पंजीरी की कालाबाजारी पर रोक को नई जुगत

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ब्लाक व जिला मुख्यालय पर भी रहेगा वितरण का रिकार्ड

बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में अब कई चरणों में पोषाहार वितरण का रिकार्ड बनेगा। अभी तक सिर्फ आंगनबाड़ी केन्द्रों पर ही वितरण के रिकार्ड रखे जाते थे। ऐसे में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने मनमाफिक आंकड़ा तैयार करती थी और फर्जी पंजीकरण के नाम पर पोषाहार का उठान करती थी। अब जांच और नियंत्रण की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इससे धांधली पर अंकुश लगने की उम्मीद है।

प्रमुख सचिव सदाकांत ने निर्देश दिया है कि पंजीकरण, उपस्थिति और वितरण का आंकड़ा अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के अलावा मुख्य सेविका, बाल विकास परियोजना अधिकारी और जिला कार्यक्रम अधिकारी से लेकर मुख्यालय तक रखा जायेगा। प्रतिदिन उपस्थिति और वितरण के आधार पर ही अगले माह की आपूर्ति होगी। कई बार यह भी शिकायत मिली कि एक बार दर्ज आंकड़े के आधार पर लगातार आपूर्ति होती है, जबकि बीच में बच्चों की संख्या घट जाती है। इससे पोषाहार का सदुपयोग नहीं हो पाता है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अब इस प्रक्रिया से न केवल आपूर्ति में नियंत्रण होगा, बल्कि धांधली भी रुकेगी।

उल्लेखनीय है कि लाभार्थियों का स्पेशल कार्ड बनाने के फरमान के बाद विभाग ने इस नई व्यवस्था की पहल की है। अभी तक आंगनबाड़ी केन्द्र पर पंजीकृत बच्चों, गर्भवती और धात्री महिला तथा किशोरियों को पोषाहार बांटने का रिकार्ड बनता रहा है। इसी रिकार्ड के आधार पर पोषाहार के पैकेज केन्द्रों को दिये जाते हैं। हाट कुक्ड फूड की धनराशि के लिए भी यही संख्या पैमाना बनती है। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि केन्द्रों पर कभी भी पंजीकृत बच्चों के सापेक्ष उपस्थिति नहीं होती है। पाया गया कि फर्जी नामांकन के आधार पर पोषाहार के पैकेट लेकर उसे बेच दिया जाता है।

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