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स्पेशलिस्ट देंगें छात्रों को कम्पूटर की बेहतर शिक्षा

फर्रुखाबाद: फर्रुखाबाद विकास मंच के अध्यक्ष मोहन अग्रवाल ने आज नगर के मोहल्ला बूरा वाली गली स्थित श्री साईं कम्पूटर सेंटर का फीता काटकर उदघाटन किया|

माईक्रोसोफ्ट ऑफिस द्वारा कम्पूटर के उत्तर प्रदेश व उत्तरांचल के लांचिंग मैनेजर सईद अख्तर ने बताया कि कम्पूटर प्रशिक्षण के बाद उत्तीर्ण छात्रों को माईक्रोसोफ्ट ऑफिस स्पेशलिस्ट का प्रमाण पत्र मिलेगा जिसको इंटरनेट पर चेक किया जा सकता है| यह प्रमाण पत्र सरकारी व गैर सरकारी विभागों में भी मानी होगा|

उन्होंने बताया कि छात्रों की परीक्षा ऑन लाइन दो प्रकार की होगी| प्रथम साईबर लर्निंग की तथा दूसरी माईक्रोसोफ्ट ऑफिस स्पेशलिस्ट की| केंद्र के डायेरेक्टर नितिन गुप्ता ने बताया कि रविवार को छात्र अपना ऑन लाइन सायेबर लर्निंग पर फ्री टेस्ट कर सकते हैं| जिससे छात्रों को अपनी योग्यता की स्वयं जानकारी प्राप्त हो सकेगी कि वह कितना प्रशिक्षण ले चुके हैं|

उदघाटन के दौरान व्यापारी नेता अरुण प्रकाश तिवारी ददुआ, सतीश चन्द्र गुप्ता, संजय गर्ग, अभिनव सक्सेना, सोनू, चौधरी अमरीश गुप्ता आदि गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे|

एकजुट होकर करें आतंकबाद का मुकावला: एडीएम

फर्रुखाबाद: आतंकबाद विरोधी दिवस के अवसर पर अपर जिलाधिकारी सुशील चन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि आतंकबाद गतिविधियों की रोकथाम के लिए लोगों में एकजुट होकर मुकावला करने की जरूरत है|

उन्होंने कहा कि वर्तमान परिवेश में तमाम अवांछित ताकतें देश कि एकता व अखण्डता को तोड़ने व आतंक फैलाकर समाज में भय उत्पन्न करने का प्रयास कर रही हैं| ऐसी ताकतों को नष्ट करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को एकजुटता का परिचय देना होगा|
अपर जिलाधिकारी ने कहा कि हम भारतवासी अहिंसा एवं सहनशीलता में विश्वास रखते हैं| यदि कोई भी इसमें व्यवधान उत्पन्न करने का प्रयास करेगा तो उसको मुहं तोड़ जबाब दिया जायेगा| उन्होंने कहा कि आज हम सब प्रतिज्ञा करें कि यदि मानव जाती के सभी वर्गों के बीच शांति, सामाजिक सद्भाव तथा सूझ बूझ कायम करने और मानव जीवन मूल्यों को ख़तरा पहुचाने का कोई भी प्रयास करेगा तो उसका डटकर मुकाबला किया जायेगा|

इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी ने कलक्ट्रेट सभागार में उपस्थित अधिकारियों व कर्मचारियों को आतंकवाद से मुकाबला करने कि सपथ भी दिलवाई| डिप्टी कलक्टर रविन्द्र सिंह ने भी लोगों से आतंकवाद से डटकर मुकाबला करने का आग्रह किया|

मौनी बाबा के दर्शन करने वाले तीन लोग स्वर्ग गये

फर्रुखाबाद: मौनी बाबा के दर्शन कर वाहन से घर जाने वाले तीन लोगों की दुर्घटना में मौत हो गयी| जबकि चालक सहित तीन लोग बाल-बाल बच गये|

पड़ोसी जिला काशीराम नगर थाना पटियाली के ग्राम नर्थर निवासी पूर्व प्रधान प्रेमपाल व उनका युवा पुत्र राजीव , बाबा राम औतार सिंह तथा अरुण कुमार का १७ वर्षीय पुत्र सुमित तथा प्रेमपाल के बरेली निवासी समधी रमेश आज सुबह जाईलो कार नंबर यूपी ८२/३७८६ से फर्रुखाबाद के थाना राजेपुर के ग्राम जमापुर के निकट मौनी बाबा के दर्शन करने गये थे| सभी लोग मौनी बाबा के दर्शन कर सायं वापस लौट रहे थे| कार को ड्राईवर नरेन्द्र चला रहा था|

