मृत्यु के बाद भी जीवन का संकल्प: सुधांशु द्विवेदी व पत्नी केजीएमयू में कर चुके देहदान का संकल्प

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फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो)सूबे के कद्दावर नेता रहे स्वर्गीय ब्रह्मदत्त द्विवेदी के भतीजे तथा सदर से भाजपा विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी के चचेरे भाई सुधांशु दत्त द्विवेदी व उनकी पत्नी अर्चना द्विवेदी ने देहदान कर समाज के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। अगस्त 2022 में दोनों ने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ में देहदान का संकल्प लेकर मानव सेवा की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया, जिसकी जनपद भर में चर्चा हो रही है।
सुधांशु दत्त द्विवेदी ने बताया कि देहदान सबसे बड़ा दान है, जो मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा करता है। उन्होंने कहा कि उन्होंने यह निर्णय लगभग साढ़े तीन वर्ष पूर्व ही ले लिया था। उनके अनुसार मृत्यु उपरांत शरीर के अधिकांश अंग कार्य करना बंद कर देते हैं और उनका दान संभव नहीं होता, केवल आंखें ही ऐसी होती हैं जो मृत्यु के बाद भी कार्य कर सकती हैं, जबकि देहदान के माध्यम से पूरा शरीर चिकित्सा शिक्षा के लिए उपयोगी बनता है।
उन्होंने कहा कि मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्र मृत शरीर के माध्यम से शारीरिक संरचना और रोगों का गहन अध्ययन करते हैं, जिससे बेहतर चिकित्सक तैयार होते हैं। देहदान से चिकित्सा विज्ञान को नई दिशा मिलती है और देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में शोध व नवाचार को बढ़ावा मिलता है। सुधांशु व अर्चना द्विवेदी का यह कदम समाज के लिए प्रेरणा बनकर सामने आया है, जिससे अन्य लोग भी देहदान जैसे पुनीत कार्य के लिए आगे आने को प्रेरित होंगे।

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