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खाद्यान घोटाले में FCI, RICE MILL और मार्केटिंग विभाग का खेल

फर्रुखाबाद: गरीबो और जरूरतमंदो को सस्ती दरो पर बटने/बिकने वाला खाद्यान जिले के राशन माफिया, फ़ूड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया और जिले के मार्केटिंग विभाग के अफसरों की मिलीभगत से कालाबाजारी बड़े ही करीने से होता है| इस खेल में मार्केटिंग विभाग द्वारा किराए पर लिए गए गोदाम के स्वामियों की पहचान से ही घोटाले की बू आती है| कमालगंज के एक एक्टिविस्ट (सुरक्षा द्रष्टि से पहचान नहीं खोली जा रही है) ने हलफनामा देकर जिले के पांच गोदामों में हो रहे राशन की कालाबाजारी की शिकायत शासन से की है| इस घोटाले का खेल समझने के लिए पहले सरकार की राशन वितरण प्रणाली को समझना होगा| राशन में गेंहू, चावल, चीनी, तेल दालें आदि होता है जिन पर सरकार करोडो रुपये की सब्सिडी देती है| ये सब्सिडी का धन वो धन है जिसे केंद्र और राज्य सरकारें जनता से विभिन्न टैक्स की मदों में वसूलती है| अब समझिये जो धन इन लूटेरों द्वारा लूटा जा रहा है वो हम सबका है|

राशन की खरीद वितरण प्रणाली

सरकारी राशन की खरीद कर उसे वितरण के लिए प्रदेश के मार्केटिंग विभाग को दिया जाता है| खरीद करने और भण्डारण करने की जिम्मेदारी फ़ूड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया और स्टेट वेयर हाउस की होती है| जहाँ से जिलों में जरुरत के हिसाब से डिमांड के सापेक्ष ये राशन जिलों में मार्केटिंग विभाग (प्रदेश खाद्य आपूर्ति एवं विपणन विभाग) मंगाता है और अपने गोदामों में रखता है| इन्ही गोदामों से ये राशन सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान (जिन्हें सामान्य भाषा में कोटेदार की दुकान कहते है), मिड डे मील आदि के लिए वितरित किया जाता है| मार्केटिंग विभाग के गोदाम में राशन सीधे नहीं खरीदा जाता है| खरीद फ़ूड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया आदि एजेंसियां करती है और इन्हें पूर्ती करती हैं| इस पूरे प्रकरण में तीन प्रकार के बाहय खर्चे होते है| पहला खर्चा राशन की कीमत का जो किसानो, धान मिल और चीनी तेल कम्पनियों आदि को भुगतान किया जाता है| दूसरा इस राशन को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने का तहत तीसरा इनके भण्डारण का| राशन माफिया यानि “गरीबो के राशन चोरो” की नजर इन तीनो खर्चो पर होती है और इसमें भागीदारी इस पूरे तंत्र को चलाने वाले नौकरों की भी होती है जो जनता के टैक्स से वेतन पाकर अपने आपको सरकारी नौकर कहते हैं|

घोटाले की पहली कड़ी- खाद्यान ट्रांसपोर्ट घोटाला

ध्यान देने की बात ये है की खरीद का माल पहले फ़ूड कारपोरेशन या प्रदेश भण्डारण निगम की गोदाम में जाना चाहिए वहां से जिलों की मार्केटिंग गोदामों में| मगर पहला घपला यही शुरू होता है ये माल असल में व्यापारी/धान मिल स्वामी अपने कारखाने से सीधे इन मार्केटिंग गोदामों में ले जाता है और कागजो में फ़ूड कारपोरेशन या प्रदेश भण्डारण निगम के गोदामों को भेजने के कागज घोटाले की पहली कड़ी में तैयार करता है| इस कड़ी में ट्रांसपोर्ट का ठेकेदार खाद्यान की ढुलाई का फर्जीवाड़ा करता है और फ़ूड कारपोरेशन के अधिकारी इस फर्जीवाड़े की काली आय में मुह कला करते हैं| खाद्यान घोटाले के इस हिस्से को आप खाद्यान ट्रांसपोर्ट घोटाला भी कह सकते हैं|

राजेपुर की गोदाम में खाद्यान कम निकलना- खाद्यान ट्रांसपोर्ट घोटाला है

फर्रुखाबाद के राजेपुर ब्लाक में मार्केटिंग गोदाम में लगभग १५०० बोरी कम पाया गया खाद्यान इसी टांसपोर्ट घोटाले की पहली कड़ी है| राजेपुर के गोदाम में अधिकतर चावल एस एस राईस मिल से आपूर्ति होता रहा है| मार्केटिंग विभाग के ही हमारे विश्वस्त सूत्रों के अनुसार एस एस राईस मिल के पास चावल उतना नहीं था जितनी आपूर्ति उसे देनी थी, मगर वो मिल मालिक फ़ूड कारपोरेशन को माल आपूर्ति करने की रसीद प्राप्त कर गया और फिर फ़ूड कारपोरेशन ने उस कागजी फर्जी चावल/गेंहू को कागजो पर फर्रुखाबाद/राजेपुर के मार्केटिंग विभाग को आपूर्ति दिखा दिया| मार्केटिंग विभाग ने भी उस राशन को कागजो पर प्राप्त कर लिया| इससे पहले की महीने के अंत में अभिलेख में आहरण वितरण का खाका बराबर किया जाता, जिलाधिकारी रिगजिन सेम्फेल की निगाहों में मामला फस गया|

