फर्रुखाबाद: समय चक्र फिर वहीँ लौट आया| हर सुबह चौक और उसकी मुख्य सडको पर सुबह सुबह बिकती आलू पापड़ी, ठेले की जलेबी कचौड़ी, चौक पर बिकता मजदूर और सर पर डलिया में रखी अपनी दिन की रोटी के साथ आवाज लगाता 10 साल का गोलू- ठंडाई वाले फालसे…….| सुबह की पौ फटते ही गालिओ मोहल्लो के नुक्कड़ो पर झाड़ू के साथ सफाई कर्मी| सब्जिओ से भरे चौक से पुलिस वाले तो दस का नोट देकर निकलते टेम्पो (थ्री व्हीलर)|
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पिछले कई सालो में फर्रुखाबाद के चौक पर बहुत कुछ नहीं बदला| हाँ कुछ बदलने की कोशिश जरुर हुई| मगर इन दिनों नगर की सुबह में व्यापक सफेदी है| ग्लैमर है, पूछ है और बिना बुलाये मेहमान की तरह कुण्डी खटखटाते नेताओ की टोलियाँ है| सुबह तक देर से उठने वालो के लिए नयी मुसीबत| अभी न मंजन किया न कुल्ला| डोरबेल या दरवाजे के खटके के साथ जांघिया पहने राजीव ने दरवाजा खोला कि सामने नेताजी के दर्शन हो गए| मुह से तो न बोल सके मगर आत्मा से आवाज आई- धन्य भाग्य हमारे पांच साल बाद पधारे| नेताजी जबरिया घर में आवाज लगाते घुस चले- चाची कहाँ है| कैसा अपनत्व झलक रहा है| आपका काम नहीं कर पाया बहुत शर्मिंदा हूँ, पर आपने देखा मैंने प्रयास बहुत किया| बहुत मजबूरिया होती है, आप से क्या छुपा| आप तो घर के हैं| लेकिन वादा रहा चुनाव बाद जरुर काम हो जायेगा| ये जुमले नेताजी जेब में डाल कर चले थे| 

अब आवाज आई बेटा कैसे हो? चुनाव कैसा चल रहा है? बात बाद में पहले नब्बे कोण के अंश पर लपक के दोनों पैर में हाथ छुआ कर मतदाता की चरण रज ली, ऊपर उचके और फिर चाचा से मुखातिब हुए| बस बढ़िया है| आपका आशीर्वाद है| सर्व समाज का समर्थन मिल रहा है| चाचा ने भी हौसला आशीर्वाद देकर बढ़ाया| जीत तय है| मनोज का हौसला चौक के पास नुन्हाई में कुछ इस प्रकार दिखा आज| वार्ड के प्रचार की भूमिका की तैयारी नीलू पाण्डेय, सुनील बाजपेयी, मुन्ना पाण्डेय कल्लू मिश्रा ने तैयार की थी| नगरपालिका के मुख्य सफाई निरीक्षक कपिल गुप्ता ने विशेष तौर से मनोज के जनसम्पर्क के मोहल्लो में सफाई कराई| इस बात की खबर उन्हें एक दिन पहले ही दे दी जाती है| किसी राजदरबार के विशेष चाटुकारों की तर्ज पर नगरपालिका के कई कर्मचारी अपरोक्ष रूप से चुनाव प्रचार और सहयोग में देने में नाले से लेकर चौक तक महती भूमिका जो निभा रहे है|


उधर असल प्रत्याशी वत्सला अग्रवाल भी पहले से तय सिन्धी कालोनी, हाता करम खां, अमीन खां में ठेकेदारों की टीम के साथ मुस्तैद दिखाई दी| थकावट छुपाती हुई चेहरे पर मुस्कान भोर की लालिमा बिखेर रही थी| समर्थको ने कुण्डी खटखायी अन्दर से मतदाता निकला, भाभी ने परचा थमाया| वोट माँगा और चाय की पेशकश को समय अभाव के कारण उधार कर आगे बढ़ गयी| अगले गेट पर ठेकेदार जो समर्थक की भूमिका में थे, नारे लगा रहे थे– वत्सला अग्रवाल जिंदाबाद| लिखापढ़ी वाले चुनाव प्रचार का दूसरा दिन कुछ यूं शुरू हुआ मनोज अग्रवाल के खेमे का|



जनसम्पर्क: धन्य भाग्य हमारे, पांच साल बाद नेताजी हमारे घर पधारे…
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