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मुफ्त में कपड़े मिलने से खुश हो गए निर्धन विकलांग

फर्रुखाबाद: आवास विकास स्थित रिप्प्स निर्धन विकलांग सेवा शिक्षण संस्थान में छठवां विश्व विकलांग दिवस बड़ी धूम-धाम से मनाया गया| निर्धन विकलांग 60 बच्चों को गर्म जर्सी भेंट की गयी जिससे वह काफी प्रसन्न हो गए|

कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्रीशचंद्र कटियार ने की| मुख्य अतिथि डॉ राधेश्याम गर्ग, विशिष्ट अतिथि ज्योती स्वरुप अग्निहोत्री रहे| संस्था के अध्यक्ष धीरेन्द्र सिंह फ़ौजी ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि दान एवं चन्दा से सैकड़ों विकलांग की सेवा की जा रही है| छात्रों को पाठ्य लेखन सामिग्री, स्कूल ड्रेस, मिड डे मील, चिकित्सा, विकलांग बस एवं रेलवे पास विकलांग पेंशन, पोलियो आपरेशन, सिलाई मशीने, दुकानों के खोखा भेंट करके आत्मनिर्भर बनाया जाता है|

समारोह में रक्तदाता विकलांगों तथा अतिथियों को गीता पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया गया| विकलांग छात्रों ने विकलांगता कम करने वाले तथा नाटे बच्चों का कद बढाने वाले योगासनों का प्रदर्शन किया| समारोह में चक्र सिंह यादव, विनोद गुप्ता, नरेश सिंह चौहान, प्रवन्धक सरोज राठौर, बिटाना चौहान, अमित सिसोदिया, सुनील गांधी, सुबोध अवस्थी, प्रमुख रूप से मौजूद रहे|

रिपोर्ट लिखाने थाने पहुचे एसपी: SHO और चौकी प्रभारी नपे

फर्रुखाबाद: पुलिस अधीक्षक डॉ के एजिलरशन आज से फुलफार्म पर आ गये, उन्होंने चोरी की रिपोर्ट दर्ज करने में लापरवाही वरतने वाले फतेहगढ़ कोतवाली के इंस्पेक्टर बीके मिश्र को लाइन हाजिर तथा कर्नलगंज चौकी प्रभारी रामकुमार को निलंबित कर दिया है| एसपी के कड़े रुख को देखकर जिले के पुलिस कर्मियों में जबर्दस्त हड़कंप मच गया है|

कोतवाली फतेहगढ़ के मोहल्ला नगला दीना निवासी अवधेश चतुर्वेदी के मकान का २२ नवम्बर की रात में ताला तोड़कर चोर नगदी व जेवरात निकाल ले गये थे| साधन सहकारी समिति कमालगंज के सचिव अवधेश ने रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तहरीर दी तथा कोतवाली के कई चक्कर लगाए| अवधेश ने आज एसपी के समक्ष पेश होकर उन्हें अपनी पीड़ा बतायी तो एसपी ने फोन पर ही इंस्पेक्टर की खबर ली और पीड़ित को अपनी कार में बिठाकर कोतवाली ले गये और इन्स्पेक्टर को तहरीर देकर तुरंत रिपोर्ट दर्ज कर अवगत कराने की चेतावनी दी|

एसपी के जाते ही पुलिस ने अवधेश की चोरी की रिपोर्ट दर्ज कर ली| मुकद्दमे की विवेचना उप निरीक्षक अरविन्द कुमार त्रिपाठी को सौंपी गयी| पुलिस अधीक्षक ने जिले के लापरवाह कर्मचारियों को सुधर जाने की चेतावनी देने के उद्देश्य से इंस्पेक्टर बीके मिश्र को लाइन हाजिर तथा चौकी इंचार्ज रामकुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया|

आलू की गुणवत्ता सुधारने की कवायद

फर्रुखाबाद: जिलाधिकारी मिनिस्ती एस ने फर्रुखाबाद के घटिया किस्म के आलू पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आलू की गुणवत्ता सुधारने के लिए शीघ्र ही एक सेमीनार का आयोजन किया जाएगा| जिसमे आईआईटी एवं कृषि वैज्ञानिकों के अलावा बड़े व्यवसायीयों व आलू किसानों को बुलाया जाएगा|