दरअसल ये खेल जिले की हर मार्केटिंग गोदाम में होता है| महीने के शुरू में माल आता है और 23 के बाद वितरण होता है| मगर असल में माल आता नहीं है और वितरण होता नहीं है| कोटेदार जितना बतना होता है उतना ही माल ले जाता है और बाकी का कालाबाजारी के लिए माल नहीं इधर उधर करना होता है| कालाबाजारी का हिसाब कागजो पर होता है जिसमे मार्केटिंग विभाग, जिला आपूर्ति विभाग से लेकर राशन माफिया और माल आपूर्तिकर्ता तक अपना मुह काला करते है| ऐसा नहीं कि इस खेल की जानकारी प्रशासनिक अधिकारिओं को नहीं होती मगर मासिक बंधा बधाया महीना लेकर ये साहब लोग भी अपना मुह काला करते हैं| ऐसी ही एक जानकारी जेएनआई ने पिछले माह एक रात एक एसडीएम् साहब को दी थी मगर उन साहब ने ये कहकर कुछ नहीं किया कह दिया कि रात बहुत हो चुकी है सुबह देखेंगे| और जेएनआई की जानकारी उस राईस मील स्वामी तक पंहुचा दी| दरअसल में कालाबाजारी का चावल ट्रेक्टर पर लद कर कोटेदार की दुकान की जगह नगर में एक बसपा नेता की धान मिल पर उतरा था और जे एन आई ने बिलकुल सटीक जानकारी दी थी| फिर रातो रात उस कोटेदार की दुकान पर वापस पूरा चावल पंहुचा कर मामला साफ़ दिखाया गया| ऐसे में कैसे कोई आम जनता इन प्रशासनिक अधिकारिओं पर भरोसा करे और भ्रष्टाचार की जानकारी दे|

खाद्यान घोटाले की दूसरी कड़ी- मार्केटिंग विभाग के गोदाम में कागजी भण्डारण का घोटाला

गरीबो और जरुरतमंदो के सरकारी सस्ते खाद्यान की कालाबाजारी का खेल जितना भौतिक रूप से होता है उससे ज्यादा कागजो पर होता है| ये सारा खेल सरकार की सब्सिडी हडपने के लिए होता है| इस खेल में मंत्री से लेकर संत्री तक अपना अपना हिस्सा अपनी अपनी पॉवर के हिसाब से वसूलते है| फ़ूड कारपोरेशन और स्टेट वेयर हाउस सहित सभी खरीद एजेंसियां किसानो से खाद्यान खरीदते समय से लूटने में लग जाती है| कभी वजन का खेल तो कहीं हर साल अरबो रुपये का नया बारदाना कागजो पर खरीद करती है| हकीकत में जिलें में जितने धान की पैदावार होती है उससे ज्यादा चावल यहाँ खरीदा जाता है| चूँकि गेंहू और चावल की खरीद जिले के बाहर नहीं होती है इसलिए कृषि विभाग और इन खरीद एजेंसियों द्वारा खरीद के मिलान से ये मामला पकड़ में आता है| अब जब खाद्यान का उत्पादन ही नहीं हुआ तो खरीद तो फर्जी होगी ही| हकीकत ये है की यहाँ की धान मिल मालिक जितना धान अपने मिल में खरीद करते हैं उसके अनुपात में निकलने चावल कई गुना ज्यादा होता है| व्यापार कर विभाग में इन मालिको द्वारा धान की दी गयी खरीद के मिलान से ये मामला पकड़ा जा सकता है|

खैर आगे बढ़ते है और बात जिलों में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग और मार्केटिंग विभाग के बीच के खेल से आपको अवगत कराते हैं| इन मार्केटिंग गोदामों में 1 तारीख से 22 तारीख तक माल आता है और हर माह की 23 तारीख से ३० तारीख के बीच कोटेदारो को उठान करना होता है| लगभग हर कोटेदार अपने हिस्से के मिले खाद्यान के कुछ हिस्से को कालाबाजारी कर बाजार में ऊँचे दामो (बाजार मूल्य) पर कालाबाजारी के तहत बेच देता है ये बात ज्यादातर जागरूक जनता जानती है| मगर जनता जो नहीं जानती वो ये है कि कालाबाजारी के लिए ज्यादातर कोटेदारो को खाद्यान को गोदाम से उठान ही नहीं करना पड़ता है, ये केवल सरकारी और बाजार भाव के मूल्य का अंतर राशन माफियाओं से लेते है| इन राशन माफियों में कुछ गोदाम के मालिक है तो कुछ ट्रांसपोर्टर है| एक किस्म के राशन माफिया और है जो केवल बिचौलिए का काम करते है और अपने को गल्ला व्यापारी कहलाते है| कोटेदार जो कालाबाजारी का राशन गोदाम नहीं उठता है वो राशन हकीकत में इन गोदामों में आता ही नहीं है उस माल के केवल कागज फ़ूड कारपोरेशन और स्टेट वेयर हाउस से आते हैं| यानि भौतिक रूप से गड़बड़ी हर माह की 10 तारीख से 25 तारीख के बीच पकड़ी जा सकती है| माह के अंत यानि तीस तारीख आते आते आहरण वितरण के रजिस्टर में लेखा जोखा बराबर हो जाता है| राजेपुर में मार्केटिंग गोदाम में जिलाधिकारी के खुद के प्रयास से पकड़ी गयी गड़बड़ी 10 से 25 तारीख के बीच ही पकड़ी गयी है|

