विदेशी बैंको में देश का काला धन- सरकार की हालत भीगी बिल्ली जैसी

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सतीश दीक्षित की कलम से-

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“चोर की दाढी में तिनका” की तर्ज पर बाबा रामदेव के प्रस्तावित आन्दोलन से केंद्र सरकार बुरी तरह से डर गई है| अन्ना हजारे द्वारा जन लोकपाल विल के लिए जो अभियान प्रारम्भ हुआ था सरकारी स्तर पर उसमे पलीता लगाने की कोशिशें पहले दिन से ही पर्दे के पीछे से चल रही थीं| यह अब पूरी तरह उजागर हो गया है| परन्तु बाबा के प्रस्तावित कार्यक्रम ने सरकार की षड्यंत्रकारी गति विधियों की हवा निकाल दी है| काले धन, भ्रष्टाचार जन लोकपाल जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर सरकार इससे पहले कभी इतने दवाव में नहीं दिखी|

वास्तविकता तो यह है कि काले धन, भ्रष्टाचार, जन लोकपाल जैसे ज्वलंत और जन हित के मुद्दों पर सरकार कभी गंभीर नहीं रही| यदि ऐसा न होता तो स्थित आज की तरह विकराल और विस्फोटक नहीं होती| बचकानी हरकतों को केंद्र सरकार ने पहले अन्ना हजारे के आन्दोलन में दाल नहीं गली तो सयुंक्त समिति गठित कर दी| राजनैतिक वियावान में भटक रहे लोगों द्वारा गैर सरकारी सदस्यों पर ढेरों कीचड डलवाया गया| यही लोग समिति के सरकारी सदस्यों पर सार्वजनिक रूप से गलबहियां डाले और उनकी चरण बंदना करते देखे गए| सरकारी सदस्यों ने अपनी इच्छा पिछली मीटिंग में दर्शा दी| नतीजतन वार्ता अमे गतिरोध आ गया| अब केंद्र सरकार और प्रदेश सरकारों व राजनैतिक दलों के नेताओं को इस सम्बन्ध में पत्र लिख रही है| यह पत्र जरूरी होने पर डेढ़ माह पूर्व ही लिखे जा सकते थे| फिलहाल इस गतिरोध के जल्दी समाप्त होने के आसार नहीं दिख रहे|

परन्तु भ्रष्टाचार का मुद्दा अब देश व्यापी हो गया है| यह अब सरकार की कोशिशों से थमने वाला नहीं है| आन्दोलन चाहें अन्ना हजारे का हो या बाबा रामदेव का| सरकार जितनी ढिलाई बरतेगी, मामले को टालने की कोशिश करेगी उसकी विश्वसनीयता रसातल में जायेगी और लोगों का आक्रोश बढ़ता जाएगा|

केंद्र सरकार अपने को जन तांत्रिक परम्पराओं का अलम्बरदार सिद्ध करने के लिए प्रदेश सरकार और राजनैतिक दलों के पत्र लिख रही है| बीते दिनों में इनमे से किसी ने इस मुद्दों के प्रति कोई गंभीरता दिखाई हो या जन आंदोलन चलाया हो ऐसा कहीं भी परिलक्षित नहीं होता| सही पूंछो तो हमारी अधिकांस प्रदेश सरकारें अल्पमत सरकारें हैं| राजनैतिक दल विरासत बिरादरी और कुनवा परस्ती से संचालित होते हैं| यह इन मुद्दों पर कभी सहमत और एक राय नहीं हो सकते|

सरकार में यदि हिम्मत है और वह इन मुद्दों को लेकर वास्तव में गंभीर है तब उसे इस प्रकार की ड्रामेबाजी करने के स्थान पर इस मसलों पर जनमत संग्रह की चुनौती स्वीकार कर लेनी चाहिए|

विदेशी बैंको में कालेधन की समस्या देश में ऊपर से नीचे तक फैले भ्रष्टाचार से भी विकराल है| इस समस्या को बढाने और इसके अनदेखी करने के लिए केवल और केवल केंद्र सरकार जिम्मेदार है| जब-जब यह मुद्दा उठा सरकार ने कमेटी बनाने विदेशी बैंको से वार्ता और पत्राचार करने जैसी बातें कर मामले पर लीपापोती करने का ही प्रयास किया| अब जब बाबा रामदेव अपार जन समर्थन के बल पर आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं| केंद्र सरकार अपनी तिकड़मों से मामले को ठंडा करने और टालने के प्रयासों में लगी है|

