजीपी ने कह दिया था कि वे जिले के एसपी जानें, तो वे क्या जानें, उनके पास तो चार ही रुपये हैं. बाकी तो पुलिस मुख्यालय पैसा आता है. अभी बागपत में पांच पूर्व आईपीएस के खिलाफ मुक़दमा कायम हुआ है भ्रष्टाचार का और गबन का. एक लोकल सिपाही ने यह पूछ लिया तो उस पर भी उलटे मुक़दमा लिख गया है.

– क्या ये पैसे की वसूली जबरदस्ती है?
— जब हम उस संस्था के सदस्य ही नहीं हैं, पदाधिकारी ही नहीं हैं तो हमारी मर्जी कैसे होगी. उलटे तो इन लोगों पर मुकदमा भी लग जायेगा अवैध वसूली का. ये तो कर्मचारी को पता भी नहीं होता है कि कट क्या रहा है.

– आपको इस बात की जानकारी कैसे लगी?
— हमको तो यह जानकारी तब लगी जब हमारी संस्था का इन लोगों ने विरोध किया. तो हमने एफिडेविट दिया कि हमसे कोई विद्रोह का भय नहीं है. पर मेरा ट्रांसफर झाँसी से कर दिया चित्रकूट, वहाँ से कर दिया बांदा, वहाँ से जालौन. फिर जालौन से उठा कर भेज दिया गाजीपुर. मेरी इच्छा थी कि सैनिक स्कूल की तर्ज पर पुलिस स्कूल खोलूं. हमारे बच्चे अच्छी शिक्षा नहीं पा पाते. हमारा संगठन होता तो कई मामलों में अपने लोगों का भला हो जाता. इस तरह से शासन से प्रदत्त सुविधाएँ हम वास्तव में उपयोग कर पाते. मान लीजिए कि प्रमुख सचिव हरीश चंद्र गुप्ता ने यह आदेश किया कि 26 साल की नौकरी या 45 साल से अधिक उम्र के सिपाहियों से परेड के बाद की ड्यूटी नहीं जी जाए और उनसे सी आर नहीं कराया जाए. पर ये अधिकारी पचपन-अट्ठावन साल के लोगों से ये सब ड्यूटी करा रहे हैं. कई तो गिर के मर भी चुके हैं यू पी.

– तो आपका उद्देश्य क्या था एसोशिएशन बनाने के पीछे?
— पुलिसवालों की वाजिब समस्याओं को दूर करने के लिए ही हमारी संस्था बनायी गयी है. लेकिन इन लोगों ने केवल आईपीएस अधिकारियों तक बात को सीमित रखा था. मेरे पास एक चिट्ठी है जिसमे एक बड़े अधिकारी ने साफ लिखा कि यदि ये लोग अपने मकसद में कामयाब हो गए तो आईपीएस के लिए बहुत नुकसानदेह हो जाएगा और हमारी आईपीएस एसोशिएशन कमजोर हो जायेगी. इस तरह की मानसिकता है इनकी. जब मुझे मालुम हुआ कि ये लोग चारों तरफ घोटाला में फंसे हैं और उलटे मेरा विरोध कर रहे हैं तो मैंने इनका पोल खोलने का बीड़ा उठाया.

– वरिष्ठ अधिकारियों से लड़ाई में आपको नौकरी में दिक्कत नहीं आई?
— हमको इन साहब लोगों ने प्यार से रोटी नहीं खाने दी. कोई ना कोई पंगा लगाते रहे- सस्पेंड फिर ट्रांसफर, फिर सस्पेंड, फिर ट्रांसफर और यह क्रम चलता ही रहा. अभी हमारी संस्था का जो अध्यक्ष है फतेहपुर का, उसे देर से आने के आरोप में सस्पेंड कर दिया. इनका मतलब है कि किसी प्रकार से हम लोगों का शोषण करें|

– आपकी संस्था का प्रसार कहाँ तक है?
— सर, हम को ये लोग कुछ करने ही नहीं देते. हम बहुत कुछ कर देते पर ये लोग कुछ करने ही नहीं देते. पर फिर भी मैं अपना पैसा खर्च करके इन लोगों को न्याय तो दिलाता ही रहता हूँ.

– इसमें परिवार का सहयोग रहता है?
— इसमें सबों का सहयोग है- परिवार का, बच्चों का, दोस्तों का, सहयोगियों का.

