धार्मिक ग्रन्थ का अपमान: रामनगरिया प्रशासनिक गेट पर पैरों से कुचली रामायण

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फर्रुखाबादः रामनगरिया मेले में भीड़ भाड़ आज कुछ ज्यादा ही थी क्योंकि आज रामनगरिया का उदघाटन था। जिसको संबोधित करने के लिए जिलाधिकारी सच्चिदानंद दुबे व पुलिस अधीक्षक ओपी सागर आने वाले थे।

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प्रशासनिक गेट के बाहर किसी साधु संत के झोले से रामायण गिर गयी। लेकिन फिर क्या था जिलाधिकारी व मेला उदघाटन कार्यक्रम देखने में जुटी पब्लिक से ज्यादा सुरक्षाबलों के सिपाही ने इस ग्रन्थ को रोड पर पड़ा देखकर भी अनदेखा कर दिया। सिर घुमाकर निकल गये। जहां मंच से एक तरफ लोगों को संबोधित करते हुए कुछ लोगों ने गंगा व रामायण की पवित्रता का बखान बड़े-बड़े शब्दों में कर दिया।

वहीं दूसरी तरफ धार्मिक ग्रंथ आज पतित पावनी गंगा के तट पर लोगों द्वारा पैरों से रौंदा गया। जेएनआई टीम की नजर जब उस ग्रन्थ पर पड़ी तो उसने इस ग्रन्थ के बारे में पास ही के साधु को जानकारी दी। साधु ब्रहमानंद ने रामायण को वाइज्जत उठाया। उन्होंने कहा कि जहंा ऐसे पवित्र ग्रंथों को लोग सड़क पर डाल देते हैं तो फिर इस रामनगरिया का मतलब ही क्या है। उन्होंने रामायण को बाइज्जत गंगा में प्रवाहित कर दिया।

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