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श्रम प्रवर्तन अधिकारी सर्वे कर कार्यदायी संस्थाओं का पंजीकरण कराएं: ADM

फर्रुखाबाद: श्रम प्रवर्तन अधिकारी सभी संस्थाओं में जाकर सर्वे करें तथा रजिस्ट्रेशन संबंधी कार्यवाही अभिलम्ब पूर्ण करवाएं|

कलेक्ट्रेट सभागार में श्रम बंधुओं की बैठक में कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारियों को निर्देश देते हुए अपर जिलाधिकारी सुशील चन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि कार्यदायी संस्थाओं के रजिस्ट्रेशन कराने के सम्बन्ध में जिलाधिकारी द्वारा पत्र भेजकर सूचित किया जा चुका है जिन संस्थाओं ने अभी तक पंजीयन नहीं कराया है वह श्रम विभाग के निर्धारित प्रपत्र को पूर्ण कर अपना पंजीयन अवश्य करा लें|

इसके साथ ही निर्माण कार्य करने वाले मजदूरों का भी पंजीयन अवश्य कराएं ताकि श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिवार को दुर्घटना बीमा योजना, शिशु कल्याण लाभ एवं मेधावे छात्रों को पुरष्कार आदि लाभ प्रदान किये जा सके|

अपर जिलाधिकारी ने श्रम प्रवर्तन अधिकारी को निर्देशित करते हुए कहा कि वह सभी कार्यदायी संस्थाओं का सर्वे कर रजिस्ट्रेशन संबंधी कार्रवाई पूर्ण कराएं| साथ ही एक स्मरण पत्र भी सभी विभागों को जारी करें और इसी पत्र के साथ रजिस्ट्रेशन फ़ार्म भी दे दिया जाएगा| इस वित्तीय वर्ष में जो भी कार्य प्रारम्भ किया जाए उसकी सूचना श्रम विभाग को अवश्य उपलब्ध कराएं तथा लागत एक प्रतिशत शेष राशि भी श्रम विभाग में जमा कराएं|

श्रम प्रवर्तन अधिकारी एसपी सिंह ने कहा कि नगर क्षेत्र में ३७ संस्थाओं का कार्यालय द्वारा पंजीकरण कराया जाना है| लेकिन किसी भी संस्था द्वारा अभी तक कोई सूचना प्राप्त नहीं है|

कारखानों की बीच से निकलने वाली बिजली तारों को हटाया जाए: एडीएम

फर्रुखाबाद: कारखानों के बीच से निकलने वाले बिजली के तारों को तत्काल हटाया जाए यह निर्देश अपर जिलाधिकारी सुशील चन्द्र श्रीवास्तव ने कलेक्ट्रेट सभागार में उद्धमियो की शिकायतों को सुनने के बाद विधुत विभाग के अधिकारियों को दी है|

उन्होंने कहा कि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के अधिशाषी अभियंता उद्धामियों से सम्बंधित समस्त समस्याओं का निराकरण प्राथमिकता से करें| जिन मामलों में विवाद की स्थित हो उसमे प्रशासनिक अधिकारियों का सहयोग लें| कनेक्शन की प्रगति पर उन्होंने कहा कि हथियापुर क्षेत्र के व्यवसायीयों को तुरंत विधुत कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए|

अपर जिलाधिकारी ने हस्तशिल्प आर्तिटन क्रेडिट कार्ड योजना पर महा प्रबन्धक उधोग केंद्र को निर्देश दिए कि बरेली स्थित हस्तशिल्प के अधिकारियों से सम्पर्क कर कार्यशाला आयोजित कराएं| जिसमे बैंक के अधिकारियों को भी बुलाया जाए| इस योजना के तहत ऋण का वितरण भी होना है|

एडीएम ने ग्राम मुडगाँव में ग्राम समाज की ६५ हेक्टेयर भूमि पर टेक्स्टाईल पार्क बनाने के बारे में बताया कि सिटी मजिस्ट्रेट के साथ व्यापारी लोग बता कर लें साथ ही ग्रामीणों से भी वार्ता करें| जमीन उपलब्ध होने पर टेक्स्टाईल पार्क बनाने की कार्रवाई की जायेगी|

बैठक में अपर पुलिस अधीक्षक बीके मिश्र, सिटी मजिस्ट्रेट डॉ महेंद्र, उप जिलाधिकारी अनिल धींगरा, विधुत विभाग के अधिकारी, डीड बैंक मैनेजर व अन्य बैंको के प्रतिनिधि व भारी संख्या में व्यापारी मौजूद रहे|

शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाना दुराचार

इलाहाबाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विनोद प्रसाद ने कहा है कि किसी युवती को शादी का झांसा देकर उससे शारीरिक संबंध स्थापित करना और उसे लगातार जारी रखना दुराचार है। इंटरनेट के जरिए वर खोजने वाली युवती के साथ धोखाधड़ी के इस मामले में न्यायालय ने आरोपी युवक की निचली अदालत के समन आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। यह आदेश गुड़गांव के शिवालिक घोष की रिवीजन याचिका पर दिया है।

