रिटायर्ड सहकारी कर्मी की आत्महत्या के एक वर्ष बाद मिला सुसाइड नोट

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JHANGANJ-SUICIDEजहानगंज (फर्रुखाबाद) : फतेहगढ़ कोतवाली क्षेत्र के बेबर रोड भोलेपुर निवासी घनश्याम पाण्डेय पुत्र मिश्रीलाल पाण्डेय ने संदिग्ध परिस्थितियों में बीते 11 फरवरी 2012 को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। जिसमें हरीश मिश्रा, शरीफ व वीरेन्द्र सिंह को हत्या के लिए प्रेरित करने का आरोपी बनाया गया था। घटना के लगभग एक वर्ष बाद तहसीलदार की उपस्थिति में जब मृतक के कार्यालय का ताला तोड़ा गया तो उससे सुसाइड नोट बरामद किया गया है।

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घनश्याम कृषक सहकारी समिति जहानगंज में सचिव पद पर तैनात थे जोकि 31 जनवरी 2012 को रिटायर हो चुके थे। उसके बाद भी घनश्याम का अपने कार्यालय में आना जाना बना रहा। 11 फरवरी 2012 को सुबह अपने घर से गये और लगभग 3 बजे कार्यालय से घर चले गये। लेकिन घर पर नहीं पहुंचे।

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उनकी पत्नी श्रीमती मंजू का फोन आया तो कार्यकर्ता नरेश यादव ने घनश्याम पाण्डेय के मोबाइल फोन पर फोन किया तो फोन नहीं उठा। मोबाइल घनश्याम की जेब में बजता रहा। जब किसी का फोन रिसीव नहीं हुआ तो खोजवीन शुरू की गयी।

खोजने पर उनकी मोटरसाइकिल सहकारी शीतगृह के बरामदे में मिली। देखा कि सहकारी शीतगृह जहांनगंज के पीछे झरने पर प्लास्टिक की रस्सी से घनश्याम लटकते हुए मिले। जबकि कोल्ड लगभग 15 वर्षों से खण्डहर के रूप में पड़ा हुआ था। पुलिस ने मृतक के शव को उतरवाकर पोस्टमार्टम कराया व परिजनों की तहरीर पर हरीश मिश्रा, शरीफ व वीरेन्द्र के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कर लिया।

उसी समय ही घनश्याम पाण्डेय के कार्यालय सहकारी समिति जहानगंज को सील कर दिया गया था। शनिवार को मजिस्ट्रेट तहसीलदार आर पी चौधरी, अपर जिला सहकारी समिति अधिकारी राजाराम व सचिव ओमप्रकाश ने मौके पर पहुंचकर कार्यालय का ताला तुड़वाया। कार्यालय में दो अलमारियां रखी हुई थीं। जिसमें से एक अलमारी का जब ताला तोड़ा गया तो उसमें अन्य की चाबियां मिलीं। इसके साथ ही घनश्याम के द्वारा लिखा गया सुसाइड नोट भी मिला। सुसाइड नोट में घनश्याम ने हरीश मिश्रा, शरीफ व अमीन वीरेन्द्र पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।

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