देवोत्थान एकादशी पर मिलता अश्वमेघ यज्ञ का फल

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फर्रुखाबाद:(नगर प्रतिनिधि): भगवान विष्णु की देवोत्थान एकादशी पर श्रद्धालुओं ने गन्ना, शकरकंद और सिंघाड़े से पूजा अर्चना की। बाजार में गन्ना व सिंघाड़ों की बिक्री के लिये खूब हुई। पांचाल घाट गंगातट पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।
देवोत्थान एकादशी पर सोमवार को श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद भगवान विष्णु का पूजन कर गन्ना, सिंघाड़े व शकरकंद से भगवान को भोग लगाया। इसके बाद विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर भगवान विष्णु की बैकुंठ वापसी का उत्सव मनाया। उन्होंने चावल के घोल से भगवान विष्णु के चरण बनाए। इनको लकड़ी के पाटा से ढक दिया। पाटा के ऊपर सालिगराम का विगृह स्थापित किया। इसके बाद बीच में पांच गन्ने का मंडप बनाकर सिंघाड़ा, शकरकंदी और आलू आदि रखे। गन्ने की पांचों मूजों को बांधकर खील-खिलौनों से पूजा की।
बाजार में इस पर्व पर पूजन-विधान के लिये बाजार में सिंघाड़ा, शकरकंद व गन्ना की खूब बिक्री हुयी। पल्ला निवासी दुकानदार दीपक उर्फ़ दीपू वाथम ने बताया की गन्ना 10 रूपये से 15 रूपये का बिक्री हुआ| वही सिंघाड़ा व शकरकंद 15 रूपये से लेकर 20 रूपये तक बिक्री किया गया| लेकिन इस बार बिक्री पिछली वर्ष की तुलना में कम रही| आचार्य सर्वेश शुक्ला ने बताया की इस तिथि को देवगण शयन से उठते हैं। इससे इसे देवोत्थान एकादशी कहा जाता है। द्राक्ष, ईख, सिंघाड़ा, अनार, केला आदि भगवान को अर्पण करने से विशेष पुण्य मिलता है।

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