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जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर तहसीन का कब्जा

फर्रुखाबाद: जिला पंचायत अध्यक्ष पद की दावेदारी पर बसपा सरकार के ही नुमाईंदे का परचम लहराया|

बसपा विधायक ताहिर हुसैन सिद्दीकी के भाई तहसीन हुसैन सिद्दीकी ने १७ वोटो से जीत दर्ज कर जिला पंचायत अध्यक्ष पद की सीट हथिया ली| तहसीन सिद्दीकी के मुकावले में जनक्रांति पार्टी से अध्यक्ष पद पर अनीता यादव ८ वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहीं|

वहीं अतुल गंगवार व सपा प्रत्याशी विधायक नरेन्द्र सिंह यादव की भाभी मंजूलता यादव को एक भी वोट नसीव न होने के कारण उनकी जमानत जब्त हो गई|

मुकावले के लिए हिन्दू अस्त्र-शस्त्र से लैस हों

फर्रुखाबाद: विश्व हिन्दू परिषद् उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के क्षेत्र संगठन मंत्री महावीर सिंह ने आज यहाँ ओजस्वी भाषण देकर हिन्दू समाज के लोगों को राम मंदिर बनवाने के लिए संघर्ष करने को उकसाया|

श्री सिंह भारतीय पाठशाला में हनुमति शक्ति जागरण समिति के द्वारा आयोजित यज्ञ एवं अनुष्ठान की समाप्ति पर धर्म सभा को संबोधित कर रहे थे| उन्होंने कहा कि यदि आज अयोध्या में राम मंदिर न बना तो विरोधी भविष्य में वहां मंदिर नहीं बनने देंगे| हमारी ८० प्रतिशत आबादी के मुकावले विरोधी २०० फीसदी ही है| जिस दिन विरोधी ३५ फीसदी हो गए तो हमें होली और दीवाली जैसे त्यौहार मनाने के लिए उनकी अनुमति लेनी होगी|

श्री सिंह ने कहा कि अगर आज सरकार को हम मजबूर नहीं कर सकते तो कल हम मजबूर हो जायेंगे| उन्होंने कहा कि हिन्दू अगर आतंकी नहीं बन सकते तो कम से कम अस्त्र-शस्त्रों से अपने को सजा ही लें पता नहीं सरकार कब आतंकी बना दे|

धर्म सभा में डॉ ब्रह्मदत्त अवस्थी, देवी सहाय पालीवाल, रवींद्र सिंह भदौरिया, ज्ञान प्रकाश पाठक, हरिश्चंद्र पाठक, सुरेन्द्र अवस्थी, सूर्या प्रकाश द्विवेदी, लक्ष्मीकांत मिश्रा, भानु प्रताप सिंह, नारायण जी, विशम्भर दयाल जी, स्वामी परमानंद जी, देवाश्र्म जी स्वामी भारत चैतन्य, सदानंद जी, वीरेंद्र स्वरुप, महेश देव परमहंस, मिथिलेश ब्रह्मचारी आदि साधू-संतों ने विचार व्यक्त कर राम मंदिर को बनवाये जाने का आवाहन किया|

सहायक के लिए बीमार हुये बसपा के १३ जिला पंचायत सदस्य

सहारनपुर: जिला पंचायत अध्यक्ष पद को मतदान करने वाले बसपा के 23 सदस्यों में से 13 बीमार पाए गए हैं। इन्हें मेडिकल बोर्ड ने अनफिट करार देकर मतदान के दौरान ‘सहायक’ देने की संस्तुति की है।

12 दिसंबर को जिपं अध्यक्ष पद के लिए मतदान होना है। बसपा ने अपने 24 सदस्यों को बीमार बताया और डीएम से आग्रह किया कि मतदान के समय इन सदस्यों को ‘सहायक’ दिया जाए। जिलाधिकारी के आदेश पर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. रविश गर्ग ने इसके लिए तीन चिकित्सा विशेषज्ञों का एक पैनल बनाया। इसमें नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. एसएस लाल, सर्जन डा. राजन डंग और फिजीशियन डा. पीके बंसल को शामिल किया गया।

सीएमओ दफ्तर के एक कक्ष में सुबह साढ़े नौ बजे से इन ‘बीमार’ सदस्यों का मेडिकल परीक्षण शुरू हुआ। सीएमओ डा. रविश गर्ग ने बताया कि पैनल ने 23 सदस्यों में से 10 को स्वस्थ और 13 को स्वास्थ्य कारणों से अनफिट बताया है। इन सभी अनफिट सदस्यों को मतदान के वक्त ‘सहायक’ देने की संस्तुति के साथ जिलाधिकारी रिपोर्ट भेज दी गई है।