खाद्यान घोटाले की अंतिम एवं तीसरी कड़ी- कोटेदार की दुकान पर वितरण घोटाला

जनता के टैक्स से बटने वाली सब्सिडी वाले खाद्यान की घोटालेबाजी की अंतिम कड़ी कोटेदार की दूकान होती है| एक अनुमान के मुताबिक कोटेदारो की दुकानों पर होने वाला खाद्यान घोटाला कुल खाद्यान घोटाले का केवल 30 फ़ीसदी भाग होता है| 70 फ़ीसदी घोटाला तो खाद्यान की खरीद से भण्डारण और कोटेदारो की दुकान पर राशन पहुचते पहुचते हो चुका होता है| आमतौर पर कोटेदार खाद्यान तौल में कम देता है, जिरह करने पर कहता है कि गोदाम से ही कम मिलता है| आपूर्ति विभाग की मिलीभगत से फर्जी राशन कार्ड रखता है और उसका राशन ब्लेक करता है| कमजोरो और गरीबो को राशन देने में गुंडई दिखता है और गाँव कस्बो के अच्छी माली हालत के राशन कार्ड धारक राशन कोटेदारों की दुकान से लेने जाते नहीं है, उस हिस्से का भी राशन कोटेदार कालाबाजारी की भेट चढ़ाता है| ऐसे चोर किस्म के कोतेद्दर आपको अपने आसपास मिल जायेंगे जो बिना इनकम टैक्स विभाग में कोई रिटर्न भरे आलीशान मकान में रहते है और लाखो की चमचमाती जीप कार से फर्राटा भरते नजर आयेंगे| आमतौर पर एक कोटेदार अधिक से अधिक 200 लोगो को राशन देता है और उसमे भी सरकारी राशन की दूकान पर लगी लाइन ये साबित करने के लिए लगवाता है जैसे रेलवे स्टेशन पर ट्रेन छूटते समय लोग भागते भागते टिकेट लेने के लिए लाइन में लगे है| जरा सोचिये कि बाजार में अच्छे बनिए की दुकान पर कम से कम 100 ग्राहक रोज आता होगा और दूकान पर लाइन नहीं लगानी पड़ती|

इस खाद्यान घोटाले के खेल में कौन कौन मुह काला करता है-

सरकारी सस्ते गल्ले की दूकान देश के हर गाँव और वार्ड में है| देश का सबसे बड़ा बजट इन्ही दुकानों पर सस्ता गल्ला आम जनता को पहुचाने के उद्देश्य से सरकार सब्सिडी के रूप में खर्च करती है| ये आम जनता का पैसा है जिसे आपके आसपास रहने वाले लुटेरे ही लूट रहे हैं| सरकारी नौकरशाह, बाबू से लेकर छोटे अफसर, इन पर लगाम लगाने के जिम्मेदार नेता मंत्री और आम जनता के बीच के दलाल और माफिया ये सभी इस कालाबाजारी के धन से अपना मुह काला करते है और समाज में रहीस बनकर समाजसेवी का ढोंग करते है| आपूर्ति विभाग के छोटे बड़े अफसर से लेकर इन पर निगरानी रखने वाले प्रशासनिक अमले के लोग भी बहती भ्रष्टाचार की गंगा में हाथ धोना नहीं भूलते| आमतौर पर ये लोग अक्सर सरकारी/पब्लिक मंचो पर माला पहनते नजर आयेंगे, बड़े बड़े आदर्शो वाले भाषण झाड़ते नजर आयेंगे| इन्ही के फोटो से अखबारों के कलम भरे जाते हैं, और मीडिया के सबसे बड़े विज्ञापनदाता भी यही होते हैं| ये दहेज़ विरोधी अभियान के मंच पर आदर्शो वाली घुट्टी जनता को पिलाते हैं और अपनी बिटिया के दहेज़ के करोडो गरीब जनता के हिस्से का लूट अपनी तिजोरियों में जमा यही चोर करते हैं| इतना ही नहीं गरीब और लाचार जनता के हिस्से के धन को यही चुराते हैं और इसी काले धन से उच्च प्राइवेट शिक्षा संस्थानों में लाखो की केपिटेशन फीस भर अपने बच्चो को घूसखोरी के धन से डिग्रियां दिलाते हैं |

शायद ही किसी युवा होते इस देश के नौजवान ने अपने पापा से ये पुछा हो कि पापा आपने 30 -40 लाख खर्च कर मुझे आस्ट्रेलिया पढ़ने के लिए भेजा था ये पैसा अपने कहाँ से जुटाया था? अगर पैसा सफ़ेद यानि ईमानदारी का न हुआ तो यकीन मानिये वो चोर टाइप इंसान जबाब नहीं दे पायेगा कि किसी गरीब की झोपड़ी जो बाढ़ में बह गयी थी उसके सरकारी मुयाबजे की रकम हड़प कर तेरे लिए ये आशियाँ बनाया है और तुझे पढ़ाया है|

कभी इनके नाम के आगे चोर/घूसखोर राशन माफिया/ शिक्षा माफिया आदि लगाकर सम्बोधित करके देखिये कितना सटीक नाम लगेगा देश की इस भ्रष्ट बिरादरी का| माना की 100 में 90 बेईमान है फिर भी 10 का तो ईमान है|

क्यूँ न घूसखोर और भ्रष्टाचार में लिप्त लोगो के नामो के आगे इनके काले कर्मो के आधार पर उपयुक्त किये जाने वाले शब्द लगा कर इन्हें पुकारा जाए? जैसे चोर शर्माजी, घूसखोर दीक्षित जी आदि आदि| आप अपनी राय जरूर लिखे हम उसे अलग से प्रकाशित करेंगे|

जारी….

