नोटिस दे कर भूल गया प्रशासन: मंदिर तो तोड़ दिया, पर अतिक्रमण कर बने मकान न हटे

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फर्रुखाबाद: अंगूरीबाग में जलभराव की समस्या से निजात दिलाने के लिये नाला खोलना जरूरी था। नाले पर अतिक्रमण कर बनाये गये एक मंदिर को जिला व पालिका प्रशासन ने जेसीबी से तोड़ कर चंद घंटों में तोड़ दिया। कुछ मकानों को भी तोड़ कर तत्कालिक राहत मिल गयी। पानी निकलने लगा। जिला प्रशासन ने समस्या के स्थायी हल के लिये अतिक्रमण कर बनाये गये लगभग ढाई दर्जन मकानों को हटाने के लिये नोटिस भी जारी किये व पालिका प्रशासन को नाला निर्माण कराने को कहा गया। परंतु समस्या के टलते ही प्रशासन को अब न तो मकानों को हटाने के लिये दिये गये अपने नोटिस याद हैं, और न ही नाला निर्माण की सुध है। नगर मजिस्ट्रेट मनोज कुमार का कहना है कि अब तो नगर पालिका में निर्वाचित बोर्ड पदारूढ़ है, फिर भी अधिशासी अधिकारी से इस संबंध में वार्ता की जायेगी।

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लगभग बीस दिन पूर्व जब नगर के जल निकास का मुख्य नाला चोक हुआ तो नगर पालिका ही नहीं जिले के पूरे प्रशासन के नाक में दम हो गयी। पूरा प्रशासन नगर में हुए जलभराव से निजात दिलाने में लग गया। यहां तक कि जिलाधिकारी, नगर मजिस्ट्रेट, सीओ सिटी, नगर पालिका ईओ इत्यादि ने मौके पर खड़े होकर नाला साफ कराया। लेकिन नाला साफ होते ही प्रशासन तो दूर नाला सफाई की जिम्मेदारी संभाले नगर पालिका को भी इसकी सुध नहीं रही। यहां तक कि नाले पर अवैध निर्माण कर बनाये गये मकान मालिकों को जो नोटिस दिये थे उनकी भी नगर पालिका प्रशासन ने कोई कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाई।

विदित हो कि जिस समय नाला चोक हुआ था उस समय जिलाधिकारी मुथुकुमार स्वामी ने ईओ नगर पालिका को निर्देश दिये थे कि नाले के मूल मानचित्र को निकलवाकर तत्काल पक्के नाले का निर्माण कराया जाये। यदि मूल मानचित्र सम्बंधित बाबू न दे सके तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जाये। इसके बावजूद नगर पालिका अधिशासी अधिकारी ने नाले निर्माण के लिए कोई कार्यवाही नहीं की। जिससे आये दिन नगर में जलभराव हो रहा है। वहीं नगर पालिका के सफाई कर्मी चकरघिन्नी बने रहते हैं। जहां भी नाला चोक होता है तो वहां नगर पालिका कर्मचारी फावड़ा, दांती लेकर पहुंच जाते हैं व उसे रिपेयरिंग करने में जुट जाते हैं। नगर पालिका के नालों का पार्ट रिपेयरिंग होने का ही नतीजा है कि विधायक के घर के सामने परमानेंट नाला चोक की समस्या है। यदि नगर पालिका के द्वारा नाले की विधिवत सफाई व पक्के नाले का निर्माण बरसात से पहले ही किया गया होता तो आज यह नौवत नहीं आती।

20 दिन पूर्व जब पूरा प्रशासन नाले को खुलवाने में लगा था तो नगर वासियों को एसा लग रहा था कि अब जलभराव से शायद उनको निजात मिल जायेगी। उस समय नगर पालिका ने वर्षो पुराना बना मंदिर चंद मिनटों में नागरिकों के विरोध के बावजूद ध्वस्त करा दिया व नाले का गंदा पानी निकलने की त्वरित व्यवस्था कर दी। लेकिन आज तक उस नाले को पक्का नहीं किया गया है वह कभी भी बंद हो सकता है जिससे आगे होने वाली बरसात में किसी भी दिन शहर जलाशय में तब्दील हो सकता है। प्रशासन को क्या पड़ी वह फिर किसी का मकान गिरवाकर उल्टा सीधा नाला खुलवा देगा लेकिन परेशानी तो नागरिकों को होती है। जो अपने कीमती मकानों में पानी भरने से उनके मकान चटख जाते हैं। कई मोहल्लों में तो पानी भरने पर लोग अपने घरों में जाने तक को तरस जाते हैं। लेकिन नगर पालिका प्रशासन कोई स्थाई व्यवस्था करने के मूड़ में नहीं दिख रहा है। उसे तो फर्रुखाबाद की जनता को इसी तरह जाम लगाये, चिल्लाते जो देखना पसंद है।

जब नगर मजिस्ट्रेट ने अवैध रूप से बनाये गये लोगों को नोटिस दिया था तो लग रहा था कि इनके निर्माण ध्वस्त कराकर नाले चोक से स्थाई निजात मिल जायेगा। लेकिन अब एसा नहीं है। नगर पालिका ने फिलहाल इनको ठंडे बस्ते में डाल दिया है। जिसका खामियाजा लगातार नागरिक भुगत रहे हैं और आगे आने वाले दिनों में भुगतते रहेंगे।

 

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