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पीएसी जवान ने बेटी के आशिक को गोली से उड़ाया

काशीराम नगर: बेटी के प्रेम के खिलाफ हो चुके पीएसी के जवान ने पहले बेटी को समझाने का प्रयास किया लेकिन जब बात नहीं बनी तो उसने बेटी के प्रेमी को गोली मार दी। काशीरामनगर के सहसवार इलाके में जवान राजेन्द्र ने बेटी के प्रेमी को उस वक्त लाइसेंसी बंदूक से गोली मारी जब वह राजेन्द्र की कार का पीछा कर रहा था।

उत्तर प्रदेश के काशीरामनगर जिले के सहसवार थानान्तर्गत रहने वाला राजेन्द्र सिंह पीएसी 45वीं वाहिनी में सिपाही है। अलीगढ़ में तैनाती होने के कारण राजेन्द्र सिंह का परिवार सहसवार में रहता था। इसी बीच उसकी बेटी का गोविन्दपुरी निवसी राहुल नाम के युवक के साथ प्रेम संबंध हो गया। राजेन्द्र को इस बात का पता ही नहीं चला।

राजेन्द्र के घर लौटने पर जब परिवार वालों ने उसे यह बात बतायी तो उसने पहले बेटी को समझाने का प्रयास किया लेकिन जब बात नहीं बनी तो राजेन्द्र ने तय किया कि वह परिवार को लेकर अलीगढ़ चला जाएगा। अभी वह जाने की तैयारी कर ही रहा था कि राहुल को उन लोगों के घर छोड़कर जाने का पता चल गया। राहुल कुछ ही देर में वहां पहुंच गया। क्षेत्रवासियों का कहना था कि राजेन्द्र ने राहुल से वहां से चले जाने को कहा।

राजेन्द्र परिवार को लेकर कार में बैठकर गांव से निकल गया। अभी कुछ दूर ही आगे चला था कि देखा पीछे से राहुल गाड़ी से उनका पीछा कर रहा था। यह देखकर राजेन्द्र को गुस्सा आ गया और गाड़ी से निकलकर अपनी लाइसेंसी बंदूक उठायी और राहुल को गोली मार दी। गोली लगने के बाद राहुल की मौके पर ही मौत हो गयी। राहुल की मौत के बाद आस-पास के लोग वहां एकत्र हो गये। लोगों ने पुलिस को घटना की सूचना दी मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से उसकी लाइसेंसी बंदूक बरामद कर ली।

अफसरों का काम कर रहा प्रधान

फर्रुखाबाद: जिस काम का वेतन सरकारी अफसर को मिलता है वो काम लोकतंत्र की सबसे छोटी संसद ग्रामसभा के प्रधान को करना पड़ रहा है| जनपद में एक सैकड़ा से अधिक पूर्व और वर्तमान प्रधान लगभग 8 करोड़ से अधिक की जो धनराशी मिड-डे-मील के खाद्यान और कन्वर्जन कास्ट हड़प कर चुके है उस धनराशी को सरकारी अफसर केवल कागजो में वसूली कर रहे है| वहीँ जनपद के एक जागरूक प्रधान ने मामले को लखनऊ स्तर तक पंहुचा राज्य और जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर पिछले प्रधान के द्वारा हडपी हुई धनराशि वसूल कर उसे न दी गयी और उसके कार्यकाल के दौरान बच्चो के खाद्यान में कटौती हुई तो वो मिड डे मील बंद कर देगा और इसकी जबाबदेही सरकारी अमले की होगी|

पूर्व प्रधान गटक गया 5 लाख?
ब्लाक मोहम्दाबाद के मेरापुर ग्राम सभा के प्रधान संतोष यादव ने निदेशक मध्याह भोजन योजना को भेजे अपने पत्र में लिखा है कि वो 2010 का चुना हुआ प्रधान है और उसके द्वारा ग्राम सभा का चार्ज लेने के बाद उसके ग्राम सभा के स्कूलों में बच्चो के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा पर्याप्त खाद्यान और कन्वर्जन कास्ट नहीं दी जा रही है| उसके संज्ञान में आया है पिछले प्रधान के ऊपर सरकार का 284 कुंतल गेंहू और 164171/- रुपये कन्वर्जन कास्ट के बकाया हैं| जिसकी वसूली के एवज में उसके कार्यकाल के दौरान खाद्यान और कन्वर्जन कास्ट में कटौती कर उसे दी जा रही है| जिस कारण स्कूल में नौनिहालों को मिलने वाला मिड डे मील प्रभावित हो रहा है| संतोष के मुताबिक सरकार को चाहिए कि वो पिछले प्रधान से वसूली कर उसे खाद्यान उपलब्ध कराये|

फर्जी अदेय प्रमाण पत्रों में भी मालामाल हुए अफसर?
प्रधान संतोष कुमार ने आरोप लगाया और उसके साक्ष्य के रूप में पिछले प्रधान को भेजे गए नोटिस भी प्राधिकरण को भेजे हैं| ज्ञात हो कि खानापूरी के लिए 23/08/2010 को पंचायत चुनाव से ठीक पहले थोक के भाव ऐसे नोटिस सरकारी फाइलों के पेट भरने के लिए भेजे गए थे| बकाया होने के बाबजूद प्रधानो ने बाकायदा कोई बकाया नहीं का अदेय प्रमाण पत्र हासिल किया और लाठी ठोक कर चुनाव लड़े| ये बात और थी कि इनमे से अधिकांश बेईमानो को जनता ने बाहर का रास्ता दिखा दिया| मगर सरकारी अफसर कुछ क्यूँ नहीं कर सके?

