बीटीसी में फर्जीवाड़ा: संस्कृत विवि के 90 फीसदी अंकपत्र फर्जी

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प्रदेश में जाली अंकपत्रों के माध्यम से प्राथमिक शिक्षक बनने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। विशिष्ट बीटीसी की तरह बीटीसी में भी संपूर्णानंद संस्कृत विवि के जाली अंकपत्रों से चयन पाने में अभ्यर्थी सफल हो गए हैं। देवरिया डाएट द्वारा संस्कृत विवि को सत्यापन के लिए भेजे गए बीटीसी में चयनित अभ्यर्थियों के अंकपत्रों के सत्यापन में इसका खुलासा हुआ है। जांच में 90 फीसदी अंकपत्र फर्जी पाए गए हैं। जल्द ही डाएट को सत्यापन रिपोर्ट भेज दी जाएगी।

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बीटीसी-2011 में देवरिया में संस्कृत विवि की डिग्री से चयनित 30 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। अभ्यर्थियों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान, देवरिया द्वारा विवि को सत्यापन के लिए भेजे गए थे। सत्यापन करने पर 28 अभ्यर्थियों के पूर्व मध्यमा, उत्तर मध्यमा एवं शास्त्री के अंकपत्र जाली पाए गए हैं। दूसरे जनपदों से भी आए अभ्यर्थियों के अंकपत्रों की जांच की जा रही है, जिनमें दो-दो, चार-चार अंकपत्र जाली हैं। सबसे ज्यादा अंकपत्र देवरिया डाएट के ही मिले हैं। दो साल पहले विशिष्ट बीटीसी में बड़े स्तर पर जाली अंकपत्रों से अभ्यर्थियों का चयन हुआ था, जिसमें बागपत डाएट में बड़े पैमाने पर ऐसे अभ्यर्थी पाए गए थे।

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