मायावती के खिलाफ क्यों हुई एफआईआर: सुप्रीम कोर्ट

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उत्‍तर प्रदेश की पूर्व मुख्‍यमंत्री मायावती के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से उन्‍हें बड़ी राहत मिली है। अदालत ने मायावती के खिलाफ सीबीआई के एफआईआर को ही गैरकानूनी करार देते हुए कहा कि कोर्ट ने इस मामले में कभी भी एफआईआर दर्ज करने को नहीं कहा था। अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले में सीबीआई सही दिशा में नहीं चल रही है।

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इस फैसले के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। मायावती को राहत मिलने से केंद्र की राजनीति को लेकर मायावती के रुख में बड़ा बदलाव आ सकता है। बीजेपी अक्सर यह आरोप लगाती रही है कि सीबीआई की जांच की वजह से ही मायावती यूपीए सरकार को समर्थन देती रही हैं। बीएसपी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि बीजेपी के दबाव में मायावती के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। बीजेपी की ओर से मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि उनकी पार्टी कोर्ट के आदेश का अध्ययन कर रही है। नकवी ने कहा कि इस समय देश में सीबीआई का कितना उपयोग या दुरुपयोग हो रहा है, यह किसी से छुपा हुआ नहीं है। सपा की ओर से मोहन सिंह ने मायावती को राहत मिलने पर कहा कि वे अदालत की टिप्पणी का सम्मान करते हैं।

गौरतलब है कि मायावती शुरू से ही कहती रही हैं कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में राजनीति के तहत उन्‍हें फंसाया गया है और उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला चलाने की इजाजत नहीं देनी चाहिए। सीबीआई का आरोप है कि वर्ष 2003 में मायावती ने अपनी संपत्ति एक करोड़ बताई थी, जो वर्ष 2007 में बढ़कर 52 करोड़ हो गई। इसी मामले की जांच के लिए सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की थी। मायावती ने यह अर्जी दी थी कि इस एफआईआर को रद कराया जाए। गौरतलब है कि इनकम टैक्‍स ट्रिब्‍यूनल की ओर से मायावती को क्‍लीन चिट मिल जाने के बादवजूद सीबीआई ने एफआईआर की थी। अपनी आय पर उठे सवाल का जवाब देते हुए मायावती कई मौकों पर कहती रही हैं कि पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उन्‍हें पैसे चंदे के रूप में मिले हैं।

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