मुश्किलों में फंस सकते हैं बाबा: टैक्स चोरी को लेकर इनकम टैक्स की रिपोर्ट तैयार

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ब्लैक मनी के मुद्दे पर छह दिनों के अनशन के दौरान कांग्रेस को निशाने पर लेने वाले बाबा रामदेव आने वाले दिनों में मुश्किलों में फंस सकते हैं। सरकार ने रामदेव के ट्रस्टों और आयुर्वेदिक उत्पाद बनाने वाली कंपनी में कथित टैक्स चोरी को लेकर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से एक भारी-भरकम रिपोर्ट तैयार करवा ली है। हालांकि, सरकार का कहना है कि बाबा के खिलाफ रिपोर्ट पहले से जारी जांच का हिस्सा है और इसे बदले की कार्रवाई के तहत नहीं देखना चाहिए।

बाबा रामदेव ने मंगलवार को अपना अनशन तो खत्म कर लिया, लेकिन सरकार के खिलाफ ‘कांग्रेस भगाओ देश बचाओ’ का नारा देते हुए आंदोलन छेड़ दिया है और अपने समर्थकों से अगले लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को सत्ता से उखाड़ फेंकने की अपील की।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के सूत्रों के मुताबिक रामदेव के ट्रस्टों को दी जाने वाली टैक्स छूट को वापस लिया जा सकता है, क्योंकि यह छूट चैरिटेबल कामों के लिए दी जाती है, जबकि यह ट्रस्ट इसका कर्मशल इस्तेमाल कर रहे हैं। एक बार टैक्स छूट वापस लेने के बाद रामदेव को न केवल टैक्स चुकाने पड़ेंगे बल्कि उनके खिलाफ टैक्स चोरी और पैसे की हेराफेरी की कार्रवाई भी हो सकती है। अगर रामदेव के ट्रस्टों के खिलाफ इनकम टैक्स की कार्रवाई होती है तो उन्‍हें 250 करोड़ से लेकर 300 करोड़ रुपये की रकम टैक्स के रूप में चुकानी पड़ सकती है। इतना ही नहीं, पिछले 6 सालों में किए गए लेन-देन की भी जांच की जाएगी।

सूत्रों के अनुसार, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की दो भाग में तैयार की गई इस भारी-भरकम रिपोर्ट में बाबा रामदेव की आयुर्वेद कंपनियों और उनके द्वारा कमाए जा रहे लाभ पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में पतंजलि योगपीठ पर उंगुली उठाई गई है कि चैरिटी के नाम पर टैक्स छूट का फायदा उठाया जा रहा है और कमाई की जारी है। रिपोर्ट में बाबा रामदेव के योग कैंपों से होने वाली कमाई और चैरिटी के नाम पर किए गए खर्चों के हिसाब की छानबीन की गई है। सरकार रामदेव के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने से पहले बाबा रामदेव की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही है।

वित्त मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने बताया है कि रामदेव के ट्रस्टों के खातों की जांच पहले से ही चल रही है। इसलिए इसका ब्लैक मनी के मुद्दे पर बाबा रामदेव के सरकार पर किए गए हमले से किसी तरह का कोई लेना-देना नहीं है।

डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ सेंट्रल एक्साइज इंटेलिजेंस (DGCEI) ने स्पेशल ऑडिट में इन बिंदुओं पर बाबा के ट्रस्टों और संगठनों की जांच की है....
1. पतंजलि योग पीठ ट्रस्ट (PYPT) की डीड में बाबा को असीमित ताकत।
2. योग कैंपों के आयोजन पर कॉर्पोरेट मेंबर्स से फीस न लेकर 11 हजार रुपये से लेकर 11 लाख रुपये तक का डोनेशन लिया जाता था।
3. पतंजलि योग पीठ ने बिना रजिस्ट्री के काफी जमीन हासिल की है।
4. सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) की अनुमति के बिना ही ट्रस्ट ने देश के बाहर ऐक्टिविटीज आयोजित कीं।
5. रिपोर्ट के अनुसार, ट्रस्ट ने कई गैरकानूनी काम किए। योग ग्राम और पतंजलि योग पीठ-2 ऐसी जमीनों पर बनाई गईं, जो कानूनी रूप से उनकी है ही नहीं। इन पर 64.20 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
6. वानप्रस्थ स्कीम के लिए रजिस्टर्ड करने वाले लोगों से आजीवन मुफ्त आवास की सुविधा के बदले फीस ली जाती थी। इस रकम को डोनेशन के नाम पर छूट नहीं दी जा सकती क्योंकि यह रकम सेवा देने के बदले ली जा रही है।