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दलित परिवार के 3 सदस्यों की हत्या

अमरोहा: उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में एक दलित परिवार के तीन सदस्यों की गला रेतकर हत्या कर दी गई। जिले के धनौरा इलाके में मुखराम (55 वर्ष), उसकी पत्री ज्ञानवती (50 वर्ष) और छोटे बेटे राहुल (22 वर्ष) की सोमवार देर रात घर में ही गला रेतकर हत्या कर दी गई।

धनौरा थाना प्रभारी संजय तिवारी ने मंगलवार को संवाददाताओं को बताया कि हत्या धारदार हथियार से की गई। मृतकों के गले और पेट में गहरे जख्मों के निशान मिले हैं। तिवारी ने कहा कि हत्या के कारणों और हत्यारों का सुराग नहीं लग पाया है। पूरे मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि घटना के पीछे पारिवारिक विवाद भी एक कारण हो सकता है।

पुलिस को आशंका है कि घटना के बाद से घर से लापता मुखराम के ब़डे बेटे शिवपाल (26 वर्ष) का इन हत्याओं के पीछे हाथ हो सकता है। उसकी तलाश की जा रही है। उसके मिलने के बाद ही मामला पूरी तरह से साफ होगा। तिवारी के मुताबिक प़डोसियों से पता चला है कि पिछले दिनों संपत्ति के बंटवारे को लेकर शिवपाल ने पूरे परिवार से झग़डा किया था।

पढ़ायें या जनगणना करायें ?: मास्टर साहब

बात शुरू करते हैं परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की। इनके सिर पर जिम्मेदारियों का पहाड़ रख दिया गया है। ऐसी स्थिति में यह विद्यालय में कैसे बच्चों को पढ़ायें। शिक्षकों से दूसरे कार्य कराने से छात्रों की पढ़ाई का लगातार नुकसान हो रहा है।

वैसे भी प्रा. विद्यालयों व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की बेहद कमी है जो शिक्षक है उन पर भी अन्य कार्यो का बोझ लदा है। ऐसी हालत में सरकार का सर्व शिक्षा अभियान कितना सफल होगा। यह सोचने की बात है। भविष्य के नागरिक तैयार करने की जिम्मेदारी जिस शिक्षक समुदाय पर है उसे शिक्षा कार्य से इतर काम भी करने पड़ते हैं। वह जनगणना कराता है। स्कूल की मरम्मत कराता है। शिक्षक स्कूल खाते तैयार करता है, जोनल दफ्तरों में क्लर्की करता है। मिड डे मील बंटबाता है।

इतना ही नहीं मतदाता सूची का पुनरीक्षण, चुनाव डयूटी, पोलियो अभियान में भागीदारी आदि कार्यो में भी शिक्षकों को लगाया जाता है। कभी-कभी कई कार्यो में शिक्षक की अक्षमता उसके निलंबन का कारण भी बनती है। अब बेहद व्यस्त मास्टर साहब के पढ़ाई के दिनों का हिसाब करें तो साल में 52 रविवार और 42 विशेष दिवस अवकाश होते है।

सर्दी गर्मी की छुट्टियों के अलावा शिक्षण से इतर कार्यो में भी पढ़ाई के दिन खर्च होते हैं। विद्यालयों में पढ़ाई की इस हालत के चलते ही अभिभावकों का प्रा.वि. व पूर्व मा. विद्यालयों से विश्वास टूट चुका है। इन विद्यालयों में शिक्षा को ग्रहण लगा है। विद्यालय में बच्चे वजीफा व मिड डे मील के भोजन तक ही सीमित है।

जबकि सरकार सर्व शिक्षा अभियान को लेकर धन की वर्षा कर रही है। बुद्धिजीवियों की मांग है कि शिक्षक समुदाय को शिक्षण कार्य के अलावा अन्य कार्यो में न लगाया जाये। जिससे परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा का स्तर बढ़ सके।

ग्राम प्रधानों के 25 हजार से अधिक पद आरक्षित

लखनऊ: पंचायती राज विभाग ने सितम्बर-अक्टूबर में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत के दसवें सामन्य निर्वाचन के लिए आरक्षण कोटे का चार्ट जारी कर दिया है।

इसके अनुसार 51,914 ग्राम पंचायतों में से 25 हजार से अधिक पंचायतें आरक्षित की गयी है और सभी वर्गो में चाहे वे आरक्षित हों या अनारक्षित, महिलाओं के लिए उसमें अलग से कोटा तय किया गया है। इस प्रकार महिलाओं के लिए सामान्य वर्ग सहित कुल 17,559 पद आरक्षित किये गये हैं।