– आपको लगता है कि इसमें कल को और लोग भी जुडेंगे?
— यह सत्य है कि आज बहुत सारे लोग इसमें सामने नहीं आ रहे हैं पर आत्मिक रूप से सब मेरे साथ हैं. ये सब साढ़े तीन लाख लोग मेरे साथ हैं. साढ़े नौ साल मैं बर्खास्त रहा, एनएसए झेला हम लोगों ने, कई मुकदमे लगाये, कई बार सस्पेंड रहा तो इन लोगों की सिम्पेथी तो जाहिर है कि मेरी ओर रहती है.

सिपाही बिजेंद्र सिंह यादव से बातचीत पीपल’स फोरम, लखनऊ की संपादक डा. नूतन ठाकुर ने की. नूतन ठाकुर आईपीएस अमिताभ ठाकुर की पत्नी है और पत्रकारिता में व्यापक दखल रखती है|

नये कलेवर में दिखेगा फर्रुखाबाद महोत्सव

फर्रुखाबाद: चौदहवें फर्रुखाबाद महोत्सव को बेहतर ढंग से करने के लिए जोरदारी से तैयारियां चल रही हैं|

महोत्सव के अध्यक्ष डॉ रामक्रष्ण राजपूत ने पटेल पार्क में पत्रकारिता वार्ता के दौरान महोत्सव की तैयारियों का खुलासा किया| उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी मिनिस्ती एस २६ दिसम्बर को पटेल पार्क में महोत्सव का उद्घाटन करेंगीं| उन्होंने बताया कि बीते वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष महोत्सव नये रंग रूप में देखने को मिलेगा|

श्री राजपूत ने बताया कि कार्यक्रम में राजनेताओं को अधिक महत्व न देकर साहित्यकारों, कवियों व आम जनता को तवज्जो दी जायेगी| उन्होंने बताया कि इस वर्ष कई नये कार्यक्रम शामिल किये गए हैं| इस वर्ष कम घाटा होने की उम्मीद है|

महोत्सव के स्वागत सचिव राकेश सिंह चौहान ने बताया कि २९ दिसम्बर को महोत्सव में डायविटीज शिविर का आयोज किया गया है| जिसमे डायविटीज व उससे सम्बंधित बीमारियों का मुफ्त में इलाज किया जाएगा|

आयोजन समिति के सहयोगी अनिल मिश्रा एडवोकेट, डॉ पीएस सूद, डॉ कैशर खां, सभासद राजन राय राजपूत जौली, क्रष्ण कान्त त्रिपाठी अछर, बसी अहमद बसी के अलावा स्वतंत्रता सेनानियों के बन्स्हज ग्रीश चन्द्र दुबे, महेश चन्द्र शुक्ला एवं जेपी सिंह आदि मौजूद रहे|

सड़क पर उतरी महिलाएं, ‘ शीला की जवानी ‘ मुर्दाबाद

वाराणसी|| उत्तरप्रदेश के वाराणसी शहर में आज रिलीज हुई तीस मार खां फिल्म के गाने ‘ शीला की जवानी ‘ का जमकर विरोध किया गया। विरोध में शहर की महिलाएं झाड़ू बेलन लेकर सड़क पर उतर आईं।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही वाराणसी की स्थानीय अदालत में इस गाने को फिल्म से हटाने के लिए याचिका दायर की गई थी पर अभी तक उस पर कोई भी फैसला नहीं आया। यहां के लोगों की माने तो साल की सुपरहिट फिल्म दबंग के आइटम सॉन्ग मुन्नी बदनाम हुई गाने का भी शहर में बहुत विरोध किया गया था। लेकिन शीला की जवानी गाने में ‘ शीला की जवानी ‘ शब्द से लोगों को बेहद आपत्ती है।

लोगों के मुताबिक शीला एक साधाराण नाम है जो हर दूसरी महिला या लड़की का होता है। इस गाने पर लड़कों ने लड़कियों को छेड़ना शुरू कर दिया है। इस अभद्र शब्द को गाने से हटा दिया जाए या फिर पूरा गाना ही फिल्म से हटा दिया जाए।

गाने पर हुए जोरदार प्रदर्शन में शहर की कई महिलाएं भी शामिल थीं। झाडूं और बेलन थामे महिलाओं ने सड़क पर इस गाने को लेकर मुर्दाबाद के खूब नारे लगाए और शहर कोतवाली में घुस गईं। पूरे पदर्शन को पुलिस तमाशबीन बने देखती रह गई।

SP को पिटाई का हर्जाना 20 हजार रुपये

फर्रुखाबाद: कन्नौज के जनपद न्यायाधीश दीनानाथ श्रीवास्तव ने तत्कालीन एसपी राहुल अस्थाना की पिटाई किये जाने के मुकद्दमे में फैसला सुनाया है| इस मामले में तत्कालीन इंस्पेक्टर नरसिंह पाल को एसपी के पहले अपनी ही कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराने में दोषी पाए जाने पर उन पर २० हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है| अदालत ने २० हजार रुपये जमा करने के लिए इंस्पेक्टर को २ सप्ताह का समय दिया है|

