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पुलिस के लाठी चार्ज के जवाब में सपाईयों ने पथराव कर दी गिरफ्तारी

फर्रुखाबाद: समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता आज जोश में दिखे| सपा नेता सत्यभान सिंह सत्ते ने अधिशाषी अभियंता को कार्यालय में बंदकर हंगामा मचाया तो सपा नेता चन्नू यादव के समर्थकों ने पुलिस पर पथराव किया| पुलिस ने लाठी चार्ज कर चन्नू सत्यभान सहित आधा सैकड़ा लोगों को गिरफ्तार कर लिया|

प्रदेश में आन्दोलनकारी सपाईयों के उत्साह एवं जोरदारी से पुलिस से भिड़ने की घटनाओं को देखकर आज यहाँ के भी कार्यकर्ताओं में जोश आ गया| सपा नेता सत्यभान सिंह सत्ते करीब तीन दर्जन समर्थकों के साथ लोको रोड से मुलायम सिंह जिंदाबाद, समाजवादी पार्टी जिंदाबाद, मायावती मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए भोलेपुर स्थित विधुत विभाग में घुस गए| वहां अधिशाषी अभियंता ग्रामीण के कार्यालय के गेट को बंद कर दिया|

उत्साही कार्यकर्ता झंडा बैनर लिए हुए थे| जिन्होंने करीब १० मिनट तक कार्यालय में जोरदार नारेबाजी करके हंगामा मचाया| जिनको पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया| उधर सपा नेता चन्नू यादव दर्जनों समर्थकों के साथ लोको स्थित अपने आवास से रवाना हुए| सेना क्षेत्र से होते हुए एआरटीओ कार्यालय के निकट लगे बैरियर पर पहुंचे|

बैरियर के निकट एसडीएम रवींद्र कुमार वर्मा, सीओ अभय कुमार गुप्ता, इंस्पेक्टर फतेहगढ़, कायमगंज व एसओ मऊदरवाजा पुलिस पीएसी बल के साथ घेराबंदी करने के लिए डटे थे| नजदीक आने पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तारी देने के लिए रोका तो चन्नू ने कहा कि वह मुख्यालय पर गिरफ्तारी देंगें|

इसी विवाद के दौरान चन्नू पुलिस वालों को धकियाते हुए विकास भवन के मार्ग की ओर काफी दूर तक पहुँच गए| तब पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया और कई लोगों ने जबरदस्ती खींचकर चन्नू को पुलिस जीप में डाला| उधर चन्नू के समर्थक डाकघर की ओर भागे जिन्होंने लाठी चार्ज के विरोध में पथराव किया| तब पुलिस ने नरम रुख अपनाते हुए समर्थकों को गिरफ्तारी देने के लिए कहा| चन्नू के भाई जग्गू यादव व करीब एक दर्जन समर्थकों ने गिरफ्तारी दे दी|

सपा नेता रंजीत चक ने अकेले ही पुलिस को छकाया वह किसी तरह छिपते हुए पुलिस कार्यालय पहुंचे और अन्दर घुसकर सपाई टोपी पहनकर गमछा डाला तथा हाँथ में झंडा लेकर एटीएम पहुंचकर नारेबाजी की| जब पुलिस ने पकड़ने का प्रयास किया तो वह फर्स पर लेट गए तो पुलिस ने उन्हें जमकर उठाकर जीप में डाला|

भोजपुर विधान सभा क्षेत्र के पूर्व विधायक जमालुद्दीन सिद्दीकी व उनके पुत्र ब्लाक प्रमुख राशिद जमाल सैकड़ों समर्थकों की जिला जेल चौराहे पर गिरफ्तारी की गयी| आज १७९ सपाईयों को गिरफ्तार किया गया| जिनमे ९ को किशोर बंदी सुधारगृह तथा १७० को बागी सुधार गृह भेजा गया| गिरफ्तार सपाईयों की संख्या २९५ हो गयी|

कैमरे की नजर से- समाजवादी पार्टी के आन्दोलन का दूसरा दिन

समाजवादी पार्टी की फर्रुखाबाद इकाई ने भी बसपा सरकार की नीतियों के खिलाफ आन्दोलन में समाजवादियों ने प्रशासन की नींद हराम कर दी है| दिन रात लगकर भी पुलिस और ख़ुफ़िया विभाग सपाइयों को पकड़ने में नाकाम रहा और सपाई कलेक्ट्रेट तक पहुचने में कई बार सफल भी रहे| दूसरे दिन राशिद जमाल सिद्दकी, जमालुदीन सिद्दकी, चन्नू यादव, सुनील राठौर, रणजीत चक सहित सैकड़ों सपाई तोड़े गए| पेश है कैमरे की नजर से गिरफ़्तारी और झड़पो की तस्वीरे-







महिला दिवस: कनोडिया स्कूल हड़प गया वजीफा, सब्जी बेच करती पढ़ाई तुलसी

फर्रुखाबाद: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर चारों और उन महिलाओं की ही चर्चा हो रही है जिन्होंने अपनी जिन्दगी में कोई मुकाम हासिल कर लिया है| परन्तु उन महिलाओं के वारे में कोई बात नहीं कर रहा है जो जिन्दगी में दो जून की रोटी जुटाने की जंग अभी तक लड़ रही है|

उनके पास भी वह काविलियत है लेकिन हालातों से मजवूर होकर वे कुछ कर नहीं सकती सिवाय मन मसोस कर रह जाने के| ऐसी ही एक महिला है विमला, विमला तुलसी की माँ है जो बजरिया सब्जी मंडी में सब्जी की दुकान लगाकर अपने परिवार का पेट पाल रही है| भगवान् की कृपा से विमला को भरा पूरा परिवार मिला परिवार में पति के अलावा ४ बेटे और २ बेटियां थी| परन्तु एक बेटी शादी के कुछ समय बाद चल बसी और बड़े २ बेटों ने शादी के वाद अपनी अलग गृहस्थी वसा ली|