पंचायती राज विभाग के सूत्रों ने बताया अनुसूचित-जनजाति के लिए 31 पद आरक्षित किये गये हैं जिसमें महिलाओं के लिए 16 पद हैं। इसी प्रकार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 10,980 पदों में से 3,921 पद महिला व 7,059 पुरुषों के लिए हैं। पिछड़ा वर्ग के लिए 14,016 पद आरक्षित किये गये हैं। इसमें 4,948 महिलाओं व 9,068 पद पुरुषों के लिए है।

सामान्य वर्ग के लिए प्रधानों का 26,887 पद रखा गया है। इसमें भी महिलाओं के लिए 8,674 पद आरक्षित किये गये हैं। इस प्रकार 51,914 ग्राम पंचायतों में से आरक्षित वर्ग के लिए 25,027 पद हैं तथा अनारक्षित वर्ग के लिए 26,887 पद हैं। सभी वर्गो को मिलाकर इसबार महिलाओं के लिए 17,559 पद आरक्षित किये गये हैं जो 33.33 प्रतिशत हैं। चक्रानुक्रम में आरक्षण का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है जिसे अंतिम रूप से 25 अगस्त तक पूरा हो जाना है।

सलीके से करें मोबाइल का इस्तेमाल

देश में एक तरफ जहां मोबाइल फोन के ग्राहकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, वहीं इनके कारण पैदा होने वाली समस्याएं भी रफ्तार पकड़ रही हैं। अक्सर देखने में आ रहा है कि लोग मोबाइल फोन का सलीके से इस्तेमाल नहीं करते और उनकी बातचीत से उनके आस-पास मौजूद लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

जानकारों ने इस समस्या को ‘मोबाइलोफोबिया’ नाम दिया है। समस्या के लगातार बढ़ने के बीच अब सेलफोन के सलीकों के लिए एक अलग संहिता बनाने की जरूरत महसूस की जाने लगी है। लोक व्यवहार विशेषज्ञ [एटीकेट स्पेशलिस्ट] उपासना सिंह कहती हैं कि मीटिंग, अस्पताल, अदालत परिसर, थिएटर, सिनेमाघर, मंदिर, स्कूल आदि में सेलफोन की घंटी व्यवधान उत्पन्न करती है। इसलिए इन स्थानों पर जाने से पहले सेलफोन को साइलेंट या वाइब्रेशन पर रखना चाहिए।

एक अन्य एटीकेट स्पेशलिस्ट गौरव दास कहते हैं कि सेलफोन पर कई लोग जोर-जोर से बातें करते हैं, जिससे निजी या गोपनीय सूचनाएं सार्वजनिक हो सकती है। उनके अनुसार, सेल फोन पर बातें करते समय संयम के साथ ही गुस्से पर भी काबू रखना चाहिए। भावनात्मक बातचीत सोच-समझकर करें, ताकि दूसरों के सामने शर्मिदगी की नौबत न आए। गौरव की राय में, मिस काल करने का चलन गलत है। अपने पैसे बचाने के लिए दूसरों को ‘मिस्ड काल’ देने वाले यह नहीं सोचते कि दूसरों के पास पैसे फालतू नहीं हैं। गौरव कहते हैं कि वाहन चलाते समय सेल फोन का इस्तेमाल कतई नहीं करना चाहिए वर्ना आप अपने साथ-साथ दूसरों की जान भी जोखिम में डाल सकते हैं।

राजधानी में एक स्कूल चला रहे मोहन सिंह कहते हैं कि जरूरी सूचना एसएमएस द्वारा दी जा सकती है। मल्टीमीडिया एप्लीकेशनों जैसे एमएमएस, वीडियो आदि का इस्तेमाल सोच-समझ कर करना चाहिए। इनका गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

वारिश का मीडियानामा

उत्तर प्रदेश में वारिश से किसानो के चेहरे खिले- फसल अच्छे होने के आसार|
न्यूज़ रूम में बैठ कर हेडिंग लगा दी, खबर उसने पढ़ी जिससे सम्बंधित थी उसने माथा पीट लिया, दो चार गलियां दी और मीडिया की बेबकूफी पर निराश होकर गाँव में अपने घर की चौपाल से उठकर स्कूल में पढ़ाने चला गया| ऐसा क्या था खबर में जिससे किसान बौखला गया| खबरों के पाठक लगातार घट रहें है हालाँकि आंकड़ो में प्रसार बढ़ रहा है|

