नकली नोटों के शक में किशोरों को हिरासत में लेकर छोड़ा

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फर्रुखाबाद: शहर में पकड़े गये नकली करेंसी के आरोपी अनीस की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को अब हर व्यक्ति नकली नोटों का व्यापारी नजर आने लगा है। इसे पुलिस की नादानी कहें या आतंकी अनीस की दहशत। जिला जेल चौराहे पर कोतवाल ने रंगे हाथों कुछ किशोरों को नकली नोटों सहित गिरफ्तार कर लिया। कोतवाल का चेहरा उस समय देखने लायक था जब उन्होंने किशोरों को पकड़ा। अपने गुड वर्क पर इतराते हुए किशोरों को गाड़ी में डालकर कोतवाली ले आये।

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कोतवाली फतेहगढ़ के प्रभारी रूम सिंह यादव जिला जेल चौराहे पर गश्त कर रहे थे। तभी अचानक उनकी नजर हाथ में नोट पकड़े कुछ किशोरों पर पड़ी। पुलिस पहले से ही नकली नोटों के कारोबारी व आतंकी के आरोप में पकड़े गये बड़ा बंगशपुरा निवासी अनीश की गिरफ्तारी के बाद फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। जिसके चलते कोतवाली प्रभारी ने अचानक उन किशोरों को दबोच लिया और पूछताछ शुरू कर दी। घटना के समय जिला जेल पर अंधेरा था। कोतवाल अपने गुड वर्क को सोचकर फूले नहीं समाये और उन्होंने किशोरों को गाड़ी में डाल लिया। हूटर बजाती हुई कोतवाल की जीप कोतवाली फतेहगढ़ पहुंची तो पुलिस के आरक्षी नकली नोटों के आरोपी किशोरों पर दौड़ पड़े और किसी ने किशोर का हाथ पकड़ा, किसी ने कालर, कुछ ने तो मौके का फायदा उठाकर अपने हाथ भी साफ कर दिये। किशोर कहते भी रहे कि साहब नोट नकली हैं, कोतवाल बोले इसी आरोप में तो पकड़े गये हो। अचानक कोतवाली में भीड़ लग गयी और लोग कोतवाल की तारीफ और पकड़े गये किशोरों पर छींटाकसी करने लगे। बेटा अब जाओगे अंदर, कोई कह रहा था कि 6 साल तक जमानत तक नहीं होगी। किशोरों ने फिर कहा कि साहब नोट तो देख लीजिए। नोट नकली हैं! कोतवाल बोले सभी को हवालात में डाल दो और नोटों को इधर लाओ। अब कोतवाल ने पूरी बारीकी से नोटों का निरीक्षण शुरू किया। नकली नोटों की खबर मिलते ही मीडियाकर्मी भी कोतवाल का वयान लेने पहुंच गये। अब ठीक से कोतवाल ने जैसे ही चश्मा लगाकर नोटों को देखा तो नोट 50-50 के थे और उन पर भारतीय रिजर्व बैंक की जगह भारतीय चिल्ड्रन बैंक लिखा था। कोतवाल को अब कोई जबाव नहीं सूझा। उन्होंने तत्काल अपना रंग गिरगिट की तरह बदलते हुए हड़काई आवाज में किशोरों से कहा कि जल्दी निकल लो! अब कभी नकली नोट लेकर मत घूमना!

इस सम्बंध में फतेहगढ़ कोतवाल रूम सिंह यादव ने बताया कि जिला जेल पर अंधेरा होने की बजह व नजर कम पड़ने की बजह से मैं नोटों की पहचान नहीं कर पाया। किशोरों को कोतवाली में लाकर जब नोट देखे तब वह नकली थे। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।

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