फर्रुखाबाद कोतवाली के इंस्पेक्टर नरसिंह पाल २ मई २००६ की रात सब इंस्पेक्टर आनंद कुमार सिंह, राजेश कुमार सिंह के साथ पुलिस अधीक्षक के आवास पर गए थे| वहां किसी बात को लेकर विवाद होने पर उन्होंने पुलिस अधीक्षक राहुल अस्थाना की पिटाई कर दी थी| इतना ही नहीं दबंग इंस्पेक्टर ने कोतवाली फर्रुखाबाद में पुलिस अधीक्षक राहुल अस्थाना के विरुद्ध भ्रष्टाचार आदि की धाराओं में मुकद्दमा दर्ज किया|

कानपुर के डीआईजी ने जांच में यह मुकद्दमा फर्जी पाया| तब इंस्पेक्टर नरसिंह पाल ने फर्रुखाबाद की अदालत में फायनल रिपोर्ट पर आपत्ति जाहिर करते हुए मुकद्दमा दायर कर दिया| अदालत ने एसपी को नोटिस जारी किया हाई कोर्ट के आदेश पर मुकद्दमे की सुनवाई जनपद कन्नौज के लिए स्थानांतरित कर दी गयी|

इंस्पेक्टर नरसिंह पाल सेवा निवृत हो जाने के कारण जनपद अलीगढ़ थाना व कस्बा मड्राग अपने गाँव में रह रहे हैं| उन्होंने बताया कि वह हर्जाने की रकम अदालत में जमा नहीं करेंगे बल्कि निर्णय के विरुद्ध हाई कोर्ट में अपील करेंगें न्याय पाने के लिए अंतिम सांस तक कानूनी लड़ाई लड़ेंगें|

जेब पर डाका डाल रही हैं मोबाइल कंपनियां

आपको पता भी नहीं लगता और मोबाइल कंपनियां आपकी जेब से पैसे उड़ा लेती हैं। जबसे मोबाइल कंपनियों ने कस्टमर केयर पर शुल्क वसूलना शुरु किया है तबसे ग्राहकों की जेब ज्यादा उधड़ने लगी है।

दरअसल जब भी आप मोबाइल कंपनियों के कस्टमर केयर पर कॉल करते हैं और आपकी कॉल वेटिंग में चलती है तब मोबाइल कंपनियों की जेब भरती चली जाती है। कई मिनटों के इंतजार के बाद भी ऑपरेटर आपकी कॉल नहीं उठाता ऐसे में या तो आप खुद फोन काट देते हैं या आपकी कॉल अपने आप कट जाती है लेकिन कॉल कटने के साथ आपकी जेब भी कट जाती है। ऐसे में ग्राहकों की समस्या का समाधान भी नहीं होता और चपत भी लग जाती है।

इस साल फरवरी से कंपनियों ने अपने कस्टमर केयर कॉल पर शुल्क लगाना शुरु किया है। ट्राई के मान्यता प्राप्त कस्टमर केयर संगठनों को ग्राहकों की इस लूट के बारे में कई शिकायतें मिली है। वही मोबाइल कंपनियों का तर्क है कि कुछ शरारती तत्व कस्टमर केयर की फ्री कॉल का गलत फायदा उठाते हैं इसलिए उन्हेने इसपर शुल्क लगाया वहीं उपभोक्ता संगठनो के मुताबिक ग्राहकों पर शुल्क का बोझ डालना ठीक नहीं है।

गरीबों का हक मारकर हड़प गया दहेज का सामान

फर्रुखाबाद|| सामूहिक विवाह समारोह के आयोजक को गुमराह कर संपन्न पिता ने पुत्री की शादी के नाम पर गरीब कन्याओं को मिलने वाला दहेज का सामान तथा समाज कल्याण विभाग से शादी अनुदान हड़प लिया।

निर्धन वर्ग की कन्याओं हेतु 18 दिसंबर को हुए सामूहिक विवाह समारोह के आयोजक पालिका अध्यक्ष मनोज अग्रवाल को गुमराह कर एक व्यक्ति ने अपने को गरीब बताते हुए अपनी पुत्री के विवाह का रजिस्ट्रेशन करा दिया तथा निश्चित तिथि पर शादी सम्पन्न भी हो गयी। उसने आयोजक की ओर से गरीब कन्याओं को दिया गया उपहार स्वरूप दहेज का सामान तथा समाज कल्याण विभाग से विवाह अनुदान की मिली 10 हजार रुपये की चेक भी प्राप्त कर ली।