आखिर क्या कहता है किसान

फर्रुखाबाद जनपद के ब्लाक कायमगंज के गाँव दुदेपुर सलेमपुर के 58 साल के स्कूल हेडमास्टर भगवती प्रसाद यादव जिला मुख्यालय पर बेसिक शिक्षा विभाग में कुछ स्कूल के काम से आये तो वहां उनसे अमन सामना हो गया| 16 किलोमीटर दूर से साइकिल चलाकर आये मास्टर साहब के झोले में बाजार से खरीदा हुआ अंग्रेजी का हिन्दुस्तान टाइम्स देख पूछ बैठा मास्टर साहब आपके गाँव में अखबार आता है, बोले नहीं जब कभी शहर आता हूँ कोई न कोई अंग्रेजी का अख़बार जरूर ले लेता हूँ. देश दुनिया की खबरों से जान पहचान बनी रहती है| बात आगे बढ़ी तो अंग्रेजी से हिंदी अख़बारों पर आकर अटक गयी| मुझे पत्रकार जान कुछ संकोच से बोल ही दिया आजकल अखबार पढ़ने लायक नहीं बचा ….(शालीनता पूर्वक संसदीय अपशब्द) क्या लिखते और छापते हैं- किसान देर से वारिश होने से फसल बो नहीं सका और अख़बार लिख रहा है वारिश से किसानो के चेहरे खिले? धान की पौध ज़माने के लिए डीजल पम्प चलाकर पानी भरना पड़ा| जब रुपाई का नंबर आया तब भी बादल सूखे बने रहे लिहाजा फिर किसान ने जमा पूंजी लगाकर डीजल का इंतजाम किया और पानी भरा और अब जब धान बड़ा हो गया है उसे पानी की कम जरूरत है वारिश हो रही है चारो तरफ बाढ़ आ रही है| फसल को नुकसान होने का खतरा पैदा हो रहा है| और मीडिया लिख रहा है – फसल अच्छे होने के आसार| देश के मंत्री भी इसी मीडिया नामा में डूब कर आकंडे गढ़ लेते हैं| देश में गन्ना कम बोया गया है शरद पवार कह रहे है चीनी का उत्पादन अच्छा होगा|

मीडिया और सरकार दोनों से निराश है किसान

गहरी समझ के मास्टर भगवती प्रसाद सरकार और मीडिया दोनों से निराश दिख रहे थे| आगे बोले देश में उत्तर प्रदेश में सबसे बड़े क्षेत्र में गन्ना बोया जाता है मगर यहाँ गन्ने से चीनी कम पैदा होती है इसके मुकाबले आंध्र प्रदेश में गन्ने से चीनी अच्छी मात्र में मिलती है लिहाजा सबसे ज्यादा चीनी पैदा करने वाला आंध्र है मगर यहाँ उत्तर प्रदेश को सरकार ने गन्ने का मुखिया बना रखा है| दर्जनों सरकारी चीनी मिलें बंद पड़ी है| गन्ने के कम उत्पादन के चलते हजारों छोटे छोटे क्रेशर (देशी चीनी बनाने के लघु उद्योग) गन्ने के आभाव और उससे मिलने वाली चीनी की उत्पक्द्ता के चलते बंद हो गए हैं और शरद पवार चीनी की पैदावार अच्छी होने के आसार का बयान दे रहें हैं| और मीडिया उसे छाप भी रहा है अरे कभी किसी किसान से तो पूछ लेते की वारिश से किसानो के चेहरे खिले या मुरझाये…
(असल मुलाकात पर आधारित)
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एक रुपए की चाय, साढ़े बारह रुपए की थाली

इस महंगाई के दौर में अगर हम आपको यह कहें कि आपको सिर्फ एक रुपए में एक कप चाय मिल जाएगी और साढ़े बारह रुपए में खाने की पूरी थाली मिल जाएगी तो शायद आपको यकीन नहीं होगा। पर यह सौ फीसदी सच है। इस महंगाई के दौर में भी आपको इतनी कीमत में खाने की थाली मिल जाएगी। और यह मिलेगी हमारे संसद के कैंटीन में। भले ही इस कैंटीन में पहुंचना हर किसी के बस में ना, हो लेकिन चलिए कम से कम हम आपको यहां का मेन्यू तो दिखा ही देते हैं।

चाय -1.00 रूपया, शाकाराही थाली -12.50 रुपया, मांसाहारी थाली – 22.00 रुपया, राजमा चावल – 7.00 रुपया, वेज पुलाव – 8.00 रुपया, सूप – 5.50 रुपया, फिश फ्राई – 17.00 रुपया , चिकन बिरयानी – 34.00 रूपया, डोसा – 4.00 रुपया, खीर – 5.50 रुपया, चिकन करी – 22.50 रुपया, रोटी – 1.00 रूपया (एक पीस), दाल – 1.50 रुपया (एक कटोरी)

देश में आम आदमी महंगाई के बोझ तले दबा है। उम्मीद की जा रही है कि इस बार के मानसून सत्र में महंगाई का मुद्दा भी उठेगा। लेकिन सवाल यह कि संसद के भीतर इन रियायती दरों पर मिलने वाले व्यंजनों का लुत्फ उठाने वाले सांसद, क्या गंभीरता से इस मुद्दे को उठा पाएंगे?