जिलाधिकारी ने दीप प्रज्वलित कर अग्रवाल सभा भवन में वस्त्र छपाई उधोग समिति एवं जिला उधोग केंद्र के तत्वावधान में आयोजित औधोगिक सेमीनार ( वस्त्र छपाई उधोग ) स्क्रीन प्रिंटिंग क्लस्टर समारोह का उदघाटन किया| उन्होंने वस्त्र छपाई एवं स्क्रीन प्रिंटिंग क्लस्टर की उन्नति के लिए हर संभव सहयोग करने का आश्वाशन दिया|

पीओके चीफ एक्ज्यूकेटिव रवींद्र के कपूर एवं वाईएस गर्ग ने कहा कि यहाँ की वस्त्र एवं स्क्रीन छपाई में वह गुणवत्ता नहीं है जिससे विदेशी छपाई से मुकावला किया जा सके| उन्होंने छपाई के स्तर को सुधारने के लिए आवश्यक मशीनों व तकनीकि का उपयोग करने की सलाह दी| समारोह में जिला उधोग केंद्र के महा प्रवन्धक एच डी राम, वस्त्र छपाई उधोग समिति के प्रवन्धक रोहित गोयल, अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार सफ्फ्ड, करुणानिधि अग्रवाल आदि ने भी सुझाव दिए|

जिला उधोग केंद्र के लिपिक सुनील यादव, आरडी शुक्ला, बीके सक्सेना, आरके कटियार आदि ने सहयोग किया|

पुलिस शराब ठेके पर, चोरों ने लाखों के जेवर उड़ाये

फर्रुखाबाद: फर्रुखाबाद जिले की पुलिस बीती रात शराब के ठेके पर डटी रही| उधर चोरों ने दुकानों के शटर उचकाकर लाखों रुपये कीमती जेवरात नगदी आदि कीमती सामान उड़ा दिए|

यह सनसनी खेज घटना बीती रात कोतवाली मोहम्दाबाद के मुरहास कन्हैया बाजार में हुयी| चोरों ने रात सवा दो बजे बजरिया निवासी होरीलाल वर्मा की सर्राफ दुकान शटर के ताले तोड़े| खटपट की आवाज सुनकर दुकान मालिक मुंशीलाल की वृद्ध पत्नी सूरजमुखी जाग गईं| उनके द्वारा टोके जाने पर चोर भाग गए|

सूरजमुखी नंगे पैर ही दौड़ती हुई पड़ोस के अंगरेजी शराब के ठेकें पर पहुँचीं| और चोरों के बारे में पुलिस को जानकारी दी| वहां सिपाही रामविलास, इमरान खान, होमगार्ड अजय पाल व इन्द्रपाल के साथ आराम फरमा रहे थे| जिन्होंने चोरों को तलाशने का प्रयास नहीं किया बल्कि शराब के ठेके पर जाकर सो गए| चोरों ने शराब के ठेके के निकट नगर के मोहल्ला बूरावाली गली निवासी सर्राफ रतनलाल वर्मा के शटर को उचका दिया, और दुकान से लोहे की अलमारी व शोकेस को उठाकर दुकानों के पीछे ले गए| वहां अलमारी व शोकेस को तोड़कर नगदी जेवरात निकाले|

चोरों ने रतनलाल के पड़ोसी दुकान मालिक जगवीर लोधे के फोटो स्टूडियो का भी शटर तोड़ दिया| और अन्दर से ९ हजार रुपये की नगदी ले गये| जगवीर बीती रात परिजनों के साथ विवाह समारोह में गए थे| रात १ बजे उनका बेटा संदीप स्टूडियो से कैमरा निकाल ले गया| परिजन सुबह ४:३० बजे वापस लौटे तब दुकानों के शटर टूटे देखकर चोरी का पता चला|

चोरों ने रोशनी बंद करने के लिए अध्यापक के दरवाजे के बाहर लगा बल्ब तोड़ दिया| तथा एक अन्य दुकान से स्टेपलाईजर उठा ले गए|

