कवि सम्मेलन- देह के संगीत में है गीत की साँसे प्रवाहित

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kavi-sammelanफर्रुखाबाद: साहित्यिक, सामाजिक संस्था वागिव्भा के तत्वावधान से आयोजित कवि सम्मेलन में कविताओं के माध्यम से समाज और उसमे चल रही विषमताओं के विषय को उठाया गया | कवियों ने एक से बढ़कर एक कवितायें प्रस्तुत की |

नुनहाई स्थित हिन्दी भवन में आयोजित कार्यक्रम में काव्य पाठ करते हुए मैनपुरी से आये कवि बलराम श्रीवास्तव ने काव्य पाठ करते हुए कहा कि –

शब्द शांकल को बजाकर भावना के द्वार खोले |

हो गया है अब सवेरा साधना के द्वार खोले ||

कमालागंज से आये डॉ राम आसरे दीक्षित निराला राही ने काव्य पाठ करते हुए कहा कि –

अपनी वाणी से मत विषमय कीजिये, प्रेम पीयूष का आचमन कीजिये ||

लोग बढ़कर लगा ले तुम को गले, पहले अपने अहम् का हवं कीजिये ||

उपकार मणि उपकार ने काव्य पाठ करते हुए कहा कि-

दिल जला के सफ़र करना है मजबूरी मेरी, बहुत मध्यम हो गयी है रोशनी आकाश की ||

गर्म रोटी की महक से कर दिया पागल उसे, बहुत भारी पड़ रही है,

कार्यक्रम में कवियों द्वारा पढी गयी कविताओं को सुनकर मौजूद लोग भाव विभोर हो गए | डॉ शोभा रानी श्रीवास्तव को नारायण देवी चतुर्वेदी सम्मान दिया गया | इस दौरान कार्यक्रम का संचालन गरिमा पाण्डेय ने किया | डॉ शिवओम अम्बर, व्यापारी नेता अरुण प्रकाश तिवारी ददुआ, सुरेन्द्र पाण्डेय, निमिष टंडन, कन्हैया लाल, महेश चन्द्र शुक्ला, रेखा मिश्रा.मधु गौर, बलराम श्रीवास्तव आदि लोग मौजूद रहे |

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