सवाल- वसूली क्यूँ नहीं हो पा रही?
सवाल सबसे बड़ा यही है कि जनता के टैक्स के पैसे के रूप में खाद्यान और कन्वर्जन कास्ट का लगभग 8 करोड़ रुपया जिले के अफसर क्यूँ नहीं वसूल पा रहे है| कमी अफसरों के आत्मबल की है या उनके सरकारी अमले की सबसे निचली इकाई ग्राम सचिवो को बचाने की कोई सोची समझी रणनीति है|

सरकारी चाल- तत्काल मतलब कितना समय?
फिलहाल मध्याह भोजन प्राधिकरण लखनऊ के अफसर संतोष कुमार ने भी जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र लिख कर सरकारी कागज चला दिया है कि वे (जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी) तत्काल जिलाधिकारी से मिल कर आवश्यक विधिक कारवाही कराते हुए प्राधिकरण को अवगत कराये ताकि भोजन व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके| सरकारी महकमे में तत्काल क्या होता है इसकी बानगी ले- प्रधान संतोष कुमार ने ये पत्र तब भेजा था जब स्कूल खुले थे| स्कूल बंद हुए भी 10 दिन हो चुके हैं| प्राधिकरण ने ये पत्र 24/5/2011 को फर्रुखाबाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को प्राप्त कराया| मगर पञ्च दिन बाद भी ये मामला जिलाधिकारी तक नहीं पंहुचा|

लाखों की नगदी जली, जेवर पिघले, सिलिंडर फटा

फर्रुखाबाद: जूता व्यापारी साविर हुसैन के गोदाम व घर में लगी आग में लाखों रुपये की नगदी भी जल कर राख हो गयी। आग बुझने के बाद निकले पिघले सोने के जेवर और फटे हुए गैस सिलिंडर।

फतेहगढ़ स्थित साबिर हुसैन के मार्केट व घर में लगी भीषण आग में घर व दुकान में रखे लाखों रुपये की नगदी भी जल कर राख हो गयी। दुकान के गल्ले से रुपया निकालने की कोशिश में उनका बड़ा पुत्र शाहिद झुलस भी गया परंतु सफलता नहीं मिली। आग पर काबू पाने के बाद घर और दुकान से यही जले अधजले नोट देख कर लोग हैरान रह गये। इसी प्रकार घर में बक्सों में रखा सोने चांदी का जेवर भी बुरी तरह पिघल कर ख्रराब हो गया। आग के दौरान घर के किचेन में रखा गैस सिलिंडर कब फट गया किसी को पता ही नहीं चला। बाद में यह बुरी तरह क्षतिग्रस्त सिलिंडर लोगों ने बाहर निकाला। मार्केट में खड़ी मोटर साइकिलों के बस चेसिस ही अवशेष के रूप में देखने को मिले।

भीषण आग के कारण पूरा भवन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। जगह जगल लेंटर व दीवारे तोड़ कर आग बुझायी गयी। इसके अतिरिक्त गर्मी के कारण् मार्केट व आवासी भवन में जगह जगह लेंटर व दीवारे भी बुरी तरह चटक गयी हैं।

साबिर अली के पुत्र साजिद उर्फ लाली ने बताया कि आग में पहने हुए कपड़ों के अलावा अब कुछ नहीं बचा। दुकान की तिजोरी में रखे 6  लाख रुपये जलकर खाक हो गए। घर में रखे 10 लाख रुपये से अधिक कीमत का सामान, जेवरात, दुकानों में भरे लाखों रुपये के जूते जलकर खाक हो गए। लाली ने बताया कि मकान पुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। इससे कुल मिलाकर करीब डेढ़ करोड़ का नुकसान हो गया है।

अग्निशमन अधिकारी आरके बाजपेई ने बताया कि आग से 5 लाख रुपये का नुकसान का अनुमान है। परिजनों से बात करने पर सही आकलन हो सकेगा। आग को काबू करने में करीब 40 हजार लीटर से अधिक पानी खर्च हुआ। अभी मामले की जांच की जा रही है।

फरुखाबाद विकास मंच सामाजिक संगठन नहीं, राजनैतिक दुकान

फर्रुखाबाद: जनपद में सामाजिक संगठन बनाकर राजनीति करने का इतिहास कोई नया नहीं है| किसान यूनियन से नेतागिरी चमकाकर अजय अनमोल कांग्रेसी हो गए| अब नरेश अग्रवाल से राजनीति के दाव पेच सीख उनके शागिर्द मोहन अग्रवाल पर भी यही भूत सवार हो गया है| फर्रुखाबाद विकास मंच सामाजिक संगठन बनाकर मोहन विधान सभा के सपने बुनने लगे है| ये आरोप उनके ही सहयोगी और संगठन के पदाधिकारी युवा जिलाध्यक्ष बिट्टू परमार ने लगाते हुए फर्रुखाबाद विकास मंच से नमस्ते कर ली है|