मोहम्दाबाद के इन्स्पेक्टर विजय बहादुर सिंह ने बताया कि पुलिस कर्मचारियों की लापरवाही से घटना हुई है| जिनके विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी| उन्होंने बताया कि रतनलाल वर्मा की रिपोर्ट दर्ज कर ली गयी है|

रतन लाल के पुत्र देवेन्द्र ने बताया कि चोर २ लाख रुपये से अधिक कीमती के जेवरात ले गए हैं|

पुलिस अधीक्षक डॉ के एजिलरशन ने बताया कि ड्यूटी करने वाले दोनों सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है तथा होमगार्डों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी जायेगी|

भ्रष्‍ट और बेलगाम अधिका‍रियों के हाथ सत्‍ता की लगाम

उत्तर प्रदेश में विकास का पहिया जाम हो गया है, साथ ही कानून व्यवस्था के भी हालात असहनीय होते जा रहे हैं, जिसे पटरी पर लाने के लिए मुख्यमंत्री मायावती ने एक बार फिर स्वयं कमान संभाल ली है। वह शीघ्र ही प्रदेश में दौरे शुरु करने वाली हैं। इस खबर से यह तो साफ हो गया है कि मायावती भी मानने लगी हैं कि प्रदेश के हालात सही नहीं हैं, लेकिन उनके दौरों से अधिक फर्क पडऩे वाला नहीं है, क्योंकि चपरासी से लेकर प्रमुख सचिव तक और सिपाही से लेकर एडीजी कानून-व्यवस्था तक के अधिकतर अधिकारियों-कर्मचारियों में लगभग एक ही जैसी मानसिकता घर कर गयी है। ऐसे में दौरों से कुछ बदलेगा, साफ तौर पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।
अब आया दौरों का दौर
वैसे मुख्यमंत्री मायावती के शुरु होने वाले दौरों को लेकर लापरवाहों, भ्रष्टाचारियों और जातिवादियों की नींद उड़ गयी है, जिससे सबके सब जमीनी हकीकत सुधारने की बजाये कागजी आंकड़ेबाजी दुरुस्त करने में जुट गये हैं, पर इतना तय है कि दौरे के दौरान मुख्यमंत्री की एक नजर भी पड़ गयी, तो कार्रवाई से कोई बचा नहीं पायेगा, लेकिन फिर सवाल उठता है कि मुख्यमंत्री हर चीज स्वयं तो देख-समझ नहीं सकतीं और जिसकी आंखों से वह देखती-समझती हैं, वह वही दिखायेंगे, जिसमें उनका स्वार्थ सिद्ध हो रहा होगा।
पूर्ण बहुमत का नशा उतरने लगा है?
खैर, पूर्ण बहुमत की सरकार होने के कारण पिछले लगभग दो सालों से मुख्यमंत्री मायावती ने समीक्षा बैठकें व दौरे कम कर दिये एवं इस बीच चुनावी व्यस्तता भी रही, जिससे सिस्टम पर भ्रष्ट, लापरवाह व जातिवादी कुंडली मार कर बैठ गये, तभी जनता हाहाकार करने लगी। शायद, यह सच किसी शुभचितंक ने मुख्यमंत्री तक पहुंच दिया, इसीलिए उन्होंने सिस्टम दुरुस्त करने का बीड़ा पुन: उठा लिया है। उन्होंने अपने दौरों से सम्बंधित गाइड लाइन जारी कर दी है, जिससे अफसरों के होश उड़े हुए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत सुधारने की बजाय सबके सब कागजी आंकड़ेबाजी दुरुस्त करने में जुट गये हैं। अगर विभिन्न विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर नजर डाली जाये तो शायद ही कोई विभाग या अधिकारी-कर्मचारी ऐसा नजर आयेगा, जो सिर्फ वेतन के लिए काम कर रहा हो या जितना वेतन ले रहा है, उतना काम कर रहा हो।
आकड़ेबाजी में उलझा ग्रामीण विकास अभिकरण विभाग-