खाद्यान्न घोटाले में अब तक सिर्फ दो धान मिल मालिकों के विरुद्ध एफआईआर

*विपणन सहायक व लिपिक के निलंबन की संस्तुति

फर्रुखाबाद,  जिलाधिकारी के आदेश पर शरू हुई राजेपुर एसएमआई गोदाम और तीन धान मिलों की जांच में मिली गड़वड़ियों के क्रम में शुक्रवार को दो धान मिल मालिकों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करा दी गयी है। एसएमआई गोदाम पर तैनात विपणन सहायक व लिपिक के विरुद्ध निलंबन की संस्तुति कर दी गयी है। डिप्टी आरएमओ के विरुद्ध भी शासन को लिखा जायेगा।

विदित है कि जिलाधिकारी रिग्जिन सैम्फेल के आदेश पर राजेपुर विपणन गोदाम की जांच में 1338 बोरी खाद्यान्न कम निकलाने के बाद से ही कार्वाई तय मानी जा रही थी। प्रशासन ने इतनी अधिक मात्रा में खाद्यान्न कम निकलने पर आस-पास की तीन धान मिलों को भी सील कर दिया था। इन धान मिलों के स्टाक सत्यापन में भी गड़बड़ी निकलने पर मामला साफ हो गया। उल्लेखनीय है कि JNI ने गुरुवार को विस्तृत एडीटोरियल में FCI, RICE MILL और मार्केटिंग विभाग के खेल का खुलासा किया था। यद्यपि विभागीय अधिकारी अभी भी मामले की लीपापोती के प्रयास में लगे थे परंतु डीएम के आदेश पर शुक्रवार को पूर्ति निरीक्षक मन्ना सिंह की ओर से जय बालाजी राइस मिल व एसआर राइस मिल के मालिकों सुशील कुमार उर्फ़ पप्पू व मूलचंद के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करा दी गयी है। राजेपुर एसएमआई गोदाम पर तैनात विपणन सहायक रामऔतार और लिपिक महेंद्र कुमार शुक्ला के विरुद्ध निलंबन की संस्तुति कर दी गयी है। इस मामले में सुबह ही लिपिक महेंद्र शुक्ल अपने कई साथियो के साथ अपना पक्ष रखने जिलाधिकारी के पास भी गए थे| महेंद्र शुक्ल का कहना है कि सारी गड़बड़ी रामऔतार और डिप्टी आर एम् ओ यादराम की मिलीभगत से होती है, उनके (महेंद्र शुक्ल) के पास कई पटल है और उन्हें राजेपुर में अतरिक्त कार्य देखने हेतु रखा गया था| उन्होंने बताया की गोदाम की चाबी भी रामऔतार के पास रहती थी|

संभागीय खाद्य नियंत्रक कानपुर वीपी वर्मा ने बताया कि रामऔतार द्विवेदी और महेंद्र कुमार शुक्ला के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की जा रही है। डिप्टी आरएमओ याद राम की इस संबंध में आयी रिपोर्ट के भ्रामक होने पर स्पष्ट आख्या भेजने के निर्देश दिये गये हैं। श्री वर्मा ने बताया कि शिथिलता के लिये यादराम को भी हटाने की संस्तुति की जायेगी।

नगर परिक्रमा-2 बार्ड नंबर 11

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फर्रुखाबाद: प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय, ५० बेड का अस्पताल व पानी की टंकी आदि सभी सुबिधाओं से नगर का बार्ड नंबर ११ परिपूर्ण है| फिर भी लोगों की परेशानियां अनगिनत!

JNI टीम ने इन सभी स्थानों का आज अवलोकन किया और लोगों से रूबरू हुए|

एक बानगी-

प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय-

यहाँ पर प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय एक ही स्थान पर बनवाये गए हैं| विद्यालय के प्रवेश द्वार से जैसे ही अन्दर प्रवेश करते हैं दाहिनी तरफ नजर पड़ती है शौंचालय पर जिसकी दुर्दशा इतनी भयानक है कि वहां पर खड़ा होना बीमारियों को दावत देना है| शायद वर्षों से वहां सफाई नहीं हुई है|

स्कूल के अन्दर और चलने पर इंडिया मार्का सरकारी हैण्ड पम्प लगा हुआ है जिसके चारों तरफ पानी भरा हुआ है और पानी बहकर कमरों के बाहर बने बरामदे तक पहुँच गया है जिसकी तुलना तालाब से की जा सकती है|

स्कूल की शिक्षिका व बार्ड सभासद अशोक वर्मा की पुत्री कीर्ति वर्मा ने अपने ही स्कूल की दुर्दशा वयां करते हुए बताया कि विद्यालय में झाडू लगाने वाला नहीं आता है और शौंचालय की व्यवस्था बेहद नरकीय है| नालियों का पानी ऊपर से बहकर गलियों में आ जाता है जिससे राहगीरों को काफी दिक्कत होती है| नगर पालिका वाले इसकी कभी सफाई नहीं कराते|