मुकदमें में याची का कहना था कि युवती बालिग है और शारीरिक संबंध सहमति से बने। याची की दलील को खारिज करते हुए न्यायालय ने कहा कि यदि किसी स्तर पर युवती अपना कौमार्य खो चुकी है तब भी किसी को उससे दुराचार करने का अधिकार नहीं मिल जाता है। प्रकरण के अनुसार नोयडा के सेक्टर 32 में एक युवती ने इंटरनेट पर गुड़गांव के शिवालिक घोष से रिश्ता तय किया। आरोप है कि शिवालिक ने उसे गुड़गांव बुलाया और कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर उससे दुराचार किया। युवती के विरोध पर शादी करने का आश्वासन दिया।

कानपुर से आये प्रवर्तन दल को देख पुरुष व युवक गाँव छोड़कर भागे

फर्रुखाबाद: कानपुर के सहायक आबकारी आयुक्त प्रवर्तन दल की टीम को देखकर देशी शराब कारोबारी गाँव छोड़कर भाग गए| जिसके कारण एक ही ग्रामीण पकड़ा जा सका|

प्रवर्तन दल ने कमालगंज के थानाध्यक्ष सुनील तिवारी पुलिस फ़ोर्स के साथ ग्राम महारूपुर रावी में छापा मारा| फ़ोर्स को देखकर ग्रामीण पुरुष व युवक गाँव छोड़कर भाग गए| फ़ोर्स ने जमीन खोदकर लहन से भरे प्लास्टिक के डिब्बे निकाले, लहन को बहाया गया और सूजे से डिब्बे नष्ट किये गए|

फ़ोर्स ने हजारों लीटर लहन बहाकर दर्जनों डिब्बे फोड़े| इस दौरान महिलाओं व युवतियों ने फ़ोर्स के साथ हूटिंगबाजी की और अपनी भाषा में बडबडाती रही| फ़ोर्स ने काफी देशी शराब बरामद कर मुन्ना गिहार को पकड़ लिया| जिसको थाना पुलिस के हवाले कर दिया गया|

छापे के दौरान प्रवर्तन दल के निरीक्षक गिरिराज सिंह, रामशंकर सिंह व आबकारी विभाग के निरीक्षक आरके तिवारी, अशोक मिश्रा आदि फ़ोर्स मौजूद रहा|

लखनऊ में स्पीक एशिया के दफ्तरों पर फिर छापे

लखनऊ: स्पीक एशिया कंपनी और देश की प्रमुख फ्रेंचाइजी संचालक के बीच मुंबई से मिले अनुबंध दस्तावेजों के अध्ययन के बाद बुधवार को साढे़ 10 बजे सेवा कर टीम ने एक बड़े अफसर की अगुवाई में लखनऊ के सहारागंज, नरही, इंदिरानगर व गोमतीनगर क्षेत्र में पांच फ्रेंचाइजी संचालकों के दफ्तरों पर छापामारी शुरू की।

ऑनलाइन सर्वे कंपनी स्पीक एशिया के फ्रेंचाइजी संचालकों के पांच से अधिक दफ्तरों पर बुधवार को ताबड़तोड़ छापे मारे गए। छापों में मिले दस्तावेजों से सर्वे कंपनी और फ्रेंचाइजी संचालकों के बीच साठगांठ का खुलासा हुआ है। केंद्रीय उत्पाद, सीमा शुल्क व सेवा कर विभाग ने यह कार्रवाई की। जांच टीम ने कंप्यूटरों की हार्ड डिस्क को भी खंगाला। टीम को निवेशकों के बारे में भी पूरी जानकारी मिल गई है। इन दस्तावेजों की जांच के बाद गुरुवार को स्पीक एशिया कंपनी के फ्रेंचाइजी संचालकों के बारे में खुलासा होगा। छापामार दल के मुताबिक सर्वे कंपनी पर विदेशी मुद्रा विनिमय अधिनियम के तहत कार्रवाई हो सकती है।

बिजली ने जरदोजी कारीगर की जान ली

फर्रुखाबाद: विधुत विभाग की घोर लापरवाही के कारण जरदोजी कारीगर हाशिम की जान चली गई|

थाना कमालगंज के ग्राम शेखपुर निवासी असफाक का २२ वर्षीय पुत्र हाशिम मंजन कर रहा था| मंजन करते-करते वह दरगाह मकदूमियाँ के सामने लगे बिजली के पोल से टिककर खड़ा हो गया| खम्भे में करेंट आने से वह चिपक गया| जब तक लोग समझ पाते तब तक वह बिजली की चपेट में आ चुका था| जल्दबाजी व लापरवाही से छुडाने के चक्कर में कई लोगों को भी करेंट लगा|

