फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं को सर्दी से बचाने के लिए दिए जाने वाले गर्म कपड़े और जूते समय पर उपलब्ध न हो पाने से एक बार फिर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। लगभग 15 दिन तक पड़ने वाली हाड़कंपाऊ ठंड के बाद अब जाकर छात्राओं को गर्म कपड़े और जूते वितरित किए गए हैं। इससे यह जाहिर होता है कि जिम्मेदार अधिकारी छात्राओं की बुनियादी जरूरतों को लेकर कितने संवेदनशील और सजग हैं।
जनपद के कमालगंज, राजेपुर, शमशाबाद, नवाबगंज और कायमगंज ब्लॉकों में संचालित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में दूर-दराज क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की छात्राएं अध्ययनरत हैं। शासन की मंशा है कि इन छात्राओं को निःशुल्क आवास, भोजन, शिक्षा के साथ-साथ मौसम के अनुसार जरूरी वस्तुएं समय से उपलब्ध कराई जाएं, ताकि उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य प्रभावित न हो। लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है।
पिछले कई दिनों से तापमान लगातार गिरने के कारण कड़ाके की ठंड
पड़ रही थी। इस दौरान छात्राएं बिना पर्याप्त गर्म कपड़ों के ठंड सहने को मजबूर रहीं। ठंड के कारण कई छात्राओं की तबीयत भी बिगड़ी, जिसके बाद उन्हें विद्यालय से घर भेजना पड़ा। अभिभावकों ने भी इस स्थिति को लेकर नाराजगी जाहिर की, लेकिन अधिकारियों की ओर से समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
अब जब शीतकालीन अवकाश की तैयारी है। छात्राओं को घर जाना है। तब जाकर गर्म कपड़े और जूते बांटे गए हैं। इस देरी से न केवल प्रशासनिक लापरवाही उजागर हुई है, बल्कि छात्राओं के स्वास्थ्य के साथ किए गए खिलवाड़ पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि सामग्री समय पर उपलब्ध करा दी जाती तो छात्राएं सर्दी से होने वाली बीमारियों से बच सकती थीं और उनकी पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होती।विद्यालयों के जिम्मेदारों का कहना है कि गर्म कपड़ों की मांग समय से भेज दी गई थी, लेकिन आपूर्ति और वितरण में अनावश्यक देरी हुई।
15 दिन की कड़ाके की सर्दी के बाद बांटे गए गर्म कपड़े, कस्तूरबा विद्यालयों की व्यवस्था पर सवाल
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