इसी मोहल्ले में कच्चा नाला है जिसे बनवाया नहीं जा रहा है जब भी बारिश होती है नाले का पानी बहकर सडकों और लोगों के घरों में घुस जाता है और पानी भरने से मच्छर और बीमारियाँ लोगों को घेर लेती हैं|

अस्पताल-

१२:१५ बजे हमारी JNI टीम अस्पताल में प्रवेश करती है वहां प्रवेश एंट्री करने वाला रिसेप्निष्ट ही नदारद| अस्पताल में अन्दर एक,दो चिकित्सकों को छोड़कर अन्य सभी डाक्टर नदारद थे| पूंछे जाने पर मालूम पड़ा कि होली होने के कारण डाक्टर छुट्टी पर हैं| मरीजों की देखभाल करने वाला कोई नहीं था और पर्चा बनवाने व दवाईयां लेने के लिए इधर-उधर भटक रहे थे|

पानी की टंकी-

यहाँ पर पानी की टंकी का निर्माण जल्दी ही करवाया गया है परन्तु वह भी सफ़ेद हांथी सावित हो रही है| वहां के लोगों का कहना है कि ” जा पानी की टंकी लगवाये का फाईदा है जामे तो पानी ही नई आउत है| ” कुलदीप कुशवाह ने बताया कि ” यहाँ पानी की बहुत दिक्कत है टंकी को बने काफी समय हो गया है लेकिन नगर पालिका ने नलकूप आपरेटर की कोई व्यवस्था नहीं की है”|

सोनी कुशवाह-

सोनी ने बताया कि ८ दिन से बिजली नहीं आ रही है| सोनी के घर पर शिक्षा संबंधी व कंप्यूटर आदि सभी उपकरण मौजूद हैं लेकिन बिजली के न आने से उन सभी से बंचित है और विजली विभाग को कोसती है| यहाँ तक कि मोहल्ले में बिजली कनेक्शन ही नहीं है लोग सिर्फ दूर दूर से कटिया डालकर लाते हैं|

कोटेदार की कालाबाजारी-

जमुना देवी ने बताया कि उनके पास बीपीएल राशन कार्ड है लेकिन उस पर सिर्फ तीन लीटर ही केरोसीन मिलता है इसके अलावा और कोई भी सामान नहीं दिया जाता है|

19 और 20 को मोबाइल कंपनिया करेंगी आपकी जेब साफ़, JNI पहुंचायेगा बधाई सबके पास

फर्रुखाबाद: होली, दीवाली या फिर नव वर्ष हो ये मोबाइल कम्पनियां इन मौको को नहीं गवाना चाहती हैं| यही वो मौके होते हैं जव ये कंपनिया अपने ग्राहकों की जेबे अच्छी तरह साफ़ कर देती हैं| इन मौकों पर मोबाइल धारकों के मोबाइल पर कोई भी टैरिफ प्लान, एसएमएस प्लान काम नहीं करता है और कंपनियां मनमाने ढंग से चार्ज लगाकर मोबाइल का बैलेंस खत्म कर देते हैं|

19 और 20 मार्च को होली है लेकिन कंपनियों के मनमाने ढंग से चार्ज लगाने के कारण लोग अपने नजदीकियों को बधाई नहीं दे पाते हैं| लेकिन इन समस्याओं से जूझते लोगों को इन दिक्कतों से निजात दिलाने के लिए मोबाइल कंपनियों व अन्य मीडिया की  होड़ से आगे निकलती हुयी JNI ने हाँथ में वीणा उठा लिया है| अब लोग अपनों को बधाई देने से बंचित नहीं रह पायेंगें|

लोगों की आवाज व बधाई सन्देश हर एक व्यक्ति के पास पहुंचायेगा| JNI से सम्पर्क करने के लिए अभी काल करें 09415333325, 09455522555 बधाई सन्देश बुक कराएं|

पूर्ति कर्मियों ने लिखाई अधिवक्ता के विरुद्ध एफआईआर

*सरकारी कार्य में बाधा व आतंक फैलाने का आरोप

फर्रुखाबाद, जिला पूर्ति कार्यालय के लिपिक राजीव कुमार व चार अन्य ने गुरुवार को सर्वोदय मित्रमंडल कार्यकर्ता लक्षमण सिंह एडवोकेट व उनके 8 साथियों के विरुद्ध कोतवाली फतेहगढ में कार्यालय में घुस कर पत्रावलियां फाड़ डालने, आतंकित करने व मारपीट करने का मुकदमा दर्ज कराया है।

कोतवाली में दी गयी तहरीर के अनुसार लक्षमण सिंह एडवोकेट बुधवार को प्रातः 11 बजे अपने 8-10 साथियों के साथ पूर्ति कार्यालय पहुंचे और जिला पूर्ति अधिकारी के विषय में अभद्र भाषा का उपयोग करते हुए कहा कि कहां भाग गया। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मोहन को धक्का देकर कमरे में घुस गये व कई सरकारी पत्रावलियां फाड़ डालीं। साथियों के साथ कार्यालय में आतंक का माहौल फैला दिया, जिससे कर्माचिरयों में भय व्याप्त हो गया।