थोड़ी देर बाद हाशिम भी छोटकर दूर जा गिरा| उसे उपचार के लिए डाक्टर के पास ले जाया गया जहां डाक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया| बिजली के खम्भे में करेंट आने से कई जानवरों की मौत हो चुकी है| शिकायत करने के बावजूद भी बिजली विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की|

फर्रुखाबाद परिक्रमा: भाभी की हार का बदला… और डॉ रजनी का आइना

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फिर लुट गया किसान बीच बाजार

राष्ट्रीय स्तर पर सर्वाधिक आलू उत्पादक जिले के रूप में चर्चित फर्रुखाबाद के आलू उत्पादन की किस्मत रूठी ही रहती है| हर चुनाव में हर नेता यहाँ पर आलू पर आधारित उधोग लगाने की बात करता है| परन्तु पांच दर्जन से अधिक शीतग्रहों के अतिरिक्त यहाँ है कुछ भी नहीं| हर पार्टी का प्रमुख नेता यहाँ शीतग्रह का मालिक है| कथित रूप से लगभग सभी में आलू उत्पादक का शोषण होता है| भाव, कटौती, लोन, बारदाना, तौल, जैसे बहुत हतकंडे हैं| हारता हर बार आलू उत्पादक ही है| इस बार भी यही हो रहा है| शीतग्रहों में लगभग चार लाख मैट्रिक टन आलू भंडारित है| निकासी मुश्किल से 15% हुयी है| भाव गिर गया है अधिक निकासी पर भाव और गिरेगा| नतीजतन नेताओं के कोरे आश्वासनों के बाद एक बार फिर किसानों के सपनों की होली जलेगी और जलसों, धरनों प्रदर्शनों में किसान एकता जिंदाबाद के जोरदार नारे लगेंगे|

चौक पर कत्ल: जहां बड़े और छोटे के लिहाज के अलावा  काई भेदभाव नहीं था

चौक की पटिया पर बैठे मुंशी हर दिल अजीज और मियाँ झान झरोखे के आंसू थम नहीं रहे थे| उदासी तो किराने बाजार से लेकर घुमना, लोहाई रोड, रेलवे रोड सहित पूरे व्यापारिक क्षेत्र में फ़ैली थी| चौक की पटिया के बाद नगर में बंगाली होटल और विक्रम होटल सर्वाधिक चर्चित और अखाड़ेबाजी के स्थान रहे| बंगाली होटल वर्षों पहले बंद हो चुका है| अब दीपक की दिन दहाड़े हुई ह्त्या ने विक्रम होटल पर भी ग्रहण लगा दिया है| मुंशी और मियाँ पटिया पर बैठे-बैठे पुरानी यादों में खो गए| मियाँ दुःख के अतिरेक में मुंशी के दोनों कंधे पकड़कर झिझोड़कर सुवकते हुए बोले मुंशी कैसा बुरा वक्त आ गया है| हँसी, दिल्लगी, चकल्लस, विचार विमर्श के अड्डे झगड़े फसाद, हत्याओं के गवाह बन रहे हैं| हमारा यह प्यारा दुलारा शहर और चौक के आसपास का इलाका देर रात तक गुलजार रहा करता था| आज देखो क्या हाल है सब एक-दूसरे की जान के दुश्मन हो गए हैं|

मुंशी रूमाल से आंसू पोंछते बोले मियाँ पुरानी बातों को याद कर कलेजा मुंह को आता है| अभी कल जैसी ही बात है लोग विक्रम होटल में बैठकर चाय की चुस्कियां लेते थे| चौक की पटिया पर आकर पान खाते थे| नेहरू रोड पर दुकानों की सीढियां हर जाति वर्ग और धर्म के लोगों की कफलियाँ मस्ती और कहकहों का बेहतरीन नजारा पेश करती थी| एक उत्सव जैसा माहौल बनता था जो देर शाम से शुरू होकर देर रात तक चलता था| खानपान का दौर भी चलता था| चर्चाओं, बहसों, दांवपेच, अफवाहों के दौर चलते रहते थे| परन्तु क्या मजाल है कि कहीं भी किसी प्रकार की बदतमीजी हो? हर लंबी बहस का समापन गजक मूंगफली पान बीडी सिगरेट चाय के दौर से होता था|

