फर्रुखाबाद:(अमृतपुर संवाददाता) क्षेत्र में पिछले करीब 24 घंटे से हो रही मूसलाधार बारिश लोगों के लिए आफत बन गई है। कहीं हरे पेड़ सड़क पर गिरने से यातायात ठप हो गया तो कहीं नीम का पेड़ झोपड़ी पर गिरने से परिवार के सामने सिर छिपाने का संकट खड़ा हो गया। शनिवार को नगला हुषा गांव के पास बदायूं रोड पर पेड़ गिरने से करीब चार घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। वहीं कुबेरपुर गांव में झोपड़ी पर नीम का पेड़ गिर गया। हादसे के समय परिवार के सदस्य झोपड़ी में मौजूद थे, लेकिन गनीमत रही कि सभी बाल-बाल बच गए।सड़क पर पेड़ गिरने से चार घंटे जामअमृतपुर थाना क्षेत्र के नगला हुषा गांव के पास शनिवार को तेज बारिश के दौरान अचानक कई हरे पेड़ भरभराकर बदायूं रोड पर गिर गए। पेड़ों के सड़क पर गिरते ही दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। देखते ही देखते यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। करीब चार घंटे तक राहगीर जाम में फंसे रहे।बारिश के बीच जाम में फंसे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कोई दवा लेने जा रहा था तो कोई रिश्तेदारी में जाने के लिए निकला था। वाहनों के पहिए थम जाने से राहगीरों को काफी देर तक सड़क खुलने का इंतजार करना पड़ा।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सड़क किनारे लगाए गए पेड़ों की जड़ों में पर्याप्त मिट्टी नहीं डाली गई थी। लगातार बारिश के कारण मिट्टी ढीली होने से पेड़ों की पकड़ कमजोर हो गई और वे सड़क पर गिर गए। ग्रामीणों का कहना है कि पौधे लगाने के बाद उनकी नियमित देखरेख और जड़ों में मिट्टी डालने पर ध्यान दिया जाता तो पेड़ों के गिरने की संभावना कम हो सकती थी।काफी मशक्कत के बाद सड़क से पेड़ों को हटाया गया, जिसके बाद यातायात सुचारु हो सका। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से सड़क किनारे लगे पेड़ों की स्थिति की जांच कराने और कमजोर पेड़ों की जड़ों को मजबूत कराने की मांग की है।झोपड़ी पर गिरा नीम का पेड़, परिवार बाल-बाल बचाइधर, कुबेरपुर गांव में लगातार बारिश के बीच कन्हैया लाल पुत्र बाबूराम सक्सेना की झोपड़ी पर अचानक नीम का पेड़ गिर गया। कन्हैया लाल अपनी पत्नी और आठ बच्चों के साथ इसी झोपड़ी में रह रहे थे। पेड़ गिरने से झोपड़ी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।हादसे के समय परिवार के सदस्य झोपड़ी में थे, लेकिन संयोग से कोई जनहानि नहीं हुई। झोपड़ी नष्ट होने के बाद बारिश के बीच परिवार के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है।आवास की उम्मीद, अब बारिश ने छीन लिया आशियानापीड़ित कन्हैया लाल ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। वह लंबे समय से सरकारी आवास मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं, लेकिन अभी तक पक्का मकान नहीं मिल सका। उनके अनुसार सरकारी योजना के तहत उन्हें केवल शौचालय का लाभ मिला है। आठ बच्चों समेत पूरा परिवार अब तक झोपड़ी में रहकर गुजर-बसर कर रहा था।पेड़ गिरने से झोपड़ी भी नष्ट हो गई। ऐसे में लगातार बारिश के बीच परिवार के सामने रात गुजारने तक का संकट खड़ा हो गया है। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से तत्काल राहत दिलाने के साथ सरकारी आवास उपलब्ध कराने की मांग की है।उपजिलाधिकारी श्वेता साहू ने परिवार को सहायता का भरोसा देते हुए मौके पर लेखपाल भेजकर स्थिति की जांच कराने की बात कही है। अब देखना है कि बारिश के बीच बेघर हुए परिवार को प्रशासन की ओर से कितनी जल्दी राहत मिलती है और आवास योजना का लाभ कब तक मिल पाता है।
बारिश बनी आफत, कहीं सड़क पर गिरे पेड़ तो कहीं झोपड़ी पर गिरा नीम
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