घटना की सूचना पाकर नगर मजिस्ट्रेट भी वहां मौके पर पहुंचे व उन्होंने भी लक्षमण सिंह को समझाने का प्रयास किया परंतु वह नहीं माने। उनके जाने के बाद कर्मचारियों ने जिलाधिकारी को सूचना दी। जिलाधकारी रिग्जिन सैम्फेल के आदेश पर नगर मजिस्ट्रेट हरीशंकर व सीओ सिटी डीके सिसोदिया ने पूर्ति कार्यालय के कर्मचारियों के बयान दर्ज किये। कर्चारियों के बयानों के आधार पर नगर मजिस्ट्रेट व सीओ सिटी ने अपनी रिपोर्ट डीएम व एसपी को सौंप दी। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर पूर्ति कर्चारियों राजीव कुमार, मोहन लाल, राजकुमारी, सरोजनी देवी व रजनी देवी की शिकायत के आधार पर लक्षमण सिंह व उनके 8 अज्ञात साथियों के विरुद्ध धारा 147,352,353,504 व 427 आईपीसी और 3/4 लोक संपत्ति सुरक्षा अधिनियम एवं 7 क्रिमनल एमेंडमेंड एक्ट के अंतर्गत एफआईआर दर्ज करली गयी है।

पुतला फूंकने के प्रयास पर पुलिस ने खदेड़ा, सतीश सहित 16 सपाई गिरफ्तार

फर्रुखाबाद: समाजवादी युवजन सभा के जिलाध्यक्ष एवं जिला पंचायत सदस्य दृगपाल सिंह यादव बाबी ने समर्थकों के साथ लखमीपुर गाँव में मुख्यमंत्री का पुतला फूंकने के लिए तैयारी की| मीडिया वाले भी पहुँच गए थे|

कमालगंज थानाध्यक्ष आरके सक्सेना ने जानकारी मिलते ही मौके पर छापा मारकर सपाईयों को खदेड़ दिया| बाद में श्री बाबी ने बताया कि कीरतपुर गाँव में पुतला फूँका गया|

शहर कोतवाली पुलिस ने समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष सतीश दीक्षित व ओमप्रकाश को शांतिभंग करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया| इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार ने बताया कि सतीश दीक्षित को लोहिया प्रतिमा के निकट नारेबाजी करते कालोनी के ओमप्रकाश के साथ शांतिभंग करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया|

सीओ कायमगंज मछुआ राम दुग्ताल ने बताया कि उनके क्षेत्र में आज १४ सपाई गिरफ्तार किये गए| कोतवाली कायमगंज में ८, मेरापुर में ५ तथा शमसाबाद क्षेत्र से एक ही गिरफ्तारी की गई है| उन्होंने बताया कि बीती रात व बीते दिन कायमगंज व कम्पिल क्षेत्र में ११,११ तथा शमसाबाद थाने में ७ लोगों की गिरफ्तारी हुयी है|

सीओ मोहम्दाबाद बीके शर्मा ने बताया कि उनके क्षेत्र में कोई भी गिरफ्तारी नहीं हुयी है| इसी तरह कोतवाली फतेहगढ़, थाना मऊदरवाजा, थाना अमृत पुर व राजेपुर क्षेत्र में कोई नहीं पकड़ा गया|

एसओ कमालगंज श्री सक्सेना ने बताया कि बीती रात दो सपाईयों को गिरफ्तार किया गया|

गुप्तचर विभाग की सूचना के अनुसार बीते दिन दिनों से जिला जेल में 44 कार्यकर्ता बंद हुए हैं| अपर पुलिस अधीक्षक बीके मिश्र ने बताया कि उन्हें सपाईयों की गिरफ्तारी की पूरी फिगर नहीं मालूम|

सपा का दावा- CM के 46 पुतले फूंके, पुलिस बोली- एक भी नहीं

फर्रुखाबाद: समाजवादी पार्टी के आन्दोलन के दौरान आज पूरे जिले में सपाईयों व पुलिस में आँख-मिचौली चलती रही| पार्टी के जिलाध्यक्ष बोले कि ४६ स्थानों पर मुख्यमंत्री के पुतले फूंके गए| जबकि अपर पुलिस अधीक्षक मिश्र ने बताया कि पुलिस की सर्तकता से जिले में एक भी पुतला नहीं फुंका|

सपा के जिलाध्यक्ष चंद्रपाल सिंह यादव ने मोबाइल फोन पर अपरान्ह ३ बजे दावा किया कि ब्लाक राजेपुर क्षेत्र में ग्राम उजरामऊ उमेदपुर के सामने बरेली मार्ग पर छायाग्रह के पास पेंड पर मुख्यमंत्री का पुतला टांगा गया है| उन्होंने बताया कि ब्लाक बढपुर में भगुआ नगला, पुरानी घटियाघाट, बजरिया, कादरीगेट, चाचूपुर मोड़, हैवतपुर गढ़िया, ब्लाक राजेपुर के ग्राम खुटिया, निविया, इमादपुर, एस्लाईनपुर, हीरानगर, हमीरपुर, खुशहाली नगला, ब्लाक कमालगंज के ग्राम बिचपुरी, बहादुरपुर, मीठापुर, नवादा, कन्तला, ब्लाक मोहम्दाबाद के गाँव नगला इंद, ऊंची गधेडी, उखरा, भूड़ नगरिया, नवादा, सिरोली, खुरिया तथा नीव करोरी गाँव में पुतले फूंके गए|