विमला के पति लालाराम दमे की वीमारी के मरीज हो गए ऐसे में पूरे परिवार की जिम्मेदारी विमला के कन्धों के ऊपर आ गई| विमला ने अपने परिवार के भरण पोषण के लिए सब्जी वेंचाने का रास्ता निकाला और तब से बजरिया मंडी में सब्जी वेंचने लगी| विमला के इस काम में उसकी 13 वर्षीय वेटी तुलसी भी सहायता करती है|

विमला ने वताया कि सब्जी मंडी बजरिया से हट जाने के कारण उसे वाहर से सब्जी लानी पड़ती है जिसमे अधिक भाडा देना पड़ता है| इस लिए वचत बहुत कम हो पाती है जिससे परिवार को चलाना वहुत कठिन हो गया है विमला चाहती है कि कही से दो पैसों का इंतजाम हो जाये तो वह अपनी बेटी के हाँथ पीले कर दे|

विमला की वेटी तुलसी कनोडिया बालिका विद्यालय की 7वीं कक्षा की छात्रा है और वह अभी आगे पढ़ना चाहती है परन्तु आर्थिक तंगी के कारण मजवूर है| तुलसी कहती है कि उसे आगे बहुत पढने का मन है लेकिन स्कूल से फ़ार्म भरने के बावजूद भी 2 सालों से वजीफा नहीं मिला है| और माँ कापी कितावों का खर्चा भी नहीं उठा सकती|

शादी के सवाल पर तुलसी ने वताया कि अभी उसे शादी करने की कोई इच्छा नहीं है परन्तु पिता जी की वीमारी और माँ की मजवूरी के आगे हम मजवूर है| ये कहानी अकेली विमला और तुलसी की नहीं है बल्कि शहर में ऐसी अनेकों तुलसियन और विमला है जो इनसे भी अधिक दयनीय स्थिति में जीवन यापन कर रही है परन्तु उनके ऊपर किसी की भी नजरे नहीं जाती| ये तो ये भी नहीं जानती की आज महिला दिवस है और ये महिला दिवस क्यूँ मनाया जाता है|

जिले में लल्लन छाप अधिकारिओ की भरमार

शरद जोशी के उपन्यासों पर आधारित लोकप्रिय धारावाहिक “लापतागंज” में एक बहुत ही मजेदार चरित्र हैं लल्लन जी| लल्लन जी पीडब्ल्यूडी में काम करते हैं और इस बात पर उन्हें काफी अभिमान भी है| उनका एक खास अंदाज़ है कि जब तक कोई उन्हें सीधे तौर पर कोई बात नहीं कहता है, वे उसे ना तो सुनते हैं और ना उससे अपना कोई मतलब मानते हैं| वे वहीं खड़े रहेंगे, सारी बात उनके सामने होती रहेगी पर उनका कहना होगा कि हमसे क्या मतलब, क्योंकि किसी ने मुझे सीधे तो कहा नहीं है|

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जनपद में भी लगभग यही हाल है| जिला पूर्ति अधिकारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी, पुलिस, नगरपालिका के जिम्मेदार अधिकारी सहित जिला श्रम अधिकारी से लेकर बाट माप अधिकारी तक लल्लन जी की तर्ज़ पर चलना पसंद करते हैं| तभी तो जब तब ठीक उनके सामने खड़े हो कर, उनका नाम ले कर, उनको इंगित करके कोई बात नहीं कही जाए, वे यह मानते हैं कि “हमसे तो किसी ने कहा ही नहीं.”

यहाँ इतने ही अधिकारिओ का जिक्र इसलिए किया जा रहा है क्यूंकि लोकतान्त्रिक प्रणाली में जनता को भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास की योजनाओ के लिए यही अधिकारी सीधे तौर से जिम्मेदार होते हैं| सरकार की प्राथमिकता वाले कार्यक्रम सभी को शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, भरपेट भोजन उपलब्ध करना लोकतान्त्रिक कार्यपालिका की जिम्मेदारी है| एक बेहतर समाज के लिए कानून का पालन करना पुलिस की जिम्मेदारी है|

लल्लन जी फर्रुखाबाद में जमा है लगभग 2 रुपये मूल्य करोड़ का गुटखा का भंडार
बात शुरू करते हैं सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले की जो 1 मार्च से लागू होना था| गुटखा और पान मसाला की प्लास्टिक पाउच पैकिंग में रोक| अदालत ने फैसला बहुत पहले सुना दिया था| मगर लागू 1 मार्च से होना था| गुटखा बनाने वालों ने 28 फरवरी तक मशीने चला कर मसाला बनाया और बड़े शहरो से ये माल छोटे शहरो में ट्रांसफर कर दिया| मसाला व्यापर की अर्थगणित ये कहती है मशीन से निकलने से लेकर खाने के शकीनो के मुह में पहुचते पहुचते कम से कम एक महीना लग जाता है| ऐसे में अरबो रुपये का मसाला स्टॉक करने के बाद सुप्रीम कोर्ट के नियम को लागू करा पाना लोहे के चने चवाने से कम नहीं| फर्रुखाबाद में पान की दुकानों से मसाले के पाउच की सजावट भले ही हट गयी हो मगर हर दुकान में ब्लेक में मसाला उपलब्ध है| आखिर ये दुकानदार मसाला कहाँ से ला रहे है| जिले के लल्लन छाप अधिकारिओ की ख़ुफ़िया फ़ौज क्या कर रही है| ये मसाला थोक विक्रेताओं ने जमा किया है| गोदाम कहाँ है इसका पता लगाना ख़ुफ़िया का काम है| सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लिंजिगंज बाजार, किराना बाजार, घूमना में ये स्टॉक जगह बदल कर रखे गए है| सबसे बड़ा गोदाम सेन्ट्रल जेल के पास एक पंडितजी के खेत में बनाये गए आलीशान कोठी में विराजमान है| सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करना प्रशासन की जिम्मेदारी है फिर भी पान मसाले के पाउच में बिकते रहना लल्लनजी बनना हो सकता है यानि पूछो तो साहब कहे “हमें तो किसी ने न सीधे बताया और न ही शिकायत नहीं की”

