संप्रदायिक सौहार्द की मिसाल: शिव मंदिर के पुजारी बने जान मोहम्मद

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टीटू यादव (नवाबगंज) फर्रुखबाद: कभी-कभी कुछ ऐसी घटनायें घट जाती हैं जो बाकई में किसी व्यक्ति विशेष को आकर्षण का केन्द्र बना देती है। कहते हैं सभी धर्म एक हैं हिन्दू मुस्लिम, सिख, ईसाई आपस में किसी तरह का भेदभाव नहीं करते। सभी धर्मों की नावें उसमें बैठे यात्री को नदी के उस पार ले जाने का ही काम करतीं हैं चाहे वह नाव काठ की हो या सोने की हो। बस व्यक्ति विशेष की बुद्धि का फेर है। इस कहावत को नबावगंज क्षेत्र के बरतल गांव में शिव मंदिर में पुजारी बने जान मोहम्मद ने जीवंत कर दिया। जान मोहम्मद सावन के महीने में मंदिर में पुजारी बनकर जॉप इत्यादि करने लगे हैं। जान मोहम्मद को देखने के लिए लोगों का हुजूम प्रति दिन मंदिर में उमड़ रहा है।

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घटना कई वर्ष पूर्व की है। मुस्लिम धर्म से ताल्लुक रखने वाले जान मोहम्मद का विवाह होने के बाद अपने परिवार के साथ जीवन यापन करने लगे। लेकिन समय के फेर को वह नहीं रोक सके। सच्चे मुसलमान रहे जान मोहम्मद की बेगम ने आत्महत्या कर ली।जान मोहम्मद अपने ही मोहल्ले में बने बरतल के शिव मंदिर में मन्नत मांगने पहुंचे। जहां उनकी मन्नत पूरी हुई। जान मोहम्मद तो इसे बरतल के शिव मंदिर का ही वरदान मान रहे हैं। शिव मंदिर से प्रभावित होकर जान मोहम्मद गेरूआ वस्त्र धारण कर, हाथ में रुद्राक्ष माला लेकर मंदिर में पूजा अर्चना करने लगे। मुसलमान को पूजा अर्चना करते देख कुछ मोहल्ले वालों ने पहले तो टीका टिप्पणी की लेकिन जान मोहम्मद की मंदिर के प्रति निष्ठा को देखते हुए अंत में उन्हें मंदिर का पुरोहित घोषित कर दिया।

मोहल्ले के ही सूरजगिरि के अनुसार सभी धर्म एक समान हैं और अगर मुसलमान मंदिर में पुजारी बना है तो इसमें उन्हें कोई ऐतराज नहीं है क्योंकि मंदिर में पूजा करने का हक हर इंसान का है। फिलहाल जान मोहम्मद क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए हैं।

 

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