जब कार सायं ५:४५ बजे कोतवाली कायमगंज के ग्राम ठंडी कुईयाँ औधोगिक केंद्र के निकट से गुजर रही थी| उसी समय अनियंत्रित कार साइकिल सवार को बचाने के प्रयास में तीन वार पलटती हुई खाई में जा गिरी| राम औतार व प्रेमपाल की मौके पर ही मौत हो गयी| दुर्घटना में रमेश व राजीव बाल-बाल बच गये| राजीव ने सुमित को कायमगंज के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया| हालत बिगड़ने पर उसे लोहिया अस्पताल लाया गया जहां डाक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया|

राजीव ने बताया कि दुर्घटना में ड्राईवर नरेन्द्र भी बच गया वह घायलों को तड़पता हुआ छोड़कर भाग गया|

मनरेगा मजदूरी न मिलने की शिकायत पर होगी कार्यवाही

फर्रुखाबाद: व्यक्ति को सामाजिक प्राणी होने के नाते अपने अधिकार और कर्तव्यों की जानकारी होनी अत्यंत आवश्यक है इसके लिए जन जागरूकता की आवश्यकता है यह बात आज ग्राम पपियापुर में विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर में उपस्थित ग्राम वासियों को संबोधित करते हुए अपर जिला जज चन्द्रोदय कुमार ने कही|

उन्होंने कहा कि मनुष्य जागरूक होकर ही अपने अधिकारों की प्राप्ति कर सकता है और जागरूक होने के लिए व्यक्ति का शिक्षित होना बहुत जरूरी है, शिक्षा के आभाव में लोगों को अपने अधिकारों की सही जानकारी नहीं हो पाती है| उन्होंने कहा कि जन जागरूकता के लिए इस प्रकार के शिविरों की महती आवश्यकता है ताकि लोग अपने अधिकारों की जानकारी करके अपने अधिकारों का सही इस्तेमाल कर सकें| लोगों को चिहिये कि वे भी विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क बनाये रखे जिससे उन्हें निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त होती रहे|

विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव मीना श्रीवास्तव ने कहा की प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है की वह कोई विवाद उत्पन्न न करे और यदि कोई व्यक्ति अनावश्यक सता रहा हो तो विधिक सेवा प्राधिकरण में प्रार्थना पत्र दे जिसका निस्तारण अतिशीघ्र किया जायेगा| दैवी आपदा से प्रभावित व्यक्तियों, दहेज उत्पीडन की शिकार महिलाओं और गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले व्यक्तियों को निःशुल्क कानूनी सहायता दी जाती है| मनरेगा में जाब कार्ड धारकों को मजदूरी न मिले अथवा काम न मिले, थाणे में रिपोर्ट न लिखी जाये तो प्रार्थना पत्र दे सकते हैं, जिसके आधार पर कड़ी कार्यवाही की जायेगी|

जांच के दौरान एआरटीओ ने किया एसडीएम को पिटवाने का प्रयास?

फर्रुखाबादः जांच के उपरांत उपजिलाधिकारी सीपी उपाध्याय ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी है। रिपोर्ट के अनुसार एआरटीओं कार्यालय में भृष्टाचार और दलाली को बोलबाला है। महत्वपूर्ण अभिलेख और रिकार्ड गायब हैं। नवीनीकरण शुल्का जमा कराने के बाद भी लाइसेंस और पंजीयन को फर्जी बता देना आम बात है। स्वयं विभागीय अधिकारी श्रीराम वर्मा नियम कानून को ताक पर रखकर स्वेच्छाचारिता से कार्य करने के आदी है। स्थिति यह भी बनी कि जांच के दौरान एआरटीओ ने दलालों को उकसाकर शांति भंग कराने का भी प्रयास किया। मजे की बात है कि इतनी सब अनियमितताओं के बावजूद एक भी अधिकारी कर्मचारी के विरुद्ध एफआईआर नहीं की गयी है।

भृष्टाचार और दलाली का अड्डा बना है एआरटीओ

आठ वर्षों के रजिस्टर गायब, अभिलेओं में हेराफेरी

विदित है कि एआरटीओ कार्यालय में भृष्टाचार और दलाली की शिकायतों के आधार पर जिलाधिकारी रिग्जिन सैम्फेल ने उपजिलाधिकारी सीपी उपाध्याय और सहायक लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा साहित्य कटियार को विस्तृत जांच के आदेष दिये थे। यह बात श्री सैम्फैल के एक माह पूर्व दुर्घटनाग्रस्त होने से पूर्व ही है। डीएम ने जांच तीन दिन में करने के निर्देश दिये थे। पहले तो एआरटीओ महोदय ने जांच अधिकारियों को घास ही नहीं डाली। कई बार चक्कर काटने के बाद जैसे तैसे जांच शुरू हुई तो एआरटीओ श्रीराम वर्मा ने जांच के दौरान ही आक्रामक रवैया अख्तियार कर लिया। जो रिकार्ड लिपिकों ने प्रस्तुत किया भी उससे स्पष्ट था कि इसके साथ छेड़छाड़ की गयी है। रजिस्टरों के पेंजों पर नंबर तक नही पड़े थे, और नही इनपर किसी अधिकारी के हस्ताक्षर थें। पुराने रिकार्ड के बारे में अधिकांशतयः यही जवाब मिला कि यह अभिलेख उपलब्ध ही नहीं है। कहां गया के सवाल पर जवाब मिलता कि, पता नहीं मै तो बाद मे आया हूं। जांच के दौरान एकबार तो एआरटीओ और एसडीएम के बीच तनातनी की नौबत आ गयी। जांच के दौरान एआरटीओ ने तो बयान दिये और न ही अपना पक्ष लिखित रूप से प्रस्तुत किया।