लल्लनो की कमी नहीं है, इन्हें देखिये-
पूर्ती विभाग
जिले में शायद ही कोई कोटेदार हो जो ईमानदारी से राशन बाटता हो| गेंहू चावल से लेकर मिटटी के तेल तक और आंगनवाडी से लेकर मिड डे मील तक का राशन कालाबाजारी हो जाता है| जरूरतमंद तक नहीं पहुचता| कोटेदार घटतौली करता है| फर्जी राशन कार्ड रखता है और तमाम लोगो के कार्ड तक कोटेदार के पास पड़े रहते है| मगर साल भर में भ्रष्टाचार पर कितनी लगाम लगा पाए जिला पूर्ति अधिकारी| शायद न के बराबर| सारा जहाँ जानता है मगर साहब को सीधे किसी ने नहीं बताया इसलिए कोटेदारो की कालाबाजारी नहीं रुक पाई, हुए न लल्लन छाप अधिकारी|

शिक्षा विभाग
इस विभाग के दो खंड है| एक प्राथमिक शिक्षा का दूसरा उच्च शिक्षा का| प्राथमिक शिक्षा बेसिक शिक्षा अधिकारी देखते है और उच्च शिक्षा को जिले स्तर पर चलने की जिम्मेदारी जिला विद्यालय निरीक्षक की है| जिला विद्यालय निरीक्षक इन दिनों जिले में बोर्ड परीक्षा कराने की तैयारी कर रहे है और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी वर्षांत में साल भर का पैसा चंद दिनों में खर्च दिखा कर बजट उपभोग बनाने में जुटे है| उस पैसे से कितना शैक्षिक विकास हुआ इसका सवाल उनसे मत पूछिए, कह देंगे मैं तो एक महीने पहले ही जिले में आया हूँ| शिक्षक पढ़ाने से दूर रहे, बिना प्रश्न पत्र के सत्र परीक्षा हो गयी, मिड डे मील में घटिया खाना बिना मीनू के रोज बन रहा है| दागदार और नियम विरुद्ध चयनित एनजीओ मुख्यालय पर मिड डे मील का भैस सहित खोया कर रहे हैं| जनपद के लगभग एक सैकड़ा स्कूलों में ताला पड़ा है मगर लल्लन छाप साहब को किसी ने सीधे शिकायत नहीं की सो कारवाही कैसे हो और व्यवस्था कैसे सुधरे| हाँ प्रदेश की मुख्यमंत्री को फर्जी रिपोर्ट बनाकर सभी स्कूलों में गुणवत्ता सहित चकाचक बात रहे मिड डे मील की रिपोर्ट भेजना वो भी नहीं भूले| इन लल्लन जी ने जो मुख्यमंत्री को रिपोर्ट भेजी है उसके मुताबिक जिले में शत प्रतिशत सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चे लाभान्वित है और शत प्रतिशत स्कूलों में खाना बनता है|

उच्च शिक्षा के पालनहार जिला विद्यालय निरीक्षक है जिनकी लल्ल्नता तो इसी से साबित हो जाती है कि इस बार डिबार विद्यालय भी बोर्ड परीक्षा के केंद्र बना दिए गए| 17 मार्च से जिले में बोर्ड परीक्षा में धडल्ले से नक़ल होगी और इन लल्लनो को दूंदे नहीं मिलेगी| अब अगर कहें कि जिले में नक़ल नहीं होती तो ये शायद उस तरक्की को गली देना होगा जिसकी दम पर एक स्कूल खोल नक़ल का व्यापार शुरू करने वाले अरबो रुपये के विभिन्न प्रकार के कॉलेज बनाने की हैसियत में आ गए| यही नक़ल माफिया हर साल छात्रो के हिस्से की अरबो रुपये की छात्रवृति से लेकर शुल्क प्रतिपूर्ति डकार दिनों दिन अमीर होते जा रहे है और गरीब बच्चे बेचारे भटकते रहते हैं मगर साहब का तुर्रा ये की उन्हें तो किसी ने शिकायत नहीं की|