अब बैंको की दादागीरी नहीं….

नई दिल्ली: सितंबर के बाद हो सकता है कि आपको पैसे निकालने, जमा करने या फिर ट्रांसफर करने के लिए बैंकों में इंतजार या फिर एटीएम की लाइन में न लगना पड़े क्योंकि अब आपका मोबाइल ही बैंक एकाउंट होगा। आप मोबाइल पर ही ये सभी काम कर सकते हैं, और इसके लिए आपको किसी बैंक में परंपरागत एकाउंट खोलने की भी जरूरत नहीं है। फिर आपको बैंकों की दादागिरी भी नहीं झेलनी पड़ेगी क्योंकि इसमें न्यूनतम बैलेंस शून्य रखने की सुविधा है। बैंकों में न्यूनतम बैलेंस की 500 रुपयों से लेकर 10,000 रूपए तक की सीमा है। वर्तमान में भारत में मोबाइल यूजर्स की संख्या करीब 50 करोड़ है। और केंद्र सरकार ने इसी बढ़ते व्यवसाय का पूरी तरह से दोहन करने की योजना बनाई है।

क्या होगी योजना

केंद्र सरकार इस पूरी योजना को अंतिम रूप दे रही है। इस योजना के तहत मोबाइल सर्विस कंपनियों के जरिए आपका एक एकाउंट खोल जाएगा, और इसे मोबाइल से जोड़ा जाएगा। अभी योजना की तकनीक और नियंत्रण पर काम किया जा रहा है। फिर मोबाइल के जरिए इस एकाउंट में रखे धन को निकालकर दूसरे के नाम ट्रांसफर किया जा सकेगा। फिलहाल इसमें एक ट्रांजेक्शन पांच हजार रूपयों तक होगा औऱ महीने में इसकी सीमा 25,000 रुपए होगी। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम इस मामले में सरकार की मदद कर रहा है, जो मोबाइलों को बैंक एकाउंट से जोड़ने का काम करेगा। मोबाइलों के एकाउंट से जुड़ने के बाद, एक पहचान नंबर मिलेगा, जो कि एकाउंट ऑपरेट करने में मदद करेगा।

आया सावन झूम के…..

सावन का महीना यानी शिव का महीना, कांवरियो का महीना, झूलों का महीना, मेंहदी का महीना, श्रृंगार का महीना, लड़कियों के मायके जाने का महीना..जीं हां आज यानी 26 जुलाई से सावन महीने की शुरूआत हो गई है। आज सावन का पहला सोमवार है। वैसे धार्मिक और पुराणों की बात करें तो सावन को शिव का प्रिय महीना कहा जाता है।

सावन मास के आरंभ होते ही व्रत-उपवासों का दौर शुरू हो जाता है। सावन मास में जहाँ शिवोपासना, शिवलिंगों की पूजा की जाती है जिससे मनुष्‍य को अपार धन-वैभव की प्राप्ति होती है। इस माह में बिल्व पत्र, जल, अक्षत और बम-बम बोले का जयकारा लगाकर और शिव चालीसा, शिव आरती, शिव-पार्वती की उपासना से भी आप शिव को प्रसन्न कर सकते हैं। सावन मास के दौरान एक महीने तक आप भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना कर साल भर की पूजा का फल प्राप्त सकते हैं।

इस बार का सावन बेहद खास है। धर्म पंडितों के अनुसार इस बार सावन जिस नक्षत्र में लगा है वो नक्षत्र बेहद शुभ है। आज से 27 साल पहले ऐसा नक्षत्र देखा गया था। इस सावन की विशेषता ये भी है कि 27साल बाद इस बार का सावन सोमवार से प्रारंभ हुआ है। सावन के बारे में लोग कहते है कि भगवान शिव को ये महीना इसलिए भी बेहद पसंद क्योंकि ये ही वो माह है जिसमें शिव-पार्वती की शादी की तय हुई थी। इन दिनों की गई पूजा का फल हर मनुष्य को अवश्य ही प्राप्त होता है।