प्रदेश के विकास विभाग की बात करते ही लोगों के दिमाग में बेहद ही भ्रष्ट विभाग की तस्वीर उभर आती है। इस विभाग के मुखिया प्रदेश स्तर से लेकर जनपद स्तर तक सिर्फ जेबें भरने का ही काम कर रहे हैं। हालात इतने खराब हो चले हैं कि इस विभाग में कमीशन के बगैर अधिकारी-कर्मचारी कुछ भी करने के बारे में सोचते तक नहीं हैं। डीआरडीए की बात की जाये तो इस संस्था को प्रत्येक जनपद में जनपद स्तर पर भ्रष्टाचार की सर्वोच्च ट्राफी देने से अपने को कोई नहीं रोक पायेगा। यह संस्था सिर्फ सरकारी धन हड़पने का माध्यम बन कर रह गयी है, जिसके बारे में सभी जानते भी हैं। विधायक व सांसद निधि के कार्यों को शुरू करने से पहले पीडी व सीडीओ को स्थलीय निरीक्षण करने का शासनादेश जारी हो चुका है एवं कार्य समापन पर भी उक्त दोनों अधिकारियों को मौके पर जाकर और गुणवत्ता देखने, परखने के बाद व संतुष्ट होने पर ही अंतिम किश्त जारी करने के स्पष्ट निर्देश हैं, लेकिन उक्त दोनों अधिकारी मौके पर सिर्फ कागजों में ही जाते हैं, बाकी सब ठेकेदार व बाबू मिल कर ही निपटाते आ रहे हैं। आरईएस और दो कदम आगे बढ़ कर काम कर रहा है। यहां भी सिर्फ कमीशनखोरों का ही राज कायम है।
लूट खसोट में चैम्पियन कल्याण विभाग
पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, नेडा, समाज कल्याण विभाग व सहकारिता विभाग पर तो किसी की नजर ही नहीं जाती है, जिससे धन का बंदरबांट यहां और भी आसानी से कर लिया जाता है। प्रोबेशन कार्यालय ने तो और भी बड़ा रिकार्ड कायम कर रखा है। प्रदेश में शायद ही कोई जनपद होगा, जहां पेंशन को लेकर घोटाला नहीं किया गया होगा। कृषि विभाग की बात की जाये, तो आम लोग कहते हैं कि इस विभाग का नाम तो सुना है, पर काम क्या है, वह नहीं जानते। लोक निर्माण विभाग के बारे में जगजाहिर है कि यहां वही होता है, जो ठेकेदार चाहते हैं। पुलिस की जीडी की तरह ही यहां एक बांड रजिस्टर होता है, जो कभी अपडेट नहीं होता, हमेशा वर्तमान से महीनों पीछे रहता है, जिससे बेईमानी का खेल खेलने में आसानी होती है, पर यह सब जानते हुए भी उच्चाधिकारी मौन ही रहते हैं, क्योंकि विभाग से मिलने वाला कमीशन ऊपर तक बंटता है।
जंगल, निकाय, सूखा और बाढ़ महकमा का लेखाजोखा नहीं मिलता
वन विभाग की बात करें, तो पिछले एक दशक में इतने पेड़ लगाये गये हैं कि प्रदेश में लोगों को रहने को जगह कम पड़ जाती, पर गनीमत ही कही जायेगी कि विभागीय अधिकारियों ने यह सब कागजों में ही किया, लेकिन इससे भी बड़ी हैरत की बात यह है कि इस सब का हिसाब लेने वाला ही कोई नहीं है। निगमों व पालिकाओं की बात की जाये तो यहां भी कमीशनखोरी का खेल खुलेआम चल रहा है, साथ ही यहां किसी का भी अंकुश काम नहीं आ रहा है। अध्यक्षगणों के मन में जो आ जाये, वही आदेश हो जाता है। प्रदेश में अरबों रुपया कमीशनखोरी की भेंट चढ़ चुका है। कांशीराम आवासीय योजना भी अफसरों व ठेकेदारों के लाभ का ही जरिया बन कर रह गयी है और सत्ताधारियों के चमचे ठेका लेकर पूरा लाभ उठाते देखे जा सकते हैं। इन्दिरा व महामाया आवास योजना का भी यही हाल है। बाढ़ खंड विभाग भी अपने कारनामों को लेकर टॉप टेन में शामिल किया जा सकता है। बांधों की मरम्मत को आने वाला धन सिर्फ कागजों में ही खर्च होता है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अधिकारियों के हाथ कांप जाते हैं। जिलाधिकारियों की बात करें तो कहीं लग ही नहीं रहा है कि जनपदों में आईएएस अधिकारी तैनात है, बस टाइम पास करते नजर आ रहे हैं। हां, इतना जरुर है कि जिलाधिकारी की बजाय अगर बाबू से मिला जाये तो काम हाथों-हाथ हो जाता है, जिससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस गरिमामयी पद का भी उत्तर प्रदेश में क्या हश्र हो गया है?