जिला विकास कार्यालय
इस कार्यालय में छोटे बड़े कई प्रकार के लल्लन हैं| शुरुआत उपरी मंजिल से करते है जहाँ जिला पंचायत राज अधिकारी बैठते है| सबसे ऊपर बैठने के बाद भी इन्हें कुछ दिखाई नहीं पड़ता है| जिले भर के गाँव और उनके स्कूल गंदे पड़े है| नन्हे मुन्ने बच्चे बेचारे स्कूल में पढ़ाई का सबक भले ही न सीख पाए मगर सुबह सुबह झाड़ू लगाते मिल जायेंगे| जिले भर में गठित ग्राम पंचायतो में भारी अनिमियतता है| न तो महिलाओं को और न ही अनुसूचित जाति के जागरूक लोगो को ग्राम पंचायत समितिओं में भागीदारी दी गयी है| कई हारे हुए प्रधान अभी भी पुराने बही खाते देने को तैयार नहीं हैं| मिड डे मील के खाद्यान और कन्वर्जन कास्ट का करोडो रुपये डकार जाने के बाद भी पिछले चुनाव में इन्हें बकाया नही का प्रमाण पत्र जारी होता रहा| यही करोडो रुपये डकारने के बाद भी साहब ने इसे वापस वसूलने की कोई सार्थक कोशिश नहीं की| कुछ पूछोगे तो जबाब यही मिलेगा “उन्हें सीधे किसी ने शिकायत नहीं की”
इनके ऊपर के साहब के तो इससे भी बुरे हाल है| इनके दफ्तर में मिड डे मील बनाने वाली दागी एनजीओ से निजाद पाने के लिए दिसम्बर 2010 माह से ही नयी एनजीओ के आवेदन वाली फ़ाइल किसी बेजुबान अर्थशास्त्र के ठीक न बैठ पाने के कारण धूल फाक रही है| मनरेगा कार्य के लिए जिले भर में बने जॉब कार्डो में फर्जीवाड़े की भरमार है| मगर साहब से सीधे किसी ने नहीं कहा| केंद्र सरकार के दो साल पुराने आदेश के बाद भी जिले में आधे से ज्यादा जॉब कार्ड धारको के बैंक खाते नहीं खुले| विकास का हाल तो कागजो में फर्राटा भर रहा था मगर मायावती के केवल दो सड़क पर दौड़ी गाड़ियों ने निवर्तमान जिलाधिकारी को जिले से वापस लखनऊ दफ्तरी करने के लिए पंहुचा दिया| मगर साहब से किसी ने अभी तक कहा नहीं कि आवास विकास कालोनी स्थित सरकारी लोहिया अस्पताल के आसपास की सडको का इतना बुरा हाल है कि बेचारी प्रसूता रिक्शे पर बैठ घर से चलती है मगर सडको के इतने गड्डे झेलते झेलते बेचारी अस्पताल के गेट तक आते आते ही जननी हो जाती है और खबरे छपती है स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ कि “”फिर सड़क/रिक्शे पर हुआ प्रसव””| अब दोष किसका विकास विभाग का या फिर स्वास्थ्य विभाग का| मगर लल्लन जी से ये आज तक किसी ने नहीं कहा होगा|
इसी विकास कार्यालय में एक दफ्तर है जिला कृषि अधिकारी का जिनकी जिम्मेदारी है किसानो की सेवा करना| अब साल भर किसान बेचारा यूरिया या तो ब्लेक में खरीदता है या फिर लाइन में लगे रहकर खाली हाथ वापस लौट जाता है| जिले के खाद माफिया जमकर मनमानी करते है और खबरे अखबारों में भी छपती है मगर शायद ये सीधे शिकायत के इन्तजार में लल्लन बने रहना ही अपनी शान समझते है|

जिला स्वास्थ्य विभाग

इस विभाग के तो क्या कहने| प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री का चुनावी क्षेत्र| व्यवस्था का आलम ये कि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में डाक्टरों की कमी का रोना तो इनके मंत्री तक पिछले चार साल से रो रहे है मगर व्यवस्था कुछ भी नहीं कर पाए| जिले में एक दर्जन एम्बुलेंस पेट्रोल पी रही है मगर किसी गरीब की प्रसूता को आज तक नसीब नहीं हुई| गरीब की जोरू को तो तांगे पर ही आना पड़ेगा| जिले में टीकाकरण का व्यापक दौर चला| लगभग 3 करोड़ से ज्यादा की धनराशी टीकाकरण के विभिन्न मदों में खर्च हो गयी मगर रामपुर गाँव की प्रसूता तो टीकाकरण के अभाव में ही चल बसी| गाड़ियाँ दौड़ी, स्वास्थ्य मेले लगे, स्वास्थ्य का भारी भरकम बजट खर्च हुआ| राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिले का सबसे बड़ा बजट इस विभाग ने खर्च किया| छोटे बड़े कार्यक्रम को मिलकर लगभग 87 योजनायें चली मगर जनता तक कितनी नहीं पहुची इसकी शिकायत सीधे मुख्या स्वास्थ्य अधिकारी से किसी ने नहीं की लिहाजा लल्लन साहब ने कोई कारवाही नहीं कर पायी| सब कुछ ठीक ठाक खीचने का प्रयास तो किया मगर वित्तीय वर्ष के अंत में मायावती ने स्वास्थ्य विभाग को नाकारा बता सारी मेहनत का जायका ही बिगड़ दिया| अब बेचारे लोहिया अस्पताल को दिन रात चमकाने में लगे है, मगर अन्दर की बात ये है कि वित्तीय वर्ष के अंत में लखनऊ से दर्जनों चिठियाँ बजट खर्च करने और उपभोग भेजने की आ चुकी है सो उन्हें उपभोग दिखाना है और जहाँ तहां दिखाना भी है सो विकास कार्य ने तेजी पकड़ ली है मगर पत्रकार सहित तमाम लोग यही समझते रहे हैं कि डॉ साहब अब मेहनत कर रहे हैं|

निशुल्क पुस्तक घोटाला- तीसरा संस्करण जारी..