10 अँगुलियों के छापे और आंख की पुतली से पहचान होगी कलावती की

देश के लाखो कलावातिओं और कलुआ की पहचान अब दोनों हाथों की दसों अंगुलिओं और आंख की पुतली की फोटो से की जाएगी| अब भारत का कोई नागरिक बिना पहचान के नहीं रहेगा| यूआईडी ने भारत के हर नागरिक को एक अलग पहचान देने के लिए पूरी तैयारी कर ली है| इस पहचान पत्र का नाम होगा ”आधार”| बिना ”आधार” के कुछ सालों के बाद सरकार से मिलने वाली सुविधाओं को ले पाना काफी मुश्किल होगा| भारत पूरी दुनिया में पहला ऐसा देश होगा जहाँ इतने बड़े पैमाने पर ये ”आधार” पहचान पत्र जारी किये जायेंगे|

आधार बनाने का पहला चरण अगस्त 2010 में शुरू हो जायेगा| इसके लिए लगभग सब तैयारियां कर ली गयी है| इसके लिए देश भर से 221 कम्पनियों का नामांकन कर लिया गया है| सरकारी देख रेख में ये प्राइवेट कम्पनियां नागरिको के आधार पहचान के लिए आंकड़े जुटाने का काम करेंगी| वर्ष 2015 देश के हर नागरिक को ये पहचान पत्र उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है|

सरकार की किसी प्रकार की सहायता प्राप्त करने के लिए इस आधार का होना जरूरी हो जायेगा| भ्रस्ताचार पर अंकुश लगाने में भी इससे काफी मदद मिलेगी| बैक में खाता खोलने से लेकर सरकारी दुकान से राशन और मिटटी का तेल लेने तक, कर्ज लेने से जमीन जायदाद का बैनामा कराने तक, वोट देने से लेकर पासपोर्ट बनबाने तक में यही ”आधार” काम आएगा| आधार में नागरिक के भौतिक से लेकर अनुवांशिक रिकॉर्ड का लेखा जोखा होगा| कब पैदा हुए, कहाँ खान पढ़ाई की, कितनी शिक्षा है, कितना धन है, कितना कमाते है और कहाँ कहाँ बैंक खाते है सब रिकॉर्ड इसमें पड़ी चिप में दर्ज होगा| पूरे जीवन में कहाँ कहाँ अपराध किया, कितने मुकदमे चल रहे हैं, कितने पुरष्कार मिले आदि आदि|

13 अंको वाले इस “आधार” में वो सब कुछ होगा तो नहीं भटकना पड़ेगा आपको जाती प्रमाण पत्र बनबाने या फिर आय प्रमाण पत्र बनबाने के लिए| जमीन जायदाद का बैनामा कराने में पहचान इसी से होगी| खरीदने के लिए धन कहाँ से आया गलत जानकारी देते ही पकड़ा जायेगा| फर्जी आय प्रमाण पत्र बनबाकर वजीफा और शुल्क प्रतिपूर्ति हडपने वालों को एक बटन दबाते ही पकड़ा जा सकेगा|

गरीबो के हक़ पर डाका डालने वाले नटवरलालों के लिए किसी खुनी पंजे से कम नहीं होगा ये “आधार” तो सही हकदार को उसका हक भी दिलाएगा ये “आधार”|

और क्या क्या खूबियाँ होंगी और कैसा होगा ये आधार पढ़िये अगले अंक में—

बसपा नेता के भाई पर चाकू से हमला

फर्रुखाबाद|25july: दवंग लोगों ने बसपा नेता के भाई को चाकू मारकर घायल कर दिया.

थाना मऊदरवाजा पुलिस ने ग्राम बड़ी बरौन निवासी घायल नदीम खां मंसूरी का लोहिया अस्पताल में डाक्टरी परीक्षण कराया. जरदोजी का कार्य करने वाले नदीम ने बताया कि वह सायं घर पर था तभी पड़ोसी रिजवान खां, जाफर खां, शाहरुख खां आदि ने लाठी डंडा व् चाकू से हमला कर दिया.

सूचना मिलने पर खेत में मौजूद बड़े भाई खिल्लन खां ने बचाया. खिल्लन ने आपातकालीन कक्ष में मौजूद मंत्री प्रतिनिधि जितेन्द्र ओझा को घटना की जानकारी देते हुए बताया कि वह बसपा सेक्टर का महा सचिव है. बीते दिनों पूर्व यह लोग मेरे साथ भी मारपीट कर चुके हैं.

लोगों के समझाने पर मैंने हमलावरों को माफ़ कर दिया था. अब किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करूंगा. हमलावरों की ओर से परिवारी महताव हुसैन खिल्लन को राजीनामा करने के लिए मनाते रहे.