बिट्टू परमार असामाजिक तत्व-
दूसरी तरफ बिट्टू परमार को मोहन अग्रवाल ने अपने मंच से बाहर का रास्ता दिखा दिया है| मोहन ने कल तक साथ में गलबहिया डाल कर घूमने वाले बिट्टू परमार पर अपराधिक छवि व् समाज विरोधी तत्व होने का आरोप लगाया है| मोहन ने एक प्रेस नोट जारी कर अपने मच से सभी अपराधिक तत्वों को बाहर करने का निर्णय लिया है|

अखबारों में विज्ञापन छपवाने के लिए बनाया दबाब-
आनंद विक्रम सिंह उर्फ़ बिट्टू परमार ने एक प्रेस नोट जारी कर कमालगंज की पूरी कार्यकारिणी के साथ विकास मंच छोड़ने का दावा किया है| बिट्टू ने मोहन पर सामाजिक संगठन बनाकर राजनैतिक इस्तेमाल करने और मोहन के पक्ष में अखबारों में विज्ञापन छपवाने के लिए पैसा देने का दबाब बनाने का भी आरोप लगाया है|

फ़िलहाल जहाँ फर्रुखाबाद विकास मंच के गठन के एक साल पूरे करने के बाद भी विकास मंच के खाते में बिना परिणाम वाले सामाजिक समस्याओ के रिकॉर्ड तोड़ ज्ञापन, धरना प्रदर्शन दर्ज हुए वहीँ एक साल पूरा होते होते पदाधिकारियो के इस्तीफे और बर्खास्तगी भी चर्चा में रही|

आग बुझाने आयी फायर ब्रिगेड की गाड़ी में चुल्लू भर पानी तक न था

फर्रुखाबाद: पड़ोसियों के द्वारा जूता गोदाम में लगी आग की स  सूचना दिये जाने के लगभग बीस मिनट बाद फायरब्रिगेड का जो वाहन दुर्घटना स्थल पर पहुंचा उसके टैंक में चुल्लू भर पानी तक न था। आग बुझाने पहुंचे दमकल कर्मियों ने पहुंचते ही पानी की व्यवस्था के बारे में पूछा तो लागों के होश उड़ गये।

जनपद की अटठारह लाख की आबादी को आग से सुरक्षा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी ओढ़े अग्निशमन विभाग के कारिंदे कितने जिम्मेदार हैं इसका अंदाज उस वक्त लगा जब फतेहगढ़ के जूता व्यापारी के गोदाम में लगी भीषण् आग को बुझाने के लिये पहुंचे दमकल वाहन से उतरे जवानों ने सबसे पहले यह पूछा कि पानी की व्यवस्था कहां से हो सकती है। भीषण आग से जूझ रहे नागरिकों के चेहरे पर दूर से टन_टन अलार्म बजाते वाहन को आते देख् जो राहत के भाव जागे थे वह भृकुटियों में तबदील होने लगे। परंतु मौका इतना नाजुक था और इतनी बड़ी आफत सामने ख्ड़ी थी कि लोगों ने सब्र से काम लेना ही मुनासिब समझा। जैसे तैसे दमकल कर्मियों ने पास से गुजर रहे नाले से पानी खेंच कर काम शुरू किया। स्थानीय लोगों ने फतेहगढ़ में ही रहने वाले नगर पालिका के जलकल अवर अभियंता फरहत खां को फोन कर पानी के टैंकर भेजने का अनुरोध किया, इसी प्रकार छावनी परिषद के टैंकर भी लोगों ने व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर मंगवाये। विद्युत विभाग के अधिकारियों से परिस्थितियों को बयान करते हुए मानवीय आधार पर विद्युत आपूर्ति तत्काल चालू करवाई, जिससे आस पास घरों में लगे सबमरसिबिल पम्प चला कर पानी निकाला जा सके। आग की भीषण्ता और दमकल कर्मियों की असहाय सी स्थिति को देख्कर मौके पर पहुंचे अपर जिलाधिकारी सुशील चंद्र श्रीवास्तव और एसडीएम सदर अनिल ढींगरा ने जिलाधिकारी के माध्यम से जनपद कन्नौज व मैनपूरी के अतिरिक्त स्थानीय सैन्य छावनी से सहयोग की अपील करवाई।