फर्रुखाबाद: बेसिक घोटाला विभाग यानि बेसिक शिक्षा विभाग फर्रुखाबाद में नौनिहालों को सरकार द्वारा दी जाने वाली निशुल्क पाठ्य पुस्तक में करोडो का घोटाला पिछले चार साल से हो रहा है| हर साल कोई न कोई मामला पकड़ में आ जाता है और फिर जाँच बैठ जाती है| जाँच में घपले का खुलासा भी हर बार हुआ है| ज्यादातर शिकायतें सही पायी गयी मगर आज तक आधा दर्जन से ज्यादा हुई जांचों में कोई दण्डित नहीं हुआ| ये जांचे समय समय पर विभिन्न मजिस्ट्रेट और बड़े अधिकारी कर कारवाही की संस्तुति करते रहे है| एक बार फिर निशुल्क पुस्तक घोटाला जाँच का पांचवा संस्करण एसडीएम और सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारिओ को सौप दी गयी है|

निशुल्क पुस्तक घोटाला- प्रथम संस्करण

निशुल्क पुस्तक घोटाला का पहला संस्करण वर्ष 2007 में तब आया जब जिलें में बेसिक शिक्षा अधिकारी की कुर्सी पर प्रदेश के स्वस्थ्य मंत्री के करीबी और चहेते राघवेन्द्र बाजपेई बैठे थे| राजकीय इंटर कॉलेज फर्रुखाबाद में प्रधानाचार्य के पद से मंत्रीजी के रहमो करम से बाजपेई जी पहली बार बेसिक शिक्षा में जिले स्तर के अधिकारी बने थे| कुर्सी मलाईदार थी सो ईमानदारी का पाठ पढ़ाने वाला एक शिक्षक भ्रष्टाचार के दल दल में उतरता चला गया| राघवेन्द्र बाजपेई के कार्यकाल में जनपद के नवाबगंज ब्लाक में उन दिनों सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी नरेन्द्र कुमार तैनात थे और बीआरसी महेंद्र कुमार यादव थे| नवाबगंज ब्लाक के स्कूलों में बटने वाली किताबे पूरे सत्र बच्चो को नहीं दी गयी और जनवरी-फरबरी में नयी मांग पत्र देने से ठीक पहले ब्लाक सेंटर में रखी लगभग 50 बोरा जिसमे ढाई लाख नई किताब थी कस्बे के एक कबाड़ी को बेच दी गयी| कबाड़ी को बेचते समय एक स्थानीय पत्रकार की नजर पड़ गयी और पत्रकार ने जिम्मेदारी निभाते हुए इसकी खबर कायमगंज के तत्कालीन एसडीएम अतुल सिंह को दी| अतुल सिंह ने तत्परता दिखाते हुए छापा मारा और तहसीलदार से गोदाम सील करवा कर नवाबगंज थाने में बीआरसी महेंद्र सिंह यादव और कबाड़ी के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत करवा दिया| उसके कई हफ्ते बाद मीडिया में छपी खबरों के दबाब के बाद किताबो की गिनती हुई और वो ढाई लाख किताबे जिले के नरेन्द्र सरीन स्कूल फतेहगढ़ स्थित केंद्रीय गोदाम में आ गयी| उसके बाद उन किताबो का क्या हुआ इसका जबाब विभाग के किसी कर्मचारी/अधिकारी के पास नहीं| इस मामले में डाली गयी सूचना के अधिकार के तहत प्राथना पत्र धूल फाकते रहे| उस समय संजय पालीवाल निशुल्क किताबो का पटल जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में देख रहे थे| पूरे खेल में इनकी महती भूमिका रहती थी| इतना ही नहीं उसी वर्ष एक और मामला पकड़ में तब आया जब उर्दू की एक भी किताबे बच्चो तक नहीं पहुची और लगभग डेढ़ लाख मूल्य की उर्दू की किताबो की खरीद और वितरण दिखाया गया| उर्दू की किताबी की खरीद और वितरण की जिमीदारी बाबू मनोज श्रीवास्तव के पास थी| धीरे धीरे राघवेन्द्र बाजपेई के खिलाफ शिकायतों का अम्बार लगने लगा| प्रोन्नतियो में अनुसूचित जाति की अनदेखी करना, विद्यालयों में शिक्षण के लिए खरीदे गए कंप्यूटर में घोटाला करना, निशुल्क पुस्तक वितरण घोटाला सहित कई मामलों में फसते ही राघवेन्द्र बाजपाई का तबादला फिरोजाबाद डायट में प्रवक्ता पद कर दिया गया| जाँच पूरी होने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया| इतना सब कुछ हुआ मगर निशुल्क पुस्तक वितरण में सरकार को आर्थिक क्षति पहुचाने और नौनिहालों के भविष्य के साथ खिलवाड़ के बाद भी किसी को कोई दंड नहीं मिला| राघवेन्द्र बाजपेई कुछ दिनों बाद बहाल हो गए| राघवेन्द्र बाजपेयी आजकल गोंडा जिले में बेसिक शिक्षा अधिकारी की उसी मलाईदार कुर्सी पर विराजमान हैं|

निशुल्क पुस्तक घोटाला- दितीय संस्करण

फर्रुखाबाद में निशुल्क पुस्तक घोटाले के दूसरे संस्करण की बुनियाद पहले संस्करण के समय ही पड़ चुकी थी| २.४३ लाख बच्चो के सापेक्ष २.९७ लाख बच्चो के लिए किताबो को खरीदने की तैयारी की जा चुकी थी जो अलगे सत्र में आनी थी| मगर सही मायने में दूसरे संस्करण का आगाज निवर्तमान निलम्बित बेसिक शिक्षा अधिकारी आरएसपी त्रिपाठी के समय में हुआ| बाजपेई के जाने के बाद वर्ष 2008 में राम सागर पति त्रिपाठी ने जिले में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी का कार्यभार संभाला और कुछ महीनो के बाद ही कार्यालय के सर्वाधिक विवादित बाबुओं की गिरफ्त में आ गए| कार्यालय में ही चेन स्मोकिंग के शौक़ीन संजय पालीवाल के पास निशुल्क पुस्तक से सम्बधित पटल बना रहा और पिछले रेकॉर्ड्स में तब्दीली का भरपूर मौका भी| हालाँकि सबसे बड़ा घोटाला वर्ष २००७ में ही हुआ जब नौनिहालों तक मात्र १०% किताबे ही पहुची और बाकी किताबो का कागजो और बिल वाउचर में बंदरबाट हुआ था|

