शांति धारा के साथ दस लक्षण महापर्व का इतिश्री

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फर्रुखाबाद:(नगर संवाददाता) शहर के मोहल्ला जोगराज़ स्थित श्री 1008 भगवान महावीर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर में दस लक्षण महापर्व के समापन रविवार को विधि-विधान के साथ हो गया| पर्व के दौरान सभी ने खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से अपने आप को समर्पित किया।
दिगंबर जैन मंदिर जोगराज में दस लक्षण महापर्व के समापन पर भगवान शांतिनाथ का अभिषेक व शांति धारा व पूजन किया गया। रविवार को भगवान महावीर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर में अष्ट द्रव्यों से नित नियम पूजन अभिषेक व शांतिधारा की गयी। पर्व के दौरान बताया गया कि यह पर्व पर्युषण पर्व परि और उषण से मिलकर बना है। परि का अर्थ है चारों ओर और उषण का मतलब है कि अर्थ और धर्म की पूजा की जाए। वर्ष में यह पर्व एक बार ही मनाया जाता है। पर्युषण पर्व तैयारी में पहले तीर्थंकरों की पूजा कर उनका स्मरण किया जाता है। व्रत रखकर समाज के लोग खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से अपने आप को समर्पित करते हैं। निर्जला व्रत करके तीर्थंकरों की आराधना पूजा होती है। संवत्सरी, केशलोचन, प्रतिक्रमण, तपश्चर्या, आलोचना और क्षमा याचना, इन पांच कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। यह पर्व महावीर स्वामी के सिद्धांत पर आधारित है। यह हमें सत्य के मार्ग पर चलना सिखाता है। धर्म के मार्ग पर चलने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन तपस्या करने अत्यधिक महत्वपूर्ण माना गया है। इसलिए जैन धर्म में पर्युषण पर्व खास होता है। कन्हैया लाल जैन ने बताया क्षमा वाणी का पर्व सौहार्द सौजन्यता व सद्भाव का पर्व है शांतिधारा विश्व के अमोध मंत्र है। विश्व में शांति के लिए शांति धारा की जाती है। अभिषेक जैन,नीरज जैन, रोमिल जैन, कमल कुमार जैन, विमल शरण जैन, ममता जैन, नंदिता जैन, नीलम जैन, शिवानी जैन,पूनम जैन, मणी जैन, आरती जैन आदि रहे।

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