फर्रुखाबाद: रमजान के पाक महीने में की गयी इबादत दोज़ख से निजात दिलाती है। रमजान का मुबारक महीना अपने इख्तताम की तरफ बढ रहा हैं। रमजाने के तीन अशरों में से दो मुकम्मल हो चुके हैं। तीसरा अशरा अभी चल रहा है। यह अशरा जो दोज़ख से निजात दिलाने का अशरा है।
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इस अशरे की 21, 23, 25, 27 व 29 की रातों में शबेकद्र के होने का यकींन है। इस रात में की गयी इबादत सत्तर हजार रातों के बराबर मानी गयी है। इस अशरे में माली इबादत के तौर पर सदकये फित्र भी अदा किया जाता है।
इस अशरे में इहतकाफ का भी एहताम किया जाना सुन्नत है। जिसके तहत मस्जिद में रहकर और दुनिया से हटकर सिर्फ अल्लाह की इबादत उसकी रजा व अपनी मगफरत के लिए की जाती है।
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