आखिर श्री उपाध्याय ने जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को प्रेषित कर दी है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार रिपोर्ट में जो कुछ लिखा गया है वह वास्तव में जांच से अधिक एक शिकायत ही है। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 1990 से 1998 के बीच के रिकार्ड ही गायब हैं। इसकी जिम्मेदारी तक लेने को कोई अधिकारी या कर्मचारी राजी नहीं है और न ही इस संबंध में कोई एफआईआर दर्ज करायी गयी है। कार्यालय में शुल्क जमा करने की कोई रसीद उपभोक्ता को नहीं दी जाती है और न ही उसके द्वारा प्रस्तुत अभिलेखों की प्राप्ति रसीद दी जाती है। जानबूझ कर काम में विलंब किया जाता है और ऐसी स्थिति पैदा की जाती है जिससे दलालों को बढ़ावा मिले और उपभोक्ता को सीधे काम कराने में कठिनाई हो।

जांच रिपोर्ट में एक मजेदार तथ्य यह भी बताया गया है कि लगभग एक सैकड़ा ड्राइविंग लाइसेंस लंबित हैं। पूछने पर एआरटीओ ने बताया कि जिलाधिकारी की ओर से हेल्मेट रसीद दिखाने की अनिवार्यता के चलते लाइसेंस जारी नहीं किये गये। परंतु इसी के साथ लंबित लगभग दो दर्जन चार पहिया वाहनों के लाइसेंस क्यों लंबित हैं इसका जवाब किसी के पास नहीं था।

जानकारी के अनुसार जांच रिपोर्ट का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि इसमें जांच अधिकारी एसडीएम और सहायक लेखाधिकारी ने संयुक्त हस्ताक्षर से दी गयी रिपोर्ट में यह बात स्वीकार की है कि जांच के दौरान एआरटीओ ने सार्वजनिक रूप से दलालों को भड़काकर शांतिभंग कराने का भी प्रयास किया गया। शायद इसका यह आषय नहीं है कि जांच में गये एसडीएम को पिटवाने का भी प्रयास किया गया।

रिपोर्ट भेज दिये जाने के बाद भी जांच अधिकारी श्री उपाध्याय और श्री कटियार इस संबंध में कुछ भी कहने से कतरा रहे हैं। काफी कुरेदने के बाद श्री उपाध्याय ने बताया कि रिपोर्ट डीएम कैंप आफिस भेज दी गयी है। जिलाधिकारी के आदेष पर अब अग्रिम कार्रवाई की जायेगी। अभिलेख गायब होने के मामले में संबंधित कर्मचारी और अधिकारी के विरुद्ध एफआईआर की बात भी वह टाल गये।

खबर का असर: नगर पालिका ने शुरू किया नाला सफाई कार्य

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फर्रुखाबाद: नगर में बरसात के दिनों में होने वाले जलभराव के सम्बन्ध में JNI ने नगर परिक्रमा के माध्यम से कई वार्डों के निवासियों को जलभराव से होने वाली समस्याओं को प्रमुखता से लिखा| जलभराव का मुख्य कारण नालों की सफाई समय पर न होना प्रमुख रूप से सामने आया है|

JNI में प्रकाशित उन खबरों का असर नगर पालिका पर होना शुरू हो गया है| पिछले कई माह से खराब पड़ी जेसीबी मशीन को ७ मई को सही करवाकर नगर पालिका ने उसे नालों की सफाई पर लगा दिया है| नगर पालिका में सफाई प्रभारी श्याम बाबू वर्मा ने बताया कि हमने अब तक प्रथम दौर में तलैया फजल इमाम से लेकर गंगा नगर कालोनी व कादरीगेट तक नाले की सफाई का कार्य किया है और अब बंगसपुरा से लेकर दूल्हे साहब की मजार तक नाले की सफाई करवाई जा रही है|

उन्होंने बताया कि जहा जेसीबी मशीन नहीं पहुँच पा रही है उन स्थानों पर प्रत्येक रविवार को नगर पालिका के समस्त संविदा सफाई कर्मचारियों के माध्यम से नालों की सफाई का काम करवाया जा रहा है| सफाई प्रभारी ने कहा कि हमें विश्वास है कि बरसात शुरू होने से पहले सभी नालों की सफाई का काम पूरा करवा लिया जाएगा|

