फिर लौटेंगे “गुल्लक” के दिन, खनकेंगे 50, 100, 150 व 1000 के सिक्के

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फर्रुखाबाद: एक जमाना था जब बचपन में हम चवन्नी-अठन्नी तो बड़ी बात दस-पांच पैसे के सिक्के होली-दिवाली, ईद-बकरीद पर खरीदी  मिट्टी की गोलक में इकट्ठे करते थे। फिर उसे फोड़ कर पैसे गिनने व इस रेजगारी के बदले मम्मी से करारे नोट लेकर पर्स में रखने का मजा ही कुछ और था। यह तब की बात है जब चवन्नी-अठन्नी में बच्चों को “चीज” मिल जाती थी, अब तो भिखारी भी लेने से इनकार कर देते हैं।

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कभी स्कूलों में बच्चों को बताया जाता था कि 100 रुपयों के नोट में एक रुपये के कितने सिक्के तो बच्चे कहते थे कि 100 सिक्के। 100 रुपये का नोट कभी सिक्के में बदल जायेगा यह एक अजूबे वाली बात थी। लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया ने अब 50, 100, 150, 1000 तक के नोट नहीं वल्कि सिक्कों की नयी श्रंखला जारी कर दी हैं। हालांकि अब तो बैंकों ने बच्चों के भी बैंक एकाउंट खोलने शुरू कर दिये है। पर लगता अब फिर बच्चों में गुल्लक का क्रेज लौट आयेगा। पुराने समय में बचत के लिए गुल्लक थी। बैंकों का तो नाम भी लोग नहीं जानते थे और घर में बचे खुचे सिक्के गुल्लक में डालकर एक बड़ी बचत कर लिया करते थे। लेकिन वस्तुओं पर आयी महंगाई ने जैसे गुल्लक पर ग्रहण ही लगा दिया। लेकिन रिजर्व बैंक द्वारा जारी बड़े सिक्कों की श्रंखला से लगता है कि आने वाले दिनों में गुल्लक के दिन फिर लौटने वाले हैं।

 

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