पूर्ण शांती परमात्मा से मिलकर ही होती है

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फर्रुखाबाद: राधास्वामी शक्ति मंदिर में चल रहे भगवत कार्यक्रम में प्रवचन करते हुए डा0 सुरेन्द्र नाथ द्विवेदी ने कहा कि जीवात्मा संसार में आकर चाहे जो भी कर्म करे, कर्म कभी भी उसे शांती नहीं दे सकता। उसे पूर्ण शांती परमात्मा से मिलकर ही होती है।

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आचार्य ने भगवत प्रेमियों को श्रीकृष्ण की कथा का श्रवण कराते हुए कहा कि गोपियों का भगवान से स्वाभाविक और सहज प्रेम है। जीवात्मा अंश है और परमात्मा अंशी। अंश अंशी की ओर ही भागता है, जैसे नदियों का जल अंश है और समुद्र उसका अंशी, इसलिए नदियां स्वाभाविक रूप से समुद्र की ओर दौड़तीं हैं। जब तक नदियां समुद्र में नहीं मिल जातीं तब तक उन्हें चैन नहीं मिलता। इसी प्रकार जीवात्मा संसार में चाहे जो भी कर्म करे, कर्म कभी भी उसे शांती नहीं दे सकता। जीवात्मा को पूर्ण शांती परमात्मा से मिलकर ही होती है। जीव चेतना है तो उसका सच्चा सम्बंधी कोई समग्र चेतना ही हो सकता है। चेतन का सम्बंधी कभी जड़ नहीं हो सकता। संसार में मनुष्य ने जड़ से अपना सम्बंध बना रखा हैं सभी विषय जड़ हैं, सो जड़ और चेतन का सम्बंध भ्रम या अज्ञान के कारण है। उन्होंने कहा कि यही मनुष्य के दुख का कारण है, मनुष्य जब भी दुखी होता है उस समय उसके मन में संसार का चिंतन होता है। संसार को छोड़ना नहीं है, उसे हम छोड़ भी नहीं सकते, सिर्फ संसार का चिंतन छोड़ना है। मन से संसार निकल जाने से शांती प्राप्त होती है और मन में भगवान का चिंतन होने से मन आनंदित हो जाता है। वियोगकाल में भी गोपियों का श्रीकृष्ण से वहरंग वियोग है, पर उसका मन से नित्त सहयोग है। इस तरह आचार्य ने श्रोताओं को भगवान व जीवात्मा के आपसी रिश्ते के बारे में विस्तार से बताया।

इस दौरान मंदिर में बांके बिहारी की झांकी निकाली गयी। कार्यक्रम में रामचन्द्र जालान, कृष्ण गोपाल जालान, रामकृष्ण सिगतिया, रामधारी अग्रवाल, प्रवीन सफ्फड़, गौरव अग्रवाल, गिरधर अग्रवाल, अश्वनी गुप्ता आदि लोग मौजूद रहे।

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