सबसे पहली और कारगर कुमक सेना के एएससी व सिख्लाई की दमकलों की शक्ल में पहुंची। एएससी का ५००० लीटर क्षमता का टैंकर और सिखलाई की अत्याधुनिक दमकल ने पहुंचते ही आग से सीधी लड़ाई शुरू कर दी। इसी बीच विद्युत आपूर्ति भी शुरू हो गयी। जामा मस्जिद और  दरगाह सत्तारिया सहित आसपास के आधा दर्जन सबमरसिबिल पम्प चालू हो गये। आग इतनी भीषण् थी कि किसी प्रकार बुझने का नाम नहीं ले रही थी। सबमरसिबिल पम्पों से आने वाला पानी दमकलों की जरूरत के सामने बौना पड़ रहा था। इसी बीच कायमगंज व कन्नौज से भी एक_एक फायर ब्रिगेड वाहन आ गया। सेना और पुलिस के जवानों ने विशाल काय भवन की दीवारे कई स्थानों से काट कर अंदर पानी छोड़ा। आग पर जब कई मोर्चों से एक साथ हमला हुआ तब कही लगभग छह घंटे बाद उस पर काबू पाया जा सका। सर्वाधिक बहादुरी, जीवट और कार्यकुशलता का परिचय सेना के जवानों ने दिखाया। सैन्य अधिकारियों ने भी बीच बीच में मौके का जायजा लेकर जवानों की हौसला अफजाई की।

छह घंटे की जंग के बाद फौज ने पाया भीषण आग पर काबू

करोड़ों की संपत्ति राख,

फर्रुखाबाद: जनपद मुख्यालय फतेहगढ़ में फायर स्टेशन से बमुश्किल ५०० मीटर की दूरी पर कानपुर मुख्य मार्ग पर एक जूता व्यवसायी के घर व गोदाम में शार्ट सर्किट से लगी भीषण आग के कहर पर लगभग छह घंटे की जद्दोजेहद के बाद काबू  पाया जा सका। गोदाम व घर में रखा सामान, जेवर एवं नगदी समेत करोड़ों रुपये की संपत्ति जल कर राख हो गयी। मामूली शार्ट सर्किट से निकली चिंगारी ने इतनी तेजी से विकराल रूप धारण किया कि दिन का समय होने के बावजूद धरवालों व सामने खड़े पड़ोसियों तक को संभलने का मौका नहीं मिला। आग इतनी विकराल थी कि पड़ोसी जनपद कन्नौज के अतिरिक्त सेना की दमकल भी बुलानी पड़ी।

फतेहगढ़ कोतवाली से चंद कदम की दूरी पर स्थित जामा मस्जिद के ठीक सामने स्थित साबिर हुसैन का जूते का शोरूम है। उनके यहां रूपानी के अतिरिक्त कई अन्य कंपनियों का भी जूते चप्पल का थोक व फुटकर दोनों का कारोबार है। इसी शोरूम से सटी हुई दुकानों में गोदाम व इसी के पीछे उनका आवास है। कारोबार उनके दोनो पुत्र शाहिद व लाली संभालते हैं। सोमवार प्रात: लगभग छह बजे मस्जिद के पड़ोस की चाय की दुकान पर रोज की तरह लोगों की भीड़ थी। कुछ लोगों ने सामने गोदाम की एक दुकान से धुआं निकलते देखा। उनमें से एक ने जल्दी से सामने ही स्थित साबिर हुसैन के घर पर आवाज देकर इसकी सूचना दी। साबिर हुसैन कहीं बाहर गये हुए थे। उनके बड़े लड़के शाहिद ने बाहर निकल कर देखा और आवाज देकर अपने गूंगे नौकर को गोदाम की चाबी लाकर गोदाम खोलने को कहा। गूंगे ने ताले के पास शटर के नीचे से लपकती लपटों को देखा तो वह पानी लाने के लिये भागा। पानी लाने के दौरान उससे गोदाम की चाबी कहीं गिर गयी। जितनी देर में चाबी ढूंडी जाती उतने समय में तो आग के कारण  पूरे परिसर में धुंआं व रबर जलने की दुर्गंध ने पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। घर के अंदर धुआं भरने लगा तो अंदर औरतों व बच्चों ने चीख पुकार और रोना पीटना शुरू कर दिया। घबराये शाहिद व लाली ने परिजनों को किसी प्रकार पीछे के एक रास्ते से बाहर निकाल कर सामने ही स्थित अपने दूसरे घर में पहुंचाय। लौट के आने तक आग ने पूरी तरह से अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया था। शाहिद ने शोरूम का दरवाजा खोलकर गल्ले में पड़े रुपये निकालने का प्रयास किया तो आग के एक जोरदार लूके ने उनको बुरी तरह पीछे घकेल दिया। इस कोशिश में उनका चेहरा भी झुलस गया। इसके बाद उन्होने कुछ भी बचा पाने की लालच को छोड़ दिया, और बाहर खड़े बेवस पड़ोसियों की भीड़ मे हो गये।

आग पर काबू पाने के लिये पड़ोसी जनपद कन्नौज की फायर ब्रिगेड के अतिरिक्त सेना की दमकलों को भी बुलाना पड़ा। लगभग छह घंटों की मशक्कत के बाद भीषण आग पर काबू पाया जा सका।