अगले साल डिजीटल हो जाएगा सीआईसी का कामकाज

तेज और प्रभावी कार्य परिस्थितियां निर्मित करने की दिशा में उठाये गये एक बड़े कदम के तहत केंद्रीय सूचना आयोग अगले वर्ष एक जनवरी से कामकाज के डिजीटल स्वरूप की व्यवस्था को अपना लेगा।

आयोग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि वे आयोग की मौजूदा कार्यप्रणाली को उन्नत बनाकर उसे अर्द्ध न्यायिक गतिविधियों के लिये कागज रहित स्वरूप देने के मकसद से एक समय सीमा निर्धारित करें।

मुख्य सूचना आयुक्त ए.एन. तिवारी ने कहा है कि पहले कदम के तहत आयोग के केंद्रीय पंजीयक को मिलने वाली सभी शिकायतें और अपीलें स्कैन होने के बाद डिजीटल स्वरूप में परिवर्तित कर दी जायेंगी।

तिवारी ने निर्देश दिये कि इसके बाद केंद्रीय पंजीयक द्वारा यह डिजीटल स्वरूप संबंधित सूचना आयुक्तों के पंजीयकों को भेज दिया जायेगा और वे भी डिजीटल तरीके से ही उसका निपटारा करेंगे।

इस प्रक्रिया का सूचना आयुक्त शैलेष गांधी एक परियोजना के आधार पर इस्तेमाल कर रहे हैं। वर्तमान में अपीलों और शिकायतों को सूचना आयुक्तों के कार्यालय के मुताबिक छांट दिया जाता है और कागजी स्वरूप में उन्हें संबंधित कार्यालयों में भेज दिया जाता है। बड़ी तादाद में आने वाली अर्जियों का रिकॉर्ड बनाये रखने में काफी समय खर्च होता है और इससे शिकायतें तथा अपीलें संबंधित सूचना आयुक्तों के पास पहुंचने में देरी हो जाती है।

एक अक्टूबर को मुख्य सूचना आयुक्त बनने के बाद तिवारी ने आश्वस्त कराया था कि केंद्रीय पंजीयक की कार्यक्षमता को बढ़ाना उनकी शीर्ष प्राथमिकता में रहेगा।

आयोग ने अपनी हालिया बैठक में फैसला किया कि जब तक प्रक्रिया निर्बाध नहीं हो जाती तब तक केंद्रीय पंजीयक का विभाग रसीदें भौतिक स्वरूप में भेजना जारी रखेगा।

सूचना आयुक्त एम.एल. शर्मा और शैलेष गांधी ने केंद्रीय पंजीयक के कामकाज के बारे में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट में उन्होंने कहा था कि केंद्रीय पंजीयक विभाग में पर्याप्त कर्मचारी हैं और डाक से संबंधित सभी डायरी कार्य मौजूदा कर्मचारियों द्वारा नहीं कर पाने का कोई कारण नहीं है। विभाग में औसतन प्रतिदिन 300 डाक आती हैं।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि मौजूदा कर्मचारी डेटाबेस में 400 से 475 डाक प्रतिदिन दर्ज करा सकते हैं। समिति की सिफारिशों को मंजूर कर लिया गया था और केंद्रीय पंजीयक विभाग को निर्देश दिये गये थे कि सभी बुनियादी सुविधाएं मुहैया करायी जायें।

चुनावी रंजिश में फायरिंग, पूर्व प्रधान सहित 7 गिरफ्तार

फर्रुखाबाद: प्रधानी चुनाव की रंजिश में ग्रामीण को मारपीट कर घायल कर के विवाद में हुई फायरिंग से गांव में दहशत फ़ैल गई|

थाना नवाबगंज के ग्राम पुठरी निवासी प्रेमपाल गांव के ही राजेंद्र सिंह की दुकान पर मोबाइल का रीचार्ज कूपन खरीदने गये थे। वहीं रावतपट्टी (पुठरी) निवासी सुरेश चंद्र दुकान से प्रेमपाल को गाली दी| विरोध करने पर सुरेश व उनके पुत्र श्याम सिंह ने मारपीट कर दी।

झगड़े की सूचना मिलते ही पूर्व प्रधान सुधाकर सिंह साथियों के साथ प्रेमपाल का पीछा करते रावतपट्टी पहुंचे तथा गाली गलौज करने लगे। प्रेमपाल को बचाने उनके समर्थकों के आ जाने पर फायरिंग शुरू हो गयी| भयभीत ग्रामीण घरों में दुबक गये, तीन दर्जन से अधिक हुई फायरिंग की जानकारी किसी ने फोन पर एसपी को दे दी।

मौके पर पहुंची पुलिस ने पूर्व प्रधान सुधाकर सिंह, राकेश, सर्वेश, बब्लू तथा दूसरे पक्ष में विक्रांत, रवी तथा उमेश निवासी जनपद हरदोई को शांतिभंग करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया| प्रेमपाल ने बताया कि चुनाव में प्रधान की सीट अनुसूचित जाति की आरक्षित होने के कारण उसने रामऔतार का समर्थन किया था जिसके कारण सुरेश चंद्र रंजिश मानते हैं।