राजीव गांधी की जिन्दगी का सफरनामा……

राजीव गांधी नाम के जिस व्यक्तित्व पर कलम चलानी है, वह सहज संभव नहीं है । सौम्य छवि, अविचल मुस्कान से सदा परिपूर्ण रहने वाला चेहरा । यदि यह कहा जाये कि आज जिस संचार क्रांति के दम पर भारत विश्व के शीर्षस्थ देशों में से एक है, उस क्रांति को भारत भूमि पर व्याप्त करने वाला युगदृष्टा, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। उनकी पुण्यतिथि 21 मई के मौके पर राजीव गांधी के बारे में पेश है जेएनआई की विशेष रिपोर्ट-

भारत के अब तक के सबसे युवा प्रधानमंत्री राजीव गॉंधी इस देश के सातवें प्रधानमंत्री थे । कहते हैं कि विधी का विधान सुनिश्चित है। इंदिरा गांधी के दो पुत्रों में से संजय जी मूलतः राजनीतिज्ञ थे और राजीव जी को राजनीति से परहेज था। पर 23 जून 1980 का दिन राजीव गांधी के जीवन में बहुत उथल-पुथल और परिवर्तन लाया। छोटे भाई संजय की विमान हादसे में मौत और मॉं इंदिरा का राजनीति में आने का आदेश शायद राजीव जी के जीवन का सबसे बड़ा निर्णय रहा होगा। राजीव गांधी ने अपनी राजनीतिक आरूचि के बाद भी मॉं के आदेश पर राजनीति जीवन शुरू किया । छोटे भाई संजय के स्थान पर 1981 में अमेठी से पहला चुनाव जीता और लोकसभा में पहुंचे।

मुंबई में जन्म के बाद दून स्कूल फिर 1961 में लंदन, 1965 में सोनिया गॉंधी से मुलाकात और 1968 में विवाह, इंडियन एयर लाईंस में पायलट, राजनीति और प्रधानमंत्री निवास से कोसों दूर राजीव गांधी और फिर परिस्थितियोंवश अमेठी से लोकसभा उपचुनाव 1981 में। अमेठी चुनाव में लोकदल के नेता शरद यादव को दो लाख मतों से हरा कर सांसद बने । सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश की सबसे बड़ी जनसंस्था लोकसभा उनकी पहली राजनीतिक पाठशाला बनी और फिर कांग्रेस संगठन को जानने, समझने के उद्देश्य से कांग्रेस के महासचिव का जिम्मा मिला। राजीव गांधी राजनीति का अपना कौशल मजबूत करते जा रहे थे, और इस सब में सबसे बड़ी बात यह थी कि उनके व्यवहार से कभी भी यह नहीं प्रतीत हुआ कि वे भारत के प्रधानमंत्री के पुत्र हैं। निश्छलता, सौम्यता, सद्व्यवहार व वरिष्ठजनों का सम्मान राजीव गांधी की राजनीतिक पूंजी थे।

कोई व्यक्ति मानसिक रूप से कितना सुदृढ़ हो सकता है, इसकी मिसाल राजीव थे। पहले छोटे भाई की मृत्यु और चार वर्षों बाद मॉं की नृशंस हत्या, इस सब के बाद भी उनके कदम डगमगाए नहीं और वे और शक्ति के साथ भारत निर्माण की मंजिल की ओर बढ़ते गए । इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद लोकसभा में कांग्रेस का पूर्ण बहुमत था, राजीव गांधी लोकसभा के निर्वाचित सदस्य थे, फिर भी राजनीतिक शुचिता का परिचय देते हुए, उन्होंने पुनः लोकसभा में चुनाव समय पूर्व करवाए ताकि कोई यह अंगुली न उठा सके कि जनता ने इंदिरा जी को देखकर कांग्रेस को बहुमत दिया था, राजीव को नहीं । और राजीव गांधी के नेतृत्व में भारत के लोकतंत्र में इतिहास में कांग्रेस ने 542 में से 411 सीटें जीतकर एक नया रिकार्ड बनाया।
सन् 1982 के एशियाई खेलों के दौरान राजीव गॉंधी सांसद के नाते विभिन्न निर्माण स्थलों का निरीक्षण करते व कार्य करने वाले समूहों के साथ सतत् रूप से उपस्थित रहते जिससे उस समय के एशियाई खेलों का आयोजन आज भी भारत के सफलतम आयोजनों में से एक माना जाता है। जबकि ऐसा करना उनके उत्तरदायित्वों में सम्मिलित नहीं था किंतु राजीव गांधी के लिये भारत की प्रतिष्ठा सर्वोपरि थी। राजीव गॉंधी ने सत्ता की कमान सम्हालते ही यह निर्णय सबसे पहले लिया कि देश में लाइसेंस प्रणाली को समाप्त किया जाए। हर छोटी-बड़ी बात के लिए लाइसेंस और लाइसेंस के लिए रिश्वत। और राजीव गांधी सबसे पहले इस भ्रष्टाचार की जड़ को ही समाप्त करना चाहते थे

