कांशीराम कालोनी पहुंचे गरीबों को यहां भी मिली तो टपकती छतें

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चौथी मंजिल के दो दर्जन परिवार जूझ रहे हैं पेयजल समस्या से

फर्रुखाबाद: करोड़ों रूपये की लागत से बनी कांशीराम कालोनी की छतें पहली दूसरी बरसात में ही रिमझिम का मजा देने लगीं है। खुले आसमान के नीचे से एक अदद छत की तलाश में यहां आये गरीबों को यहां भी मिलीं तो टपकती छते। कालोनी के लौ ब्लाक ऐसे हैं जिनकी ऊपरी मंजिल के आबंटियों को पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है। इन आवासों की महिलाओं व  बच्चों को दिन भर पीने के पानी के लिये नीचे से बाल्टियां भर कर लानी पड़ती हैं।

शहरी आवासहीन गरीबों को एक छत मुहैया कराने की कवायद में सरकार की ओर से करोड़ों रुपये की लागत से तैयार कांशीराम कालोनी निर्माण के दूसरे साल ही इसमें अधिकारियों व ठेकेदारों द्वारा की गयी लूटखसोट की कहानी बयान करने लगी है। निर्माण के दौरान व विगत वर्ष की बरसारत में ही यूं तो हकीकत सामने आने लगी थी। कई बार जांच भी हुई परंतु मामला हमेशा की तरह ले दे कर निबट गया। यहां पर तैनात आवास विकास परिषद के अधिशासी अभियांता को दंड स्वरूप आगरा जैसे बड़े जनपद में तैनाती दे दी गयी। बरसात एक बार फिर आ गयी है। ऊपरी मंजिल के अनेक मकानों की छतें बरसात बंद होने के घंटों बाद भी अंदर बारिश का मजा देती रहती हैं। टपकती छतों से बचने के लिये बेचारी गरीब आबंटी पड़ोसियों के घरों में सामान व सिर बचाते फिरते है।

कालोनी के ब्लाक नंबर एक से तेरह तक एक दर्जन बलाकों की ऊपरी मंजिल के दो दर्जन से अधिक घरों के निवासी पेयजल संकल से जूझ रहे है। यहां पर रहने वाले परिवारों की महिलाओं व बच्चों का पूरा दिन नीचे से पानी भरकर लाने में ही गुजर जाता है। ब्लका संख्या आठ के शमसुद्दीन व सायरा बेगम के घरों के लिये यही समस्या है। इसी ब्लाक के 80 वर्षीय मोहम्मद हमीद परचूनी की दुकान चलाते हैं, इनके छोटे छोटे पोते पोतियां दिन भर छोटी बाल्टियों व डिब्बों से पानी भरते रहते है। यही हाल ब्लाक नंबर नौ के सलीम व इरशाद के घरों का है। इसी ब्लाक के इंद्र नरायन की तबियत खराब है। उनकी पत्नी के सामने पति के इलाज से बड़ी समस्या बच्चों के लिये पानी की समस्या को दूर करना है। बलाक तेरह के बसंत के घर भी बढ़ी मां पानी भरने में हलकान रहती है।

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