मियाँ बोले इस महफ़िल में बड़े और छोटे के लिहाज के अलावा किसी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं था|स्वर्गीय विमल प्रसाद तिवारी की लंबी राजनैतिक चर्चाओं और फर्राटेदार अंग्रेजी स्वर्गीय दयाराम के अनुभवों, स्वर्गीय ब्रह्मदत्त द्विवेदी की नजीरो और तुरंती कविता, जगदीश बागला, लाला राम श्रीराम अग्रवाल, दादा चंद्र शेखर, हरे कृष्ण की अपनी टीम के साथ रामलीला और दुनिया जहान की बातें, दीवान यावर हुसैन, ब्रन्दावन टंडन, लाल जी टंडन, पन्नालाल, डॉ रामलाल वर्मा, अम्बरीश गुप्ता, दलाई लामा, हीरालाल अग्रवाल, अरुण प्रकाश तिवारी ददुआ, गोपाल अग्रवाल, ओमप्रकाश खन्ना, गंगाराम वर्मा, त्रिलोकी शुक्ला, अशोक कपूर, वागीश अग्निहोत्री, किशन लाल गुप्ता, रामजी अग्रवाल, रमेश टंडन, श्रवण कुमार चतुर्वेदी, कुञ्ज बिहारी सिंह, प्रकाश नारायण पाण्डेय, अनिल मिश्रा, राकेश चौहान, विनोद गुप्ता, द्वारिका दीक्षित, श्यामा गुप्ता, अनिल तिवारी आदि सैकड़ों लोग नगर के प्रतिदिन देर शाम से चलने वाले इस उत्सव के स्थायी भागीदार होते थे|
फतेहगढ़, कमालगंज, शमसाबाद, सहित दूर दराज से अपने कामधाम शादी समारोह में आने वाले लोग समय निकालकर इस उत्सव में एक साथ अनेक लोगों से मिलने की गरज से आते-जाते रहते थे| ट्रांसपोर्टर मुन्नू भैया, स्पोर्ट्स मैन रघुवीर सिंह, रामलीला के कुम्भकरण पुन्नीशुक्ला, मेकअप के फनकार पुरुषोत्तम शर्मा, राम प्रकाश कनौजिया, महेंद्र नाथ धवन, सतीश गुप्ता, श्याम प्रकाश दुबे, रमेश कटे फटे, शाह राधा रमन अग्रवाल, किसकी किसकी याद करें| यह कहते कहते मियाँ फिर फफक कर रो पड़े| केशरी साध, विजय फल साध राजमुकुट साध आदि सबके सब अब दिल्ली वासी हो गए|

मुंशी मियाँ को ढाढस बंधाते हुए बोले दीपक की ह्त्या ने हमारे शहर की तहजीव को कलंकित किया है| नोकझोंक बहस की बात चलती है| यह जाग्रत समाज की पहिचान है परन्तु बेख़ौफ़ फ़िल्मी अंदाज में विक्रम होटल के खुश मिजाज दीपक की ह्त्या ने सभी झकझोर दिया| दो दिनों तक चली सौदेबाजी के बाद हत्यारे की गिरफ्तारी हो गई है| परन्तु इस कांड में हत्यारे के परिवार की दो महिलाओं को दो दिन हिरासत में रखने के बाद नशीले पदार्थ बरामदगी में जेल भेजने की कहानी ने यह सावित कर दिया है कि पुलिस चाहे कुछ हो जाए अपनी शैली और कार्य प्रणाली में निकट भविष्य में कोई परिवर्तन के स्थान पर अपनी कारिस्तानियों से बाज आने वाली नहीं है| क्या कप्तान साहब बहादुर यह बताने का कष्ट करेंगें कि शहर के ह्रदय प्रदेश में हुए इस लोम हर्षक हत्याकांड की तर्ज पर  इस प्रकार की अन्य घटनाओं पर तेजी की जगह पुलिस चुप और शांत क्यों है|

भाभी जी ने आईना दिखाया !

नगर और जिले में महिला नेत्रियों के माध्यम से चलने वाले गैंगों, बिग्रेड, आर्मियों की भरमार है| जुल्म ज्यादती और सामाजिक सरोकारों को उठाने में कोई कमी नहीं रखना चाहता| परन्तु दीपक हत्याकांड के मुख आरोपी पंकज शुक्ला के परिवार की दो महिलाओं के साथ हुए पुलिसिया अत्याचार और बाद में कथित रूप से मादक पदार्थ रखने के आरोप में जेल भेजे जाने के मुद्दे पर इन सभी महिला संगठनों के सर्वे सर्वा जैसे कुछ हुआ ही न हो के अंदाज में खामोश हैं| क्या यह खामोशी हमारी कायरता नहीं है|

दीपक हत्याकांड के जिम्मेदार लोगों पर विधि सम्मत कड़ी से कड़ी कार्यवाही हो| परन्तु महिलाओं पर इस प्रकार की पुलिसिया ज्यादती के विरोध में खड़े होकर डॉ रजनी सरीन ने उन सब लोगों को आईना दिखाया है जो पुलिस की इस अमानवीय कार्रवाई के विरुद्ध अपने अपने कारणों से खामोश थे| देखना यह है कि क्या आने वाले दिनों में बात बात में राष्ट्रीय प्रांतीय नेताओं के पुतले जलाने वाले विभिन्न राजनैतक दलों के सूरमा तथा विभिन्न संगठनों की वीरांगनाएं पुलिस द्वारा किये गए इस अमानवीय उत्पीडन के विरुद्ध आबाज उठाने की हिम्मत जुटा पायेंगें|

