गोंडा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यूपी पुलिस का एक कारनामा सामने आया है। 2007 में जिसकी मौत हो गई थी उसी के खिलाफ दस साल बाद 2017 में एफआईआर दर्ज कर ली गई। यहर नहीं मामले की विवेचना कर रहे सीओ साहब ने मृतक का बयान भी दर्ज कर लिया और चार्टशीट भी फाइल कर दी। मामले का खुलासा तब हुआ जब चार्जशीट फाइल होने के बाद एससीएसटी के विशेष न्यायाधीश ने संबंधित आरोपी को समन जारी किया, जिसको लेकर पुलिस मृतक के घर पंहुची तो स्थित साफ हो गई। ग्राम प्रधान ने स्थिति को साफ करते हुए मृत्यु प्रमाण पत्र भी पुलिस को दे दिया।
पिता के पैरों तले खिसक गई जमीन अपने मृत बेटे के खिलाफ हुई एफआईआर की जानकारी जब उसके बेबस पिता को हुई तो उसके पैरों से जमीन खिसक गई। उसने कोर्ट कचहरी और पुलिस के चक्कर लगाने शुरू कर दिए। देवी पाटन मंडल के डीआईजी से मिलने पंहुचे मृतक के पिता सुरेंद्र सिंह ने बताया, मेरे बेटे शिवम सिंह की तालाब में डूबने से मौत 2007 में हुई थी। विपक्षी द्वारा मेरे बेटे के खिलाफ सन 2017 में एफआईआर दर्ज कराई गई थी और सीओ ने बयान दर्जकर चार्टशीट भी लगा दी।
पीड़ित ने की कार्रवाई की मांग पुलिस पर आंख बंदकर काम करने का आरोप लगाते हुए पीड़ित सुरेंद्र की मांग है कि तत्कालीन सीओ शंकर प्रसाद के साथ जिन पुलिसकर्मियों की लापरवाही है कोर्ट उन्हें दंडित करे, क्योंकि इस लापरवाही से उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पंहुची है और उसके मान की हानि हुई है। बता दें, मृतक का बयान दर्ज करने वाले शिव शंकर प्रसाद 2017 में गोंडा के मनकापुर सीओ पद पर तैनात थे। वर्तमान में बहराइच जनपद के महशी सीओ हैं।
क्या कहते हैं पुलिस अधिकारी इस मामले में देवीपाटन मंडल के डीआईजी राकेश सिंह ने कहा कि सुरेंद्र सिंह ने बताया है कि उनके मृत बेटे के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इसके बारे में संबंधित एसपी से रिपोर्ट मांगी है। जो भी दोषी है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही चार्जशीट लगाया गया है तो न्यायालय भी इस मामले का संज्ञान लेगी।
यूपी पुलिस का कारनामा: 10 साल पहले मर चुके शख्स पर दर्ज किया मुकदमा, लगा दी चार्जशीट
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