भारत की आजादी के बाद यदि किसी भी प्रधानमंत्री ने अमेरिका से रिश्ते सुधारने की सोच रखी व पहल करी तो निश्चित ही यह श्रेय राजीव गॉंधी को है और शायद राजीव गांधी की पहल द्वारा तैयार करी गयी पृष्ठभूमि पर आज भारत-अमेरिका संबंध मजबूत एवं मधूर हैं। भारत को इन संबंधों से जो लाभ मिल रहा है उसका आंकलन किया जाए तो आज की पीढ़ी राजीव जी की ऋणी है । इस दौरान विशेष बात यह भी कि भारत का सांमजस्य और सद्भाव अपने पुराने मित्र रूस के साथ भी खराब नहीं रहा। राजीव गांधी और तत्कालीन रूसी राष्ट्रपति मिखाइल गोर्वाच्योव की मित्रता ने उस समय एक नई मिसाल कायम करी थी। राजीव गॉंधी इस बात को समझते थे कि किसी भी देश की प्रगति में सबसे बड़ा ईंधन उसका मानव संसाधन है, यह मानव संसाधन सुशिक्षित और समझदार होगा तो भारत की तस्वीर एवं तकदीर बदलने में देर नहीं लगेगी। संभवतः इसलिये उनकी सरकार ने विज्ञान एवं तकनीक के विकास पर सर्वाधिक जोर दिया और सन् 1986 में एक राष्ट्रीय नीति की घोषणा करी जिसके मूल में शिक्षा के उन्नयन की बात थी इसके तहत देश भर में आधुनिक स्तर की उच्च शिक्षा देने हेतु योजनाएं संचालित की गयीं । शायद इसके मूल में यह सोच भी हो कि अच्छी शिक्षा से अच्छा रोजगार मिलेगा और यह रोजगार युवाओं को उस समय फैले आतंकवाद से दूर रखेगा ।

भारत एक प्राचीन सभ्यता जरूर है परंतु यह एक युवा राष्ट्र भी है। मैं युवा हूं और मेरे कुछ सपने हैं, जिनमें सबसे बड़ा स्वप्न यह है कि मेरा देश स्वतंत्र, सशक्त और आत्मनिर्भरता के साथ मानवता की सेवा करने वाला अग्रणी राष्ट्र हो । ऐसी सोच वाले राजीव गांधी ने सही मायनों में 21वीं सदी के अनुरूप भारत के विकास का मास्टर प्लान सोचा था । इंदिरा गांधी ने बैंको का राष्ट्रीकरण और राजा महाराजाओं के प्रिवीपर्स समाप्ति जैसे बड़े निर्णय लिये वहीं राजीव गांधी ने उनसे एक कदम आगे बढ़ते हुए एक युवा स्वप्नदृष्टा प्रधानमंत्री की छवि के अनुरूप कार्य किया और यह कहा कि मेरे पास वह योजना है जो हमारे भारत को बहुत मजबूती के साथ 20वीं सदी से 21वीं सदी में ले जायेगी जहां भारत विश्व नायक के रूप में उभरेगा।

राजीव गांधी के गद्दी संभालने के समय उन्हें आतंकवाद से जलता झुलसता भारत मिला था। उत्तरी भाग में पंजाब तो उत्तरपूर्व में असम जैसे राज्य के आम नागरिक आतंकवादी और आतंकी घटनाओं से संघर्ष कर रहे थे और यह राजीव गांधी के लिए एक बड़ी पीड़ा का कारण था। उन्होंने पंजाब में आतंकवाद के हल करने की दिशा में अग्रसर होते हुए संत हरचरण सिंह लोंगोवाल से आग्रह किया कि ऐसा कुछ सार्थक किया जाए कि जिसके परिणामस्वरूप पंजाब की जनता को आतंक की आग से बचाया जा सके और इसकी परिणिति के रूप में राजीव-लोंगोवाल समझौता सामने आया जिसका त्वरित प्रभाव यह रहा कि पंजाब के लोगों ने पहली बार मानसिक रूप से यह स्वीकार कर लिया कि पंजाब से आतंकवाद खत्म हो सकता है, और पंजाब के युवा पुनः देश के मुख्य धारा में सम्मिलित हो सकते हैं । यद्यपि संत लोंगोवाल के निधन से समझौते के परिणाम प्राप्त होने में समय जरूर लगा पर इस मानसिक दृढ़ता के बल पर ही पंजाब के लोगों ने धीरे-धीरे आतंकवाद पर विजय प्राप्त करी और आज पंजाब में सब कुछ सामान्य है ।

