परम्परागत कृषि छोड़ कर प्राकृतिक खेती करें किसान

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फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) ऑफीसर्स क्लब फतेहगढ़ में सोमबार को पीएम किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया| जिसमे किसानों को परम्परागत कृषि छोड़ कर प्राकृतिक खेती करनें की सलाह दी गयी|
सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में पंहुचे सांसद मुकेश राजपूत नें जिलाधिकारी संजय कुमार सिंह के साथ फीता काटकर कार्यक्रम का श्रीगणेश किया| इस दौरान प्रधानमंत्री द्वारा पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत बारहवीं किस्त का हस्तान्तरण का लाइव प्रसारण एलईडी० के माध्यम से जनपद के सातों विकास खण्डों से आये लगभग 1000 किसानों को दिखाया गया| जिसमें भारत के 8 करोड़ से अधिक कृषकों को 16000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को कृषकों के खातों में भेजा गया| 600 किसान समृद्धी केन्द्रो का उदघाटन किया। सांसद नें जनपद के कृषक को तिलहन व दलहनी फसलो का क्षेत्रफल बढ़ाने की सलाह दी तथा परम्परागत कृषि पद्धति को छोड़ करके प्राकृतिक खेती करने की सलाह दी। प्राकृतिक खेती करने से पर्यावरण की शुद्धता के साथ-साथ हमारा स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा।
उपकृषि निदेशक अनिल कुमार यादव ने बताया की जनपद में 189633 कृषको का डाटा सत्यापन के उपरान्त भुगतान हेतु शासन को भेजा गया है| जो कुल कृषको का 87.6 प्रतिशत के साथ प्रदेश में दसवे स्थान पर है। इसी प्रकार सरकार की मनसानुसार जनपद में किसान कॉल सेन्टर खोल दिये गये है| जो सातो ब्लॉको एवं एक जनपद स्तर पर प्रातः 8 बजे से ले करके रात्रि 8 बजे तक किसानों की समस्याओं के निस्तारण हेतु कार्य करेंगे। कार्यक्रम में सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन टेक्नोलॉजी (आत्मा) योजनान्तर्गत एवं नेशनल मिशन ऑन एडिविल ऑयल (ऑयल सीड्स) तिलहन मेला रबी सीजन का आयोजन किया गया। इस मेला के अन्तर्गत जनपद से आये हुये किसानों को रबी फसलों की तैयारी से लेकर भण्डारण तक की वैज्ञानिक विधि से जानकारी दी गई| डा0 संजय कुमार कृषक वैज्ञानिक द्वारा ट्राइकोडर्मा और व्यूवेरियावेशियाना के प्रयोग करने की विधि बताई गई। इसी प्रकार डा० अभिमन्यु कृषक वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केन्द्र फर्रुखाबाद द्वारा रबी फसलों में फसल सुरक्षा की दृष्टि से बीच शोधन एवं भूमि शोधन के विधियों के बारे में विस्तार से बताते हुये आलू में काली पपड़ी एवं चेचक बीमारी के प्रबन्धन के बचाव हेतु 3 से 4 वर्ष फसल चक्र के साथ- साथ हरी खाद्य का उपयोग कर तथा तीन प्रतिशत बोरिक एसिड के घोल में लगभग 30 मिनट तक आलू के कन्दों को डुबोएं तथा भूमि शोधन हेतु 4 किग्रा0 ट्राइकोडर्मा तथा एक कुन्तल सड़ी गोबर की खाद के साथ खेत में मिलायें। यू०पी० डास्प के जिला समन्वयक डा० सतेन्द्र सिंह द्वारा जनपद में गंगा के किनारे जैविक खेती की जा रही है, जैविक उत्पादों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। इस कार्यक्रम में जिला कृषि अधिकार बृजेश कुमार, भूमि संरक्षण अधिकारी उपेन्द्र कुमार खरवार, उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी सतीश कुमार, जिला आलू एवं शाक भाजी विकास अधिकारी आरएन वर्मा, वीरेन्द्र सिंह राठौर, दुर्ग कुमार अधिशाषी अभियन्ता सिंचाई, इमरान अंसारी सहायक अभियंता नलकूप, कृषक वैज्ञानिक डॉ० संजय कुमार, डॉ० अभिमन्यु कृषि विज्ञान केन्द्र फर्रुखाबाद आदि रहे|

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