इमानदार अफसरों की बेतुकी तैनाती
वैसे तेजतर्रार या ईमानदार आईएएस व आईपीएस अधिकारी सरकार को भी पसंद नहीं हैं, यह बात इसलिए पुख्ता हो रही है कि तेजतर्रार, ईमानदार व चर्चित आईएएस एम.देवराज व आईपीएस तरुण गाबा राज भवन में तैनात हैं। बताना सही रहेगा कि देवराज प्रदेश के दर्जनभर जनपदों में तैनात किये जा चुके हैं और तीन महीने से अधिक का कार्यकाल लगभग कहीं नहीं रहा है, साथ ही उनका तबादला आदेश आते ही जनता महीनों धरना-प्रदर्शन व आंदोलन करती है, इसीतरह गाबा को तैनाती स्थलों पर आज भी आदर के साथ याद किया जाता है। सरकार की मानसिकता अगर आम आदमी को न्याय दिलाने या भयमुक्त वातावरण देने की रही होती, तो ऐसे जनप्रिय अधिकारी किसी न किसी जनपद में ही तैनात होते, जबकि वह दोनों प्रदेश छोडऩे को आतुर नजर आ रहे हैं। पिछले दिनों विदेश से व्यवस्था शिक्षा प्राप्त करके देश वापस लौटे आईएएस हीरालाल को फर्रुखाबाद में चंद दिनों एडीएम रखने के बाद लखनऊ बुला लिया गया| हीरालाल जनता के बीच काफी लोकप्रिय हो गए थे और कभी कभी भ्रष्ट व्यवस्था पर अपना मुह खोल देते थे| डीएम साहब से उनकी नहीं पटी और उन्हें लखनऊ जाना पड़ा|
रामभरोसे स्वास्थ्य सेवाएं
मुख्यमंत्री का स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विशेष ध्यान रहता है, पर विभाग आम आदमी से बहुत दूर जा चुका है। यहां पैसे के बगैर कोई गरीब तबके के मरीजों से बात तक करना पसंद नहीं करता। इस महकमे को तो मंत्रियो के बीच बात दिया गया| मलाईदार आइटम बाबुराम को मिल गए और ढांचा अनंत कुमार मिश्र के पास रह गया| दो मंत्रियो के बीच झूल रहे विभाग में अधिकारिओ और कर्मचारियो की बल्ले बल्ले हो गयी| केबिनेट मंत्री अब सूबे में ब्रह्मण नेता के रूप में खुद को स्टार प्रचारक बनाने का सपना बुन रहे है और स्वास्थ्य सेवाएं राम भरोसे|
प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था का चीर हरण
जिला पंचायत की बात की जाये तो यहां शासनादेशों को कोई अहमियत नहीं दी जाती। यहां सिर्फ अपना कानून चलता है। विकास कार्यों पर खर्च होने वाले धन में से चालीस प्रतिशत से भी अधिक धन हजम कर लिया जाता है, पर जानते हुए भी कोई कुछ नहीं कर पाता। इसी तरह शिक्षा विभाग की योजनायें अधिकारियों की जेबें भरने का माध्यम बन कर रह गयी हैं। राशन व्यवस्था की बात की जाये तो सफेदपोश, माफियाओं और अधिकारियों के गठजोड़ ने व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त ही कर रखा है। इसके अलावा प्रदेश या केन्द्र सरकार की अधिकतर योजनायें सिर्फ कागजों में ही चल रही हैं। कानून व्यवस्था की दृष्टि से देखा जाये तो अधिकतर जनपदों में थानों के प्रभारी पद का ठेका दिया जा रहा है, ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि रुपये देकर थाना प्रभारी बनने वाले इंस्पेक्टर व सब-इंस्पेक्टर जनसेवा को कितनी अहमियत दे रहे होंगे।

