मिट्टी के गणपति बनाकर बहनों ने दिया गंगा स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

0
9

फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) गणेश चतुर्थी के पर्व को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का सराहनीय प्रयास विजाधरपुर निवासी दो बहनों ने किया है। सरस्वती शिशु मंदिर की छात्रा निष्ठा शुक्ला और शिव्याशी शुक्ला ने इस बार भी घर पर मिट्टी से भगवान गणेश की प्रतिमा तैयार की। इसके बाद दोनों बहनों ने प्रतिमा का श्रृंगार भी प्राकृतिक रंगों से किया। उनके इस प्रयास के माध्यम से गंगा स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश लोगों तक पहुंच रहा है।निष्ठा और शिव्याशी का गणेश उत्सव मनाने का तरीका सामान्य आयोजनों से अलग है। दोनों बहनें पिछले कई वर्षों से बाजार से प्लास्टर ऑफ पेरिस अथवा रासायनिक रंगों से बनी प्रतिमा खरीदने के बजाय स्वयं मिट्टी से गणपति की प्रतिमा तैयार करती हैं। प्रतिमा तैयार करने से लेकर उसके रंग-रोगन और श्रृंगार तक का कार्य वह स्वयं करती हैं। इसके बाद विधि-विधान से घर में भगवान गणेश की स्थापना कर पूजा-अर्चना की जाती है। खास बात यह है कि गणेश उत्सव के बाद प्रतिमा का विसर्जन भी दोनों बहनें किसी नदी, तालाब अथवा गंगा में नहीं करतीं। घर में ही गमले में प्रतिमा का विसर्जन कर मिट्टी को पौधों के लिए उपयोगी बनाती हैं। इससे धार्मिक परंपरा भी निभती है और जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने का संदेश भी मिलता है।दोनों बहनों के इस प्रयास का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति की रक्षा करना भी हमारी जिम्मेदारी है। गंगा सहित अन्य जलस्रोतों में प्रतिमाओं के विसर्जन से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए मिट्टी की प्रतिमाओं का प्रयोग और घर पर ही विसर्जन एक बेहतर विकल्प हो सकता है।निष्ठा और शिव्याशी ने प्राकृतिक रंगों का प्रयोग कर यह भी संदेश दिया कि त्योहारों को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाया जा सकता है। छोटी उम्र में दोनों बहनों की यह पहल न केवल उनकी रचनात्मकता को दर्शाती है, बल्कि पर्यावरण के प्रति उनकी जागरूकता को भी सामने लाती है।परिजनों के अनुसार दोनों बहनों को बचपन से ही मिट्टी से कलाकृतियां और गणपति प्रतिमा तैयार करने में रुचि रही है। धीरे-धीरे यह रुचि पर्यावरण संरक्षण से जुड़ गई। अब हर वर्ष गणेश उत्सव के दौरान वह स्वयं प्रतिमा तैयार करती हैं और घर पर ही उसका विसर्जन करती हैं। उनकी इस पहल से आसपास के लोगों को भी प्राकृतिक तरीके से गणेश उत्सव मनाने की प्रेरणा मिल रही है।निष्ठा और शिव्याशी का कहना है कि गणपति बप्पा की भक्ति के साथ गंगा और प्रकृति की स्वच्छता का ध्यान रखना भी हमारा कर्तव्य है। यदि लोग मिट्टी की प्रतिमाओं का प्रयोग करें और उनका विसर्जन घर में ही करें तो जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने में काफी मदद मिल सकती है। दोनों बहनों की यह पहल आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का सुंदर संदेश दे रही है।

[adrotate banner="3"]
[adrotate banner="2"]