अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी पैदा करने को मात्र एक पैसा प्रति छात्र

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अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी पैदा करने के सपने संजोये प्रदेश सरकार इसके प्रति कितनी संजीदा है, इसका अंदाजा उसके सालाना बजट से लगाया जा सकता है। प्रदेश में डेविड बेक्हम और माइक पोवेल पैदा करने के लिये प्रदेश सरकार ने परिषदीय छात्रों के लिये एक पैसा प्रति छात्र से भी कम का बजट प्राविधान किया है।

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कहते हैं कि खिलाड़ी की पहचान और उसके प्रशिक्षण की व्यवस्था बचपन में ही करली जाये तभी वह आगे कुछ कर पाता है। परंतु उत्तर प्रदेश के खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर तो दूर राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में क्यों धड़ाम हो जाते हैं, इसका बहुत सीधा और स्पष्ट सा जवाब प्रदेश के बजटीय आंकड़ों में मौजूद है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष प्रिमैट्रिक वर्ग में कुल 3 करोड़ 63 लाख 25 हजार 555 छात्रों को छात्रवृत्ति वितरित की गयी, जबकि प्रदेश स्तर पर बेसिक शिक्षा विभाग को खेलकूद, बालकल्याण व अन्य कार्यकलापों की मद में मात्र दो लाख रुपये का बजटी प्राविधान किया गया। जाहिर है कि इस बजट में प्रति छात्र एक पैसे से भी कम की हिस्सेदारी पड़ी। उस पर तुर्रा यह कि बेसिक शिक्षा निदेशक दिनेश चंद्र कनौजिया ने अपने पत्र में इस धनराशि के 31 मार्च तक उपभोग कर लिये जाने पर भी जोर दिया है।

परिषदीय स्कूलों में जो भी खेल गतिविधियां चलती हैं वह भी छात्रों से फीस लेकर। प्राइमरी के बच्चों से 15 पैसे और जूनियर के छात्रों से 2 रुपये प्रति की दर से वसूली जाने वाली धनराशि में भी बंदर बांट के बाद जो पैसा बच जाता है उससे ब्लाक व जनपद स्तर की रैलियों की औपचारिकता पूर्ण करली जाती है। परंतु शिक्षा का अधिकार कानून लागू हो जाने के बाद तो यह रास्ता भी बंद होने जा रहा है।
प्रमाण के तौर पर श्री कनौजिया का पत्र प्रस्तुत है.
UP GOVT EXPENSE OF SPORTS IN BESIK SHIKSHA

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