बीए-बीएड की डिग्री रखने वालों को नहीं मिलेगी चौकीदार की नौकरी

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गांव के चौकीदार की नौकरी के लिए सातवीं पास और बीए-बीएड उम्मीदवार के बीच मुकाबला जिसमें बाजी मारी सातवीं पास ने। शिक्षक की योग्यता रखने वाला बीए-बीएड उम्मीदवार चौकीदार नहीं बन पाया। मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने कहा कि मांगी गई योग्यता से ज्यादा योग्यता भी अयोग्यता की वजह हो सकती है। जस्टिस के. कण्णन ने कहा कि इस मामले में ये कहा जा सकता है कि मांगी गई योग्यता से कहीं ज्यादा पढ़ा-लिखा होना उम्मीदवार के लिए अयोग्यता का कारण बन गया।

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यमुनानगर के सतगौली गांव के वेद प्रकाश ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उनके गांव के चौकीदार की नौकरी के लिए एरिया कलेक्टर ने उसे योग्य उम्मीदवार पाया। अच्छे चाल-चलन और सरकारी कार्यों में प्रशासनिक अफसरों के दौरे के दौरान सहयोग करने के चलते उसे चौकीदार की नियुक्ति के योग्य ठहराया गया। कलेक्टर के फैसले के खिलाफ अन्य उम्मीदवारों ने डीसी के सामने याचिका दायर की जिस पर डीसी ने उसकी नियुक्ति खारिज करते हुए कहा कि बीए-बीएड होने के कारण वह पहले से बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहा है। सुनवाई के दौरान गांव के कई लोगों ने सातवीं पास रमेश नामक उम्मीदवार की सिफारिश की। उसके (वेद प्रकाश) के नाम पर केवल महज तीन लोगों ने सहमति दी। ऐसे में उसकी जगह रमेश को गांव का चौकीदार लगा दिया गया।

डीसी के फैसले को खारिज करने की मांग करते हुए वेद प्रकाश ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की और कहा कि उसे महज इस आधार पर अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता कि वह रमेश से ज्यादा पढ़ा-लिखा है। याचिका पर सुनवाई के बाद अपने फैसले में जस्टिस कण्णन ने कहा, ‘यदि डीसी को लगता है कि बीए-बीएड की डिग्री चौकीदार की नौकरी के लिए तय योग्यता से ज्यादा है तो इसे गलत नहीं कहा जा सकता। मांगी गई योग्यता से ज्यादा योग्यता हर जगह सही नहीं ठहराई जा सकती। ऐसे में याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती।

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