ऐसा ही कुछ असम में भी हुआ जहां उत्तर भारत के पंजाबियों और राजस्थान के मारवाड़ियों को स्थानीय मूल निवासी अपना शत्रु मान रहे थे । राजीव गांधी की पहल पर यह प्रयास किया गया कि यह खाई पट सके और असम में सामुदायिक सौहाद्र बना रहे, यह समस्या अभी भी यदा कदा तकलीफ देती रहती है किंतु राजीव जी के प्रयासों से यह आज भी उतनी भीषण और विकराल नहीं हो पाई है । श्रीलंका में शांति सेना भेजने का आग्रह स्वीकार कर राजीव गॉंधी ने एक बड़ा फैसला लिया था। श्रीलंका में तमिल और सिंहली दो विभिन्न समुदायों को मानने वाले लोग रहते हैं जिनमें बहुमत सिंहली लोगों का है जो मुख्यतः श्रीलंका के मध्य एवं दक्षिण भाग में रहते हैं। सिंहली बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं जिनका टकराव श्रीलंका के उत्तर एवं पूर्व मे रहने वाले तमिल लोगों से था। यह तमिल लोग सनातन हिंदू धर्म के अनुयायी हैं। यद्यपि सिंहली भी भारतीय मूल के ही हैं और उन धर्म प्रचारकों के वंशज हैं जो सम्राट अशोक के काल में बौद्ध धर्म के प्रचार के लिये श्रीलंका गये थे।

दोनों समुदायों में झगड़े की शुरूआत तमिलों द्वारा अपने लिये स्वशासन के अधिक अधिकार की मांग से शुरू हुई, जो आगे जाकर स्वतंत्र तमिल राष्ट्र की मांग बन गयी। भारत की चिंता इसलिये स्वाभाविक थी कि स्वतंत्र तमिल राष्ट्र के प्रस्तावित मानचित्र में श्रीलंका के उत्तर और पूर्वी भाग के साथ भारत के संपूर्ण तमिल व तमिल सदृश प्रदेशों जैसे तमिलनाडू, केरला व कर्नाटक आदि शामिल थे व इन तमिल विद्रोहियों ने भारत के प्रतिद्वंदी राष्ट्र पाकिस्तान से भी सांठ-गांठ शुरू कर दी थी। और इन्हीं सब कारणों से राजीव गांधी ने श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रप्रति जूलियस जयवर्धने के आग्रह पर शांति सेना को वहां भेजा क्योंकि वह भी यह दबाव डाल रहे थे कि भारत ने यदि उन्हें सहयोग नहीं किया तो वह अन्य किसी पड़ौसी राष्ट्र से सैन्य सहयोग लेंगे। अंततः 10 महीनों के बाद भारतीय शांति सेना वापस आयी। उस समय ऐसा लगा कि यह मिशन अभी अधूरा है पर जिनके आग्रह पर शांति सेना वहां गयी थी उनके हिसाब से हमें वापस भी आना था ।

राजीव गांधी को भारत की युवा शक्ति का भान एवं सम्मान था। और वह यह मानते और समझते थे कि भारत का युवा स्वयं निर्धारित करे कि उसका जनप्रतिनिधि कौन और कैसा हो ? उन्होंने एक दूरगामी कदम उठाते हुए देश भर में मतदान की निर्धारित न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष करने का कानून पारित किया। यह भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री की युवा पीड़ी को एक बड़ी सौगात थी। इस निर्णय से भारत का लोकतंत्र और सशक्त व परिपक्व हुआ और भारत के युवाओं में यह आत्मविश्वास आया कि जब हम अपना जनप्रतिनिधि तय कर सकते हैं तो हमारे लिये कुछ भी असंभव नहीं है । इस प्रकार का ही एक बड़ा निर्णय सरकारी कार्यालय और संस्थानों के बारे में लिया गया, इन सब केंद्रीय कार्यालयों में कार्यदिवस 6 से घटाकर 5 कर दिये गये । यद्यपि कुल कार्य अवधि इससे प्रभावित नहीं हुई, यह सब निर्णय स्पष्ट करते हैं कि राजीव जी के लिये दूरगामी एवं त्वरित फैसले लेना बहुत आसान था बस उन्हें यह स्पष्ट हो कि यह सब देशहित और आम जनता के लाभ के लिये है ।