सपा नेता श्री यादव ने बताया कि पुलिस ग्राम उखरा में राजेश यादव के वृद्ध पिता को पकड़ ले गई| ब्लाक कायमगंज के ग्राम भटासा, किसरोली, फारम नगला, चांदपुरा, बादाम नगला, हादीदादपुर सराय, भूड का नगला, भड़ारा, करनपुर, भागीपुर, उमराव, ब्राहिमपुर, तथा ब्लाक नवाबगंज के ग्राम गढ़िया, दुर्ग नगला, उलियापुर, परम नगर, गंगलऊ एवं बारंग गाँव में मुख्यमंत्री का पुतला फूंककर सरकार विरोधी नारे लगाए गए|

एएसपी श्री मिश्र ने बताया कि पुलिस की कड़ी सतर्कता के कारण जिले में एक भी पुतला नहीं फूँका जा सका| उन्होंने बताया कि चंद्रपाल सिंह को पार्टी की नौकरी करनी है वह तो कह सकते हैं कि जिले के सभी गाँव में पुतले फूंके गए|

विकास का फर्जीवाडा- ग्राम स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समितियां तक गठित नहीं!

फर्रुखाबाद: वित्त वर्ष २०१०-११ समाप्त होने को है और ग्रामीण स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समितियों का अभी गठन तक नहीं हो पाया है| वित्तीय वर्ष के अंत में उत्तर प्रदेश के अफसर साल भर के काम का बजट १० दिन में खर्च करने में जुट गए है| जाहिर है इतने कम समय में करोडो के सरकारी धन के सदुपयोग की सम्भावना न के बराबर है और होली पर जनता के धन को बंदरबाट करने का बेहतरीन मौका है|

“सबसे बुरा हाल ग्रामीण विकास पर खर्च होने वाले बजट का है| शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में इस माह लखनऊ से आने वाले बजट के हर पत्र के साथ एक लाइन लिखी आ रही है-“इस बजट का उपभोग 31 मार्च 2011 से पहले कर ले और उपभोग प्रमाण पत्र भेज दें| जाहिर है मंशा काम कराने की कम और बजट हड़प करने की ज्यादा है वर्ना ये भी तो हो सकता है कि काम देख परख कर अप्रैल में करा लें या फिर काम न हो सके तो पैसा वापिस भिजवा दें|”

बात करते हैं ग्रामीण स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समितियों की इन समितियों का मुख्य कार्य गाँव के लोगों के स्वास्थ्य ग्रामीण स्वच्छता एवं शुद्ध पेय जल के ध्यान रखने का है| इस कार्य को करने के लिए प्रति वर्ष प्रति आबाद गाँव के हिसाव से १० हजार रुपये राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की और से आवंटित किये जाते है|

डाक्टर राममनोहर लोहिया अस्पताल ने रास्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की और से परिवार कल्याण विभाग द्वारा आयोजित ग्राम प्रधान सम्मलेन में इस बात का खुलासा हुआ| अधिकतर ग्राम पंचायतों के प्रधानो को ग्राम स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति के विषय में जानकारी ही नहीं थी| गाँव में इन समितियो के माध्यम से ही स्वच्छता एवं शुद्ध पेय जल, स्कूल के बच्चो के स्वस्थ्य सम्बन्धी कार्य और परिवार कल्याण की योजनाओं का संचालन होता है| सम्मेलन में प्रधानो को ही बुलाकर सरकार ग्राम समितिओं को बलशाली बनाने का दावा करती है| हकीकत ये है कि इन समितिओं में अन्य सदस्यों का कोई योगदान ही नहीं हो पाता| कार्यक्रम में बताया गया कि समितियां गाँव में मिलकर योजना बनाएगी और बजट खर्च करेंगी| मगर जब प्रधान के अलावा समितिओं के अन्य सामान्य ग्रामीण सदस्यों को इस बात की जानकारी ही नहीं होगी तो कैसे सरकार की मंशा कामयाब होगी| हकीकत ये है कि प्रधान इन समितिओं को कोई तब्बजो नहीं देते और सरकारी नुमयांदे भी बंदरबाट ने रायता न फैले इस मकसद से समितिओं को कागजो में ही सीमित रखना चाहते है|

इस विषय पर मुख्यचिकित्सा अधिकारी डाँ पीके पोरवाल ने बताया कि वित्त वर्ष २०१०-११ के प्रारंभ में ग्राम स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समितियों का गठन किया गया था परन्तु वर्ष के बीच में ही पंचायत चुनाव हो जाने के कारण अधिकतर ग्राम प्रधान बदल गए है तथा इसके बाद प्रधानों एवं अधिकारियों के व्यस्तताओं के कारण दोवारा समितियों का गठन नहीं हो सका है|

उन्होंने कहा कि प्रधानो को ६ पंचायत सदस्यों, एनम, अध्यापकों तथा आशा वहुओं को मिलाकर तत्काल समिति के गठन का कार्य पूरा कर लेना चाहिए ताकि ग्राम स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति के खाते में पडी धनराशि का प्रयोग ग्रामीण हितों के लिए किया जा सके|

17 मार्च: फर्रुखाबाद की अपराधिक घटनायें

जहर खाकर छात्रा ने जान दी

फर्रुखाबाद: छात्रा ममता यादव ने जहरीला पदार्थ खाकर जान दे दी| ममता थाना मेरापुर के ग्राम पखना निवासी वेदपाल यादव की १७ वर्षीय पुत्री थी| उसने किसी कारण बीती रात जहर खा लिया| हालत बिगड़ने पर ताऊ रामबाबू ने रात १ बजे लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया|