इस पूरे खेल में घोटालेबाजो का एक गिरोह काम करता है जिसमे दफ्तर के बाबुओं से लेकर छोटे बड़े अफसर और बीआरसी एनपीआरसी और भण्डारण इंचार्ज तक शामिल होते है| वैसे तो मामला बेहद ही गोपनीय रखा जाता है और पकडे गए तो जाँच करने वाले और बैठाने वाले भी काफी हद तक उपकृत होते रहते हैं|

वर्ष 2008 में बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बाजपेई के समय गयी किताबो की डिमांड को यथावत मंगाया और वितरण कराया मगर पिछला स्टॉक कितना बचा चल रहा था इसका कोई लेखा जोखा नहीं देखा| इसी दौरान उर्दू छात्रों के लिए मगाई जाने वाली किताबों का मामला एक विभागीय सहायक बीआरसी नानकचंद ने उछाल दिया| बेसिक शिक्षा अधिकारी आर एस पी त्रिपाठी ने पाठ्य पुस्तक वितरण की जिम्मेदारी निभाने वाले सभी सम्बन्धित कर्मचारियो और जिम्मेदारों को बुलाया और खरीद और उपभोग में चूल से चूल मिलान कर संजय पालीवाल द्वारा तैयार सूची पर दस्खत करने को कहा| नानकचंद ने फर्जी उपभोग सूची पर हस्ताक्षर करने से मन कर दिया और शिकायत लोकायुक्त तक कर दी| मामले की जाँच अपर निदेशक बेसिक शिक्षा कानपुर को मिली| पत्राचार का आदान प्रदान शुरू हुआ अखबारों में खबरे छपी|जिला सूचना कार्यालय से लेकर जिलाधिकारी कार्यालय तक ने अपनी अपनी भूमिका निभानी शुरू कर दी| सूचना कार्यालय ने अख़बार से कटिंग काटी फ़ाइल बनायीं और जिलाधिकारी ने बेसिक शिक्षा से जबाब मांगते हुए टिपण्णी की और पत्र जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आकर खो गया| न बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जबाब देना उचित समझा और न जिलाधिकारी कार्यालय ने उस पर कोई जबाब माँगा| फिलहाल वर्ष 2008 में किताबो को कस्बो और नगर में बटता देखा गया| वास्तविक भौतिक प्रगति में लगभग 15 प्रतिशत का इजाफा हुआ| मगर ग्रामीण इलाकों में पूरी किताबे वर्ष 2008 में भी वर्षांत तक बच्चो के बस्तों में नहीं पहुची|

निशुल्क पुस्तक घोटाला- तृतीय संस्करण

घोटाला कांड का तीसरा संस्करण वर्ष 2009 में नहीं आया| सामान्य तरीके से सब कुछ गोलमाल हुआ मीडिया का दबाब किताबो से हटकर मिड डे मील पर चला गया और घोटाला गिरोह सक्रिय रूप से अपना काम करता रहा| अब तक इस गिरोह के सूत्रधार बाबू ये मान बैठे थे कि पिछली किताबो का अब कोई हाल चल नहीं मांगेगा| मगर इसी बीच एक आरटीआई पड़ गयी| खरीद और वितरण के सापेक्ष वर्ष 2009 तक फर्रुखाबाद बेसिक शिक्षा फर्रुखाबाद के स्टाक में लगभग 2 लाख बच्चो की किताबे स्टाक में होनी चाहिए थी मगर वर्ष 2009 में एक बार फिर नए सिरे से 2 लाख से कम बच्चो की किताबो की डिमांड भेज दी गयी| और हिसाब किताब वितीय वर्ष में मिलान कर लिया गया मगर पिछला रिकॉर्ड अभी भी बरक़रार रहा|

घोटाले के खुलासे का तीसरा संस्करण वर्ष 2010 में आया जब एक दिन अचानक तत्कालीन एडीएम हीरालाल ने मुख्यालय के केंद्रीय गोदाम नरेन्द्र सरीन स्कूल फतेहगढ़ में छापा मार रजिस्टर खंगाल डाले| दरअसल में ये बेसिक शिक्षा अधिकारी राम सागर पति त्रिपाठी और सहायक समन्वयक नानक चंद के बीच फर्जी कामो में भागीदारी निभाने से इंकार करने से उपजा था| फर्जी मिड डे मील की रिपोर्ट और किताबो के आहरण वितरण में चूल से चूल मिलाने से इंकार करने के बाद बने दबाब को कम करने के लिए नानकचंद ने मामले को अपर जिलाधिकारी तक पंहुचा दिया|
छापा मारी में किताबो का पटल देख रहे संजय पालीवाल और भण्डारण इंचार्ज विमल मिश्र के साथ नानकचंद का आमना सामना हो गया| मौके पर एसडीएम सदर और उप बेसिक शिक्षा अधिकारी जगरूप शंखवार और मीडिया कर्मी भी थे|

परीक्षा सत्र से ठीक एक माह पहले आई कुछ किताबो को नानकचंद ने बैक डेट में लेने से इंकार कर दिया था लिहाजा किताबे स्टोर में पड़ी रही| हालाँकि जनवरी माह में आई किताबो को बढ़पुर ब्लाक ने छोड़कर सभी ब्लाक के समन्वयको ने बैक डेट में प्राप्त कर लिया था| मगर नानकचंद के द्वारा किताबो का उठान न किये जाने के कारण किताबो का कागजी उपभोग पूरा न हो सका और मामला जाँच में पकड़ा गया|