मामले का खुलासा होने पर बहादुरगंज तराई निवासी राजेंद्र श्रीवास्तव ने जिलाधिकारी को शिकायतीपत्र भेजकर धोखाधड़ी के इस मामले की जांच कराने तथा गरीबों का हक मारकर हड़पा गया दहेज का सामान व शादी अनुदान की चेक वापस जमा कराने की मांग की है। आरोप लगाया गया कि अपने को गरीब बताने वाले पिता के चार पुत्र कमाने वाले हैं तथा खुद भी अच्छा कमाता है।

उसने अपनी इस पुत्री की शादी रुदायन में तय की थी तथा तिलक में हीरोहांडा मोटरसाइकिल व दहेज का अन्य सामान पहले ही दे दिया था। 18 दिसंबर को जहां पुत्री की शादी सामूहिक विवाह समारोह के मंडप में संपन्न करायी वहीं उसी दिन आवास विकास स्थित अपने रिश्तेदार के यहां शादी के उपलक्ष्य में हजारों रुपये खर्च कर प्रीतिभोज का आयोजन किया था। उन्होंने ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

कांशीराम कालोनी के 6 आवास आवंटन निरस्त

फर्रुखाबाद|| कांशीराम कालोनी के 6 आवास आवंटन निरस्त कर दिए गए| कांशीराम आवासीय योजना की टाउनहाल कालोनी में खाली छह आवासों का पूर्व आवंटन निरस्त कर गुरुवार को झोपड़ी में रह रही गरीब महिलाओं को आवंटन पत्र दे दिये गये। वहीं हैवतपुर गढि़या कालोनी में दूसरे दिन की जांच में 61 घरों में ताले लगे मिले, उन्हें नोटिस जारी किये गये।

टाउनहाल कालोनी में खाली 6 आवासों का पूर्व आवंटन निरस्त कर जिलाधिकारी मिनिस्ती एस. ने तीन दिन पूर्व पास ही झोपड़ी में रह रही गरीब महिलाओं को घर देने का आदेश दिया था। परियोजना अधिकारी डूडा जेड ए खान ने बताया कि आवासों का आवंटन महिलाओं के नाम कर दिया गया है। नेत्रहीन महिला गुलनाज को पूर्व में सर्वजन हिताय स्लम योजना में जमीन का पट्टा मिला था। उसका पट्टा निरस्त कर आवास दिया गया है।

परियोजना अधिकारी डूडा ने हैवतपुर गढि़या कालोनी के आवास संख्या 11/164 में बुधवार को बिना अनुमति मकान न खोलने का आदेश लिखा था। इसकी भनक लगने पर आवंटी राजू खान निवासी भीकमपुरा ने दोपहर को पहुंचकर ताला खोल दिया। इस पर परियोजना अधिकारी ने उसे फटकार लगायी। चीनीग्रान के सत्तार खां दिल्ली में रहते हैं, उनके नाम से 8/127 आवास में उनकी बहन रहती मिलीं। परियोजना अधिकारी डूडा ने बताया कि दूसरे दिन 61 आवासों की निलंबन कार्रवाई शुरू कर नोटिस जारी किये गये हैं। जिन आधा दर्जन लोगों को आवास खाली करने को तीन दिन का समय दिया गया है, उन्होंने मकान खाली न किया तो पुलिस बल के साथ जबरन कब्जा लिया जायेगा।

कालिंद्री बंद होने से रोडवेज की चांदी

फर्रुखाबाद: फर्रुखाबाद से दिल्ली के लिए एकमात्र कालिंद्री एक्सप्रेस १४७२३ व १४७२४ को आज से बंद कर दिया गया| ट्रेन के बंद होने से स्टेशन पहुँचने वाले अनेकों यात्री ठण्ड में काफी परेशान हुए|

कालिंद्री के बंद होने से केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद की काफी फजीहत हुयी है| पहले उन्होंने वायदा किया था कि उनके रहते किसी भी कीमत पर इस बार कालिंद्री बंद नहीं होगी| बाद में उन्होंने विकल्प के तौर पर कासगंज अछनेरा होकर दिल्ली तक दूसरी ट्रेन चलवाने का वायदा किया था|

