बैलों को नहीं पूरी बैलगाड़ी बदलने की जरूरत: हजारे

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कैबिनेट में फेरबदल की नहीं, पूरी सरकार बदलने की जरूरत

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नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता अन्‍ना हजारे ने कैबिनेट में हुए फेरबदल पर कहा कि अब फेरबदल की नहीं, पूरी सरकार बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह सरकार बैलगाड़ी की तरह है।  उन्होंने कहा कि बैलों को बदलने की जरूरत नहीं है। अब तो बैलगाड़ी चलाने वाले को ही बदलना पड़ेगा। अन्ना आज दिल्ली में सिविल सोसायटी के सदस्यों और दूसरे लोगों से लोकपाल बिल पर चर्चा कर रहे हैं।

भ्रष्टाचार इस समय देश में एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। बकौल पीएम इसके बाद मौजूदा कैबिनेट में कोई फेरबदल नहीं किया जाएगा। ऐसे में देश को उम्मीद थी कि पीएम कुछ ऐसे बड़े बदलाव करेंगे, जिससे जनता को कुछ आस बंधेगी। लेकिन जिन सात मंत्रियों की कैबिनेट से विदाई हुई है। उनमें दयानिधि मारन ने खुद इस्तीफा दे दिया था। जबकि मुरली देवड़ा ने भी अपनी मर्जी से कैबिनेट से हटने की इच्छा जाहिर कर दी थी। राजा भी २ जी घोटाले के चक्कर में जेल में हैं। वहीं, अन्य मंत्री जैसे अरुण यादव, ए साईं प्रताप, बीएस हांडिक और कांतिलाल भूरिया के कैबिनेट में रहने या न रहने से बहुत से लोगों को ज़्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। शायद यही वजह है कि ज़्यादातर लोग कैबिनेट में फेरबदल को खानापूर्ति मान रहे हैं।

गठबंधन का दबाव
कैबिनेट विस्तार के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि दो सीटें डीएमके के लिए आरक्षित हैं। प्रधानमंत्री का बयान यह बताने के लिए काफी है कि वह गठबंधन को लेकर कितने दबाव में हैं। प्रधानमंत्री को रेल मंत्रालय उन्हें दिनेश त्रिवेदी जैसे अपेक्षाकृत नए मंत्री को देना देना पड़ा। वहीं, रविवार को हुए दो रेल हादसों के बाद दुर्घटनास्थल पर जाने के पीएम के फरमान को अनसुना करने वाले मुकुल रॉय से महज रेलवे के राज्यमंत्री का पद लिया गया है। उनके पास जहाजरानी मंत्रालय में राज्यमंत्री का पद अब भी बरकरार है। घटक दलों को खुश करने के चक्कर में पीएम ने गुरुदास कामत और श्रीकांत जैना जैसे नेताओं को नाराज करना पड़ा। ऐसे में साफ है कि पीएम दबाव में हैं।

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