फर्रुखाबाद:(जेएनआई ब्यूरो) बारिश का दौर शुरू हो गया है| लिहाजा जरा सी बारिश में शहर के कई हिस्से जलाशय में तब्दील हो जाते है | उन मोहल्लों और घरों में भी पानी दाखिल होता है| क्या आप नें यह सोचा है कि जो बारिश का पानी है वह जायेगा कहा, पूर्व में बरसात का पानी एकत्रित होनें का एक अपना निर्धारित स्थान तालाबों के रूप में था| लेकिन अधिकतर तालाबों पर कालोनियां उग गयी हैं| लिहाजा पानी एकत्रित करनें और निकासी की व्यवस्था भी ध्वस्त हो गयी| 
आप सभी को याद होगा लगभग 3 दशक पूर्व शहर की ठंडी सड़क पर लगभग दोनों तरफ बड़े-बड़े तालाब हुआ करते थे| जिसमे जलकुम्भी खड़ी हुई थी| जिसमे शहर की बारिश का पानी आसानी से समाहित हो जाता था| इसी लिये इस सड़क को ठंडी सड़क नाम दिया गया था| लेकिन अब उन तालाबों पर कंकरीट का जंगल खड़ा हो गया है| बढ़पुर शीतला माता मन्दिर के पीछे भी बड़ा तालाब हुआ करता था| लेकिन उसके भी अधिक भाग में मकान बन गये| परिणाम यह होता है कि जरा सी बारिश हुई और यह कालोनियां जलाशय में बदल जाती है| कई मोहल्लों में जो तालाबों पर मकान बने है वहां कई दिनों तक पानी सड़ता रहता है| जिससे लोगों को कई प्रकार की समस्या और बीमारियों का सामना करना पड़ता है| सातनपुर गाँव के किनारे मंडी रोड़ पर भी तालाब में भराव डालकर काफी जगहों में मकान बना लिया गये| जिससे अब बरसात होनें पर पानी गाँव की तरफ कूच करने लगा है| वहीं नेकपुर के निकट भी बड़ा तालाब था जहाँ रक्षाबंधन के दिन मेला लगता है| वहां भी तालाब पर कालोनी बन गयीं| अब तालाब ना के बराबर बचे हैं|
तालाबों में मकान, बारिश से मोहल्ले में जलाशय!
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