जो किताबे जुलाई में आनी चाहिए थी उन किताबो की कुछ संख्या केवल दिखावे के तौर पर जनवरी में आई थी| बच्चे पढ़ाई से बंचित रहे और किताब घोटाले का तीसरा संस्करण खुलने लगा| मामले की जाँच अपर जिलाधिकारी ने डीडीओ सौप दी|

जारी….
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अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी पैदा करने को मात्र एक पैसा प्रति छात्र

अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी पैदा करने के सपने संजोये प्रदेश सरकार इसके प्रति कितनी संजीदा है, इसका अंदाजा उसके सालाना बजट से लगाया जा सकता है। प्रदेश में डेविड बेक्हम और माइक पोवेल पैदा करने के लिये प्रदेश सरकार ने परिषदीय छात्रों के लिये एक पैसा प्रति छात्र से भी कम का बजट प्राविधान किया है।

कहते हैं कि खिलाड़ी की पहचान और उसके प्रशिक्षण की व्यवस्था बचपन में ही करली जाये तभी वह आगे कुछ कर पाता है। परंतु उत्तर प्रदेश के खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर तो दूर राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में क्यों धड़ाम हो जाते हैं, इसका बहुत सीधा और स्पष्ट सा जवाब प्रदेश के बजटीय आंकड़ों में मौजूद है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष प्रिमैट्रिक वर्ग में कुल 3 करोड़ 63 लाख 25 हजार 555 छात्रों को छात्रवृत्ति वितरित की गयी, जबकि प्रदेश स्तर पर बेसिक शिक्षा विभाग को खेलकूद, बालकल्याण व अन्य कार्यकलापों की मद में मात्र दो लाख रुपये का बजटी प्राविधान किया गया। जाहिर है कि इस बजट में प्रति छात्र एक पैसे से भी कम की हिस्सेदारी पड़ी। उस पर तुर्रा यह कि बेसिक शिक्षा निदेशक दिनेश चंद्र कनौजिया ने अपने पत्र में इस धनराशि के 31 मार्च तक उपभोग कर लिये जाने पर भी जोर दिया है।

परिषदीय स्कूलों में जो भी खेल गतिविधियां चलती हैं वह भी छात्रों से फीस लेकर। प्राइमरी के बच्चों से 15 पैसे और जूनियर के छात्रों से 2 रुपये प्रति की दर से वसूली जाने वाली धनराशि में भी बंदर बांट के बाद जो पैसा बच जाता है उससे ब्लाक व जनपद स्तर की रैलियों की औपचारिकता पूर्ण करली जाती है। परंतु शिक्षा का अधिकार कानून लागू हो जाने के बाद तो यह रास्ता भी बंद होने जा रहा है।
प्रमाण के तौर पर श्री कनौजिया का पत्र प्रस्तुत है.
UP GOVT EXPENSE OF SPORTS IN BESIK SHIKSHA

अखबार के विज्ञापन की आढ़ में 87 हजार रुपये की ठगी

फर्रुखाबाद:7 March||  दिल्ली की कथित सिंघानिया कम्पनी ने अखबार में विज्ञापन छपवाकर 87 हजार रुपये की ठगी कर ली|

शहर के मोहल्ला बजरिया हरिलाल निवासी मुकेश कुशवाह ने ठगी की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कोतवाली में तहरीर दी| मुकेश कूंचा भवानी दास निवासी देवेन्द्र मिश्रा एडवोकेट सेठ गली स्थित मेडिकल स्टोर की दूकान पर काम करता है| देवेन्द्र मिश्रा मुकेश की पैरवी में कोतवाली पहुंचे|

मुकेश ने बताया कि बीते पखवारे दैनिक जागरण में सिंघानिया फाईनेंस कम्पनी का विज्ञापन छपा था| विज्ञापन में छपे फोन नंबर 08447923221 पर बात करने पर बताया कि स्टेट बैंक के खाता नंबर 31600930761 में जितने रुपये जमा करोगे ५ माह में दोगुने हो जायेंगें|

मुकेश ने २६ फरवरी से ७ मार्च तक खाते में ८७ हजार ४०० रुपये जमा कर दिए| तब उससे यह कहा गया कि ४ हजार रुपये और जमा करो फिर अपना कोई खाता नंबर बताओ उसमे ढाई लाख रुपये जमा कर देंगें| बैंक में खाता न होने के कारण मुकेश ने इस घटना की जानकारी देवेन्द्र को दी| तब देवेन्द्र को संदेह हुआ कि मुकेश के साथ धोखाधड़ी हुई है| उन्होंने फोन पर रुपयों की ठगी करने वाले को भी हड़काया|

मुकेश ने बताया कि उसने रुपये कर्जा लेकर तथा दुकान की उधारी के बसूल किये रुपये भी जमा किये हैं| पुलिस मामले की जांच-पड़ताल कर रही है|

‘तानाशाही इंदिरा की नहीं चली, माया की क्या चलेगी’: मुलायम

लखनऊ|| समाजवादी पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने बीते दिन कटाक्ष करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत इंदिरा गांधी से ज्यादा ताकतवर नहीं हैं और जब श्रीमती गांधी की तानाशाही नहीं चली तो इनकी क्या चलेगी।

श्री यादव ने कहा कि सन 1975 में आपातकाल लगाकर श्रीमती गांधी ने तानाशाही की पराकाष्ठा का परिचय दिया था। समाजवादियों ने जनता के सहयोग से आपातकाल और पूर्व प्रधानमंत्री को उखाड़ फेंका था। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष सुश्री मायावती श्रीमती गांधी से ज्यादा ताकतवर नहीं हैं। इनकी तानाशाही प्रवृत्ति से त्नस्त जनता इन्हें सत्ता से उखाड़ फेंकेंगी और इनका घमंड चकनाचूर कर देगी।

