9 लोगों की जिंदगी ले चुका है यूपी में हुआ NRHM घोटाला

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लखनऊ। यूपी मेडिकल घोटाले से जुड़े सीएमओ मर्डर केस में सीबीआई ने लखनऊ के पूर्व सीएमओ ए के शुक्ला को गिरफ्तार किया है। शुक्ला पर पहले से ही मेडिकल घोटाले में शामिल होने का आरोप है। उन्हें इस मामले में गिरफ्तार भी किया जा चुका है। लेकिन अब सीबीआई ने उन्हें सीएमओ बी पी सिंह और विनोद आर्या की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है। फिलहाल शुक्ला घोटाला मामले में जमानत पर चल रहे थे।

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गौरतलब है कि 5 हजार करोड़ के इस घोटाले में शुरू हुआ मौत का खौफनाक सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। दो सीएमओ समेत अब तक छह लोग इस घोटाले की बलि चढ़ चुके हैं। शुरू में ये योजना मुख्यमंत्री के अधीन ही चलाई जा रही थी जिसे बाद में परिवार कल्याण महकमे के तहत कर दिया गया।

अब तक हुई 9 मौतों में 5 हत्या, 1 खुदकुशी, 3 संदेहास्पद हालात में मारे गए।

अब तक कौन, कैसे मारा गया, क्या थी वजह?

1- डॉ. बच्चीलाल रावत, डीजी मेडिकल एंड हेल्थ

कैसे: घर लौटते समय गोली मारकर हत्या।
वजह: ड्रग माफिया की मदद से इंकार।

2- आरएस शर्मा, एडिशनल डायरेक्टर

कैसे: लखनऊ में उनके चेम्बर के बाहर गोली मारी।
वजह: माफिया को दवा ठेके देने का विरोध किया।

3- डॉ. ओमप्रकाश चिंपा, सीएमओ इटावा

कैसे: आधी रात को घर के बाहर गोली मारकर हत्या।
वजह: ठेके देने में ड्रग माफिया को नाराज किया।

4- डॉ. विनोद आर्य, एनआरएचएम सीएमओ

कैसे: अक्टूबर 2010 को सैर के दौरान हत्या।
वजह: ड्रग माफिया को ठेके देने से इनकार किया था।

5- डॉ. बीपी सिंह, एनआरएचएम सीएमओ

कैसे: अप्रैल 2011 में मॉर्निग वॉक के दौरान हत्या।
वजह: महकमे की कई गड़बड़ियां पकड़ी थीं।

6- डॉ. योगेंद्र सचान, डिप्टी सीएमओ

कैसे: जून 2011 में लखनऊ जेल में फांसी पर लटके मिले। पोस्टमार्टम में शरीर पर गहरे जख्म।
वजह: बीपी सिंह और आर्य की हत्या का आरोप। पूछताछ में बड़े नाम उजागर होने के संकेत थे।

7- सुनील वर्मा, प्रोजेक्ट मैनेजर

कैसे: जनवरी 2012 में गोली मारकर खुदकुशी।
वजह: बड़े नामों का खुलासा करने का दबाव था।
एजेंसियों को पूछताछ में सफलता मिलने वाली थी।

8- डॉ. शैलेष यादव, डिप्टी सीएमओ

कैसे: यादव की कार ट्राले में घुसी। मौके पर मौत।
वजह: सीबीआई के सामने खुलासे करने वाले थे।

9- महेंद्र शर्मा, क्लर्क हेल्थ डिपार्टमेंट

कैसे: 7 फरवरी से लापता। 16 फरवरी को शव मिला।
वजह: उनके पास बड़े घोटाले से जुड़ी जानकारी, कागजात थे। जिन्हें वे सीबीआई को सौंप सकते थे।

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