वही हुआ जिसका डर था – अमृतपुर में  यादवी घमासान तय

समाजवादी पार्टी ने आगामी विधान सभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों की घोषणा क्या की जिले की राजनीति में तूफ़ान खडा हो गया| लंबी जद्दोजहद के बाद अमृतपुर विधान सभा क्षेत्र में यादवी घमासान की भूमिका तैयार हो गई है| मान मनौबल सांत्वना समीक्षा आदि की लंबी कथा के बाद बाबू सिंह यादव के पुत्र डॉ जितेन्द्र सिंह यादव ने सपा के घोषित प्रत्याशी नरेन्द्र सिंह यादव के विरुद्ध हर हाल में चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा कर दी है|  उल्लेखनीय है कि डॉ जितेन्द्र यादव की भाभी जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में विधायक नरेन्द्र सिंह यादव् की पत्नी को हरा चुकी है| इसके बाद विधायक नरेन्द्र सिंह यादव ने जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में डॉ जितेन्द्र यादव कीइन्हीं भाभी को पराजित करने के उद्देश्य से अपनी भाभी तक का वोट वसपा उम्मीदवार को कथित रूप से दिलवाया| आग बराबर लगी हुयी है|

कमालगंज विधान सभा क्षेत्र की वहाँ सपा प्रत्याशी जमालुद्दीन सिद्दीकी को अपने भतीजे और वर्तमान वसपा विधायक से जिला पंचायत तथा बलाक प्रमुख के चुनाव की तरह कितनी मदद मिलती है इसकी प्रतीक्षा करनी होगी| कायमगंज में प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव के चहेते माथुर सुरक्षित सीट से प्रत्याशी न बनाए जाने पर शान्त होकर बैठ गए हैं| उनके भाजपा में जाने की चर्चा चली फिर बंद हो गई| अजीत कठेरिया टिकट मिलते ही अपने धंधे पानी में लग गए| सदर सीट पर तूफ़ान आने के पहले की खामोशी है लोग खार खाए बैठे हैं|

और अंत में……………….. कौन होगा उत्तराधिकारी ?

साध्वी उमा भारती ने अपनी गंगा सफाई अभियान यात्रा में अपने आपको कल्याण सिंह की बेटी और उत्तराधिकारी क्या कहा मुकेश राजपूत के पेट में मरोड़ होने लगी| बोले उत्तराधिकारी बेटी नहीं बेटा ही होगा| कितनी घटिया सोंच है नेता कहे जाने वाले लोगों की| कभी उर्मिला राजपूत, उमा भारती, साक्षी जी महाराज की उंगली पकड़कर राजनीति सीखने वाले पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मुकेश राजपूत इस समय जिले में कल्याण सिंह के सबसे बड़े सिपहसालार हैं| वह जिला पंचायत अध्यक्ष का पद महिला होने पर अपने उत्तराधिकारी के रूप में अपनी पत्नी सौभाग्यवती की ताजपोशी कर चुके हैं| पता नहीं अपने समाज के दिग्गज नेता के स्वयं घोषित रिश्ते और उत्तराधिकार पर उन्हें क्या और क्यों एतराज है| वैसे राजनेताओं की विश्वसनीयता अपने निम्न बिंदु पर है|

कई दलों का दामन थाम चुके एक पूर्व विधायक ने एक बार खुली जन सभा में कल्याण सिंह से कहा था बाबू जी| राजवीर ( कल्याण सिंह के पुत्र ) आपका साथ छोड़ सकते हैं| परन्तु आपका यह बेटा कभी आपका साथ नहीं छोडेगा| यह और बात है कि बातों के धनी नेता अपनी इस घोषणा के बाद अभी तक केवल तीन दलों की ( एक दल की तो एक साल में दो बार ) यात्रा ही कर पाए हैं| मिशन 2012 के लिए इनके विकल्प अभी खुले हुए हैं| लोग इन्हें उस्ताद कहते नहीं थकते| वह वास्तव में क्या हैं? उन्हें जिले और शहर के सभी लोग अच्छी तरह जानते हैं| जिला पंचायत रहते मुकेश राजपूत इन सज्जन के जाल में फंस गए थे| स्वयं सपा मुखिया मुलायम सिंह ने तब कल्याण सिंह से दोस्ती के खातिर इन्हें दल दल से बाहर निकाला था|  राजनीति में बिरादरी तलवार की धार है| वह काटती ही काटती है जोडती नहीं| विशेष रूप से जब जब एक ही जाति के कई दिग्गज एक ही साथ एक ही समय पर एक ही अखाड़े में हो|

जय हिंद…………………..