रंजिश के कारण उनके साथ गाली गलौज तथा मारपीट की तथा भागते समय पीछा करने पर फायरिंग की गयी। पुलिस ने प्रेमपाल की ओर से सुरेश चंद्र व उनके पुत्र श्याम सिंह के विरुद्ध एनसीआर दर्ज कर ली| तथा घायल का डाक्टरी परीक्षण कराया।

जेल से मुर्दा कैदी को ले जाया गया इलाज के लिए

फर्रुखाबाद: केन्द्रीय कारागार फतेहगढ़ में बीमारी आदि के कारणों से कैदियों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है|आज तड़के जेल में बंदी की मौत हो गयी, तब उसके शव को इलाज कराने के लिए लोहिया अस्पताल ले जाया गया|

सेन्ट्रल जेल के बंदी रक्षक भानुप्रताप व रामसेवक मिश्रा ८१ वर्षीय एक मृत कैदी श्रीकृष्ण को लेकर इस तरह सुबह ५:१० बजे लोहिया अस्पताल पहुंचे और कहा कि कैदी की हालत बहुत गंभीर है| डॉक्टर ने एक नजर में ही ताड़ लिया कि जेल से मुर्दे को लाया गया है|फिर भी उन्होंने चेकअप करने के बाद उसे मृत घोषित कर दिया|

श्रीकृष्ण जिला हरदोई थाना मल्लावां के ग्राम विशेश्वरपुर के रहने वाले थे|हत्या के मुक़दमे में उन्हें २५ मई २००७ को आजीवन कारावास की सजा हुई थी|वह १० जून २००७ को सेन्ट्रल जेल लाये गए थे|जेल कर्मचारी श्रीकृष्ण की बीमारी के बारे में जानकारी नहीं दे सके|

जूठी पत्तलों पर लोट लगाने की प्रथा बंद हो: मायावती

लखनऊ|| मुख्यमंत्री मायावती ने कर्नाटक में आस्था के नाम पर अनुसूचित जाति के लोगों द्वारा जूठे पत्तलों पर लोट लगाये जाने की प्रथा की निंदा की है। उन्होंने कहा है कि चर्म रोगों के उपचार के नाम पर इस प्रथा का जारी रहना अमानवीय और अपमानजनक है, इसलिए कर्नाटक सरकार को इस अमानवीय प्रथा पर तत्काल प्रतिबंधित लगाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कर्नाटक में जारी इस प्रथा को भारतीय संविधान के समानता के अधिकारों के विपरीत बताते हुए कहा है कि इलाज के बहाने जातिवादी मानसिकता में जकड़े हुए तत्व अनुसूचित जाति के लोगों की गरिमा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

इस पर रोक लगाने के लिए कर्नाटक सरकार को तत्काल कदम उठाना चाहिए क्योंकि यह प्रथा न केवल अमानवीय है अपितु संविधान की मूल भावना के पूर्णत: प्रतिकूल है। इसलिए कर्नाटक सरकार इस प्रथा को तत्काल प्रतिबंधित कर अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करे।

99 साल की हुई राजधानी दिल्ली

अंग्रेजों ने सबसे पहले 11 दिसंबर 1911 को दिल्ली को पहली बार अपनी राजधानी बनाया था. इन 99 वर्षों में दिल्ली ने बेशुमार तरक्की की है.

पहली बार अंग्रेज शासन खुद सर-ए-हिंद की सर जमीं पर हिंदुस्तानियों के वजूद का जायजा लेने पहुंचा. दुनिया भर में गोरे शासन की अगुवाई करने किंग जॉर्ज पंचम क्वीन मैरी के साथ आए. उस समय जब पूरी दुनिया आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रही थी तब अंग्रेज शासक अपने सिर पर एक ऐसा ताज सजाए थे, जिसमें छह हजार से ज्यादा हीरे-जवाहरात जड़े थे. इसके साथ दिल्ली के ताज में एक नया मुकाम जुड़ा और अंग्रेजों की नई राजधानी मिली.

राजधानी नई थी लेकिन शहर पुराना था. इसके बाद दिल्ली में बदलाव की बयार बहने लगी. अंग्रेज एक ऐसे सेफ हाउस की तलाश में थे जो दिल्ली की चारदीवारी के भीतर हो और जहां से सरकार चलाई जा सके. इसके लिए उस जगह को चुना गया जो आज दिल्ली की विधानसभा के रूप में जाना जाता है. यहीं पर इंपीरियल काउंसिल की पहली मीटिंग हुई.