पत्रकारिता दिवस- मीडिया के राजनीतिकरण पर एसपी चिंतित

फर्रुखाबाद: पुलिस अधीक्षक ओ पी सागर ने आज हिंदी पत्रकारिता दिवस के मौके पर राष्ट्रीय जर्नलिस्ट एसोसिएशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में वकौल विशिष्ठ अतिथि बोलते हुए कहा की मीडिया का राजनीतिकरण हो रहा है, यह बहुत ही चिंतनीय है। उन्होंने कहा कि लोगों में मीडिया को लेकर यह चर्चा होती है कि कौन सा अखबार किस पार्टी का समर्थक है| मुख्य अतिथि न्यायिक मजिस्ट्रेट नीरज गर्ग ने सभी पत्रकारों को हिंदी पत्रकारिता दिवस की बधाई देते हुए कहा कि अखबारों में अब पहले जैसी बात नहीं रही अब ख़बरें कम और विज्ञापन अधिक छपते हैं जिससे अखबारों कि महत्ता निरंतर घट रही है|

पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पत्रकारों को चाहिए कि ख़बरों में आंकड़ों का हेर फेर न करें और उन्हें तोड़ मरोड़ कर न डालें| उन्होंने कहा कि प्रायः यह देखने में आता है कि अखबारों में घटनाओं से सम्बंधित आंकड़े आपस में मेल नहीं खाते जिससे अखबारों की विश्वसनियता पर प्रश्न चिन्ह लगता है और ऐसा ही अन्य ख़बरों के साथ भी होता है कि उन्हें अक्सर तोड़ मरोड़ कर लिखा जाता है जिससे अखबारों पर राजनैतिक छाप लगती है जो पत्रकारिता के लिए चिंता का विषय है|

हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए JNI के प्रमुख पंकज दीक्षित ने कहा कि आजादी की लड़ाई के समय देश को आजाद करवाने के लिए जन जाग्रति करना पत्रकारिता का एक मकसद था और आज के समय में भी भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए मकसद परक पत्रकारिता कि आवश्यकता है| उन्होंने कहा कि सिर्फ मकसद बदल गए हैं काम नहीं बदला है, हम तब आजादी के लिए लड़ते थे और अब भ्रष्टाचार के विरुद्ध जंग करनी है|

उन्होंने कहा कि पत्रकारों को चाहिए कि वह किसी एक विषय को चुने और उसके लिए समर्पित होकर काम करे| आज के दिन हम लोग यदि इस प्रकार का संकल्प लेकर काम को अंजाम दे तो कोई वजह नहीं कि हम अपने मकसद में कामयाब न हों| उन्होंने कहा कि देश में किसी भी स्तर पर व्यवस्था में कोई खामी नजर आये या भ्रष्टाचार कि समस्या हो हम तब तक उसे उठाते रहें जब तक वह जड़ से पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाए|

पत्रकारिता दिवस के मौके पर स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों को सम्मानित किया गया तथा “आज का संत” साप्ताहिक अखबार के रजत जयंती विशेषांक का विमोचन मुख्य अतिथि न्यायिक मजिस्ट्रेट नीरज गर्ग व एसपी ओ पी सागर द्वारा किया गया|

इस अवसर पर सतमोहन पाण्डेय, मधुकर पाण्डेय, इन्दू अवस्थी, सब्जी जगत के ओम प्रकाश तथा एसोसिएशन के महामंत्री आलोक सिंह आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये| राष्ट्रीय जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंदभान शाक्य ने सभी आगंतुक पत्रकारों का धन्यवाद ज्ञापित किया|

गरीब मरीजों की सहायता के लिए है राज्य आरोग्य निधि: डीएम

फर्रुखाबाद: मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा कोष से राज्य आरोग्य निधि का गठन किया गया है जिसका उद्देश्य गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले गंभीर रोगों से पीड़ित व्यक्तियों को विशिष्ट चिकित्सा सुबिधायें मुहैया कराना है इसकी जानकरी जिलाधिकारी रिग्जियान सेम्फेल ने पत्रकारों को दीं|

जिलाधिकारी ने बताया कि ग्रामीण अंचलों के रोगियों का प्राथमिक उपचार पीएचसी एवं सीएचसी चकित्सा केन्द्रों पर किया जाएगा| उपचार के समय आवश्यकतानुसार सयुंक्त चिकित्सालयों में उपचार के लिए भेजा जाएगा| यदि इलाज के समय यह स्पष्ट होता है कि उन चिकित्सालयों में रोगी के उपचार हेतु आवश्यक चिकित्सा सुबिधायें उपलब्ध नहीं है तो रोगी राज्य आरोग्य निधि से आर्थिक सहायता प्राप्त करने हेतु पात्र होगा| इसके माध्यम से उसका उपचार प्रदेश के राजकीय मेडिकल कालेजों, विश्व विद्यालयों तथा प्राधिकृत संस्थानों से सम्बद्ध चिकित्सालयों में किया जाएगा|

