जिला प्रशासन का इम्तिहान- जिले भर की नजर आवास विकास के अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाने पर

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फर्रुखाबाद: आवास विकास कॉलोनी में लोहिया अस्पताल के आसपास से अतिक्रमण हटाने के बाद जिला अस्पताल को जाने वाले मुख्य मार्ग पर अतिक्रमण हटाने और अवैध निर्माण को गिराने को लेकर जिले भर में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है| जिला प्रशासन पर खुलेआम व्यापारियों द्वारा गेस्ट हाउस में चाय पीने यानि की इशारो इशारो में भ्रष्टाचार के आरोप लगाये गए थे| व्यापारियों के विरोध के बाद जिला प्रशासन ने अतिक्रमण वाले भवनों पर निशान तो लगा दिए मगर ये अतिक्रमण हट सकेंगे या नहीं इस पर तरह तरह की चर्चाये रविवार को होती रही है| नोटिस देने के बाबजूद रविवार दिन में किसी ने भी अतिक्रमण नहीं हटाया है| अब सवाल ये है कि क्या समय की मियाद बीत जाने के बाद अतिक्रमण हटेगा?

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वैसे जिला प्रशासन अगर ईमानदारी से और न्याय पूर्ण रवैये से काम करे तो कुछ भी असम्भव नहीं होता| भवनों के पास नक़्शे की एक प्रति सरकारी दफ्तरों में जमा होती है मगर अतिक्रमण गिराने के समय विभाग में जमा नक़्शे की कापी लेकर चलने की जगह अफसर अतिक्रमण करने वाले से भवन का पास नक्शा मांगता है| अतिक्रमंकारी नक्शा मांगने और दिखाने में टालमटोल के लिए समय ले लेता है| आवास विकास का दफ्तर भी आवास विकास कॉलोनी में है जहाँ सभी भवनों के पास नक्शों की कापी मौजूद है| फिर भी समय बर्बाद करने या फिर सहुलियते देने के लिए अफसरों के पास नक़्शे नहीं होते है|
Lohia Home Map Original
आवास विकास कॉलोनी में जिस भवन का अवैध निर्माण और अतिक्रमण गिराने के लिए सबसे ज्यादा मुहीम व्यापारियों और अतिक्रमण में बेदखल हुए खोखा वालो ने ने चलाई है वो है लोहिया होम्स प्राइवेट लिमिटेड भवन संख्या C1. इस भूखंड पर मार्किट बनाने के लिए नक्शा पास हुआ था| जिसमे दोमंजिला दुकाने बनायीं गयी थी| समय चलते पास नक़्शे के इतर इसमें तोड़फोड़ और परिवर्तन हो गए और एक गेस्ट हाउस एक होटल, किराये पर दो बैंक स्थापित हो गए| होटल और गेस्ट हाउस बनाते समय जगह की कमी पड़ी तो बाजार की पार्किंग के लिए खुली जगह और सड़क पर भी अतिक्रमण कर निर्माण कर लिया गया| यही नहीं नाली के ऊपर भगवान को भी स्थापित कर जमीन को पक्का कब्ज़ा बताने की कोशिश की गयी|
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अब प्रशासन के सामने मुश्किल कोई खास नहीं है| आवास विकास के व्यापारी और अतिक्रमण हटाने में बेदखल हुए खोखा वाले इस भवन से अतिक्रमण हटाने का दबाब बनाये हुए है| रविवार को पूरे दिन दोनों खेमे में जगह जगह मीटिंगों का दौर चला| इस भवन पर सिर्फ एक लड़ाई नहीं है| कई दुकानदार जिन्होंने अपने पैसे आंशिक रूप से दुकान खरीदने के लिए दिए थे और उन्हें दूकान नहीं मिली वे आज भी पैसे वापस लेने के लिए भटक रहे है| हालाँकि प्रॉपर्टी के मालिक ये बेबुनियाद आरोप बताते है वे कहते है जो दुकान के पैसे पूरे नहीं जमा कर सके उनके पैसे वापस कर दिए गए थे| भवन में कई किरायेदार है और नगरपालिका को किरायेदारों के एवज में कमर्शियल टैक्स वाजिव मिल रहा है या नहीं इसका नगरपालिका के पास कोई जबाब नहीं है| कई बार इस बिल्डिंग की भवन संख्या बदलवा कर नगरपालिका के टैक्स में गोलमाल का भी मामला चर्चा में है| भवन वर्ष 15 साल पहले बना था और तबसे कितना टैक्स नगरपालिका को मिला इसका ब्यौरा पालिका के पास नहीं है| फ़िलहाल देखिये इस बिल्डिंग का पास किया हुआ नक्शा जिसे प्रशासन को वापस मूल रूप में लाना है|- Lohia Homes PVT LTD

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