पशुओं के कान में पड़ा टैग बतायेगा मालिक की पहचान

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फर्रुखाबाद:(दीपक शुक्ला) सरकार अब आधार कार्ड की तरह पशुओं के भी आधार टैग बनाएगी। कार्ड बनने के बाद यदि कोई पशु चोरी या गुम हो जाएगा तो उसका तुरंत पता चल जाएगा। योजना के तहत पशुओं के कान पर प्लास्टिक टैग लगेगा, जिसमें बार कोड मौजूद होगा। बार कोड में पशु की पूरी डिटेल डली होगी।
अब पशुओं के कान में पड़ा टैग (छल्ला) मालिक का पता बताएगा। सरकार की ओर से आधार की तरह सभी पशुओं को भी 12 डिजिट की विशिष्ट पहचान संख्या दी जा रही है। इसी विशिष्ट पहचान संख्या के जरिए ही पशुओं का टीकाकरण व अन्य सुविधाएं पशुपालकों को दी जा सकेंगी। पशुओं के कान में टैगिंग नहीं कराने वाले पशुपालकों को पशुपालन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल सकेगा। पशुओं के टीकाकरण कार्य में लगे पशु चिकित्सकों और पैरावेट्स द्वारा टैगिंग की जाएगी। आवश्यकता पडऩे पर ग्रामसभा के हाईस्कूल पास करने वाले छात्रों को भी मानदेय पर टैगिंग कार्य में लगाया जा रहा है| पशुओं की इअर टैगिंग होने से व्यक्तिगत रूप से पशुपालक की पहचान हो सकेगी। पशुपालन विभाग के पास पशुपालकों का सारा डाटा ऑनलाइन होगा, ताकि किसी की शिकायत का त्वरित निस्तारण हो सके।
मानदेय पर रखे जाएंगे वैक्सीनेटर
जानकारी के मुताबिक पशुओं के टीकाकरण के लिए आवश्यकता पडऩे पर ग्रामसभा से ही हाईस्कूल पास छात्रों को वैक्सीनेटर और टैगिंग के लिए एप्लीकेटर के रूप में तैनात किया जा रहा है। प्रति पशु टीकाकरण के लिए 3.50 रुपए एवं टैगिंग के लिए 2.50 रुपये मानदेय के रूप में दिया जाएगा।
पशु चिकित्साधिकारी रमेश शाक्य नें जेएनआई न्यूज को बताया कि सभी पशु पालक अपने-अपने पशुओ के टैग लगवालें| यह टैग आधार कार्ड का काम करेगा| जिससे पशु की और उसके पालिक की पहचान हो सकेगी और सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिलेगा| गाँव स्तर पर वैक्सीनेटरनियुक्त किये गये है|
(मुईद खां संवाददाता कमालगंज) 

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