डीएम ने बताया कि राज्य आरोग्य निधि से स्वास्थ्य सुबिधा प्राप्त करने वाले रोगी को निवास प्रामन पत्र अथवा मतदाता पहचान पत्र के साथ गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने संबंधी प्रमाण पत्र देना होगा| यदि किसी रोगी के लिए इलाज की अधिक आवश्यकता है और आवश्यक प्रमाण पत्र न होने की दशा में विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा जिलाधिकारी को अभिलम्ब आवेदन भेजना होगा| सभी औपचारिकताओं को पूर्ण कराकर आवेदन आयुक्त कानपुर मंडल को भेजा जायेगा|

जिलाधिकारी ने बताया कि ३५ हजार रुपये तक के मामले मंडल आयुक्त द्वारा संबधित चिकित्सा महा विद्यालय, विश्व विद्यालय तथा प्राधिकृत चिकित्सा संस्थान से सम्बद्ध चिकित्सालय के मुख्य चिकित्साधीक्षक को उपचार हेतु भेजा जाएगा| ३३ हजार रुपये से अधिक के मामले शासन को भेजे जायेंगें|

रिटायर्ड इंस्पेक्टर नरसिंह पाल ने अमृतपुर से टिकट की मांगी

फर्रुखाबाद: आगामी विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों का चयन करने यहां आये प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पर्यवेक्षक खालिद गौरी के सामने रिटायर्ड पुलिस इंस्पेक्टर नरसिंह पाल सिंह ने भी अमृतपुर से टिकट की मांग की। शहर काग्रेस कमेटी की ओर से सदर विधानसभा सीट से लुईस खुर्शीद को प्रत्याशी बनाने की मांग की गई। वहीं पूर्व जिलाध्यक्ष राजेंद्रनाथ कटियार, जेपी सिंह समेत 4 दर्जन से अधिक संभावित प्रत्याशियों ने पर्यवेक्षक को आवेदनपत्र सौंपे।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पर्यवेक्षक व पूर्व विधायक खालिद गौरी रविवार को यहां आगामी विधान सभा चुनाव के लिये प्रत्याशियों के पैनल का चयन करने आये थे। पर्यवेक्षक ने चुनाव समिति के सदस्यों के साथ बैठक कर विचार विमर्श किया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष आफताब हुसैन भी पूरे समय पर्यवेक्षक के साथ मौजूद रहे। नगर के एक होटल में मीटिंग के दौरान उनको शहर कांग्रेस कमेटी की ओर से पत्र दिया गया जिसमें फर्रुखाबाद सदर सीट से लुईस खुर्शीद को प्रत्याशी बनाने की मांग की गयी। पूर्व जिलाध्यक्ष राजेंद्रनाथ कटियार ने भी सदर विधानसभा क्षेत्र से टिकट मांगा। भोजपुर से रामसेवक यादव, सुनील सिंह, जेपी सिंह, प्रदीप राठौर आदि ने प्रत्यावेदन दिया। अनिल मिश्र का अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र सीट से प्रत्यावेदन उनके पुत्र ने सौंपा। रिटायर्ड पुलिस इंस्पेक्टर नरसिंह पाल सिंह, मृत्युंजय शर्मा आदि ने भी अमृतपुर से टिकट की मांग की। सदर विधानसभा क्षेत्र सीट से 7, भोजपुर में 11, कायमगंज में 10 व अमृतपुर में 16 आवेदनपत्र पर्यवेक्षक को मिले हैं।

विदित है कि पूर्व में राष्ट्रीय कमेटी के पर्यवेक्षक व मध्य प्रदेश के विधायक अश्विन जोशी यहां आकर अपना पैनल भेज चुके हैं। पर्यवेक्षक खालिद गौरी ने बताया कि फर्रुखाबाद वीआईपी जनपद है। वे संभावित प्रत्याशियों का पैनल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पास भेजेंगे। प्रत्याशियों का चयन तो यहां के मंत्री सलमान खुर्शीद की सहमति से ही होना तय है। उन्होंने बताया कि चारों विधानसभा सीटों के लिए कुल 44 प्रत्यावेदन अभी तक प्राप्त हुए।

फर्रुखाबाद परिक्रमा: अधीरपुर नरेश का दलबदल और लोहिया के कलियुगी चेले

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गंगा दरबाजे की यज्ञ कथा-

मुंशी हर दिल अजीज गुलाबी कोठी में हुए विशाल यज्ञ में भाग लेकर प्रसाद छककर सीधे मियाँ झान झरोखे के यहाँ पहुँच गए| मियाँ भी आम हॉउस के यज्ञ में शामिल होकर लौटे थे| मुंशी को देखते ही बाग़-बाग़ हो गए- बोले भैया मेरे, अब तो इस जिले और शहर के भाग्य ही खुल गए| लोहिया के कलियुगी चेलों ने सारी गन्दगी हटाने मिटाने का ठेका स्वयं अपने नाम कर लिया है| चुनावी वर्ष है कम से कम इस वर्ष तो कमीशन खोरी नहीं होगी और काम भी ठीक-ठाक होगा|