(लेखक वरिष्ट पत्रकार के साथ वकील व समाजवादी चिंतक है)

प्रस्तुति-

सतीश दीक्षित (एडवोकेट)
1/432, आवास विकास कालोनी फर्रुखाबाद

पाठक अपनी प्रतिक्रिया satishdixit01@gmail.com or jninews@gmail.com पर भी भेज सकते है|

नगर पालिका के अध्यक्ष भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अपना रुख साफ़ करें

फर्रुखाबाद: भ्रष्टाचार ख़त्म करने के मुद्दे पर जब पूरे देश में जंग छिड़ी है तब फर्रुखाबाद के सभी नेता खामोश है| क्या ये मान लिया जाए कि जनपद का कोई भी नेता भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चोरो के साथ खड़ी है| शहर की सबसे पहली लोकतान्त्रिक इकाई नगरपालिका के अध्यक्ष से जनता पूछ रही है कि वो बताएं कि क्या वो भ्रष्टाचार के विरोध में हैं या नहीं| यदि हैं तो क्या वो नगरपालिका में विकास कार्यो सहित अन्य खर्चो में कमीशनबाजी बंद करने को तैयार हैं या नहीं| क्यूंकि वर्तमान में पूरे नगर में उनके ठेकेदार जो नाली और गली का काम करवा रहे है वो सरसर तौर पर अमानक हो रहा है और ठेकेदारों का कहना है कि उन्हें नगरपालिका ने अध्यक्ष से लेकर कई अफसरों को कमीशन देना पड़ रहा है बल्कि गलियों में लगने वाली ब्रिक पेवर ईंट भी उनकी बेनामी कम्पनी बाथम ब्रदर्स की लगाना बाध्यकारी है जिसका पैसा नगरपालिका अध्यक्ष और उनके पार्टनर के पास जाता है जो कि बेनामी है|

यहाँ हम ये स्पष्ट कर दे कि जेएनआई ने न केवल कई महीनो से लगकर इस बात के पुख्ता सबूत जुटाए हैं कि ऊपर जो लिखा है वो अक्षरश सौ प्रतिशत सही है| बहस अब इस बात पर नहीं है कि नगरपालिका अध्यक्ष सहित उनके सरकारी बाबू और अफसर भ्रष्टाचार कर रहे है क्यूंकि ये अब प्रमाणिक है|

सवाल तो अब ये है क्या अब जब देश की जनता भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ी हो चुकी है तब नगरपालिका के अध्यक्ष मीडिया में आये और इस बात का एलान करने को तैयार हैं कि आज से और अभी से नगरपालिका में कोई घूस नहीं लेगा और सारे विकास कार्यों पर कोई कमीशन नहीं लगेगा| ठेकेदार मनको के अनुसार काम करें और मुनाफा कमाए|

आम जनता और ठेकेदारों की तरफ से नगर पालिका के अध्यक्ष से जेएनआई खुद ये सवाल पूछ रहा है ताकि जनता को एक बेहतर सुखद और भ्रष्टाचार मुक्त नगरपालिका मिल सके|

नगरपालिका में किसी भी निर्माण कार्य में न तो एस्टीमेट का खुलासा हो रहा है और न ही कोई मानक का बोर्ड लगाया जा रहा है| इसलिए देखिये क्या क्या हो रहा है|

*नगर में बन रही किसी भी गली में क्लास 1 ईंट नहीं लग रही| हर गली में घटिया सेम ईंट का इस्तेमाल हो रहा है|
*गलियों को बनाने में किसी भी प्रकार का कोई वाटर लेवल प्लान नहीं है|
*अभी तक जो गलियां बनी है या बन रही हैं उनके साइड में बन्ने वाली नाली के भुगतान में बड़ा अंतर है| इंजिनियर फर्जी एमबी करके निर्माण कार्य में लगी सामग्री ईंट, सीमेंट, और बालू या मौरम की ज्यादा मात्र दर्ज करके सरकारी पैसे का बंदरबाट कर रहे है|
*सूचना के अधिकार के तहत अगर ये एमबी बुक (इसी किताब पर ठेकेदार का बिल बनाकर भुगतान किया जा सकता है) यदि जब्त कर ली जाए तो इंजिनियर को जेल जाने से कोई नहीं रोक सकता|
*गलियों में जो ब्रिक पेवर एन्न्त लग रही है वो मानक के अनुरूप नहीं है|
*गलियों में बिछने वाली कच्ची गिट्टी की परत बहुत ही पतली बिछाकर न केवल गोलमाल किया जा रहा बल्कि निर्माण की गुणवत्ता से खिलवाड़ किया जा रहा है|

इस सब बातो पर ठेकेदारों का रुख स्पष्ट है कि उन्हें कमीशन देना पड़ रहा है इसलिए वे मजबूर हैं घटिया निर्माण के लिए|