प्रदेश के हालातों को शब्दों में बांध पाना मुश्किल काम है। हालात सिर्फ अहसास किये जा सकते हैं, पर एसी में रहने वाले व लग्जरी गाडिय़ों में चलने वाले महसूस भी नहीं कर सकते। इस सबके बीच एक बात सुकून देने वाली यह है कि प्रदेश में गुंडों, डकैतों या बदमाशों का खौफ नहीं है, पर इन सबसे ज्यादा खौफ अफसरों का है, जिनसे जनता न लड़ सकती है और न शिकायत कर सकती है। ऐसे में मुख्यमंत्री मायावती द्वारा दौरे करने की खबर भी सुकून देती है, लेकिन विरोधियों का कहना है कि दौरों के पीछे भी कुछ और ही मकसद होगा, पर क्या होगा? इसके जवाब के लिए कुछ दिन इंतजार करना सही रहेगा।
साभार- भड़ास4मीडिया डाट कॉम
लेखक बीपी गौतम मान्‍यता प्राप्‍त स्‍वतंत्र पत्रकार हैं. जनपक्षधर एवं सूचितापरक पत्रकारिता के हिमायती हैं तथा सभी विषयों पर बेबाक लेखन करते रहते हैं

स्कूल में ही फांसी पर लटक गए गुरूजी

फर्रुखाबाद: जिन्दगी से बेहद परेशान शिक्षक पन्नालाल शुक्ला ने बीती रात अपने ही स्कूल में फांसी लगाकर जान दे दी|

कोतवाली फतेहगढ़ के मोहल्ला रंगसाजन निवासी शिक्षक पन्नालाल शुक्ला ग्राम याकूतगंज स्थित जूनियर हाईस्कूल में कार्यरत थे| बीते दिन उन्होंने ही स्कूल को बंद किया था| लेकिन वह घर नहीं पहुचे थे| उधर परेशान घर वाले उनके मोबाइल पर निरंतर देर रात तक फोन करते रहे, फोन न उठने पर परिजन मध्यरात्रि के समय स्कूल पहुचे तो उन्होंने पन्नालाल को फांसी पर लटकते देखा|

पन्नालाल का शव कालेज भवन के रोशनदान से मफलर से लटक रहा था| आज सुबह जानकारी मिलने पर देखने वालो की भीड़ जमा हो गयी| पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया| बताया गया कि स्कूल की प्रधानाध्यापक साविरा वेगम BLO की ड्यूटी पर थी, और एक अन्य शिक्षक पिंकी कटियार अवकास पर थी| पन्नालाल अकेले ही स्कूल में थे|

एवीएसए जगरूप शंखवार ने स्कूल चेक किया था| पन्नालाल ने फांसी क्यों लगाई इस बात का अभी तक खुलासा नहीं हुआ| अनुमान लगाया जाता है कि उन्होंने घरेलू कलह या एवीएसए द्वारा डांटे जाने के कारण ही फांसी लगाई है|

भुतनी सास ने बहू को घायल किया

फर्रुखाबाद: देश २१वी सदी में पहुँच गया है तब भी लोग भूत-प्रेतों पर विश्वास कर तांत्रिकों के हांथों बरबाद हो रहे हैं| आज दोपहर बाद लोहिया अस्पताल में भुतनी सास द्वारा बहू की पिटाई किये जाने का मामला चर्चा का विषय बन गया|

