पिंजरा सोने का हो या लोहे का पिंजरा आखिर पिंजरा …….

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PARTAT12TOTA TAAफर्रुखाबाद:(दीपक शुक्ला)इंसान और पंक्षियों की दोस्ती सदियों पुरानी है। लेकिन किसी भी पक्षी को पिंजरे में कैद नहीं रखा जा सकता। ये बात भी मायने नहीं रखती कि पिंजरा कैसा हो। पिंजरा चाहे कितना ही बड़ा क्यों न हो, पिंजरा आखिर पिंजरा ही है। हमारे जमीर के साथ ही साथ कानून भी इसकी इजाजत नही देता इसके बाद भी इन नन्ही जिंदगी का सौदा खुले आम होता है| लेकिन कोई बोलने को तैयार नही है| हम सभी ने इसे एक मनोरंजन की चीज समझ लिया है|
शहर कोतवाली क्षेत्र के लाल दरवाजे पर प्रतिदिन सैकड़ो पक्षीयो को आजीवन कैद की सजा दी जाती है| सजा उसे जिसने कोई गुनाह किया ही नही| उसके बाद भी उन्हें सजा देकर किसी के घर पिंजड़े में बंद कर भेज दिया जाता है| जबकि उनका हक है खुले आसमान में उड़ना| पशु पक्षियों को प्रकृति में स्वतन्त्र रहने के लिए बनाया गया है। उन्हें जीवन की सब सुविधायें प्रकृति से उपलब्ध होती हैं। उनको घर में बंद करके हम उनकी स्वतंत्रता को समाप्त कर देते हैं। उन्हें बंदी बनकर रहना पड़ता है। अपने स्वार्थ और खुशी के लिए हम उनकी खुशी का ध्यान नहीं रखते हैं।

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सुबह होते ही लाल दरवाजे पर दर्जनों पिजरो में बंद सैकड़ो तोते आजादी के लिये पिंजरों के अन्दर तड़पते नजर आ जाते है| चंद लोगो ने अपने रोजगार के लिये इनकी आजादी पर ग्रहण लगा दिया है| इनका कानून भी बना और कई समाजसेवी संस्था इसके लिये झंडा उठाये भी घूम रही| लेकिन इन बेजुवानो को पिंजरों की कैद से आजादी नही दिला पायी | आखिर क्यों इसका जबाब किसी के पास नही|

हिन्दू महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश मिश्रा ने बताया कि यह पूरी तरह गलत है| इसके लिये संगठन अहम कदम उठायेगा|

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