बेसिक शिक्षा: डीएम के हस्ताक्षर से फर्जी रिपोर्टिंग करा दी MDM समन्वयक ने

फर्रुखाबाद: बेसिक शिक्षा फर्रुखाबाद में एक और घोटाले की बुनियाद तैयार है| मिड डे मील की रसोईघर के रखरखाव और विद्यालय स्तर पर स्टेशनरी मद का 7,10,560.00 रुपया 31 मार्च 2011 को खर्च दिखा दिया गया| जिला समन्वयक MDM की तैयार रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2010-11 में इस मद का क्लोजिंग बेलेंस केवल 12145.00 रूपये है| मगर चौकाने वाली बात ये है इस मद के सरकारी बैंक खाते में 23 मई 2011 को 8,78,314.00 रुपया शेष है| यानि लगभग 8.66 लाख रुपया गबन या घोटाले के लिए तैयार है जिसका बंदरबाट कभी हो सकता है| समन्वयक की बनायीं रिपोर्ट को ही बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जिलाधिकारी से बतौर नोडल अधिकारी हस्ताक्षर करवाकर प्राधिकरण को भेजी है|

पैसे को चुपचाप आहरित कर गोलाम करने का संदेह!

जेएनआई की पड़ताल में जो तथ्य सामने आये उसके मुताबिक जनपद के स्कूलों में ये पैसा दो महीने के बाद भी स्कूलों के खातो में नहीं पंहुचा| भ्रष्टाचार की सम्भावना के चलते जेएनआई ने अपने सूत्रों से पड़ताल आगे बढ़ाई तो पता चला की इस मद के जिला स्तरीय बैंक खाते पंजाब नेशनल बैंक के खाता संख्या 1934000100139306 में दिनांक 23 मई 2011 में 8,78,314.00 रुपया जमा है| जबकि प्राधिकरण को भेजी गयी रिपोर्ट के मुताबिक इस खाते में केवल 12145.00 रुपया शेष होना चाहिए|

विद्यालयों के खातो में दो महीने के बाद भी नहीं पहुची ये रकम!

ये पैसा 23 मई 2011 तक किसी भी स्कूल में नहीं भेजा गया| जेएनआई ने खुद कई स्कूलों के प्रधान अध्यापको से बात की तो उन्होंने बताया की पैसा आना तो दूर उन्हें तो इस बात की भी जानकारी नहीं है की इस मद भी कोई पैसा आता है| जाहिर है इस मद का पैसा 1850 स्कूलों में वितरित होना था| रकम छोटी होने के कारण आमतौर पर किसी की नजर भी नहीं पड़ी और घोटाले के लिए एक और प्लेटफार्म तैयार हो चूका है| सर्व शिक्षा अभियान के नियमानुसार सर्व शिक्षा अभियान में इस मद के पैसे का उपभोग तभी भेजा जाना चाहिए जब इस पैसे का स्कूल स्तर पर उपभोग हो जाता| मगर यहाँ तो स्कूल में पैसा पंहुचा ही नहीं और समन्वयक द्वारा उपभोग की रिपोर्ट भेज दी गयी| ये एक बड़ी वित्तीय अनियमितता है| इस खाते में कब कब और कैसे कैसे पैसे का लेन देन हुआ इसकी पिछली जाँच हुई हो कई अफसर वितीय अनियमितता में फस सकते हैं|

इस खाते में और भी हो सकते है घोटाले

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी पहल के बाद शुरू हुई मध्याह भोजन योजना यानो दोपहर में बच्चो को पका पकाया भोजन खिलाने की मिड डे मील प्रदेश में फर्जीवाड़े और घोटालो की भेट चढ़ रही है| इस योजना में स्कूल में स्थापित रसोईघर में दोपहर का भोजन बनता है| उस रसोईघर के रखरखाव के लिए ऊंट के मुह में जीरा की तरह वार्षिक रखरखाव के लिए 200 रुपये प्रति और 75 प्रति स्कूल स्टेशनरी की मद में केंद्र सरकार ने भेजा| फर्रुखाबाद के 1850 स्कूलों के लिए 1,38,750.00 रुपये स्टेशनरी के लिए और 3,70,000.00 रुपये रसोईघर के रखरखाव के लिए भेजा गया| यही नहीं 178 स्कूलों के लिए प्रति स्कूल 1000.00 रुपये बर्तनों के टूट फूट और परिवर्तन के लिए भेजे गए| ये पैसा स्कूल स्तर पर खर्च कर उपभोग भेजा जाना था| मद का उपभोग 31 मार्च 2011 को दिखा दिया गया|

