मैं हूं कोतवाल, मुझे साहब से है क्या काम?

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FARRUKHABAD : जनपद की शहर कोतवाली में सोने वाले कोतवालों का इतिहास कुछ पुराना है। अपने सोने की आदत के लिए चर्चा में रहे तत्कालीन कोतवाल कालूराम के किसे अभी लोगों के जेहन से नहीं उतरे थे कि नये कोतवाल को पुलिस भर्ती परीक्षा की जिलाधिकारी द्वारा ली जा रही मीटिंग में सोते देख उनकी यादें ताजा हो गयीं।inspector jageshwar singh

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जनपद में 15 दिसम्बर को होने वाली पुलिस भर्ती परीक्षा के लिए तैयारी बैठक जिलाधिकारी पवन कुमार ने सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में बुलायी थी। जिसमें अन्य अधिकारियों के अलावा शहर कोतवाल जागेश्वर सिंह भी मौजूद थे। पीछे की पंक्ति में बैठे कोतवाल काफी देर तक अपनी सोने की मुद्रा में ही नजर आये तो मीडिया के कैमरे अनायास ही उनकी तरफ मुड़ गये।

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हालांकि जब मीडिया के कैमरे उनकी तरफ मुड़ ही गये तो पास बैठे अन्य अधिकारियों ने उन्हें कच्ची नींद में ही जगा दिया। देखने वाली बात है कि एक तरफ जिलाधिकारी चाक चौबंध व्यवस्था की सीख देते रहे और दूसरी तरफ कोतवाल साहब सोते रहे। कोतवाल के इस रवैये से तो ऐसा ही लगा कि मैं तो कोतवाल हूं, मुझे साहब से क्या काम?

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