9 मई को होगा महाराणा प्रताप प्रतिमा का अनावरण, रोडवेज परिसर में जलभराव बन सकता समस्या

0
253

फर्रुखाबाद:(नगर संवाददाता) रोडवेज बस स्टॉप परिसर में स्थापित की जा रही महाराणा प्रताप की प्रतिमा का अनावरण 9 मई 2026 को किया जाएगा। इस कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के प्रभारी मंत्री ठाकुर जयवीर सिंह, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह समेत भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
तैयारियों का जायजा लेने गुरुवार को ठाकुर वीरेंद्र सिंह, पीडब्ल्यूडी के ईएक्सएन श्याम कुमार तिवारी, एआरएम राजेश कुमार सहित अन्य अधिकारी रोडवेज परिसर पहुंचे। निरीक्षण के दौरान कार्यक्रम की रूपरेखा पर चर्चा की गई। बताया गया कि कार्यक्रम में लगभग 1000 लोगों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी, जबकि मंच पर क्षेत्र के वरिष्ठ एवं सम्मानित लोगों को स्थान दिया जाएगा।
एआरएम राजेश कुमार ने बताया कि कार्यक्रम के दिन बसों का आवागमन क्रिश्चियन इंटर कॉलेज की ओर से कराया जाएगा, ताकि यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो। अधिकारियों ने दावा किया कि आयोजन को भव्य और व्यवस्थित बनाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।
हल्की बारिश ने खोली व्यवस्थाओं की पोल
निरीक्षण के दौरान हुई हल्की बूंदाबांदी ने रोडवेज बस स्टॉप की बदहाल स्थिति उजागर कर दी। थोड़ी ही बारिश में पूरा परिसर तालाब में तब्दील हो गया, जिससे यात्रियों, बाइक सवारों और रिक्शा चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले दो वर्षों से हल्की बारिश में भी रोडवेज परिसर जलमग्न हो जाता है। पानी भरने से फिसलकर कई लोग घायल हो चुके हैं, जबकि कीचड़ उछलने को लेकर विवाद की घटनाएं भी सामने आती रही हैं।
ई-रिक्शा अतिक्रमण बना बड़ी समस्या
रोडवेज परिसर में ई-रिक्शाओं का अतिक्रमण भी यात्रियों और बस संचालन के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। आरोप है कि ई-रिक्शा चालक बिना रोक-टोक बस स्टैंड के अंदर तक पहुंच जाते हैं और वहीं सवारियां भरते हैं, जिससे यातायात अव्यवस्थित हो जाता है और विवाद की स्थिति पैदा होती है।
कार्यक्रम से पहले सुधार का दावा
जलभराव की समस्या पर ठाकुर वीरेंद्र सिंह ने कहा कि नगर पालिका अध्यक्ष पति मनोज अग्रवाल से बातचीत हो चुकी है और जल्द ही रोडवेज परिसर को दुरुस्त कराया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि कार्यक्रम से पहले जलनिकासी और सफाई व्यवस्था सुधार दी जाएगी।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वीआईपी कार्यक्रम न होता तो शायद इस समस्या की ओर ध्यान भी न दिया जाता। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन स्थायी समाधान करता है या केवल कार्यक्रम तक सीमित व्यवस्थाएं की

[adrotate banner="3"]
[adrotate banner="2"]