मुंशी बीच में ही बोल पड़े- होश में आओ मियाँ होश में| यहाँ शहर और जिले की चिंता किसी को नहीं है| अब चरखा दांव केवल सैफई के पहलवान ही नहीं चलाते उनके चेले भी चरखा दांव में पारंगत हो गए हैं| किसी ने जिला पंचायत चुनाव में ऐसा दांव चला कि आँख के अंधे मगर गाँठ के पूरे दोनों अगिया बैतालों की जेबों से करोडो रुपये गुलाबी कोठी की आढत पर आ गए| जमकर बन्दर बाँट हुआ कोई यहाँ गिरा कोई वहां गिरा| साइकिल तो आई हांथी के पाँव के नीचे| ध्वजाधारी हो गए लल्लू जमघटों के साथ पूरी हनक और ठसक के साथ हांथी पर सवार| ऊपर से फतबा यह कि जो कुछ किया वह चरखा दांव के हिंद केसरी की सहमति और स्वीकृति से ही किया| इसे कहते हैं चोरी और ऊपर से सीना जोरी| नतीजतन हांथी निकल गया बहुत आगे| साइकिल सवार शून्य पर आउट हो गया| सूबे भर में शायद ही किसी पार्टी प्रत्याशी की किसी चुनाव में ऐसी दुर्दशा और छीछालेदर हुयी हो| लोहियापुरम से लेकर विक्रमादित्य मार्ग तक अफरा-तफरी मच गयी| जांच-पड़ताल हुयी पर वाह रे चरखा दांव जिन्हें जिन्हें धिक्कारा जाना चाहिए था दण्डित किया जाना चाहिए था उन्हें फर्रुखाबाद केसरी का खिताब तो मिला ही अमृतसर मेल में AC कोच में आरक्षण भी मिल गया| फिर ऐसा लगा कि जो कुछ हुआ चरखा दांव के हिंद केसरी की सहमति और स्वीकृति से ही हुआ| इस मामले में की गयी छानवीन की कहानी मियाँ हम तुम्हे बाद में बतायेंगें जिससे फर्रुखाबाद केसरी को जोर का झटका ज़रा धीरे से लगे| फिलहाल तब तक भला फर्रुखाबाद केसरी के अलावा शहर और जिले में गन्दगी हटाने का ठेका लेने की हिम्मत कौन कर सकता है?

मियाँ झान झोरेखे मुंशी हर दिल अजीज की यह लतरानी सुनकर सन्नाटे में आ गए| बोले क्या बताएं मुंशी हम तो आम हॉउस में घंटों चले यज्ञ में पड़ने वाली आहुतियों और आगे-पीछे हो रही काना फूसियों के चक्कर में पड़ गए| आम हॉउस के इनर सर्किल ने पूरे तीन महीने मिशन 2012 के आरक्षण कोच में कई सवारियों को आरक्षण दिलाने की भरपूर कोशिश की| नतीजतन दाना पानी की जमकर जुगाड़ हुयी परन्तु दाल नहीं गली| जिजी नाचेंगी तो हम भी नाचेंगें की तर्ज पर स्वयं भी हवन यज्ञ का वृहत आयोजन कर डाला| अब ज़रा पड़ने वाली आहुतियों की बानगी देखिये-

गली-गली में शोर है स्वाहा…. हममे कोई चोर है स्वाहा..
हमें छोड़ सब चोर हैं, चोर भी सीना जोर हैं…

हर जोर जुल्म की टक्कर में संघर्ष हमारा नारा है| हिंद केसरी जिंदाबाद. फर्रुखाबाद केसरी मुर्दाबाद स्वाहा.. आदि आदि…………|

मियाँ बोले मजे की बात तो यह रही कि दोनों यज्ञ शालाओं के बीच एक किलोमीटर से भी कम की दूरी में सुरक्षा के कड़े प्रबंध थे| मुखबिर और जासूस दोनों यज्ञ में आने जाने वालों पर कड़ी नजर रखे हुए थे| कुछ दोनों यज्ञों में आहुतियाँ दे आये| तीसरी जगह यज्ञ हो तो भी जाने को तैयार है| मिशन 2012 को कामयाब बनाने के पूरे इंतजाम हैं|

मुंशी बात को गहरे तक समझाने के अंदाज में बोले अच्छा मियाँ यह मामला है गन्दगी कालिख मिटाने का| हमें तो ऐसा कुछ भी नहीं लगता यह तो एक-दूसरे को देख लेने समझ लेने और घाट लगा देने की गला काट प्रतियोगिता है| जनहित में इसका जारी रहना बहुत जरूरी है| मियाँ और मुंशी बहुत देर घर से निकल चौक की पटिया पर बैठे खुसुर फुसुर कर रहे थे| बाद में इंकलाबी अंदाज में दोनों हाँथ उठाकर बोले-

दुश्मनी जम के करो मगर यह ख्याल रहे,
जब कभी फिर से मिले तो शर्मिन्दा न हों|

अधीरपुर नरेश की अधीरता-

अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा तो कल 30 मई पत्रकारिता दिवस को अपने अधीरपुर नरेश पुनः औरों से भिन्न सच्ची अच्छी और राम लला को समर्पित पार्टी के कम से कम अपने जिले में महानायक बन जायेंगें| अधीरता या दल बदल का यह रिकार्ड अपने उस्ताद से 19 है या 21 इसका फैंसला तो फर्रुखाबाद की जनता इन जैसे शूरवीरों को भारी मतदान करके घाट लगाकर देगी| इस बार इसका हमको तो पक्का भरोसा है| इसीलिये हम बार बार कहते हैं जागो वोटर जागो हर चुनाव में निष्पक्ष और निर्भीक होकर भारी मतदान करके जातिवादी अवसरवादी दल बदलुओं चुनाव को महँगा करने वाले शूरमाओं को उनकी औकात बता दो|