सम्पादक की सलाह: जिलाधिकारी को सतर्क रहने की जरुरत

ज्यादातर योजनाओ में जिलाधिकारी जिलास्तर पर सरकारी योजनाओ के नोडल अधिकारी होते है| मध्याह भोजन योजना और सर्व शिक्षा अभियान की जिला स्तरीय समिति में जिलाधिकारी ही अध्यक्ष है| और सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर नोडल अधिकारी भी| लिहाजा उनके हस्ताक्षर से इन योजनाओ में प्रगति और खर्च उपभोग की रिपोर्ट ही मान्य होती है और केंद्र और राज्य सरकार मांगती है| जिला स्तर पर इन विभागों के अफसर जिलाधिकारी को पूरी फ़ाइल न भेज तथ्य छुपा कर हस्ताक्षर कराने में कामयाब हो जाते है|

वैसे सरकारी योजनाओ में सोशल आडिट का भी प्राविधान है और विभागों की योजनाओ को व्यापक प्रचार प्रसार के बाद सोशल आडिट पर ध्यान दिया जाए तो भ्रष्टाचार पर काफी अंकुश लग सकता है|

इस खबर का मकसद:

जे एन आई का मानना है हो चुके घोटाले पर काम करने से बेहतर है ऐसा काम किया जाए जिससे घोटाला होने ही न पाए|

जल्द अमीर बनने की ख्वाहिश में लोग लुटा रहे हैं गाढ़ी कमाई

फर्रुखाबाद : शहर में इन दिनों ऑनलाइन सर्वे कंपनियों की बाढ़ आई है। स्पीक एशिया सहित कई अन्य ऑनलाइन सर्वे कंपनियां भी कुछ इसी तर्ज पर निवेश करा रही हैं। ऑनलाइन सर्वे में निवेश कर चुके लोग अपने जैसे दूसरे को समझाते हैं कि घर बैठे अपने कंप्यूटर पर एक सर्वे फार्म भरना है। मुनाफे का गुणा-भाग इतना आसान लगता है कि निवेश करने के लिए कोई भी हिचकता नहीं। बिना मेहनत के घर बैठे जल्द अमीर बनने की ख्वाहिश में लोग अपनी गाढ़ी कमाई लुटा रहे हैं।

ऑनलाइन सर्वे कंपनियों की बाढ़

संचार क्रांति के सैकड़ों लाभ के बीच कई नुकसान भी छुपे हैं। अब ठग इंटरनेट के जरिए भारी मुनाफे का लालच देकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऑनलाइन सर्वे की योजनाओं से युवा जल्द प्रभावित होते हैं। विदेशी कंपनियों का नाम जुड़ा होने की वजह से उन्हें कंपनी पर जल्द विश्वास हो जाता है लेकिन इसमें सबसे बड़ा नुकसान यह है कि कंपनी द्वारा निवेशक को लिखित में कोई एग्रीमेंट अथवा दस्तावेज नहीं मिलता। मसलन, सबकुछ ऑनलाइन होने की वजह से निवेशक के पास साक्ष्य के लिए कोई लिखित पत्र नहीं होता। निवेश करने वाले व्यक्ति पर दूसरे निवेशक का दबाव होता है। निवेशक कंपनी के अधिकारियों अथवा संचालक को सीधे नहीं जानता। कंपनी का कोई बड़ा कार्यालय भी नहीं होता। ठग फ्रेंचाइजी के नाम पर छोटा सा कार्यालय खोलकर निवेशकों को अपने जाल में फंसाए रखते हैं।

निवेशकों के अनुसार सर्वे कंपनियों ने कई योजनाएं चला रखी हैं। घड़ी से लेकर कार तक देने का वादा किया जाता है। एक निवेशक द्वारा दो नए लोगों से निवेश कराने पर उसे पेयर कहा जाता था। कुछ कंपनियां 10 पेयर पर घड़ी, 25 पेयर पर मिनी लैपटाप, 250 पर नैनो कार, 800 पर अल्टो कार, 3000 पर सफारी कार देने का वादा कर रही हैं। एक नए निवेशक को कंपनी से जोड़ने पर 500 रुपये की डायरेक्टर इनकम की भी सुविधा है। दूसरे निवेशकों को अपने अंडर में ज्वॉइन कराकर खुद भारी लाभ कमाने के लालच में लोग ऐसी ऑनलाइन सर्वे कंपनियों में निवेश को बतौर एक व्यवसाय के अपनाने लगे हैं। कुछ महीनों बाद ऐसी कंपनी द्वारा भुगतान न करने अथवा उस पर कानूनी शिकंजा कसने पर निवेशकों को पता चलता है कि मेहनत से कमाए गए लाखों रुपये डूब चुके हैं, लेकिन तब तक देर हो चुकी होती है। भारी मुनाफा कमाने के लिए कई निवेशकों ने अपने नीचे सैकड़ों अन्य लोगों के रुपये निवेश कराए हैं। बहुत से निवेशक ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपनी एफडी तुड़वाकर, कार, जेवर व कीमती सामान बेंचकर, व्यवसाय को बंद कर ऐसी ऑनलाइन कंपनियों में लाखों रुपये निवेश किए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसी कंपनियों में रकम निवेश करना किसी खतरे से कम नहीं।