निसंदेह राजीव गांधी एक ऐसे शासनाध्यक्ष हैं जिन्होंने सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने का साहस किया और माना कि उनकी सरकार मे ही जनकल्याण के लिये दिल्ली से भेजे गये ”एक रूपये में से केवल 13 पैसे जनता तक पहुंचते हैं । शेष 87 पैसे बीच का भ्रष्ट तंत्र हजम कर लेता है ।” यह भ्रष्टाचारियों से लड़ने की राजीव शैली थी जिसमें भ्रष्टाचारियों को खुली चुनौती थी कि तुम्हारे कारनामे सरकार से छुपे नहीं हैं । शाहबानो प्रकरण में मुस्लिम पर्सनल लॉ के सम्मान की बात हो या अयोध्या में रामलला के दर्शन की अनुमति हो राजीव जी जैसा साहस एवं समन्वय अतुलनीय है ।
सन् 1989 में हुए लोकसभा चुनाव में यदि राजीव गांधी चाहते तो जोड़तोड़ कर सरकार बनायी| उन्होंने जनादेश का सम्मान करते हुए विपक्ष में बैठना मंजूर किया और जनता दल की सरकार बनी । पर ढाई साल के इस नवी लोकसभा के कार्यकाल में दो-दो प्रधानमंत्री ने कुर्सी संभाली लेकिन कोई भी देश नहीं संभाल सका और फिर 1991 में दसवीं लोकसभा के चुनाव की तैयारी शुरू हो गयी। तीन चरणों में होने वाले इस मतदान के पूर्व राजीव गांधी को देश की जनता ने यह एहसास दिला दिया था कि 1989 में उनसे भूल हुई है और पूरा देश फिर एक बार राजीव गांधी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहता है। राजीव गांधी अपने व्यवहार के अनुरूप सुरक्षा की परवाह करे बगैर सीधे जनता के बीच चले जाते थे और ऐसी ही एक चुनावी सभा में 21 मई 1991 को एक आत्मघाती हमले में उनका निधन हुआ। उनके निधन के उपरांत आज भी देश और सरकार चल रहे हैं पर यह सत्य है कि यदि राजीव जी को काल ने उस समय हमसे नहीं छीना होता तो आज भारत की तस्वीर और भी बेहतर होती । आज भी कांग्रेस में कई योग्य एवं प्रतिभाशाली राजनेता हैं परंतु राजीव जी के स्थान की पूर्ति संभव नहीं है ।

हर्ष फायरिंग में बाराती छात्र की मौत, बिना वधू के लौटी बारात

फर्रुखाबाद: नशेड़ी आलू व्यापारी द्वारा रिवाल्वर से की गई हर्ष फायरिंग की गोली लगने से छात्र श्याम सुन्दर यादव की मौत हो गई तथा बैंड कर्मचारी घायल हो गया| पुलिस ने छात्र के शव का पोस्टमार्टम कराया|

कोतवाली मोहम्दाबाद के ग्राम रोहिला निवासी मेवाराम यादव के बेटे योगेन्द्र सिंह की बीती रात कन्नौज थाना ठठिया के ग्राम मन्नापुर्वा में नरेश चन्द्र के यहाँ बारात गयी थी| जिसमे गाँव के मुखराम सिंह का २३ वर्षीय पुत्र श्याम सुंदर भी गया था| द्वारचार के समय खुशी में रोहिला निवासी मौजीलाल यादव के पुत्र राजू ने रिवाल्वर से फायरिंग की| गोली बैंड बाले तथा श्यामसुंदर के सीने में लगी| जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गयी|

मेजर एसडी सिंह कालेज बीए द्वितीय वर्ष के छात्र श्यामसुंदर के मर जाने पर आलू आढ़ती राजू का नशा हिरन हो गया| वह श्यामसुंदर का इलाज कराने के बहाने अपनी जाईलो कार से रात ११:५५ बजे लोहिया अस्पताल लाया साथ में श्यामसुन्दर के बड़े भाई रामबाबू को भी लाया| डाक्टर ने श्यामसुंदर को मृत घोषित कर दिया| उसके बाद राजू दूल्हे के लिए सजाई गयी कार को लेकर गायब हो गया| वर वधू को लाने के लिए राजू की कार बुक कराई गयी थी| घायल बैंड कर्मचारी को उपचार के लिए कानपुर ले जाया गया|

बाराती की मौत हो जाने के गम में शादी की रश्मों की खानापूरी की गयी| वधू को छोड़कर बारात बैरंग वापस लौटी| छात्र के परिजनों में इस बात को लेकर रोष व्याप्त है कि राजू ने इतनी बड़ी घटना की जानकारी उसके परिजनों व ग्रामीणों को नहीं दी और मदद करने के बजाय स्वयं गायब हो गया| परिवार के महिलायें शोक में बुरी तरह बिलखती रही|

उत्तर प्रदेश में तानाशाही खत्म न होने तक होगा आन्दोलन: खुर्शीद

फर्रुखाबाद: केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सलमान खुर्शीद ने आज यहाँ सूबे की मुख्यमंत्री मायावती को चेतावनी देते हुए घोषणा की कि जब तक प्रदेश में पुलिस की तानाशाही खत्म नहीं होगी तब तक कांग्रेस का आन्दोलन चालू रहेगा|