एक घायल युवती किसी तरह लोहिया अस्पताल के बाहर पहुँची बुरी तरह रोने वाली युवती को वहां मौजूद युवकों ने इमरजेंसी बार्ड पहुंचाया| युवती के शरीर पर पिटाई के निशान तथा मुंह से खून निकल रहा था कपड़ों पर भी खून लगा था| पूंछे जाने पर युवती ने बुरी तरह रोते हुए आप बीती सुनायी| युवती ने अपना नाम प्रियंका पति का नाम कमल दीक्षित सैनिक कालोनी फतेहगढ़ का निवासी बताया|

जनपद काशीराम नगर थाना जैथरा के ग्राम दहेलिया निवासी राम लडैते की पुत्री प्रियंका ने बताया कि ३ वर्ष पूर्व विवाह हुआ था| २ वर्ष की पुत्री अंजलि है पूर्व सैनिक ससुर रामआसरे डॉ आशा अग्रवाल के यहाँ सुरक्षा गार्ड की नौकरी करते हैं| प्रियंका ने बताया कि सास विमलेश बहुत परेशान करती है उसी ने बुरी तरह पिटाई की है और घर से निकाल दिया है, मेरी बेटी भी छीन ली है|

थोड़ी देर बाद ससुर रामआसरे पहुंचे उन्होंने बताया कि ३ वर्ष पूर्व ३० अप्रैल को मेरी पत्नी का देहांत हो चुका है उसी वर्ष १० फरवरी को प्रियंका का कमल से विवाह हुआ था| बहू के ऊपर भूत-प्रेत की छाया है तांत्रिकों से झाड़-फूंक करवा रहे हैं| गिर जाने के कारण बहू को चोटें आई हैं|

अब नहीं होगी फर्जी गिरफ्तारी: आईजी

फर्रुखाबाद: कानपुर जोन के आईजी ब्रजभूषण शर्मा ने आज यहाँ दो टूक कहा कि अब फर्जीफिकेशन किसी भी कीमत पर बर्दास्त नहीं होगा| निर्दोष व्यक्ति को गिरफ्तार करने वाले पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होगी|

आईजी श्री शर्मा ने निरीक्षण भवन में पत्रकारों को बताया कि कानपुर में फर्जी व्यक्ति की गिरफ्तारी करने वाले दरोगा को सस्पेंड किया गया तथा निर्दोष व्यक्ति को जमानत पर छुड़वाया| उन्होंने कहा कि अब पुलिस को हर हालत में शासन की मंशा को पूरा करना होगा| सभी घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज होकर तय समय पर उसकी निष्पक्ष जांच हो| आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ ही पैरवी करके उन्हें सजा दिलाई जाए|

श्री शर्मा ने स्वीकार किया किया ठोस पैरवी न होने के कारण आपेक्षित अपराधियों को सजा नहीं मिल पा रही है| अब थानाध्यक्षों को पहरोंकारों पर निर्भर न होकर संगीन मुकद्दमों की स्वयं पैरवी करनी होगी| माफियाओं को चिन्हित कर पुलिस उनके अवैध कारोवार को ध्वस्त कर जड़ से खत्म करेगी| महिलाओं व दलित वर्ग के लोगों की समस्याओं का तुरंत समाधान हो| युवा पीढी को बर्वाद करने वाला जुआं व सट्टा व्यवसाय को हर हालत में बंद कराया जाएगा|

उन्होंने कहा कि शासन की मंशा तभी पूरी होगी जब कोई भी पीड़ित व्यक्ति विना संकोच थाने में जाए और उसे तुरंत ही न्याय मिले| आईजी ने जिलाधिकारी मिस्तिनी एस, पुलिस अधीक्षक डॉ के एजिलरशन, सीडीओ चन्द्र प्रकाश त्रिपाठी, एडीएम सुरेश चन्द्र श्रीवास्तव, सिटी मजिस्ट्रेट हरिशंकर, एसडीएम सदर अनिल धींगरा के साथ क़ानून व्यवस्था के सम्बन्ध में बैठक की| इस दौरान अपर पुलिस अधीक्षक बीके मिश्र, सीओ सिटी डीके सिसोदिया आदि सीओ मौजूद रहे|

आईजी श्री शर्मा ने पुलिस लाइन के सभागार में थाना प्रभारियों के साथ बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए|

