यूपी बोर्ड परीक्षा घोटाला: ढाई लाख विद्यार्थियों के अचानक स्कूल बदल गये

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इलाहाबाद। माध्यमिक शिक्षा परिषद के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग ढाई लाख विद्यार्थियों ने हाईस्कूल, इंटर के परीक्षा फॉर्म भरने के लिए अचानक स्कूल बदल दिए। ताज्जुब यह कि नौवीं और ग्यारहवीं में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले इन छात्रों ने वित्तविहीन स्कूलों से परीक्षा फॉर्म भरे। अग्रिम पंजीकरण और परीक्षा आवेदन पत्रों की स्क्रूटनी में यह गड़बड़ी पकड़ी गई।

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राजकीय और वित्तपोषित स्कूल छोड़ दो लाख 53 हजार वित्तपोषित स्कूलों की शरण में क्यों गए, इसकी पड़ताल चल रही है लेकिन विभागीय सूत्रों का कहना है कि नकल माफिया के बरगलाने के कारण ही छात्रों ने ऐसा कदम उठाया। तय है कि ऐसा छात्रों को मनमाने नकल के आश्वासन पर ही किया गया। माध्यमिक शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारियों को इसकी जानकारी दे दी गई है।

बोर्ड से जुड़े प्रदेश के 2470 स्कूलों ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के परीक्षा फॉर्म जमा करने में काफी विलंब किया जिसके कारण फॉर्म छंटनी में भी देरी हुई। इन विद्यालयों के परीक्षा फॉर्म की स्क्रूटनी में इतनी गड़बड़ियां पाई गईं कि कर्मचारी भी हैरत में पड़ गए। कई फॉर्म से फोटो गायब तो कुछ ने पते का प्रमाणपत्र नहीं लगाया। इंटर के कुछ छात्रों ने हाईस्कूल का रोलनंबर ही गलत दर्ज कर दिया लेकिन इससे भी बड़ी गड़बड़ी यह रही कि ढाई लाख छात्रों के नाम उन विद्यालयों में नहीं मिले, जहां से उन्होंने नौवीं, ग्यारहवीं की परीक्षा पास की। नौवीं, ग्यारहवीं के एवार्ड ब्लैंक में उनके नाम सरकारी विद्यालयों में हैं जबकि परीक्षा फॉर्म वित्तविहीन स्कूलों से भरा है।

एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सचिव माध्यमिक शिक्षा व निदेशक को इसकी जानकारी दे दी गई है। आशंका है कि नकलमाफिया ने विद्यार्थियों को बरगलाकर परीक्षा में नकल कराने के लिए विद्यालय बदलवाया। स्कूल बदलने वाले छात्रों के अग्रिम पंजीकरण की जांच की जा रही है।

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