आज कोई दूसरी ट्रेन के न चलने से यह वायदा भी झूंठा सावित हो गया| कालिंद्री के बंद होने से रेलवे स्टेशन तथा आस-पास के बाजारों में सन्नाटा पसर गया| कालिंद्री क चलने से यात्रियों की काफी चहल-पहल रहती थी| व्यापार घट जाने के कारण दुकानदार काफी मायूस हो गए हैं|

रेलवे ने प्रतिवर्ष की तरह २३ दिसंबर से ३१ जनवरी तक कालिंद्री एक्सप्रेस के बंद रहने से रिजर्वेशन भी बंद कर दिए गए थे| उधर दिल्ली की एकमात्र ट्रेन के बंद होने से रोडवेज की चांदी हो गयी है| एआरएम संजीव यादव ने बताया कि दिल्ली जाने वाले यात्रियों के लिए आज से ५ अतिरिक्त बसों की व्यवस्था की गयी है| उन्होंने बताया कि यात्रियों की संख्या बड़ते ही बसों की संख्या भी बडाई जायेगी| यात्रियों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जायेगी|

बच्चों को भूंखे रखने वाले कोटेदार की शिकायत

फर्रुखाबाद: ब्लाक शमसाबाद की ग्राम पंचायत बघौना में प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को भूँखा रखने वाले कोटेदार की शिकायत जिलाधिकारी से की गयी|

ग्राम प्रधान अरविन्द शाक्य उर्फ़ लौहरे गाँव के अजय पाल सिंह जाटव, अनिल कुमार, संतराम आदि के साथ जिलाधिकारी से मिले| प्रधान ने राशन कोटेदार रमेश चन्द्र जाटव के द्वारा राशन न दिए जाने की शिकायत की| बताया गया कि कोटेदार रमेश चन्द्र अधिकांस राशन की कालावाजारी कर लेता है जिसके कारण गाँव वालों को न तो राशन मिलता है और न ही स्कूल के बच्चों को मिड डे मील|

नव निर्वाचित प्रधान लौहरे ने बताया कि रमेश नाम के कोटेदार हैं उनकी राशन की दुकान पूर्व प्रधान इन्द्रसेन चलाते हैं| पूरे साल में दो तीन माह ही बच्चों को भोजन मिला है| बीते माह पूर्व प्रधान ने राशन का दो ड्रम मिट्टी का तेल अपने घर पर उतारा था तब फोन पर एसडीएम व डीएम को सूचना दी थी|

प्रधान ने आरोप लगाया कि शिक्षामित्र विनीता बीते करीब तीन वर्षों में कभी कभार ही स्कूल आईं हैं| वह पूर्व प्रधान राजेश सिंह की चचेरी बहन हैं| करीब तीन वर्ष पूर्व विवाह होने के कारण ज्यादातर ससुराल में ही रहती हैं| शिकायत करके उनका चयन निरस्त कराया गया था लेकिन उन्होंने अपना दोबारा चयन करवा लिया|

हादसे में बसपा नेता के इकलौते पुत्र की मौत से कोहराम

फर्रुखाबाद: मार्ग दुर्घटना में बसपा नेता के इकलौते बेटे छात्र शैलेन्द्र की मौत होने से कोहराम मच गया| गुस्साए लोगों ने दुर्घटना करने वाले चालक को मार डालने एवं वाहन को क्षतिग्रस्त किये जाने का भरसक प्रयत्न किया|

थाना कमालगंज बसपा विधान सभा क्षेत्र के पूर्व अध्यक्ष ब्रह्मानंद भारती का १७ वर्षीय पुत्र शैलेन्द्र अपने गाँव महरूपुर रावी से बाइक द्वारा कमालगंज जा रहा था| स्वराज इंटर कालेज ककरैया कक्षा १० का छात्र शैलेन्द्र अपरान्ह २ बजे बिना नंबर की बाइक से बुलबुल कोल्ड स्टोरेज के सामने से गुजर रहा था|

उसी समय लाल रंग की जाईलो कार चालक ने शैलेन्द्र के टक्कर मारी दुर्घटना के बाद चालक ने कार को रोकने के बजाय और तेजी से भगाया जिससे कार का पहिया शैलेन्द्र के सिर से निकल गया| सिर फट जाने से छात्र की तुरंत ही मौत हो गई| ग्रामीणों ने प्रयास करके कार को राजीपुर के निकट रोक लिया|

घटना के समय थानाध्यक्ष मुकेश कुमार सक्सेना मुख्यालय थे जो काफी देर बाद थाने पहुंचे| पुलिस ने कन्नौज थाना व कस्बा तिर्वा निवासी अनीस अहमद को हिराशत में लेकर उनकी कार नंबर यूपी ७६ ई / ००९२ कब्जे में ले ली|