सपा के आज से शुरू हो रहे तीन दिवसीय आन्दोलन को कुचलने के लिए मायावती सरकार पर सपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ दमनात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि आन्दोलन शुरू होने से पहले ही 15 हजार से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है।

श्री यादव ने कहा कि सरकार घबडाई हुई है। इसीलिए आन्दोलन शुरू होने के तीन दिन पहले से ही गिरफ्तारियां शुरू कर दी गयी हैं। इन गिरफ्तारियों को उन्होंने आन्दोलन की सफलता बताया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं पर लाठियां बरसायीं जा रही हैं।

उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि सपा सरकार आने पर ऐसे अधिकारियों को दंडित किया जायेगा जो निदरेष कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न कर रहे हैं। यादव ने कहा कि देवरिया, जौनपुर, गोरखपुर, मैनपुरी आदि जिलों में १५ हजार से अधिक सपा कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हो चुकी है। आन्दोलन को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है।

कार्यकर्ताओं पर संगीन अपराधिक धाराओं में मुकदमें दर्ज किये जा रहे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा- आज गायब हो जायें और कल प्रकट हो जाये इससे आंदोलन सफल होगा। उनका कहना था कि सरकार के पास आंदोलन कुचलने के अलावा इस समय कोई काम नहीं है। सरकारी कामकाज ठप हो गया है।

उन्होंने वकीलों, छात्रों, व्यापारियों और पत्रकारों समेत समाज के सभी वगरे से आंदोलन को समर्थन देने की अपील की क्योंकि आन्दोलन की सफलता से इस सरकार का घमंड टूटेगा और तानाशाही प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।

खराब सड़क देख ठेकेदार का भुगतान रोकने के आदेश

फर्रुखाबाद, 7 मार्च: जिलाधिकार रिगजिन सैम्फेल ने सोमवार को ब्लाक कमालगंज का कई आंबेडकर ग्रामों का निरीक्षण किया| ग्राम बहोरन टप्पा हवेली में गंदगी देख कर उनहोंने नाराजगी जताई और निर्माणाधीन सड़क को टूटते देख उनहोंने ठेकेदार का भुगतान रोकने के आदेश CDO को दिए|

श्री सैम्फेल ने सोमवार को कमालगंज के आंबेडकर ग्राम सियापुर, जंजाली नगला और बहोरन टप्पा हवेली का औचक निरीक्षण किया| निरीक्षण के दौरान डीएम् को नन्हकू संखवार के घर के सामने गंदगी और नालियां चोक नज़र आयीं| गाँव में निर्माणाधीन सड़क को बन्ने से पूर्व ही उखाड़ते देख कर श्री सैम्फेल का पारा चढ़ गया उनहोंने मुख्या विकास अधिकारी चन्द्र प्रकाश त्रिपाठी को सम्बंधित ठेकेदार का भुगतान रोकने के आदेश दे दिए| इससे पूर्व उनहोंने ग्राम सियापुर में और जंजाली नगला में भी विकास कार्यों का निरीक्षण किया|

स्वास्थ्य मंत्री की लूटी गाड़ी बरामद, 3 युवक गिरफ्तार

कानपुर।। पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनंत मिश्रा के ड्राइवर को गोली मारकर लूटी गई गाड़ी बरामद कर ली। लुटेरों के पास से एक पिस्तौल भी बरामद की गई।

मालूम हो कि 4 मार्च को रात डेढ़ बजे कुछ लुटेरे आर्यनगर इलाके से अनंत मिश्रा के निजी ड्राइवर चालक राजेश को गोली मारकर गाड़ी लेकर फरार हो गए। राजेश का हैलट अस्पताल में इलाज चल रहा है।

कोहना थाना इंचार्ज आलोक मणि त्रिपाठी ने बताया कि लुटेरों ने शुक्रवार रात को आर्यनगर से मंत्री की गाड़ी लूटी और नंबर प्लेट बदलकर मथुरा भाग गए। शनिवार पूरा दिन मथुरा में गुजारने के बाद वे कल देर रात इलाहाबाद की ओर रवाना हुए। त्रिपाठी के अनुसार रविवार सुबह फतेहपुर के थरियां के एक पेट्रोल पंप पर इन तीनों लुटेरों का पेट्रोल पंप कर्मचारियों से झगड़ा हुआ तो कर्मचारी पर गोली चलाकर भाग निकले। पेट्रोल पंप कर्मचारियों ने पुलिस को सूचित किया और पुलिस ने नाकाबंदी कर इन तीनों को पकड़ लिया।

त्रिपाठी ने बताया कि तीनों युवक इलाहाबाद के अनुज अग्रवाल, पवन तिवारी तथा संजय सिंह हैं। इसमें से एक खुद को पत्रकार बताता है। कड़ाई से पूछताछ करने पर इन्होंने गाड़ी लूटने के बारे में बताया। फतेहपुर पुलिस ने इस बारे में कानपुर पुलिस को सूचित किया और कानपुर पुलिस दल फतेहपुर पहुंचा। उन्होंने बताया कि फतेहपुर पुलिस ने इन तीनों युवकों को गिरफ्तार कर इनके पास से गाड़ी और एक पिस्तौल बरामद किया। इनके खिलाफ फतेहपुर में ही मामला दर्ज किया गया है।

उन्होंने बताया कि चूंकि इन तीनों ने पेट्रोल पंप कर्मी पर गोली फतेहपुर जिले में चलाई है इसलिए अभी इनके खिलाफ वहीं मुकदमा दर्ज किया गया है लेकिन गाड़ी लूटने की घटना कानपुर की है इसलिये बाद में इन्हें वॉरंट पर यहां लाया जाएगा. फतेहपुर और कानपुर पुलिस मामले की जांच कर रही है।