सास से प्रताड़ित बहू ने पी लिया केरोसीन

फर्रुखाबाद: नव विवाहिता अचला राठौर उर्फ़ मनु को उसकी सास ने इतने ताने दिए कि उसने मरने के लिए केरोसीन पी लिया| उपचार के दौरान अस्पताल में भी सास बहू की तीखी झड़पें हुईं|

मनु कोतवाली मोहम्दाबाद के ग्राम बाग़ रठौरा निवासी शिक्षक अवनेंद्र सिंह की २६ वर्षीय पत्नी है| घरेलू कलह के कारण मनु आज सुबह ही केरोसीन पी लिया, हालत बिगड़ने पर उसको पति ने लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया|

जिला मैनपुरी के ग्राम इन्दरपुर निवासी रामनरेश सिंह की पुत्री मनु का इसी वर्ष १३ जून को अवनेंद्र से विवाह हुआ है|

सास मुन्नी देवी ने दहेज़ में कबाड़ा लाने तथा कम अक्ल होने के इतने तीखे ताने दिए कि मनु ने मरने के लिए आज सुबह ४ गिलास केरोसीन पी लिया|

परेशान मनु आज सुबह अपने पिता से बात करना चाहती थी| मोबाइल में बैलेंस न होने के कारण घर वालों ने उसकी पिता से बात नहीं कराई| इसी बात से गुस्साई मनु ने केरोसीन पी लिया| मनु ने बताया कि सास ने मेरा जीना हराम कर दिया है| उन्होंने मुझे बच्चा पैदा करने से भी मना कर दिया है तथा बीते दिन मुझसे जेवर भी उतरवा लिए| मर जाने के लिए ही मैंने केरोसीन पिया|

कोतवाली मोहम्दाबाद के ग्राम सनौडा निवासी धर्मेन्द्र की पत्नी बबली को देखते ही मनु बुरी तरह रोते हुए बोली कि बुआ तुमने हमारा मूड़ कटवा दिया है| मुन्नी देवी ने बताया कि बबली ने ही मनु की शादी कराई है| उन्होंने बताया कि बहू झूंठे आरोप लगा रही है|

पत्नी प्रधान, जलवा प्रधान पति का

फर्रुखाबाद: महिलायें जो कभी घर की आँगन की दहलीज को पार नहीं करती थीं अब वह राजनीति में घुसकर ग्राम प्रधान के ओहदे पर विराजमान हो गईं, भले ही वह घूंघट न हटायें कहती हैं कि हम घूंघट में रहकर भी प्रधानी चला सकती हैं, वो अलग बात है कि कागजों पर या अन्य किसी कामों में हमार पति ही देखभाल करेंगे| यानी कि प्रधान पति अपनी बीबियों के कंधे पर चतुराई की बन्दूक रखकर जनता का शोषण करेंगें| बस सिर्फ नाम होगा प्रधान पत्नियों का|

प्रधान सरकार ने भले ही महिलाओं की ग्राम पंचायत में भागीदारी आरक्षण की वैशाखी के सहारे तय करके उनके चुनाव भी करा दिये। परंतु वास्तविकता के धरातल पर रुतबा प्रधान पति का ही कायम है।

पंचायत चुनावों में आरक्षण के चलते ग्राम प्रधानी का चुनाव लड़ने की हसरत पूरी न हो पायी तो क्या हुआ। पत्‍‌नी ने तो चुनाव जीत लिया। अब तो सारे निर्णय प्रधान पति ही लेने लगे हैं। वास्तविक प्रधान तो घूंघट की ओट में दहलीज भी नहीं लांघ पा रही हैं।

अब इन महिला ग्राम प्रधानों का कार्य बैंक खातों से हस्ताक्षर करके धन निकलवाने तक सीमित हो गया है। समाज में भी बिना निर्वाचित हुए इन प्रधान पतियों को प्रधान जी का दर्जा मिल चुका है। प्रशासन यदि इस तरफ ध्यान नहीं देता है तो संवैधानिक मंशा अधूरी ही रह जाएगी तथा यह प्रधान पति आए दिन अपना दखल देना जारी रखेंगे।