आज दोपहर बाद ममता की मौत हो गई| परिजन शव को बिना बताये घर ले गए|

हादसे में युवक घायल

फर्रुखाबाद: दुर्घटना में थाना नवावगंज के ग्राम मंझाना निवासी कैलाश का १८ वर्षीय पुत्र राजेश घायल हो गया उसे लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया| साइकिल से घर जाते समय बाइक चालक ने टक्कर मार दी थी|

का कसूर हमसे हुई… जो ये सजा हमका मिली

फर्रुखाबाद: शहर का वार्ड नंवर ८ नगर पालिका की उपेक्षा के कारण तमाम तरह की समस्याओं से जूझ रहा है|लोगों को जीवन की मूलभूत सुविधाएँ बिजली पानी राशन आदि भी मयस्सर नहीं हो पा रहा हैं| लोगों के मकानों के ऊपर झूलती बिजली की जर्जर लाइनें कभी भी किसी भी समय लोगों के लिए मौत का सबव बन सकती हैं| इसके साथ ही कुछ स्थानों पर बिजली दी ही नहीं गई है| कूड़े और गंदगी से पटी गलियों और नालियों की वजह से लोगों का साँस लेना दूभर हो गया है| यहाँ के निवासियों में नगर पालिका के प्रति आक्रोश है क्योंकि नगर पालिका में कोई भी काम बिना सुविधा शुल्क के नहीं होता है और इसके देने के बाद भी काम नहीं होता है| ऐसी ही तमाम समस्याओं के बारे मैं स्थानीय नागरिकों ने jni को बताया|

राजीव: गंगानगर कॉलोनी की आशू गली में रहने वाला राजीव कक्षा १० का छात्र है| राजीव ने बताया की हमारे यहाँ नालियां भरी रहती हैं लेकिन कोई सफाई कर्मी नहीं आता है| नालियों की गंदगी धीरे धीरे गली में बहकर आने लगती है जिससे गली से निकलना दूभर हो जाता है| गली में गंदगी फैली देखकर पास पड़ोस के लोग घरों का कूड़ा कचरा भी वहीँ फ़ेंक देते हैं जिससे गंदगी और भी बढ जाती है| गंदगी अधिक होने से मच्छर पनपने लगे हैं और बीमारियाँ फैल रही हैं|बोर्ड परीक्षा नजदीक आते ही बिजली कटौती शुरू हो गई है|

राधे श्याम: ५७ वर्षीय राधे श्याम ने कहा की हमारे यहाँ बंदरों से बहुत परेशानी है घर में अन्दर रखी हुई किसी भी चीज को उठा ले जाते हैं और दो मिनट में काट पीटकर बराबर कर देते हैं| हम गरीब आदमी हैं इसलिए कच्चे झोपड़े में जिन्दगी वसर करनी पड़ती है, और बन्दर चैन से रहने नहीं दे रहे हैं| नगर पालिका के पास बंदरों को शहर से हटाने का पैसा भी है लेकिन नगर पालिका इस और कोई ध्यान नहीं दे रही है| मच्छरों से निजात दिलाने के लिए फागिंग मशीने भी कभी नहीं आती हैं|

विद्या: पती की मौत के कुछ समय बाद बेटे के भी गुजर जाने से अकेली बची विद्या दाने-दाने को मोहताज है विद्या ने बताया कि कुछ समय पूर्व मैं नगर पालिका में राशन कार्ड व विधवा पेंशन बनवाने के लिए तहसील गयी थी| वहां पूरे दिन धक्के खाने के बाद घर वापस लौट आई नगर पालिका और तहसील में गरीबों की कोई सुनवाई नहीं होती है| कुछ दिन पहले राजीव नाम का एक व्यक्ति यहाँ हमसे मिलने आया उसने कहा कि मैं तहसील में वकील हूँ और आपका काम मैं करवा दूंगा| आपको इसके लिए हमें १५ सौ रुपये देने होंगे मैंने उसे १५ सौ रुपये दे दिए और वह रुपये लेकर चला गया तव से उसका कोई पता नहीं चला हमारे पैसे भी मारे गए| विद्या अपने भाग्य को कोसते हुए कहती है यह सब उसके पूर्व जन्मो के कर्मों का फल है|

कैलाश चन्द्र: कैलाश चन्द्र ने बताया कि हमारे मोहल्ले की बैक साइड में नाला होने के कारण जल भराव की स्थिति हमेशा बनी रहती है अगर २ घंटे भी वारिश हो जाती है तो सभी घरों में पानी भर जाता है| और महीनो तक घरों में पानी नहीं सूखता है| सफाई कर्मी आते है और नालियों का सारा कचरा निकालकर गली में ही रख देते है जिसे बाद में कोई उठाने नहीं आता और सुअर उसे विखेर देते है जिससे और गन्दगी फैलती है

रानी: रानी ने बताया कि हमारे यहाँ पानी की पाइप लाइन पडी हुई है लेकिन पानी कभी नहीं आता हैंडपंप से पीने कि लिए पानी लेते है जो इतना अधिक खारा है कि जिससे चाय फट जाती है और दाल व सब्जी नहीं गलती है|