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जिन लोगों का विदेशी बैंको में काला धन है वह देश द्रोही हैं| विकीलीक्स ने खुलासा किया कि विदेशी बैंको में सर्वाधिक कालाधन हमारे देश वासियों का है| इसके बाद किसी भी राजनैतिक दल ने यह कहने की हिम्मत नहीं जुटाई कि उससे प्रत्यक्ष रूप से जुड़े किसी भी व्यक्ति का विदेशी बैंको में कालाधन नहीं है| आखिर डर किस बात का है| आप तो चुनाव दौरान और बाद में संसद और विधान सभाओं में अपनी संपत्ति की शपथ पर घोषणा करते हैं| १ अरब २२ करोड़ से अधिक आवादी वाले इस देश में विदेशी बैंको में कालाधन जमा करने वाले एक प्रतिशत से अधिक लोग नहीं होंगें| शक की सुईयां भी बहुतों पर हैं|

केंद्र सरकार और उसके सहयोगी संगठन और संस्थाएं तो इस मामले पर मौन हैं ही| कोई भी जन प्रतिनिधि, नौकरशाह, उधोगपति इस मामले में मिशाल और आदर्श प्रस्त्तुत करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है| ऐसा लग रहा अहै कि अगर वह स्वतः अपने स्तर से विदेशों में कालाधन न होने की घोषणा कर देंगे उस स्थित में उनकी हैसियत, रुतवा और दर्जा गिर जाएगा| लोग कहने लगेंगें कि देखो बहुत बड़े आदमी बनते हैं| इनके पास तो विदेशों में कालेधन की एक पाई भी नहीं है|

केंद्र सरकार अपने तरीकों और लंगड़े बहानों से चाहे जितनी लीपापोती कर ले अन्ना हजारे और बाबा रामदेव द्वारा प्रारंभ किये गए इस अभियान की आंधी आजादी के आंदोलन की तरह अब गली-गली गाँव-गाँव पहुँच रही है| पाप का घडा अब पूरी तरह भर गया है| इस जन अभियान में जो भी किसी प्रकार का व्यवधान खडा करेगा उसे जनाक्रोश का शिकार होना पडेगा| अब आने वाले चुनावों में पार्टियों के घोषणा पत्र कम और इन आंदोलनों में उठ रहे मुद्दे अधिक व्यापक और प्रभावी होंगें| सरकार यदि मुट्ठी भर लोगों के हित साधने के लिए जन सामान्य की उपेक्षा और अवहेलना करेंगीं| तब फिर आने वाले दिनों में उसे सिर छुपाने को भी जगह नहीं मिलेगी|

वह दिन दूर नहीं जब जन आकांक्षाओं के अनुरूप जन लोकपाल बिल बनेगा और पास होगा| जिसके परिणाम स्वरूप भ्रष्टाचार का ऊपर से नीचे तक सफाया हो जाएगा| साथ ही विदेशी बैंकों में जमा कालाधन भी वापस अपने देश में आयेगा| इस कल्पनाशील कालेधन के वापस देश में आने पर विकास का अवरुद्ध पहिया तेजी से घूमेगा|

अन्ना हजारे और बाबा रामदेव का अभियान एक महायज्ञ है| इस यज्ञ में प्रत्येक को सच्चे देशभक्त के नाते अपनी आहूति देनी होगी| सर्वाधिक योगदान नौजवानों को करना होगा| यह युद्ध सीधे देश और उनके स्वयं के भविष्य से जुड़े हुए हैं| इन जन आंदोलनों से सधे जुड़िये क्योंकि इसने हमारे समाज की उन सारी कढियों और बेड़ियों को तोड़ दिया है जिन्हें नेता और राजनैतिक दल और मजबूत करने पर तुले हुए हैं|

सवाल किसी एक दल या नेता का नहीं है सवाल देश के भाग्य और भविष्य का है| मतदान के कम प्रतिशत से जीते लोग हमारे भाग्य विधाता जन हमारे साथ खिलवाड़ न करें| इसके लिए यह बहुत आवश्यक है कि हम सब निष्पक्ष और निर्भीक होकर शत प्रतिशत मतदान की राह पर चलें| सच मानिए देश का काया कल्प हो जाएगा| भ्रष्टाचार मिट जाएगा| विदेशों में जमा कालाधन देश में फिर से वापस आयेगा|

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