पत्नी भक्तों की बढ़ती जमात-

पुत्र मोह ने ऐसा महाभारत किया कि कृष्ण जैसे सारथी भी संहार और महाविनाश को थाम नहीं पाए| राजनीति में भी पुत्र मोह कोई नयी बात नहीं है पर अब तो ज़माना बदल रहा है कारण कुछ भी हो राजनीति की विसात पर द्रोपदियों को दांव पर लगाने वाले धर्मराजों की संख्या इस बार बढ़ने के पूरे आसार बन रहे हैं| जिला पंचायत चुनाव में इस प्रयोग के परिणाम कुछ ख़ास नहीं रहे| परन्तु वह पुरुष ही क्या जो हिम्मत हार जाए विशेष रूप से अपनी पत्नियों के बारे में| मिशन 2012 में यह प्रयोग बड़े पैमाने पर किये जाने के आसार बन रहे हैं| जिले ही नहीं आस-पास के जिलों से भी यही ख़बरें हैं| कांग्रेस सपा, बसपा, भाजपा और जाने क्या-क्या हर ओर से यही ख़बरें हैं| इसीलिये सब फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं| चुनाव को अभी काफी समय शेष है| इस पर लम्भी चर्चा बाद में कभी| तब तक आपको कोई सूचना इस संदर्भ में मिले तो हमें बताईगा|

और पप्पू पास हो गया-

कभी जिले की राजनीति में जिनकी तूती बोलती थी| उनके परिवार को राजनीति ने नस्तनाबूत करने की प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष षड्यंत्रकारी गतिविधियों में वही लोग अपने मौजूदा आकाओं के इशारे पर लगे हैं| जिनका जिले की राजनीति में येनकेन प्रकरेण सत्ता सुख भोगने का लंबा इतिहास है| आजादी से पहले का भी और बाद का भी| ऐसे में बहुत छोटी सी राजनैतिक भूमिका के लिए ही सही पप्पू समीपवर्ती जनपद एटा भेजे गए| तब तो आपको हमको फिलहाल पप्पू की कथित बुराईयों को को भुलाकर यही कहना पडेगा चलो आखिर में पप्पू पास हो गया| यहाँ यह भी याद दिलाना है कि जब मौजूदा आकाओं का राजनीति में कोई अता-पता भी नहीं था| तब पप्पू के पिता श्री ने 2 अक्टूवर 1977 को झंडा सत्याग्रह में कासगंज में अपनी गिरफ्तारी दी है| पूरे पंद्रह दिन जिला एटा कारागाह में रहे थे| जौ कौमें जमातें समाज और परिवार अपने पुरखों को भूल जाते हैं उनका सम्मान नहीं करते वह अपने विनाश की भूमिका स्वयं लिखते हैं|

और अंत में-
परिक्रमा में राजनीति की छौंक कम करने का मेरा विचार
फर्रुखाबाद परिक्रमा पर जिले सहित देश प्रदेश से मिलने वाली प्रतिक्रियाओं ने मुझे अभिभूत कर दिया है| बहुतों ने सराहा है| कुछ ने धिक्कार और जमकर मेरी लानत मलानत की है| मै सबको धन्यबाद ही नहीं कृत्यज्ञता भी ज्ञापित करता हूँ| अपनी गलतियों कमियों को संज्ञान लेकर मै उन्हें सुधारूँगा और दूर करूंगा| परिक्रमा में राजनीति की छौंक कम करने का भी मेरा विचार है| क्योंकि इसमें लगे लोगों की स्वीकार्यता और विश्वसनीयता निरंतर कम हो रही है| परिक्रमा का सामान्य उद्देश्य जनपद की प्रमुख घटनाओं व्यक्तियों के क्रिया कलापों पर निष्पक्ष और निर्भीक टिप्पणी करना है जो हर आम और ख़ास की समझ में आ सके| उत्क्रष्ट कालजय साहित्यिक रचना का सर्जन मेरे इस प्रयास का लक्ष्य नहीं है| मेरे जैसे सामान्य व्यक्ति के लिए ऐसा संभव भी नहीं हैं| फिर भी आपकी सहाशय पूर्ण टिप्पणी मेरा मार्ग दर्शन करती रहेगी| ऐसा मेरा विश्वास है और ऐसा ही मेरा प्रयास रहेगा| पुनः बहुत बहुत धन्यबाद|

(लेखक वरिष्ट पत्रकार के साथ वकील व समाजवादी चिंतक है)

प्रस्तुति-

सतीश दीक्षित (एडवोकेट)
1/432, आवास विकास कालोनी फर्रुखाबाद

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