क्या आप डीएम मुथु कुमार स्वामी की कार्यशैली को सही मानते है?

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ये खबर नहीं सवाल है| सवाल फर्रुखाबाद की हर जनता से| जिसका उत्तर कोई भी दे सकता है| बस जबाब देने का हौसला चाहिए| काफी वर्षो के बाद फर्रुखाबाद की जनता को ऐसा जिलाधिकारी मिला है जिसकी आम जनमानस और सरकारी महकमे से लेकर नेताओ व मंत्रियो के कबीलों में भी चर्चा है| चर्चा उनकी कार्यशैली की| वैसे तो डीएम के काम की समीक्षा करने का कानूनी अधिकार सरकार को है मगर आम जनता जिनके लिए डीएम जिलों में नियुक्त किये जाते है उन्हें भी सम्वैधानिक अधिकार सविधान द्वारा प्रद्दत है| कम लोग ही इस विषय को जानते है और चिंतन करते है| 2 माह पहले अचानक एक रोज पूरे जनपद में अपवाह फैली- “मुथु स्वामी का ट्रांसफर हो गया क्या?” देर शाम तक जे एन आई ने पूरे जनपद में 115000 से ज्यादा लोगो को sms से खबर भेज इस अपवाह पर विराम लगाया| अब चुनाव के दौरान भी हलकी फुलकी चर्चा शुरू हुई जो शबाब पर पहुचने वाली है| आखिर डीएम मुथु स्वामी के तबादले की बात कहाँ से शुरू होती है कौन कौन करता है और बात में दम कितना है| हम इस बात पर ही चर्चा करेंगे और पाठको से अनुरोध करेंगे की जमकर अपनी प्रतिक्रिया लिखे|

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१. मुथुकुमार स्वामी ने आम जनता से जुड़ने का जो काम किया क्या वो गलत है?
२- क्या जनता के बीच मिल रही शिकायतों और सरकारी कामो की जिम्मेदारियो को ईमानदारी से निभाने के लिए वे अचानक बिना बताये किसी जगह पहुच जाँच पड़ताल कर लेते है, गलत है?
३- “फैसला ऑन स्पाट” क्या गलत है? क्या डीएम पहले जाँच कराये फिर सजा दे? हजारो जांचे फाइलों में दफ़न है कितनो पर विभागों ने कार्यवाही की? कौन सुधर गया? जाँच होती रहे है और आम जनता पिसती रहे?
४- डीएम का शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास विभाग से सम्बन्धित कामो पर विशेष ध्यान है, क्या गलत है?

क्या हर छोटे बड़े नेता और मंत्री की सही और गलत बात में डीएम साहब हाँ में सर हिलाए? जैसा कि अब तक जानकारी में आया है डीएम मुथु स्वामी ने ऐसा नहीं किया| गलत है तो फिर कोई बात नहीं| सत्ता धारी कई नेताओ को पच नहीं रहे ऐसी खबरे है| उनके अधीनस्थ अधिकांश सरकारी कर्मचारियो और अधिकारिओ डीएम साहब कबाब (भ्रष्टाचार) में हड्डी लग रहे है| मगर 18 लाख जनता को कितना ठीक लगे इस पर रायशुमारी की जरुरत है| 67 साल की आजादी के बाद देश में बहुत कुछ बदला है| जरुरी नहीं कि जिन्हें चुन कर भेज दिया वो जो फैसले करे वो सौ फ़ीसदी ठीक हो| वैसे एक बात तो मानने लायक है कि वर्तमान मुख्यमंत्री जनता की बात सुनते है, बशर्ते उन तक बात पहुचे| मुख्यमंत्री अखिलेश ने जनता की आवाज पर ही अपने दो फैसले लागू होने से पहले ही बदले- एक विधायको को फ़ोकट की 20 लाख की कार देना दूसरा माल बाजार को 7 बजे बंद करने का फरमान| ये दोनों फैसले जनता की आवाज पर ही बदले अखिलेश यादव ने|

मीडिया जनता की आवाज है| अखिलेश यादव के दोनों फैसलों पर मीडिया ने तीखी प्रतिक्रिया जनता के बीच से आई हुई छपी और अखिलेश यादव खुद अगले दिन बोले- आप न छापते तो 20 लाख की कार वापस न लेते| ये बदलता हुआ लोकतंत्र है| स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी है| इसलिए अब किसी नेता की चुगलखोरी पर अगर डीएम मुथु स्वामी का तबादला हो जाए तो उम्मीद है कि फर्रुखाबाद की जनता चाहे तो उन्हें वापस यहीं बुला सकती है| बात आसमान में सुराख करने जैसी जरुर है मगर पत्थर तो तबियत से उछालने का प्रयास किया जाए| बहुत वर्षो पहले इसी फर्रुखाबाद में एक सीओ सिटी का तबादला एक नेता ने कराया था तब जनता सडको पर उतरी थी और सरकार को फैसला वापस लेना पड़ा था| अगर मुथु कुमार स्वामी फर्रुखाबाद की आम आवाम के हित लिए मोर्चा खोले है तो जनता को भी उनके बने रहने के लिए मोर्चा खोलने में क्या दिक्कत है? क्या ऐसा करने के लिए आप तैयार है?

तो आप अपनी प्रतिक्रिया लिखे कि क्यूँ डीएम मुथु स्वामी को फर्रुखाबाद में लम्बे समय तक रहना चाहिए और क्यूँ नहीं रहना चाहिए? बोलने सोचने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हर भारतीय नागरिक को है| सो सोचे, बोले और लिखे| फैसला मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को करना है| फर्रुखाबाद की अवाम चाहेगी तो आवाज अखिलेश तक भी पहुच सकती है| चलते चलते इतना बता दे कि चर्चा एक बार फिर उनके तबादले की शुरू हो चुकी है| कुछ सफ़ेद वर्दी वाले इस अभियान में लग गए है| अखिलेश डिम्पल के साथ 11 जुलाई को आस्ट्रेलिया से वापस लौटेंगे| और लखनऊ में डेरा पड़ चुका है| बाकी पाठक सब समझदार है|

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