श्री खुर्शीद ने भट्टा परसौल में पुलिस अत्याचार की चर्चा करते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री मायावती में हिम्मत हो तो वह बिना पुलिस फ़ोर्स के साथ गाँव में जाकर पीड़ितों की समस्याएं सुनें नहीं तो धारा 144 हटा लें तो वह स्वयं मीडिया कर्मियों के साथ वहां जाकर अत्याचार को उजागर करेंगें|

उन्होंने आरोप लगाया कि जनाधार खत्म हो जाने के कारण मुख्यमंत्री अब पुलिस के बल पर सरकार चला रही है| श्री खुर्शीद ने शीघ्र ही भूमि अधिग्रहण बिल लाये जाने की जानकारी देते हुए कहा कि किसानों की जमीन उनकी सहमति से बाजारू मूल्य पर सरकारी कार्य के लिए ही ली जाए|

उन्होंने विधुत प्लांट लगवाने का वायदा करते हुए कहा कि बिना बिजली के यहाँ उद्धोग नहीं लग सकता है| बेरोजगारों को सीधी नौकरी दिलवाने की व्यवस्था की है| श्री खुर्शीद ने राजीव गांधी को याद करते हुए कहा कि अब उनका सपना साकार हो रहा है, उन्होंने उस समय कम्पूटर की बात की थी जब लोगों ने नाम तक नहीं सूना था| बेरोजगारों को नौकरी दिलवाना व उन्हें कम्पूटर शिक्षा से जोड़ना राजीव जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी|

देवयानी इंटरनॅशनल ग्रुप के महा प्रबंधक प्रसून ने बताया कि ७० बेरोजगार युवकों को नौकरी के लिए सहमति पत्र दिए गए हैं| ट्रेनिंग करने के बाद उन्हें साढ़े ७ हजार से ८ हजार रुपये तक की नौकरी दी जायेगी|

पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद ने कहा कि वह अधिक से अधिक बेरोजगारों को नौकरी दिलाने के लिए अन्य बड़ी कंपनियों से भी प्रयास कर रही हैं|

शहर कांग्रेस कमेटी ने ठंडी सड़क स्थित मनोज भसीम की रिक्सा कंपनी पर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्य तिथि मनाई| राजीव गांधी के कार्यों का गुणगान करने के बाद रिक्सा चालकों को अंग बस्त्र वितरित किये गए|

बाढ़ राहत घोटालाः लेखपाल व बैंक मैनेजर सहित पांच फंसे

फर्रुखाबादः बाढ़ राहत के नाम पर एक-एक गांव में लेखपालों द्वारा सैकड़ों किसानों के नाम पर फर्जी चेक बनवाकर लाखों रुपये का घोटाला अब सामने आने लगा है। मजे की बात है कि यह गड़बड़ियां सूचना अधिकार के अंतर्गत प्राप्त की गयी सूचनाओं के आधार पर की गयी शिकयतों की जांच के बाद सामने आ पायी हैं।

सूचना अधिकार को प्रशासनिक अमला भले ही शासकीय काम काज में व्यर्थ की दखलअंदाजी मानता हो परंतु इस कानून ने कुछ कुछ अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। विदित है कि बाढ़ राहत के नाम पर तहसील स्तर पर राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से घोटालों का पर्दा फाश करने के लिये सूचना अधिकार अधिनियम के अंतर्गत कुछ जागरूक नागरिकों ने अपने अपने गांव के लाभार्थियों की सूची प्राप्त की और उनमें अपात्रों को चिन्हित कर इसकी श्किायत जिलाधिकारी से की थी। डीएम के आदेश पर हुई जांचों में अब तथ्य सामने आने लगे हैं। तहसील अमृतपुर के ग्राम परतापुर कलां में सैकड़ों अपात्रों और फर्जी नामों से 3.41 लााख रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है।

उपजिलाधिकारी अमृतपुर आरबी वर्मा ने बताया कि प्रकरण में संबंधित लेखपाल राजकुमार और ग्रामीण बैंक शाखा प्रबंधक वीरपाल सिंह सहित कई ग्रामीण भी लिप्त पाये गये हैं। उन्होंने बताया कि एक मामले में तो लखपत नाम के एक ग्रामीण ने 40 चेकों का भुगतान प्राप्त किया है। इसी प्रकार 36 चेकों का भुगतान बुद्धपाल ने निकलवाया है। एक अन्य ओम प्रकाश तिवारी की भी संलिप्तता पायी गयी है। उन्होंने बताया कि सभी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के लिये तहसीलदार को निर्देश दे दिये गये हैं।
उन्होंने बताया कि लेखपाल राजकुमार को पहले अन्य मामलों में गड़बड़ियों के चलते मूल वेतन पर रिवर्ट कर दिया गया था। यह काफी बड़ा मामला है। विभागीय कार्रवाई के चलते उसे निलंबित भी कर दिया गया है।