राजधानी बनने के बाद देश के हर हिस्से से यहां लोगों की आवाजाही बढ़ गई. कुछ समय बाद अंग्रेज हुक्मरानों को अपने बच्चों के लिए अच्छी तालीम की जरूरत महसूस होने लगी और इसके बाद दिल्ली यूनीवर्सिटी वजूद में आई. यहां से जो पढ़ लिखकर निकले उन्हें बड़ा अफसर बनाने के लिए यूपीएससी का जन्म हुआ. पद मिला तो पैसा आने लगा. अंग्रेजों के ठाठ बाट और अच्छा पहनने के शौक के कारण कनाट प्लेस बना.

ब्रितानिया सरकार ने देश पर शासन करने के लिए एक व्यवस्था की जरूरत महसूस की. इसके लिए सरकार 1857 के आंदोलन के बाद एक ऐसे सेफ हाउस की तलाश में थे जो पूरी तरह अंग्रेजों की जरूरत के लायक हो और जहां अंग्रेज हुक्मरान बैठकर देश के आवाम पर लगाम कस सकें. इस सपने को अंग्रेजी वास्तुकार एडविन लयूटिन्स ने साकार किया.

लयूटिन्स की सोच पर 1931 में राष्ट्रपति भवन बनकर तैयार हुआ. दूसरे विश्वयुद्ध में अंग्रेजों की जड़ें कमजोर हो गईं तो वह दिल्ली को बसाने की बजाए अपने को बचाने में लगे रहे. आखिरी बार अंग्रेजों ने राजपथ पर 1947 में आखिरी बार सलामी ली.

अंग्रेज चले गए और भारत ने दो सौ साल बाद आजादी का सूरज देखा.

1911 से 2010 इन 99 वर्षों में दिल्ली का चेहरा पूरी तरह बदल गया है. कभी वाल सिटी के नाम से जानी जाने वाली दिल्ली आज दुनिया के बड़े और अहम शहरों में शुमार है.

1965 के बाद 1984 में हुए एशियाई खेलों के बाद दिल्ली के विकास में तेजी आई. दिल्ली ने देश के साथ दुनिया के नक्शे पर भी अपनी मौजूदगी बड़े शहर के रूप में दर्ज कराई.

दिल्ली में कांग्रेस सरकार के आने के बाद राजधानी की शानोशौकत में चार-चांद लग गए. दिल्ली के कोने-कोने तक फैली मेट्रो ट्रेनें और बढ़ते फ्लाईओवर शहर की पहचान बन गए. घनी हरियाली और लंबी चौड़ी सड़कों के साथ-साथ दिल्ली की लाइफ स्टाइल में तेजी से बदलाव आया. कॉमनवेल्थ गेम्स की सफल मेजबानी ने तो दिल्ली को लंदन और पेरिस जैसे शहरों की बराबरी में खड़ा कर दिया.

शहर का विकास तेजा से हुआ लेकिन इसके साथ दिल्ली की अपनी तहजीब जैसे कहीं खो सी गई है, लेकिन पुरानी दिल्ली अब भी उस पुरानी दिल्ली के अंदाज को कुछ हद तक जिंदा रखे हुए है.

नकली नोट के साथ एक गिरफ्तार

कानपुर। काकादेव क्षेत्र में पुलिस ने जौनपुर के एक व्यक्ति को कथित रूप से करीब 13 हजार रूपए के नकली नोटों के साथ गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने इस बारे में उससे पूछताछ कर रही है। पुलिस के अनुसार सूचना के आधार पर पांडुनगर के डबल पुलिया के पास से जौनपुर के अजय मिश्रा को पकडा और उसकी तलाशी ली तो उसके पास से 500 रूपए के पांच नकली नोट तथा 100 रूपए के 103 नकली नोट बरामद हुए।

तलाक लेना है तो एक साल रहो दूर: हाईकोर्ट

नई दिल्ली|| उच्च न्यायालय का कहना है कि शादी के बाद आपसी सहमति से तलाक लेने के लिए दोनों पक्षों को कम से कम एक साल अलग रहना होगा, वरना तलाक नहीं मिलेगा। एक नव दंपति ने उच्च न्यायालय में अर्जी दाखिल कर कहा था कि एक साल की तय सीमा को खत्म किया जाना चाहिए।

उच्च न्यायालय ने दोनों की अर्जी खारिज कर दी। न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर ने कहा, आपसी सहमति से तलाक लेने के लिए हिंदू विवाह अधिनियम में दी गई शर्तो का पालन करना जरूरी है। इस कानून में दी गई एक साल की शर्त कोई औपचारिकता नहीं बल्कि एक प्रावधान है। दो पक्षों को एक साल तक अलग रहने में असुविधा होगी, महज इस आधार पर कानून में बदलाव नहीं किया जा सकता है और न ही अदालतों के पास यह अधिकार है।