अंदर की बात- अब भाजपा जनप्रतिनिधि ने सीएमओ के तबादला रुकवाने के लिए संभाली कमान!

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फर्रुखाबाद: एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने अधिकारियो के तबादले और पोस्टिंग से जनप्रतिनिधियो को दूर रहने की हिदायत दी है| शायद फर्रुखाबाद में जनप्रतिनिधि को अपने बड़े नेताओ की प्रतिष्ठा का ख्याल नहीं है तभी तो तबादले के बाद एकतरफा कार्यमुक्त हो जाने पर भी चार्ज न छोड़ने वाले सीएमओ को अभी भी उम्मीद है कि “यहाँ के लोग” अगर चाहेंगे तो वे फर्रुखाबाद में रुके रहेंगे| वैसे भी 31 मार्च अभी अभी निपटा है, गठरी में माल की कमी भी नहीं है|

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विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि स्वास्थ्य सचिव द्वारा एकतरफा कार्यमुक्त किये जाने के बाद चार्ज न छोड़ने वाले 5 साल से जिले में डटे मुख्य चिकित्सा अधिकारी राकेश कुमार ने भाजपा के एक जनप्रतिनिधि से तबादला रुकवाने के लिए वाणिज्यक जुगाड़ लगाई है| और इसीलिए चुनाव से पहले तबादले के आदेश के क्रम में स्वास्थ्य सचिव द्वारा एकतरफा कार्यमुक्त कर दिए जाने के बाद भी पिछले 36 घंटे से मुख्य चिकित्सा अधिकारी राकेश कुमार न केवल चार्ज पर बने हुए है बल्कि बैकडेट में फ़ाइल भी निपटा रहे है| अपुष्ट खबर है कि साहब की मुलाकात भी अकेले में जनप्रतिनिधि से हो चुकी है|

मुख्य चिकित्सा अधिकारी राकेश कुमार जुलाई 2012 में फर्रुखाबाद में तबादले पर आये थे| इनके कार्यकाल में जनपद में कुकुरमुत्ते की तरह गली गली गैर मानको के नर्सिंग होम न केवल खुले बल्कि खूब चले भी| पूरे मानको पर तो जिले में एक भी नर्सिंग होम नहीं चल रहा है| अप्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ और भवन तो गैर मानको के है ही, दर्जन भर नर्सिंग होम में तो डॉक्टर भी नहीं है| केवल बोर्ड भर है|

जाहिर है गैर मानको और नियमो को ताक पर रख नर्सिंग होम बिना किसी लोभ या प्रलोभन के तो नहीं चले होंगे| सपा सरकार में जो हुआ सो हुआ मगर भाजपा सरकार आते ही मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने अफसरों से कह दिया है कि प्रदेश में कानून का पालन होगा|अवैध बूचड़खानों पर नकेल इसी का नतीजा रहा| अब अगर बदहाल और भ्रष्ट स्वास्थ्य व्यवस्था सपा सरकार के जैसी ही चलने देना चाहते है यहाँ के जनप्रतिनिधि तो शायद उन्हें सीएमओ के तबादले और कार्यमुक्त के क्रम में यहाँ से तत्काल हटने के लिए कहना चाहिए था| मगर फर्रुखाबाद में तो उल्टा ही हो रहा है|

सर्वविदित है कि जिलो में प्रमुख अफसरों की तैनाती में पैसो के लेन देन की बाते सामने आती रही है| कहीं ये लालच तो जन प्रतिनिधियों को सीएमओ की मदद करने को मजबूर नहीं कर रहा है ये सवाल जनता के जनमानस पर आना लाजमी है| सीएमओ राकेश कुमार ने खुद जेएनआई को फोन पर बताया कि यहाँ के लोग चाहेंगे तो रुके रहेंगे| अब “यहाँ के लोग’ शब्द यहाँ किसी खास के लिए ही हो सकता है| किसी आम आदमी के बस का तो सीएमओ का तबादला करवाना या रुकवाना है नहीं| यहाँ के लोग में सत्ताधारी जनप्रतिनिधि ही इतने ताकतवर होते है जो ये काम करते रहे है|

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